कैश मेमोरी क्या है? (What is Cache Memory in Hindi)

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ऐसे लोग जो कैश मेमोरी के बारे में जानना चाहते है, परंतु उन्हें हिंदी भाषा समझ में आती है। ऐसे ही लोगों के लिए हमने कैश मेमोरी की पूरी जानकारी हिंदी भाषा में देने का प्रयास किया हुआ है। कैश मेमोरी की कंप्लीट इंफॉर्मेशन देने के लिए नीचे आपको बताया जा रहा है कि “कैश मेमोरी क्या है” और “कैश मेमोरी के कितने प्रकार होते हैं।”

कैश मेमोरी क्या है? (What is Cache Memory in Hindi)


कंप्यूटर में विभिन्न प्रकार की मेमोरी पाई जाती है, जो अलग-अलग प्रकार से कंप्यूटर के लिए उपयोगी साबित होती है। हर मेमोरी का विशेष काम होता है। कंप्यूटर मे कैश नाम की भी एक मेमोरी पाई जाती है। इस नाम को अधिकतर लोग जानते है, परंतु इस नाम का मतलब क्या होता है अथवा कैश मेमोरी का मतलब क्या होता है इसके बारे में बहुत से लोगों को अभी भी पता नहीं है।

तो चलिए देखते हैं की आख़िर कैश मेमोरी क्या है और इसके प्रकार।

कैश मेमोरी क्या है? (What is Cache Memory in Hindi)

कैश मेमोरी एक बहुत ही तेज गति से काम करने वाली मेमोरी होती है, जिसका आकार तो बहुत ही छोटा होता है परंतु यह रैंडम एक्सेस मेमोरी से भी ज्यादा तेज काम करती है। बताना चाहेंगे कि कंप्यूटर के सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के द्वारा कैश मेमोरी को प्राइमरी मेमोरी से भी काफी जल्दी से एक्सेस कर लिया जाता है। 


इसीलिए कैश मेमोरी का इस्तेमाल हाई स्पीड में चलने वाले सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के साथ सिंक्रोनाइज करने के लिए होता है ताकि इसकी परफॉर्मेंस को बढ़ाया जा सके। कैश मेमोरी को एक्सेस करने के लिए सिर्फ सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट का ही इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि कैश मेमोरी को अगर कोई एक्सेस कर सकता है तो वह सीपीयू ही होता है।

बताना चाहते हैं कि, सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के द्वारा सामान्य तौर पर और अक्सर जिन डाटा और प्रोग्राम का इस्तेमाल किया जाता है वह सभी डाटा और प्रोग्राम कैश मेमोरी में अवेलेबल होते हैं। इसीलिए कैश मेमोरी यह सुनिश्चित करती है की जब कभी भी सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को इस डेटा की आवश्यकता हो, तो डाटा तुरंत ही सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को अवेलेबल हो जाए।  

अगर दूसरे शब्दों में कैश मेमोरी के बारे में बात की जाए तो अगर सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को कैश मेमोरी में जरूरी डाटा या फिर इंस्ट्रक्शन प्राप्त होते हैं तो उसे प्राइमरी मेमोरी अर्थात रेंडम एक्सेस मेमोरी तक जाने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होती है। 


इस प्रकार से रेंडम एक्सेस मेमोरी और सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के बीच कैश मेमोरी बफर के तौर पर काम करती है और यह सिस्टम की जो परफॉर्मेंस होती है उसे तेज करने का काम भी करती है।

कैश मेमोरी के प्रकार (Types of Cache Memory in Hindi)

कैश मेमोरी के प्रकारों के बारे में जानकारी पाने के लिए आगे नीचे दिए हुए आर्टिकल में पढे।

1: L1

कैश मेमोरी का जो पहला प्रकार होता है उसे level-1 कहा जाता है अथवा इसे कैश 1 अथवा एल 1 भी कहा जाता है। इस प्रकार के कैश मेमोरी में सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट में थोड़ी मात्रा में मेमोरी अपने आप ही मौजूद होती है। अगर सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट का 4 कोर अर्थात सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट 4 क्वॉड कोर होता है तो हर कोर के पास अपना खुद का लेवल 1 कैश होता है। 


