कंप्यूटर के घटक (Components of Computer in Hindi)

0

दोस्तों हर क्षेत्र में कंप्यूटर के बढ़ते उपयोग के आधार पर यदि आज के समय को अगर कंप्यूटर का युग कहा जाए तो गलत नहीं होगा। पर कंप्यूटर कैसे काम करता है? कंप्यूटर को बनाने में किन भागों का इस्तेमाल होता है? इसके बारे में आज भी लोगों को बिल्कुल भी जानकारी नहीं होती। अतः लोग अक्सर components of computer in Hindi सर्च करते हैं।

कंप्यूटर के घटक (Components of Computer in Hindi)


जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी बढ़ रही है सारी चीजें ऑनलाइन हो रही है जिस वजह से कंप्यूटर का इस्तेमाल ज्यादा होने लगा है। ऐसे में अगर आप भी आपको कंप्यूटर के बारे में कोई जानकारी नहीं होगी, तो आप टेक्नोलॉजी के साथ कदम से कदम मिलाकर नहीं चल पाएंगे। 

पर आज के इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको कंप्यूटर के सभी components के बारे में और यह कैसे काम करते हैं? इस विषय पर विस्तार से जानकारी मिल जाएगी। बस आपको इस आर्टिकल में बताई गई हर एक बात को ध्यान से पढ़ना होगा। 

कंप्यूटर क्या होता है? 

कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो यूजर द्वारा दिए गए निर्देशों या फिर commands पर काम करता है और उन्हें मनचाहा output प्रदान करता है। कंप्यूटर डाटा को प्रोसेस करने के साथ-साथ उसे स्टोर भी करता है। 


कंप्यूटर शब्द लैटिन भाषा के Computare और इंग्लिश भाषा के Compute से मिलकर बना है जिसका मतलब होता है गणना करना! मतलब कंप्यूटर एक ऐसी मशीन है जिसके द्वारा बहुत ही तीव्र गति से डाटा की गणना की जाती है। 

पहले के समय में कंप्यूटर का इस्तेमाल सिर्फ गणना करने के लिए किया जाता था। लेकिन आज के समय में कंप्यूटर का इस्तेमाल जीवन के हर क्षेत्र में किया जाता है। 

कंप्यूटर क्या है? उसकी पूरी जानकारी यहाँ है।


कंप्यूटर की विशेषताएं 

कंप्यूटर के बारे में जान लेने के बाद चलिए इसके विशेषताओं पर भी नजर डालते हैं – 

  1. Speed

कंप्यूटर की Speed के बारे में हम पहले ही बात कर चुके हैं।‌ ये तो सभी जानते हैं कि कंप्यूटर के द्वारा बड़ी संख्या में मौजूद डाटा को Seconds में कैलकुलेट किया जा सकता है। कंप्यूटर बहुत ही तेजी से डाटा को प्रोसेस करता है और फिर यूजर को input का output दिखाता है। 

  1. Accuracy

कंप्यूटर हम इंसानों जैसा नहीं होता है यानी हम गलती करते हैं, पर कंप्यूटर कोई गलती नहीं करता। कंप्यूटर चाहे कितनी ही तेजी से डाटा को कैलकुलेट क्यों ना करें ! लेकिन उससे कभी भी गलती नहीं होती है। 


कंप्यूटर यूजर द्वारा दिए गए कमांड पर बिल्कुल सही तरीके से काम करता है। कंप्यूटर में glitch ना के बराबर देखने को मिलता है।  अगर आप कंप्यूटर में सही इनपुट डालेंगे तो आपको आउटपुट भी बिल्कुल सही मिलेगा। 

  1. Reliability

क्योंकि कंप्यूटर इंसानों से ज्यादा अच्छे तरीके से किसी भी काम को कर सकता है इसलिए कंप्यूटर पर विश्वास करना आसान होता है। कंप्यूटर बहुत सारे डाटा को एक साथ सही तरीके से कैलकुलेट करता है जबकि उस काम को अगर कोई इंसान करें तो उससे गलती हो सकती है। इसीलिए लोगों के लिए कंप्यूटर पर विश्वास करना आसान होता है। 

