कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) क्या है और इसके प्रकार? (What is CD in Hindi)


कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) क्या है? भले ही पेन ड्राइव और मेमोरी कार्ड के आ जाने की वजह से आजकल सीडी का इस्तेमाल कम किया जाने लगा है परंतु एक समय ऐसा भी था जब मार्केट में सीडी का काफी बोलबाला था, क्योंकि इसमें गाने, ऑडियो वीडियो, फोटो इत्यादि स्टोर होते थे। हालांकि यह आज भी होता है परंतु दूसरे डिवाइस आने की वजह से इनकी इंपॉर्टेंस कम हो गई है।

कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) क्या है और इसके प्रकार? (What is CD in Hindi)

परंतु अभी भी यह मार्केट से गायब नहीं हुए हैं। काफी लोग सीडी का इस्तेमाल करते हैं और काफी लोग सीडी का इस्तेमाल कर चुके हैं। हालांकि अधिकतर लोगों को अभी भी यह नहीं पता होगा कि आखिर सीडी क्या होती है और सीडी का फुल फॉर्म क्या होता है?


इस पेज पर हम जानेंगे कि कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) क्या है और इसके प्रकार? (What is CD in Hindi)

कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) क्या है? (What is CD in Hindi)

अंग्रेजी भाषा में सीडी का फुल फॉर्म कॉम्पैक्ट डिस्क होता है। इसका आकार गोल गोल होता है जिसकी एक तरफ चमकीली परत जैसी दिखाई देती है, जिसमें हमारा चेहरा भी हल्का-हल्का दिखाई देता है।


सीडी पर एक ही बार डाटा को लिखा जाता है और इसे अनगिनत बार पढ़ा जाता है। जब सीडी की लॉन्चिंग हुई थी तब इसमें सिर्फ डिजिटल ऑडियो को ही रिकॉर्ड करके स्टोर किया जाता था।

परंतु बाद में इसमें सभी प्रकार के डाटा को स्टोर करने की सुविधा प्राप्त हो गई। एक अच्छी क्वालिटी के स्टैंडर्ड सीडी में 700 एमबी के डाटा को सुरक्षित रखा जा सकता है।


सीडी रोम ड्राइवर नाम का एक ऐसा स्पेशल उपकरण होता है जो सीडी पर से डाटा को रीड करने के काम में आता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कॉम्पैक्ट डिस्क पर जो भी डाटा लिखे गए हैं उसे पढ़ने के लिए लेजर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है। इसीलिए कॉम्पैक्ट डिस्क को ऑप्टिकल डिस्क भी कहते हैं।


कॉम्पैक्ट डिस्क में अलग-अलग प्रकार के छोटे-छोटे नोच उपलब्ध होते हैं। इसी में डाटा स्टोर होता है और फिर जब हमारे द्वारा किसी भी सीडी प्लेयर में सीडी को इंटर किया जाता है।

तो यह गोल गोल घूमना शुरू हो जाती है और सीडी पर जो डाटा होते हैं वह ऑप्टिकल ड्राइव के लेजर के द्वारा पढ़े जाने लगते हैं और संबंधित रिजल्ट हमें स्क्रीन पर दिखाई देता है।

CD Player क्या है? (What is CD Player in Hindi)

सीडी प्लेयर और सीडी रीडर यह दोनों एक ही होते हैं और इनका निर्माण मुख्य तौर पर कॉम्पैक्ट डिस्क को पढ़ने के लिए किया जाता है।

कॉम्पैक्ट डिस्क में जो भी डाटा उपलब्ध होते हैं उन्हें पढ़ने के लिए या फिर एक्सेस करने के लिए एक डिवाइस की आवश्यकता होती है, जिसे सीडी प्लेयर कहा जाता है, जिसकी कीमत मार्केट में 1000 से लेकर के ₹3000 के आसपास में होती है।

दुनिया भर में अलग-अलग कंपनियों के द्वारा सीडी प्लेयर का निर्माण किया जाता है, जिनकी खासियत के हिसाब से उनके दाम तय होते हैं। इसी सीडी प्लेयर में जब हम कॉम्पैक्ट डिस्क को इंटर करते हैं तो डाटा को पढ़ा जाता है और सीडी प्लेयर के साथ जुड़े हुए टीवी स्क्रीन पर या फिर कंप्यूटर स्क्रीन पर रिजल्ट दिखाई देता है।

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कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) कैपेसिटी कितनी होती है?