जैसा की हमने आपको ऊपर ही इस बात की जानकारी दी कि, यह मेमोरी सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट में अवेलेबल होती है। इसीलिए यह उसी गति से काम कर सकती है जिस प्रकार से सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट काम करता है। अगर कैश मेमोरी के इस प्रकार के रेंज के बारे में बात की जाए तो यह 2 केबी से लेकर के 64 केबी के बीच में होती है।

यहां पर आपको यह भी जानना अति आवश्यक है कि level-1 कैश के दो प्रकार के कैश होते हैं जिसमें पहला होता है इंस्ट्रक्शन कैश और दूसरा होता है डाटा कैश। इनमें से इंस्ट्रक्शन कैश सीपीयू की आवश्यकता वाले इंस्ट्रक्शन को स्टोर करने का काम करता है और डाटा कैश सीपीयू की आवश्यकता वाले डाटा को स्टोर करने का काम करता है।

2: L2

उपरोक्त कैश को लेवल टू कैश अथवा l2 कैश भी कहा जाता है। लेवल टू कैश सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के अंदर भी हो सकता है या फिर सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के बाहर भी हो सकता है। जितने भी सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के कोर होते हैं, उनका खुद का सेपरेट लेवल 2 कैश होता है अथवा वह 1 लेवल टू कैश को आपस में शेयर करते हैं। 


अगर सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के बाहर लेवल टू कैश मौजूद है तो ऐसी अवस्था में यह सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के साथ एक तेज गति वाले बस के माध्यम से कनेक्ट होता है। लेवल टू कैश का मेमोरी साइज की रेंज 256kb से लेकर के 512kb तक होती है। स्पीड के मामले में इस प्रकार का कैश level-1 कैश से धीमा होता है।

3: L3

उपरोक्त कैश को लेवल 3 कैश या फिर l3 कैश भी कहा जाता है। यह कैश सभी प्रोसेसर में अवेलेबल नहीं होते हैं। कुछ ऐसे हाई एंड प्रोसेसर होते हैं जिसमें इस प्रकार का कैश अवेलेबल होता है। इस कैश का इस्तेमाल लेवल एक और लेवल टू कैश की परफॉर्मेंस को बढ़ाने के लिए किया जाता है। 

लेवल 3 कैश सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के बाहर की साइड मौजूद होता है और यह सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के सभी कोर के द्वारा शेयर किया जाता है। इसके मेमोरी साइज की रेंज के बारे में बात की जाए तो मेमोरी साइज की रेंज 1 एमबी से लेकर के 8 एमबी तक हो सकती है। लेवल वन और लेवल टू कैश के मुकाबले में लेवल 3 कैश धीमा होता है। हालांकि यह रेंडम एक्सेस मेमोरी से ज्यादा तेज होता है।

कैश मेमोरी सीपीयू के साथ कैसे काम करती है?

कैश मेमोरी के सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के साथ वर्किंग प्रिंसिपल के बारे में चर्चा की जाए, तो जब सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को डाटा की आवश्यकता होती है, तो सबसे पहले सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट लेवल 1 कैश में देखता है। अगर वहां पर उसे कुछ भी नहीं मिलता है तो सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट इसके पश्चात लेवल 2 कैश में देखता है और अगर फिर से यहां पर भी सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को कुछ भी प्राप्त नहीं होता है फिर वह लेवल 3 कैश में देखता है। 

इस प्रकार से अगर कैश मेमोरी में डाटा हासिल हो जाता है तो इसे कैश हीट के तौर पर जाना जाता है, परंतु अगर डाटा कैश में हासिल नहीं हो पाता है तो इसे कैश मिस कहा जाता है।