  1. Memory

इंसान की मेमोरी चीजों को लेते लेते थक जाती है पर कंप्यूटर के साथ ऐसा नहीं होता है आप कंप्यूटर में जितने चाहे उतने डाटा को process कर सकते हैं। कंप्यूटर के माध्यम से आप बहुत साल पुरानी फाइल को भी एक्सेस कर सकते हैं। जबकि हमारे दिमाग की बात करें तो हम एक हफ्ते पहले की बात भी याद नहीं रहती है। 


Components of Computer in Hindi

कंप्यूटर में 4 कंपोनेंट्स होते हैं, जिनके आधार पर कंप्यूटर काम करता है। ये चारों कॉम्पोनेंट्स कंप्यूटर के काम करने के लिए बहुत जरूरी होता है। ‌ये कंपोनेंट्स हैं – 

  1. Input unit
  2. Output unit
  3. Processing unit
  4. Memory unit

A. Input Unit

कंप्यूटर में input unit एक ऐसा यूनिट है जिसकी मदद से यूजर कंप्यूटर से संपर्क करता है तथा उसमें इंस्ट्रक्शन और कमांड देता है। यूजर से डाटा और इन्फॉर्मेशन लेने के बाद input unit डाटा को कंप्यूटर के बाकी component में आगे की प्रोसेसिंग के लिए भेज देता है। 

ये कंप्यूटर के computational system का पहला stage होता है। जहां कंप्यूटर के द्वारा डाटा collect किया जाता है। ये यूजर और कंप्यूटर  के बीच इंटरफेस का काम करता है। Input डिवाइस आप समझ सकते हैं वो डिवाइस होती है जिसके द्वारा यूजर कंप्यूटर में  निर्देश डालता है। नीचे मैंने इन input डिवाइस के बारे में विस्तारपूर्वक बताया है, तो आप उसे ध्यान से पढ़ें – 

  1. Mouse 

माउस कंप्यूटर में इस्तेमाल किया जाने वाला एक Input डिवाइस है, इसमें तीन बटन होते हैं! left बटन, right बटन और बीच में एक चक्के  जैसा बटन होता है। माउस को टेबल पर या फिर माउस पैड के ऊपर रखकर इस्तेमाल किया जाता है। जब हम माउस को टेबल पर घुमाते हैं तो स्क्रीन पर कर्सर भी उसके अनुसार घूमता है। 

माउस का इस्तेमाल किसी फाइल, फोल्डर या फिर प्रोग्राम को select, open या फिर close करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा माउस की मदद से स्क्रीन को scroll और drag भी कर सकते हैं। 

  1. Keyboard

कंप्यूटर का ये input डिवाइस एल्फाबेट्स, नंबर और symbol से मिलकर बना होता है। कीबोर्ड का इस्तेमाल करके हम कंप्यूटर में चीज़े type कर सकते है, command दे सकते हैं और कंप्यूटर में बहुत से फंशन को इस्तेमाल कर सकते हैं। 

कीबोर्ड में हर key के साथ एक character व कमांड होता है। चाहें हिंदी कीबोर्ड हो या इंगलिश या फिर दूसरी भाषा के लिए इसमें अलग अलग layouts होते हैं। कंप्यूटर के  कीबोर्ड मे function keys, numeric keypad, arrow keys और special keys जैसे Enter, Shift, और Control भी होते है।

  1. Trackball

ट्रैकबॉल भी माउस की तरह ही एक input डिवाइस है। हालांकि माउस में बटन होते हैं लेकिन ट्रैकबॉल एक छोटा सा गोल आकार बॉल होता है। इस बॉल को घुमा कर हम स्क्रीन में दिए गए कर्सर को manage कर सकते हैं। 

माउस की तरह ही ट्रैकबॉल का इस्तेमाल भी हम कंप्यूटर में किसी फोल्डर, फाइल या प्रोग्राम को select, open अथवा Close कर सकते हैं। इसके अलावा ट्रैकबॉल से भी माउस  की तरह scrolling और dragging किया जा सकता है। ट्रैकबॉल का इस्तेमाल कंप्यूटर के शुरुआती समय में किया जाता था। आज के समय माउस का इस्तेमाल होता है।