कॉम्पैक्ट डिस्क में स्टोरेज कैपेसिटी 700 एमबी से लेकर के 800 एमबी के आसपास में होती है। जब कॉम्पैक्ट डिस्क को बनाया गया था।

तब किसी भी प्रकार के डाटा को स्टोर करने के लिए यह बेहतरीन विकल्प था और दूसरे ऑप्शन की तुलना में इसकी स्टोरेज कैपेसिटी भी काफी अधिक थी, परंतु आजकल इससे भी अधिक स्टोरेज कैपेसिटी वाली डिस्क मार्केट में आ चुकी है।

कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) कैसे काम करती है?

कॉम्पैक्ट डिस्क में फ्लैट और ट्रैक स्पाइरल मौजूद होते हैं। बता दें कि सीडी रीड ओनली मेमोरी की लिस्ट में आने वाला वस्तु है।

इस पर जो भी डाटा होते हैं उन्हें लेजर टेक्नोलॉजी के द्वारा इनकोड किया जाता है। इसके लिए लेजर टेक्नोलॉजी लेजर बीम की सहायता लेती है और सीडी पर उपलब्ध डाटा को इनकोड करने का काम करती है।

सीडी का निर्माण प्लास्टिक और मेटल के द्वारा हुआ होता है तथा इसमें टोटल 3 लेयर मौजूद होते हैं। जो बीच वाला लेयर होता है, वह एलुमिनियम के द्वारा बना हुआ होता है।

सीडी की दो परत होती है जिसमें एक साइड की परत में काफी चमकीला पन होता है और दूसरी साइड की परत में चमकीला पन नहीं होता है।

इस प्रकार से कॉम्पैक्ट डिस्क की जिस साइड में चमकीला पन होता है वहां पर जब लेजर बीम टकराती है तो इसी प्रोसेस के द्वारा सीडी पर मौजूद डाटा को पढ़ा जाता है। सीडी पर डाटा लिखने के लिए सीडी राइटर का इस्तेमाल होता है। इसी के द्वारा सीडी में मौजूद डाटा को भी पढ़ा जा सकता है।

सीडी का आविष्कार किसने किया?

कॉम्पैक्ट डिस्क के आविष्कारक के तौर पर किसी एक ही व्यक्ति का नाम नहीं लिया जा सकता है, क्योंकि इसका आविष्कार करने में अलग-अलग लोगों ने अपना योगदान दिया हुआ है।

जिसकी वजह से वर्तमान के समय में हम कॉम्पैक्ट डिस्क का इस्तेमाल कर पा रहे हैं। हालांकि इसके मुख्य आविष्कारक के तौर पर जेम्स रसैल नाम के व्यक्ति का नाम लिया जाता है।

साल 1965 में अलग-अलग लोगों के द्वारा ग्रुप बनाकर के कॉम्पैक्ट डिस्क की खोज की गई थी, परंतु उसमें सबसे ज्यादा योगदान जेम्स रसेल के द्वारा दिया गया था। हालांकि उनके द्वारा कॉम्पैक्ट डिस्क के पेटेंट को फिलिप्स और सोनी जैसी कंपनी को बेच दिया गया। इस प्रकार से कॉम्पैक्ट डिस्क का पहली बार निर्माण साल 1978 में जापान देश में 17 मई के दिन किया गया।

परंतु इसके बाद भी तकरीबन 3 सालों तक कॉम्पैक्ट डिस्क का उत्पादन नहीं हुआ। साल 1982 में 17 अगस्त के दिन जर्मनी की कंपनी फिलिप्स के द्वारा कॉम्पैक्ट डिस्क का निर्माण अपने कारखाने में करना शुरू कर दिया गया और इसके पश्चात विभिन्न अलग-अलग प्रकार की कंपनियों के द्वारा भी कॉम्पैक्ट डिस्क का निर्माण किया गया।

कॉम्पैक्ट डिस्क का निर्माण 1.2 मीमी मोटी पॉलीकार्बोनेट प्लास्टिक के द्वारा किया जाता है और इसका वजन तकरीबन 16 ग्राम के आसपास में होता है।