हम यहां पर आपकी जानकारी के लिए बताना चाहते हैं कि अगर किसी भी कैश मेमोरी में डाटा हासिल नहीं हो पाता है, तो इसके पश्चात सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के द्वारा डाटा प्राप्त करने के लिए रेंडम एक्सेस मेमोरी की तरफ जाया जाता है और रेंडम एक्सेस मेमोरी में डाटा प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है।

परंतु अगर रेंडम एक्सेस मेमोरी में भी डाटा नहीं मिलता है तो इसके बाद सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट हार्ड डिस्क ड्राइव से डाटा प्राप्त करता है। इसलिए जब कंप्यूटर पहली बार स्टार्ट होता है या फिर पहली बार एप्लीकेशन को ओपन किया जाता है। और अगर डाटा कैश मेमोरी में/ रेंडम एक्सेस मेमोरी में अवेलेबल नहीं होता है तो ऐसी सिचुएशन में सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट डायरेक्ट तौर पर हार्ड डिस्क ड्राइव से डाटा प्राप्त करता है। इसके पश्चात जब आप अपने कंप्यूटर को चालू करते हैं या फिर एप्लीकेशन को ओपन करते हैं तो सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट रेंडम एक्सेस मेमोरी अथवा कैश मेमोरी से डाटा हासिल करता है।

कैश मेमोरी के लक्षण

वास्तव में कैश मेमोरी बहुत ही फास्ट प्रकार की मेमोरी होती है, जो सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट और रेंडम एक्सेस मेमोरी के बीच बफर के तौर पर काम करती है। कैश मेमोरी के द्वारा फ्रिक्वेंटली रिक्वेस्टेड डाटा को होल्ड किया जाता है साथ ही यह इंस्ट्रक्शन को भी होल्ड करती है।

ताकि वह तब जल्दी से अवेलेबल हो जाए जब सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को रिक्वेस्टेड डाटा या फिर इंस्ट्रक्शन की आवश्यकता हो। कंप्यूटर की मुख्य मेमोरी या फिर डिश्क मेमोरी से ज्यादा महंगी कैश मेमोरी को माना जाता है। कैश मेमोरी का इस्तेमाल एक हाई स्पीड वाले सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के साथ सिंक्रोनाइज करने के लिए होता है।

कैश मेमोरी की परफॉर्मेंस

जब मुख्य मेमोरी में लोकेशन को पढ़ने की या फिर लिखने की आवश्यकता होती है तो प्रोसेसर सबसे पहले सभी एंट्री को कैश में चेक करता है। अगर प्रोसेसर को यह पता चलता है कि मेमोरी लोकेशन कैश में मौजूद है तो इसका मतलब कैश हिट हो गया है और डाटा को कैश से पढ़ा जा चुका है।

परंतु अगर प्रोसेसर को कैश में मेमोरी लोकेशन नहीं मिल पाती है तो इसका मतलब होता है कि कैश मिस हो गया है। ऐसी अवस्था में मुख्य मेमोरी से कैश नई एंट्री और कॉपी को डाटा में से प्राप्त करता है। इसके पश्चात कैश के कंटेंट से जो रिक्वेस्ट है उसकी पूर्ति की जाती है।

यहां पर बताना चाहेंगे कि कैश मेमोरी की जो परफॉर्मेंस होती है उसे जिसके द्वारा नापा जाता है उसे हिट रेटियो कहा जाता है। हम चाहे तो कैश की परफॉर्मेंस को अधिक कैश ब्लॉक साइज का इस्तेमाल करके तथा मिस रेट को कम करके इंप्रूव कर सकते हैं।

कैश मेमोरी के फायदे

यदि कैश मेमोरी के फायदे के बारे में बात की जाए, तो इसके बहुत सारे फायदे होते हैं। जैसा कि आप जानते है कि कंप्यूटर में मुख्य मेमोरी भी होती है और सेकेंडरी मेमोरी भी होती है। अभी तक आपको सिर्फ यही पता होगा कि, कंप्यूटर की मुख्य मेमोरी ज्यादा तेज होती है, परंतु क्या आप जानते हैं कि, कंप्यूटर की मुख्य मेमोरी और सेकेंडरी मेमोरी से भी ज्यादा तेज एक और मेमोरी है जिसे कैश मेमोरी ही कहा जाता है।