  1. Joystick

Joystick एक ऐसा input डिवाइस है, जो आपको हर कंप्यूटर में  देखने को नहीं मिलेगा। ‌ ये डिवाइस कंप्यूटर या gaming डिवाइस में इस्तमाल की जाती है। ये एक handheld डिवाइस होता है जो बॉल या फिर स्टिक के साथ अटैच होता है। इस डिवाइस को उपर, नीचे, दाएं, बाएं तथा diagonal directions में घुमाया जा सकता है।

Joystick का इस्तेमाल games में character की गति, शूटिंग, और दूसरे functions को manage करने के लिए किया जाता है। इसकी मदद से गेमर्स  गेम के अंदर real-time में  दूसरे players से connect करते हैं। Joystick कंप्यूटर में गेमिंग  एक्सपीरियंस को बहुत काफी ज्यादा बढ़ा देता हैं। 

B. Output Unit

Output unit कंप्यूटर  का एक ऐसा हिस्सा है, जो यूजर द्वारा दिए गए डाटा इंस्ट्रक्शन को प्रोसेस करने के बाद end  result हमे दिखाता है। ये डिवाइस हमें देखने, सुनने या दूसरे रुप में डाटा को दर्शाता है monitor, speaker, printer output unit इसके उदाहरण हैं। 

Output unit के माध्यम से text, images, videos और दूसरे multimedia को देख सकते हैं, सुन सकते हैं और या फिर hard copy में प्राप्त कर सकते हैं। ये device कंप्यूटर में data processing के  बाद user को आउटपुट  दिखाता है तथा communication और interaction को और आसान बनाता हैं। Output unit में ये सारे डिवाइस आते हैं – 

  1. Monitor

ये एक बहुत ही जरूरी आउटपुट डिवाइस है जो कंप्यूटर के साथ इस्तेमाल होती है। मॉनिटर एक डिस्प्ले  स्क्रीन होती है जहां पर हम text, इमेज वीडियो और graphics को देख सकते हैं। मॉनिटर के माध्यम से कंप्यूटर यूजर को आउटपुट दिखाता है। 

ये डिवाइस हमारे समझने लायक तरीके में डाटा को दिखाता है। मॉनिटर अलग-अलग size, resolution और टेक्नोलॉजी में मिलते हैं। High-definition (HD), full HD, और ultra HD मॉनिटर से हम high-quality visuals देख सकते हैं। Monitors आम तौर पर flat-panel LCD या LED टेक्नोलॉजी से बनते हैं तथा कंप्यूटर का visual experience बेहतर बनाते हैं।

  1. Speaker

Speaker एक ऐसा इलेक्ट्रोनिक डिवाइस है, जो कंप्यूटर, टेलीविजन तथा दूसरे इलेक्ट्रोनिक डिवाइसेज के साथ इस्तेमाल किया जाता है। ये कंप्यूटर द्वारा दिए गए इलेक्ट्रोनिक सिग्नल को sound waves में बदल कर Audio को सुनने लायक बनाता हैं। 

  1. Printer and Scanner

ये आउटपुट डिवाइस कंप्यूटर से मिले डाटा को हार्ड कॉपी में print करने के लिए इस्तमाल किया जाता है। ये डिवाइस text, images, तथा दूसरे graphical content को हार्ड कॉपी में print करता है। Printers अलग-अलग प्रकार के होते हैं। जैसे inkjet printers, laser printers, और dot matrix printers. 

Inkjet printers liquid ink को कागज पर छोटे-छोटे बूंदों के रूप मे छोड़ते हैं। Laser printers laser की मदद से electrostatic charge और toner को  droppers की मदद से characters और images को बनाते हैं।

C. Processing Unit 

Processing unit कंप्यूटर का एक बहुत ही जरूरी हिस्सा है जो कंप्यूटर के सभी कैलकुलेशन और डाटा प्रोसेसिंग का काम करता है। ये मुख्य रूप से CPU (Central Processing Unit) और उसके साथ जुड़ी कंपोनेंट्स से मिलकर बना होता है।

प्रोसेसिंग यूनिट कंप्यूटर की इंटरनल मेमोरी से डाटा को लेकर प्रोसेस करता है।Processing unit इंस्ट्रक्शन को समझकर execute करता है, arithmetic और logical ऑपरेशन परफॉर्म करता है और डाटा को मॉडिफाई भी करता है। 