कॉम्पैक्ट डिस्क की एक तरफ एलुमिनियम की बहुत ही पतली परत होती है जो की चमकीली होती है। अगर इस पर स्क्रैच लग जाता है तो सीडी के डाटा को सही प्रकार से नहीं पढ़ा जा सकता है, जिसकी वजह से जो भी रिजल्ट होते हैं वह स्क्रीन पर अटक अटक कर दिखाई देते हैं।

कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) के प्रकार (Types Of CD In Hindi)

कॉम्पैक्ट डिस्क को मुख्य तौर पर तीन आधार पर अलग-अलग बांटा गया है और विभाजन के आधार पर इनके काम करने के तरीके भी अलग-अलग हो गए हैं।

  • CD-ROM
  • Recordable CD (CD-R)
  • Rewritable CD (CD-RW)

1: CD-ROM

इस प्रकार की कॉम्पैक्ट डिस्क के अंतर्गत किसी भी डाटा को या तो पढ़ सकते हैं या फिर देख सकते हैं। उसमें कोई भी बदलाव करना संभव नहीं होता है। इस प्रकार की सीडी का इस्तेमाल किसी भी जगह पर आसानी से करना पॉसिबल होता है।

इस प्रकार की जो भी सीडी होती है, उसमें हमारे द्वारा 650mb तक के डाटा को स्टोर किया जा सकता है। बता दें कि सामान्य तौर पर सीडी रीड ओनली मेमोरी का इस्तेमाल म्यूजिक, एजुकेशन रिलेटेड, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर डाटा को स्टोर करने के लिए होता है।

2: Recordable Compact Disk (CD-R)

ऑडियो की रिकॉर्डिंग करने के लिए मुख्य तौर पर रिकॉर्डेबल कॉम्पैक्ट डिस्क का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी विशेषता यह होती है कि इसमें जो डाटा मौजूद होते हैं उसे आसानी से पढ़ा भी जा सकता है और उसे लिखा भी जा सकता है।

सामान्य तौर पर इसमें मौजूद डाटा को देखने के लिए सीडी प्लेयर का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें हमारे द्वारा सिर्फ एक ही बार डाटा को लिखा जा सकता है। इसीलिए इसकी कीमत Rewritable CD की कंपैरिजन में कम होती है।

3: Rewritable Compact Disk (CD-RW)

इस प्रकार की सीडी की विशेषता यह होती है कि इसमें जो भी डाटा उपलब्ध होते हैं उन्हें डिलीट किया जा सकता है और फिर से नए डाटा को डाला जा सकता है। इस प्रकार के कॉम्पैक्ट डिस्क का निर्माण सबसे पहली बार साल 1997 में हुआ था।

हालांकि दूसरे प्रकार की सीडी की तुलना में इसकी कीमत थोड़ी सी अधिक होती है परंतु इसकी खासियत भी जबरदस्त होती है। इसमें जो डाटा मौजूद होते हैं उसे नुकसान पहुंचने की संभावना काफी कम ही होती है।

कॉम्पैक्ट डिस्क का डाटा स्टोरिंग

आप जब गौर से कॉम्पैक्ट डिस्क को देखेंगे, तब आपको यह दिखाई देगा कि उसकी एक परत चमकीली होती है और दूसरी परत चमकीली नहीं होती है।

इसमें से जो चमकीली वाली परत होती है उसी रंगीन परत के द्वारा कॉम्पैक्ट डिस्क अपने सभी कामों को अंजाम देता है। चमकीली परत डाटा को स्टोर करने के लिए अथवा पढ़ने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।

कॉम्पैक्ट डिस्क में मौजूद चमकीली परत का निर्माण पॉलीकार्बोनेट नाम की वस्तु के द्वारा किया जाता है और तकरीबन 5 लेयर के साथ इसका निर्माण होता है।

इसमें जो सबसे ऊपर वाली लेयर होती है उसे प्रोटेक्टिव लेयर कहा जाता है और उसके पश्चात जो लेयर होती है उसे रिफ्लेक्टिव लेयर, उसके पश्चात जो लेयर होती है उसे डाई इलेक्ट्रिक लेयर, उसके पश्चात रिकॉर्डिंग लेयर और सबसे आखरी वाली लेयर को पॉलीकार्बोनेट डिस्क कहा जाता है।

वैसे तो कॉम्पैक्ट डिस्क के सभी भाग महत्वपूर्ण होते हैं परंतु इसका रिकॉर्डिंग लेयर वाला भाग बहुत ही महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसी में लेजर लाइट पड़ती है और उसके पश्चात प्रकाश परावर्तन और अपवर्तन का काम करता है जिसकी वजह से डाटा को पढ़ा जाता है और स्टोर किया जाता है।

CD का उपयोग?