कैश मेमोरी के अंदर जो कुछ भी डाटा मौजूद होता है उसे बहुत ही कम टाइम में एग्जीक्यूट किया जा सकता है। प्राइमरी मेमोरी के द्वारा डाटा एक्सेस करने में जो समय लिया जाता है उससे बहुत ही कम समय कैश मेमोरी के द्वारा डाटा एक्सेस करने के लिए लिया जाता है।

जिसका मतलब यह निकल करके आता है कि प्राइमरी मेमोरी की तुलना में कैश मेमोरी बहुत ही कम समय में डाटा को एक्सेस कर पाने में सक्षम है। डाटा और इंस्ट्रक्शन कैश मेमोरी में स्टोर होते हैं जो सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के द्वारा रेगुलर तौर से इस्तेमाल में लिए जाते हैं। इसलिए यह सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट की परफॉर्मेंस को बढ़ाने का काम करती है।

कैश मेमोरी के नुकसान

प्राइमरी मेमोरी और सेकेंडरी मेमोरी तथा कैश मेमोरी में से कौन सबसे ज्यादा महंगी है, इसके बारे में अगर बात की जाए तो यहां पर निश्चित तौर पर कैश मेमोरी का ही नाम लिया जाएगा, क्योंकि यह वास्तव में प्राइमरी मेमोरी और सेकेंडरी मेमोरी से ज्यादा महंगी होती है। कैश मेमोरी में जो भी डाटा स्टोर होते हैं, वह हमेशा के लिए स्टोर नहीं होते हैं बल्कि वह टेंपरेरी ही कैश मेमोरी में स्टोर होते हैं। 

जब कभी भी सिस्टम पावर ऑफ होता है तो कैश मेमोरी में जो भी डाटा या इंस्ट्रक्शन होते हैं वह नष्ट हो जाते हैं, क्योंकि यह डाटा को परमानेंट स्टोर कर पाने में सक्षम नहीं होता है। कैश मेमोरी की अधिक कीमत की वजह से कंप्यूटर सिस्टम के दामों में भी इजाफा हो सकता है।

कैश मेमोरी का एप्लीकेशन

नीचे आपको कैश मेमोरी के कुछ एप्लीकेशन की जानकारी दी जा रही है।

1: प्राइमरी कैश 

हमेशा प्रोसेसर चिप के अंदर प्राइमरी कैश लोकेटेड होता है। इसका आकार छोटा होता है और इसका एक्सेस टाइम प्रोफेसर रजिस्ट्रार के प्रकार पर डिपेंड करता है।

2: सेकेंडरी कैश

सेकेंडरी कैश प्राइमरी कैश और मेमोरी के बीच में उपलब्ध होता है। सेकेंडरी कैश को ही लेवल टू कैश से संबंधित किया जाता है। बताना चाहते हैं कि लेवल 2 कैश का घर भी प्रोसेसर चिप के अंदर ही होता है।

3: स्पेटीयल लोकेलिटी आफ रेफरेंस

स्पेटीयल लोकेलिटी आफ रेफरेंस के द्वारा कहा जाता है कि इस बात का चांस होता है कि एलिमेंट रेफरेंस प्वाइंट के बिल्कुल पास में मौजूद हो और अगली बार जब सर्च किया जाए तो यह रेफरेंस प्वाइंट के और भी अधिक पास में मौजूद हो।

4: टेंपोरल लोकेलिटी आफ रेफरेंस

टेंपोरल लोकेलिटी आफ रेफरेंस के द्वारा हाल ही में जिस एल्गोरिदम का इस्तेमाल किया गया है उसका इस्तेमाल किया जाता है। जब किसी भी शब्द के अंदर पेज फॉल्ट होता है तो ना सिर्फ शब्द को प्राइमरी मेमोरी में लोड किया जाएगा। बल्कि पूरे पेज फॉल्ट को भी लोड किया जाएगा क्योंकि रेफरेंस नियम कहता है कि अगर आप किसी शब्द का रेफरेंस दे रहे हैं तो जो अगला शब्द है उसे भी संदर्भित किया जाएगा।