CPU का महत्त्वपूर्ण काम है डाटा को प्रोसेस करना, प्रोग्राम रन  करना और नियंत्रित करना है। Processing unit की गति और ऊर्जा खपत कंप्यूटर की performance पर असर डालता है।

processing unit को तीन भागों में बांटा गया है – 

  1. Control unit
  2. ALU (Arithmetic Logic Unit)
  3. GPU (Graphics Processing Unit)
  • Control unit

Control unit कंप्यूटर के सारे काम और कंपोनेंट्स को निंत्रित करता है। ये unit CPU (Central Processing Unit) का एक हिस्सा है। ये instructions को समझकर उन्हें प्रोसेस करने और एक्जीक्यूट करने का  काम करता है। 

इस यूनिट का काम  instruction cycle को कॉर्डिनेट करना, data  flow और execution को कंट्रोल करना और अलग-अलग कंपोनेंट्स के बीच संपर्क और तालमेल बिठाना होता है। 

Control unit CPU के और बाकी कंपोनेंट्स के बीच interface बनाता है और सही तरह से कंप्यूटर के workload को मेंटेन करने में मदद करती है।

  • ALU (Arithmetic Logic Unit)

ALU कंप्यूटर के arithmetic और logic operations को पूरा करता है। ये unit भी CPU (Central Processing Unit) का ही एक हिस्सा है। ALU कंप्यूटर की जो बेसिक  arithmetic होती है, जैसे कि जोड़, घटाव, गुणा, भाग को पूरा करता है। इसके अलावा ये unit logic operations जैसे कि AND, OR, NOT, और किसी भी चीज की माप को कंपेयर करने का काम भी करता है। 

ALU input values को लेकर इन्हे प्रॉसेस करता है और उसके नतीजे को CPU के दूसरे कंपोनेंट्स को भेजता है। ALU का प्रमुख काम है डाटा को प्रोसेस करना और decision making के लिए लॉजिक  गेट्स का इस्तेमाल करना होता हैं । ये unit कंप्यूटर के पूरे computation power और परफॉर्मेंस में जरूरी भूमिका निभाता है।

  • GPU (Graphics Processing Unit)

GPU एक specialized electronic circuit है, जो कंप्यूटर में  ग्राफिक्स और विजुअल डाटा को प्रॉसेस करता है। ये unit CPU (Central Processing Unit) के साथ जुड़ा होता है। GPU का मुख्य काम हाई स्पीड कैलकुलेशन करके फोटो, वीडियो और ग्राफिक को generate करना व उसे आउटपुट के तौर पर दिखाना होता है। ये unit कठिन mathematical algorithms और parallel processing का इस्तेमाल करता है। 

GPU गेमिंग मल्टीमीडिया एप्लीकेशन इमेज एडिटिंग और साइंटिफिक कंप्यूटिंग में खास तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसका उपयोग फोटो, वीडियो को smooth और realistic तरीके से display करने, textures और effects को render करने के  साथ साथ high resolution graphics को संभालने के लिए किया जाता है। GPU, कंप्यूटर की overall graphics performance को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

D. Memory Unit

ये unit कंप्यूटर का ऐसा यूनिट है, जो डाटा और इंस्ट्रक्शन को स्टोर  करने के लिए इस्तेमाल होता है। Memory unit कंप्यूटर के internal स्टोरेज का हिस्सा होता है। ये unit temporary स्टोरेज सुविधा प्रदान करता है, जहां पर कंप्यूटर में चल  रहे प्रोग्राम, फाइल्स और डाटा  स्टोर रहते हैं। 

Memory unit दो तरह की होती है। जिसमें एक है primary memory और दूसरा है secondary memory. 

  1. Primary Memory

Primary memory, जिसे main memory या primary storage कहते हैं, ये कंप्यूटर का इंटरनल स्टोरेज होता है। इसमें डाटा और इंस्ट्रक्शन स्टोर  होते हैं जिसे कंप्यूटर processor active तरीके से access और manipulate करते हैं। Primary memory 2 प्रकार के होते हैं-

  1. Read only memory (ROM)
  2. Random Access Memory (RAM)
  • Read only memory (ROM)

ये एक ऐसा primary memory है जिसे read किया जा सकता है पर write नहीं किया जा सकता।  ये कंप्यूटर की परमानेंट स्टोरेज होती है और ये preloaded instructions और डाटा को स्टोर  करती है। ROM की मदद से कंप्यूटर की booting process और initial startup information के बारे में पता चलता है।