इसका इस्तेमाल कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, फिल्म के गाने, एप्लीकेशन, लाइसेंस, ऑडियो वीडियो मैटेरियल तथा दूसरे प्रकार के डाटा को स्टोर करने के लिए होता है। कॉम्पैक्ट डिस्क में जो भी डाटा स्टोर होते हैं, उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान होता है या फिर ट्रांसफर करना सरल होता है।

अगर आप अपने कॉम्पैक्ट डिस्क में मौजूद डाटा को कंप्यूटर में सुरक्षित करना चाहते हैं तो ऐसा करना बहुत ही सिंपल और सरल होता है।

कॉम्पैक्ट डिस्क का इस्तेमाल मुख्य तौर पर डाटा को सुरक्षित रखने के लिए होता है, क्योंकि इसमें डाटा को स्टोर करने की कैपेसिटी बहुत ही अच्छी होती है।

इसलिए हम इसमें अपने डाटा को सरलता से स्टोर कर सकते हैं। हालांकि आज के जमाने में डाटा स्टोर करने के लिए कॉम्पैक्ट डिस्क का इस्तेमाल कम किया जाने लगा है, क्योंकि इसकी जगह पर अब मेमोरी कार्ड और पेन ड्राइव का इस्तेमाल अधिक होने लगा है।

CD के लाभ?

कॉम्पैक्ट डिस्क के फायदे अथवा कॉम्पैक्ट डिस्क के एडवांटेज निम्नानुसार है।

  • दूसरे डिवाइस से सीडी की तुलना की जाए तो इसकी कीमत कम ही होती है।
  • कॉम्पैक्ट डिस्क के द्वारा रेंडम डाटा एक्सेस प्रदान किया जाता है।
  • कॉम्पैक्ट डिस्क में पूरे सॉफ्टवेयर पैकेज को इंस्टॉल किया जा सकता है और बाद में आसानी से उसे एक्सेस भी किया जा सकता है।
  • कॉम्पैक्ट डिस्क में लेजर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है। यह बहुत ही बेहतरीन टेक्नोलॉजी होती है।
  • कॉम्पैक्ट डिस्क एक पोर्टेबल डिवाइस होता है और यह वजन में भी हल्की होती है। इसलिए आप इसे आसानी से अपने साथ किसी भी जगह पर ले कर के जा सकते हैं।

CD के नुकसान?

कॉम्पैक्ट डिस्क के नुकसान अथवा कॉम्पैक्ट डिस्क के डिसएडवांटेज निम्नानुसार है।

  • कॉम्पैक्ट डिस्क में डाटा को स्टोर करने की कैपेसिटी बहुत ही कम होती है। इसलिए वर्तमान के समय में इसका इस्तेमाल ना के बराबर किया जा रहा है।
  • अगर कॉम्पैक्ट डिस्क की चमकीली परत पर स्क्रैच पड़ जाते हैं तो इसकी वजह से कॉम्पैक्ट डिस्क के डैमेज होने की संभावना काफी ज्यादा हो जाती है।
  • कॉम्पैक्ट डिस्क की चमकीली परत पर दाग धब्बे पड़ने की वजह से डाटा पढ़ने में काफी मुश्किल होती है और सही प्रकार से रिजल्ट भी प्राप्त नहीं हो पाते हैं।
  • कॉम्पैक्ट डिस्क की पढ़ने की और लिखने की स्पीड धीमी होती है।

कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) से संबंधित समस्याएं?

आपने इस बात पर भी गौर किया होगा कि आप की अच्छी खासी चलती हुई सीडी अचानक से ही खराब हो जाती है अर्थात जब आप उसे सीडी प्लेयर में डालते हैं तब टीवी की स्क्रीन पर या फिर कंप्यूटर की स्क्रीन पर जो रिजल्ट आते हैं वह अटक अटक कर आते हैं।

जैसे की वीडियो का सही प्रकार से ना चलना, गाने का रुक रुक कर चलना। दरअसल यह इसलिए होता है क्योंकि कॉम्पैक्ट डिस्क में जो चमकीली परत होती है वहां पर स्क्रैच लग गया होता है।