कैश मेमोरी की एक्सेसिंग

कैश मेमोरी को एक्सेस करने की परमिशन सिर्फ सीपीयू को ही होती है, क्योंकि सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट ही इस मेमोरी तक पहुंच पाने में सक्षम होता है। कैश मेमोरी सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के बाहर किसी मुख्य मेमोरी अथवा स्टोरेज डिवाइस का रिजर्व भाग हो सकता है। अधिकतर सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के द्वारा जिस डाटा और प्रोग्राम का इस्तेमाल किया जाता है वह सभी यहां पर कैश मेमोरी में ही पाए जाते हैं।

इस प्रकार से कैश मेमोरी इस बात को सुनिश्चित करती है की अगर कभी भी सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को इंफॉर्मेशन की आवश्यकता हो तो तुरंत ही वह उसे हासिल हो जाए। सरल शब्दों में कहा जाए तो अगर जरूरी इंस्ट्रक्शन अथवा डाटा सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को सिस्टम में मौजूद कैश मेमोरी में हासिल हो जाता है तो ऐसी अवस्था में उसे रेंडम एक्सेस मेमोरी या फिर प्राइमरी मेमोरी तक जाने की कोई भी आवश्यकता नहीं होती है।

इस प्रकार से यह समझा जा सकता है की, यह जो कैश मेमोरी होती है यह सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट और रेंडम एक्सेस मेमोरी के बीच बफर के तौर पर काम करती है और सिस्टम की जो ऑल ओवर परफॉर्मेंस है, उसे स्पीड प्रदान करती है।

कैश मेमोरी की विशेषताएं

मुख्य मेमोरी के मुकाबले में कैश मेमोरी को ज्यादा तेज मेमोरी माना जाता है। जहां एक तरफ मुख्य मेमोरी थोड़ा अधिक एक्सेस टाइम लेती है, वही कैश मेमोरी बहुत ही कम एक्सेस टाइम लेती है।

कैश मेमोरी में ऐसे प्रोग्राम मौजूद होते हैं या फिर डाटा अवेलेबल होते हैं जिसे बहुत ही कम समय के अंदर एग्जीक्यूट किया जाना होता है। कैश मेमोरी में जो डाटा होते हैं, वह हमेशा के लिए मौजूद नहीं होते हैं, क्योंकि यह परमानेंट तौर पर डाटा को स्टोर नहीं कर सकती है। इसमें मौजूद डाटा टेंपरेरी होते हैं जो कुछ समय के बाद खत्म हो जाते हैं।

कंप्यूटर में कैशे मेमोरी का प्रमुख काम क्या है?

आखिर कंप्यूटर में कैश मेमोरी का प्रमुख काम क्या होता है, इसके बारे में चर्चा की जाए तो कैश मेमोरी को जैसा कि हमने बताया कि यह एक हाई स्पीड वाली सेमीकंडक्टर कंप्यूटर की मेमोरी होती है। 

इसका इस्तेमाल सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट की जो स्पीड होती है, उसे बढ़ाने के लिए किया जाता है तथा सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट की परफॉर्मेंस में सुधार करने के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है। यही नहीं कैश मेमोरी का इस्तेमाल सीपीयू के द्वारा सबसे अधिक जिस डाटा और प्रोग्राम का इस्तेमाल किया जाता है, उसके हिस्से को स्टोर करने के लिए भी किया जाता है।

कैशे मेमोरी कंप्यूटर की सबसे तेज मेमोरी क्यों कहा जाता है?