इसमें जो डाटा स्टोर होता है, वो power-off होने के बाद भी डिलीट नहीं होता। क्योंकि ये एक  non-volatile memory होती है। ROM का इस्तेमाल firmware, operating system और embedded system में किया जाता है।

ROM चार प्रकार के होते हैं – 

  • PROM, 
  • EPROM, 
  • EEPROM, 
  • FLASH ROM
  1. PROM (Programmable Read Only Memory)

PROM एक primary memory है जिसमें प्रोग्राम होते हैं। इस मेमोरी में प्रोग्राम को एक बार लिखा जाता है उसके बाद इसे कभी भी read किया जा सकता है। PROM में डाटा को रखने के लिए fuse या antifuse का इस्तेमाल किया जाता है। जब एक bit को “burn” किया जाता है तो वो permanent तरीके से उसमे set हो जाता है। 

PROM को programmable कहा जाता है क्योंकि डाटा को एक बार write करने के बाद उसे डिलीट नहीं किया जा सकता हैं। Reprogramming के लिए एक नया PROM इस्तेमाल किया जाता है जो की बहुत महंगा होता है। 

  1. EPROM (Erasable programmable read only memory)

ये एक erasable primary memory होती है मतलब इस प्राइमरी मेमोरी को डिलीट भी किया जा सकता है। इसमें डाटा को ultraviolet (UV) light की मदद से burn किया जाता है। EPROM में प्रोग्रामिंग करते समय अगर कुछ गलती हो जाए। 

तो इसके पूरे प्रोग्राम को erase करने के बाद फिर शुरुआत से programming करना पड़ता है। EPROM को firmware development, prototyping, और debugging में इस्तेमाल किया जाता है। Power off होने के बाद भी इसमें कोई भी डाटा लॉस नहीं होता है।

  1. EEPROM (electronically erasable programmable read only memory)

EEPROM के डाटा को electrical signals के द्वारा डिलीट किया जाता है। इसमें डाटा को कई बार लिखा जा सकता है और किसी UV light की के बिना erase किया जा सकता है। 

EEPROM non-volatile होता है मतलब डाटा power-off होने के बाद भी इसमें डाटा डिलीट नहीं होता। इसमें डाटा को bit by bit प्रोग्राम किया जाता है। EEPROM को माइक्रोकंट्रोलर, embedded systems और पोर्टेबल डिवाइस डिवाइसेज में इस्तेमाल किया जाता है। जहां डाटा को  read, write तथा erase करने की जरूरत होती है। 

  1. FLASH ROM

Flash ROM भी एक तरह का EEPROM होता है। जिसमे डाटा को इलेक्ट्रिक सिग्नल की मदद से कई बार  burn किया जा सकता है। जहां EEPROM में डाटा bit by bit प्रोग्राम होती है वहीं flash ROM में डाटा block by block (1 block = 1000 bytes) प्रोग्राम होता है। 

इसमें transistor-based cells का इस्तेमाल होता है, जो charge और discharge होने के द्वारा ही डाटा स्टोर  करते हैं। आज के समय में modern BIOS (Basic Input Output System) Flash ROM के ही बने होते है।

  • RAM (Random Access Memory)

RAM एक प्राइमरी मेमोरी तथा एक integrated circuit है। जो कंप्यूटर में temporary स्टोरेज और डाटा एक्सेस के लिए इस्तेमाल होते हैं। ये एक volatile memory होती है मतलब की power-off होने पर इसमें मौजुद डाटा डिलीट हो जाता है। 

RAM में actively काम हो रहे डाटा और प्रोग्राम व instructions को स्टोर  किया जाता है जिसे कंप्यूटर processor तेजी से read और write कर सकता है। ये semiconductor material (Silicon और germanium) का बना होता है। RAM का काम multitasking करना, प्रोग्राम execution, और temporary डाटा स्टोरेज regulate करना होता है। RAM कुल दो प्रकार के होते हैं।