इसीलिए हमें कॉम्पैक्ट डिस्क की चमकीली परत को स्क्रैच से बचाने की अत्यंत आवश्यकता होती है। अगर उस पर कोई भी निशान पड़ जाते हैं तो इसकी वजह से डाटा को पढ़ पाना काफी मुश्किल हो जाता है।

इसके साथ ही कॉम्पैक्ट डिस्क को पढ़ने के लिए ऐसे सीडी प्लेयर की जरूरत होती है, जिसमें वायरस ना हो, क्योंकि अगर किसी सीडी प्लेयर में वायरस है तो उसकी वजह से सीडी को भी नुकसान हो सकता है या फिर उसमें अवेलेबल डाटा डिलीट हो सकते हैं।

CD में डाटा कैसे स्टोर किया जाता है?

इस बात से आप भली-भांति परिचित है कि कंप्यूटर सिर्फ बायनरी लैंग्वेज को ही समझ पाता है। इसीलिए कॉम्पैक्ट डिस्क में भी बायनरी लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता है।

दरअसल ऑप्टिकल डिस्क सीडी रोम में हाई इंटेंसिटी का इस्तेमाल डाटा को बायनरी प्रारूप में स्टोर करने के लिए और लो इंटेंसिटी वाली लेजर बीम का इस्तेमाल डाटा को पढ़ने के लिए किया जाता है।

कंप्यूटर में कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) कैसे चलाएं?

आपके द्वारा अगर अपने सिस्टम पर कॉम्पैक्ट डिस्क को चलाया जाना है तो इसके लिए सबसे पहले आपको सीडी प्लेयर के ड्राइव में कॉम्पैक्ट डिस्क को लगाने की आवश्यकता होती है।

जब आप कॉम्पैक्ट डिस्क को सीडी प्लेयर के ड्राइव में लगाते हैं तो कॉम्पैक्ट डिस्क प्लेयर ऑटोमेटिक ही सीडी प्लेयर को चलाना शुरु कर देता है।

हालांकि कभी कबार ऐसा होता है कि कॉम्पैक्ट डिस्क सीडी प्लेयर में लगाने के बावजूद भी वह नहीं चलता है। ऐसी अवस्था में आपको अपने विंडो मीडिया प्लेयर को ओपन करना चाहिए और उसके पश्चात प्लेयर लाइब्रेरी से डिस्क के नाम को सिलेक्ट करना चाहिए।

कभी कबार ऐसा भी होता है कि हमारा cd-rom सेफ मोड में तो सही प्रकार से काम करता है परंतु वह विंडो में नहीं चल पाता है। ऐसी अवस्था में यह इसलिए होता है क्योंकि शायद कोई प्रोग्राम पहले से ही चल रहा है या फिर आपका ड्राइव करप्ट हो गया है।

इसके लिए आपको डिवाइस मैनेजर को ओपन करना होता है। उसके बाद आप वहां पर सीडी को डिलीट बटन के द्वारा हटा सकते हैं। इसके बाद आपको अपने सिस्टम को रिबूट करना चाहिए। ऐसा करने पर विंडोज के द्वारा आपके cd-rom की जो प्रॉब्लम है उसे पहचान लिया जाता है। इसके बाद आप आसानी से सीडी रोम सेफ मोड में इंस्टॉल कर सकते हैं।

कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) को Clean कैसे करें?

अगर आप कॉम्पैक्ट डिस्क को साफ करना चाहते हैं तो इसके लिए आप मुलायम कपड़े का इस्तेमाल कर सकते हैं। मुलायम कपड़े का इस्तेमाल करके कॉम्पैक्ट डिस्क को साफ करने से आपके कॉम्पैक्ट डिस्क को कोई भी नुकसान नहीं होता है और सरलता से आप की सीडी भी क्लीन हो जाती है।

आप चाहे तो अपना खुद का सलूशन भी घर बैठे बना सकते हैं। इसके लिए आपको कॉम्पैक्ट डिस्क को पानी और शैंपू में मिले हुए पानी के अंदर डालकर साफ करना होता है।

अगर आपके कॉम्पैक्ट डिस्क में स्क्रैच पड़ गया है तो इसे भी आसानी से साफ किया जा सकता है। इसके लिए आपको किसी अच्छे टूथपेस्ट का इस्तेमाल करना चाहिए। टूथपेस्ट के द्वारा सीडी पर पड़े हुए स्क्रैच को हटाने के लिए सबसे पहले आपको किसी मुलायम कपड़े को लेना चाहिए और उसे हल्के गुनगुने पानी में भिगोना चाहिए।