आपकी जानकारी के लिए बताना चाहते हैं की जी हां! कंप्यूटर की सबसे तेज मेमोरी के तौर पर कैश मेमोरी का नाम लिया जाता है। ऐसा सिर्फ कहने से नहीं होता है बल्कि इसके पीछे कारण भी है। कारण के अनुसार कैशे मेमोरी सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को प्राइमरी मेमोरी से डाटा प्राप्त करने के समय को कम करने में सहायक साबित होता है, जिसकी वजह से सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट की परफॉर्मेंस में सुधार होता है।

इसके अलावा कैश मेमोरी को सुपरफास्ट मेमोरी इसलिए भी कहा जाता है, क्योंकि यह तेजी से काम करते हैं। दूसरी मेमोरी की साइज और कैश मेमोरी की साइज की तुलना की जाए तो कैश मेमोरी की साइज कम होती है और इसी वजह से डाटा को सर्च करने में जो समय लगता है वह बहुत ही कम हो जाता है।

कैश मेमोरी कैसे साफ करें?

यदि आप अपने एंड्राइड मोबाइल में कैश मेमोरी को साफ करना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको उस एप्लीकेशन को ओपन कर लेना है जिस एप्लीकेशन की कैश मेमोरी को आप क्लीन करना चाहते हैं। एप्लीकेशन ओपन करने के बाद आपको स्टोरेज वाले ऑप्शन पर क्लिक कर देना है। अब सबसे नीचे आपको क्लियर कैश वाला ऑप्शन प्राप्त हो जाता है, आपको उसी के ऊपर क्लिक करना होता है और उसके बाद एक बार आप को फिर से क्लियर कैश वाले ऑप्शन पर क्लिक कर देना होता है। 

ऐसा करने से आपके मोबाइल में संबंधित एप्लीकेशन की कैशे मेमोरी क्लीन हो जाती है। यदि आप अपने कंप्यूटर में किसी सॉफ्टवेयर की कैश मेमोरी को क्लीन करना चाहते हैं तो इससे संबंधित ट्यूटोरियल वीडियो आप यूट्यूब से देख सकते हैं या फिर इंटरनेट पर आप ट्यूटोरियल आर्टिकल सर्च कर सकते हैं।

कैश मैपिंग क्या है?

अगर कैश मिस हो गया है तो ऐसी अवस्था में रिक्वेस्टेड कंटेंट को मुख्य मेमोरी से कैश में मैप करने की जो प्रक्रिया होती है उसे ही कैश मैपिंग कहा जाता है, जो कि एक प्रकार की टेक्निक होती है। सरल भाषा में कहा जाए तो अगर सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को जो कंटेंट चाहिए, वह कैश मेमोरी में उपलब्ध नहीं होता है।

तो ऐसी सिचुएशन में संबंधित कंटेंट को प्राइमरी मेमोरी में से सर्च करके फिर से कैशे मेमोरी में लाने की जो प्रोसेस होती है, उसे ही कैश मैपिंग कहा जाता है, जिसके 3 अलग-अलग प्रकार होते हैं।

नीचे आपको कैश मैपिंग के तीनों ही प्रकारों की जानकारी हिंदी में दी जा रही है।

1: Direct Mapping

डायरेक्ट मैपिंग को सबसे सरल प्रक्रिया के तहत जाना जाता है। डायरेक्ट मैपिंग जो प्राइमरी मेमोरी होती है उसके प्रत्येक ब्लॉक को सिर्फ एक संभावित कैस लाइन में मैप करने का काम करती है अथवा डायरेक्ट मैपिंग में प्रत्येक मेमोरी ब्लॉक को कैस में एक स्पेशल लाइन पर असाइन किया जाता है। 

अगर किसी नए ब्लॉक को लोड करने की जरूरत होती है तो ऐसी सिचुएशन में किसी लाइन को सर्वप्रथम मेमोरी ब्लॉक द्वारा लिया जाता है, जिसकी वजह से जो पुराना ब्लॉक होता है वह ट्रेस हो जाता है और एक एड्रेस स्थान को दो भागों इंडेक्स फील्ड और टैग फील्ड में डिवाइड किया जाता है, जहां पर कैस का इस्तेमाल टैग फील्ड को स्टोर करने के लिए होता है वही बाकी को मुख्य मेमोरी में स्टोर किया जाता है।