  1. Static RAM
  2. Dynamic RAM
  • Static RAM

SRAM में डाटा को flip-flop circuit से स्टोर  किया जाता है, जो डाटा को स्टोर  करके रखता है। इसमें डाटा को एक्सेस और रिफ्रेश करने के लिए किसी external circuitry की जरूरत नहीं होती। ये कम स्टोरेज लेता है, लेकिन ये बहुत ज्यादा मात्रा में पावर लेता है। इस तरह के रैम काफी महंगे होते है। SRAM cache memory, रजिस्टर्ड फाइल और high-performance एप्लीकेशन में इस्तेमाल की जाती है।

  • Dynamic RAM

DRAM में डाटा को capacitor-based cells में स्टोर  किया जाता है, जो चार्ज को होल्ड करके रखते हैं। इसमें डाटा को थोड़े थोड़े देर में refresh करना जरूरी होता है नहीं तो इसका charge कम हो जाता है। इसमें मेमोरी की खपत कम होती है, लेकिन access time, SRAM के मुकाबले अधिक होता है। ये cost-effective है लेकिन इसमें पावर ज्यादा consume होता है। DRAM system memory और main memory के रूप में इस्तेमाल होती है।

  1. Secondary Memory

Secondary memory, जो auxiliary storage के नाम से भी जाना जाता है एक तरह का non-volatile storage  होता है। जो लंबे समय तक डाटा स्टोर  करने के लिए इस्तेमाल किया  जाता है। ये फिजीकल फॉर्म में पाए जाते है। जैसे hard disk drives (HDD), solid-state drives (SSD), optical drives, और magnetic tapes में होती है। 

सेकेंडरी मेमोरी हाई स्टोरेज कैपेसिटी और डाटा को परमानेंट स्टोर करके रखने की सुविधा देता है। इसकी डाटा access करने की स्पीड थोड़ी slow होती है। लेकिन इसमें power-off होने के बाद भी डाटा डिलीट नहीं होती हैं। सेकेंडरी मेमोरी डाटा बैकअप, फाइल स्टोरेज इत्यादि के काम में आती है। Secondary memory को करीब तीन भागों में बांटा गया है – 

  1. Magnetic disk
  2. Optical disk
  3. Flash Memory
1. Magnetic Disk

Magnetic disk एक तरह का secondary स्टोरेज डिवाइस है जो magnetic coating की मदद से डाटा को स्टोर  करता है। आम तौर पर इसमें spinning platters होते है, जिन पर डाटा magnetic fields के रूप में स्टोर होती है। डाटा को read और write करने के लिए magnetic heads का इस्तेमाल किया जाता है। 

ये हाई स्टोरेज कैपेसिटी और cost  effective storage solution होता है जिसे पर्सनल कंप्यूटर लैपटॉप और सर्वर जैसी चीजों में इस्तेमाल किया जाता है। Magnetic disk को तीन भागों में बांटा गया है – 

  1. HDD (Hard Disc Drive)
  2. SDD (Solid State Drive)
  3. FDD (Floppy Disk Drive)
  • HDD (Hard Disc Drive)

HDD में डाटा मैग्नेटिक डिस्क पर स्टोर  होता है। ये disks spin करते हैं और मैग्नेटिक हेड डाटा को read और write करते हैं। ये एक ट्रेडिशनल स्टोरेजटेक्नोलॉजी है। जो पर्सनल कंप्यूटर लैपटॉप और सर्वर में इस्तेमाल की जाती है।

  • SDD (Solid State Drive)

SSD में किसी भी तरह के spinning या moving parts नहीं होते है। HDD के मुकाबले SSD high-speed डाटा access करता है और डाटा ट्रांसफर rate उससे कहीं ज्यादा होता है। इसमें डाटा को electrical signals की मदद से read और write किया जाता है। SSD मजबूत, noise-free, और इसमें काफी ज्यादा पावर  होता है। ये डिवाइस भी पर्सनल कंप्यूटर लैपटॉप और अन्य डिवाइस में स्टोरेज के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

  • FDD (Floppy Disk Drive)

FDD (Floppy Disk Drive) में डाटा को floppy disks में स्टोर  किया जाता है। फ्लॉपी डिस्क छोटे और फ्लैक्सिबल प्लास्टिक डिस्क होते हैं जिनमें magnetic coating की  होती है। FDD disk HDD की तरह डिस्क को spin करता है और मैग्नेटिक हेड्स डाटा को read और write करते है।