इसके बाद आपको कपड़े के द्वारा सीडी को साफ करना चाहिए। अब आपको टूथपेस्ट ले करके उसे डायरेक्ट सीडी के ऊपर अप्लाई करना है। ऐसा करने से सीडी पर जो भी स्क्रैच होते हैं वह चले जाते हैं और आप की सीडी बिल्कुल नई जैसी दिखाई देती है।

कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) का भविष्य (Future Of CD In Hindi)

कॉम्पैक्ट डिस्क के अगर भविष्य के बारे में बात की जाए तो ऐसा कहा जा रहा है कि इसका इस्तेमाल भविष्य में काफी कम ही किया जाएगा, क्योंकि वर्तमान के समय में ही इसका इस्तेमाल बहुत ही कम किया जाने लगा है, क्योंकि इसकी जगह पर डीवीडी, मेमोरी कार्ड, पेन ड्राइव और हार्ड ड्राइव जैसी चीजें उपलब्ध हो गई है।

पेन ड्राइव और मेमोरी कार्ड का इस्तेमाल वर्तमान के समय में इसलिए भी अधिक किया जा रहा है क्योंकि इनमें सीडी के मुकाबले में डाटा को स्टोर करने की कैपेसिटी काफी ज्यादा होती है, साथ ही इनका आकार भी बहुत ही छोटा होता है। इनका आकार 1 इंच के आसपास या फिर उससे भी कम होता है।

इसीलिए पोर्टेबल डिवाइस होने की वजह से इन्हें किसी भी जगह पर ले कर के जा सकते हैं। जहां सीडी में सिर्फ 700 एमबी से लेकर के 800 एमबी के डाटा को ही स्टोर कर सकते है, वही पेन ड्राइव और मेमोरी कार्ड में डाटा एमबी में नहीं बल्कि जीबी में स्टोर होता है। इसलिए यह कहा जा रहा है कि भविष्य में हो सकता है कि कॉम्पैक्ट डिस्क मार्केट से गायब ही हो जाए और अथवा इसका इस्तेमाल कम ही किया जाए।

सीडी बनाने वाली टॉप कंपनी

  • Samsung
  • Philips
  • Toshiba
  • Daxon Technology
  • Cda
  • Bluray Korea
  • Beall
  • Fujifilm
  • Hitachi maxell

तो दोस्तों उम्मीद है की अब आपको सीडी और उससे जुड़ी सभी प्रकार की जानकारी मिल चुकी होगी, और आप जान गये होगे की कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) क्या है और इसके प्रकार? (What is CD in Hindi)

FAQ:

सीडी का फुल फॉर्म क्या है?

सीडी का फुल फॉर्म COMPACT DISK होता है.

सीडी की स्टोरेज कैपेसिटी कितनी होती है?

सीडी की स्टोरेज कैपेसिटी 700 से 800 एमबी होती है.

सीडी का अविष्कारक किसे कहा जाता है?

सीडी का अविष्कार जेम्स रसैल ने किया था.

सीडी की कीमत कितनी होती है?

सीडी की कीमत आमतौर पर 50 से ₹80 होती है.

दोस्तों यदि आपने आज का हमारा यह आर्टिकल अच्छी तरह से पढ़ लिया है तो अब आपको सीडी के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो गए हो कि आज के आर्टिकल में हमने आपको बताया है कि कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) क्या है? (What is CD in Hindi) सीडी की फुल फॉर्म क्या होती है? सीडी प्लेयर क्या है? सीडी की कितनी कैपेसिटी होती है? सीडी कैसे काम करती है? सीडी के अविष्कारक कौन थे।

अब आपको सीडी के बारे (कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) क्या है? (What is CD in Hindi)) में पूरी तरह से पता लग चुका है आपको सीडी के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त है, यदि फिर भी आपके मन में कोई सवाल अभी भी है तो आप उसे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमें बता सकते हैं हम उसका जरूर रिप्लाई करके आपके सवाल का जवाब आपको देंगे।

अगर आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों और सोशल मीडिया पर शेयर करना ना भूलें ताकि वह भी इस जानकारी का फायदा उठा सकें।

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