2: Associative Mapping

एसोसिएटिव मैपिंग में मेमोरी वर्ड का जो कंटेंट होता है और तथा जो एड्रेस होता है, उसे स्टोर करने के लिए एसोसिएटिव मेमोरी का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कोई भी ब्लॉक कैस किसी भी लाइन में जा सकता है जिसका मतलब यह निकल करके आता है कि आईडी बिट शब्द का उपयोग इस बात को आईडेंटिफाई करने के लिए किया जाता है कि ब्लॉक में कौन से शब्द की जरूरत है। 

एसोसिएटिव मेपिंग के बारे में आपको यह जानकारी भी प्राप्त करनी चाहिए कि यह कैश मेमोरी में किसी भी जगह पर किसी भी वर्ड को रखने में सक्षम बनाता है। इसे एक फास्ट और सबसे फ्लैक्सिबल मैपिंग फॉर्म माना जाता है। इसमें जो इंडेक्स बिट होते हैं वह जीरो होते हैं।

3: Set-Associative Mapping

सेट एसोसिएटिव मेपिंग को डायरेक्ट मैपिंग का एक एडवांस फॉर्म माना जाता है, जहां पर डायरेक्ट मैपिंग की जो कमी होती है वह यहां पर नहीं पाई जाती हैं। सेट एसोसिएट डायरेक्ट मैपिंग मेथड में संभावित Thrashing की जो प्रॉब्लम होती है, उसका सलूशन निकाला जाता है। 

यहां पर कैस में उपलब्ध हर शब्द को एक ही इंडेक्स एड्रेस के लिए मुख्य मेमोरी में दो अथवा दो से ज्यादा शब्द रखने की परमिशन देती है। उपरोक्त मैपिंग डायरेक्ट और एसोसिएटेड कैस मैपिंग टेक्नोलॉजी का एक बेहतरीन कॉन्बिनेशन माना जाता है।

FAQ

कैशे मेमोरी का दूसरा नाम क्या है?

कभी-कभी कैश मेमोरी को सीपीयू मेमोरी भी कहा जाता है।

कैशे मेमोरी के प्रकार कितने होते हैं?

कैश मेमोरी के मुख्य तौर पर तीन प्रकार होते हैं। जिन्हें लेवल 1, लेवल 2 और लेवल 3 कहा जाता है।

कैशे मेमोरी कहाँ स्थित है?

कभी-कभी कैश मेमोरी सीपीयू के बिल्कुल अंदर मौजूद होती है, तो कभी-कभी कैश मेमोरी सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के बिल्कुल पास में अवेलेबल होती है।

कैशे मेमोरी क्या है इसके फायदे बताएं?

कैश मेमोरी का मतलब क्या होता है और इस मेमोरी के कौन से एडवांटेज होते हैं, इसके बारे में पूरी जानकारी इसी आर्टिकल मे दी गई है। इसलिए आर्टिकल को ध्यान से पढ़ें।

कैशे मेमोरी क्या होती है?

तेजी से काम करने वाली मेमोरी में कैश मेमोरी की गिनती होती है, जो टेंपरेरी डाटा स्टोर कर सकती है। इसे सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट और रेंडम एक्सेस मेमोरी के बीच बफर के लिए इस्तेमाल में लिया जाता है।

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Hope की आपको “कैश मेमोरी क्या है” और “कैश मेमोरी के कितने प्रकार होते हैं।”, का यह पोस्ट पसंद आया होगा तथा आपके लिए हेल्पफुल भी रहा होगा।

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Ankur Singh
हेलो दोस्तों, मेरा नाम अंकुर सिंह है और में New Delhi से हूँ। मैंने B.Tech (Computer Science) से ग्रेजुएशन किया है। और में इस ब्लॉग पर टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर, मोबाइल और इंटरनेट से जुड़े लेख लिखता हूँ।

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