फ्लॉपी डिस्क ड्राइवर पोर्टेबल होने के कारण कहीं पर भी  आसानी से carry किया जा सकता है। लेकीन इसकी कम स्टोरेज क्षमता और डाटा एक्सेस की गति धीमी होने के वजह से FDD आज के समय में इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

2. Optical Disk

Optical disk एक ऐसा सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस है जो डाटा को ऑप्टिकल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके स्टोर  करता है। डाटा optical laser की मदद से read और write किया जाता है। Optical disks multimedia storage, डाटा बैकअप और ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। Optical disks, जैसे CD (Compact Disc), DVD (Digital Versatile Disc) और Blu-ray Disc, high-capacity स्टोरेजकी सुविधा देते हैं।

  • CD (Compact Disk)

CD (Compact Disc) एक प्रकार की plastic disk होती है जिसमें डाटा को भविष्य के लिए स्टोर करके रखा जाता  है। CD high-capacity स्टोरेज डिवाइस होती है‌। ये ऑडियो, वीडियो व डाटा फाइल को स्टोर  करने के लिए इस्तेमाल होता है।

  • DVD (Digital Versatile Disk)

DVD यानी digital versatile disk CD से ज्यादा डाटा स्टोर  करने में सक्षम होता है। जैसे ऑडियो वीडियो और डाटा फाइल। डीवीडी प्लेयर और कंप्यूटर ड्राइव्स डीवीडी को read, write, और play कर सकते है।

  • BRD (Blu-ray Disk)

DVD के मुकाबले Blu-ray Disk उससे कहीं ज्यादा डाटा स्टोर  कर सकता है और साथ ही यह high definition video quality भी देता है। BRD में डाटा को blue-violet laser की मदद से read और write किया जाता है। ये मूवी, वीडियो गेम और हाई रेजोल्यूशन कंटेंट के लिए काफ़ी ज्यादा popular है। इसे भी BRD player और कंप्यूटर drives read और play कर सकते है।

3. Flash Memory

Flash memory एक non-volatile स्टोरेज टेक्नोलॉजी है। ये solid-state डिवाइस है जिसमे डाटा को electrical charges के द्वारा read और write किया जाता है। फ्लैश मेमोरी हाई  स्पीड डाटा को access करने के साथ कम बिजली की खपत, और मजबूती की सुविधा देता है। ये portable USB drives तथा मेमोरी कार्ड में इस्तेमाल किया जाता है।

  • Memory card

Memory card एक portable स्टोरेज डिवाइस होता है। ये compact size और high-capacity स्टोरेज देता है। मेमोरी कार्ड को digital डिवाइसेज जैसे कि स्मार्टफोन कैमरा और टेबलेट में इस्तेमाल किया जाता है। इसमें डाटा flash memory टेक्नोलॉजी से स्टोर होता है। कंप्यूटर में मेमोरी कार्ड से डाटा को read और write करने के लिए कार्ड रीडर का इस्तेमाल किया जाता है।

  • Pen drive

Pendrive या USB drive भी एक portable स्टोरेजडिवाइस है। पेन ड्राइव को USB port से कनेक्ट करके डाटा को read और write किया जा सकता है। पेन ड्राइव को पर्सनल  कंप्यूटर, लैपटॉप और दूसरे डिवाइसेज में डाटा ट्रांसफर तथा स्टोरेज के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

मेमोरी की विशेषता क्या है? 

1.कंप्यूटर की मेमोरी में सारा डाटा स्टोर होता है। जिसे यूज़र जब चाहे तब प्रोसेस कर सकता है। 

  1. कंप्यूटर के मेमोरी में अगर बिजली बंद भी हो जाए तब भी डाटा डिलीट नहीं होता है। 
  2. यूजर डाटा को ज्यादातर कंप्यूटर के सेकंड मेमोरी में स्टोर  करके रखते हैं। 
  3. कंप्यूटर के सेकंड मेमोरी को अपने हिसाब से बढ़ाया जा सकता है लेकिन इस तरह की मेमोरी की कीमत काफी ज्यादा होती है। ‌
  4. इस मेमोरी में जो डाटा स्टोर होता है उसे आसानी से ट्रांसफर किया जा सकता है। ‌

FAQ 

कंप्यूटर को हिंदी में क्या कहते हैं? 

कंप्यूटर को हिंदी में संगणक कहते हैं। ‌

हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर क्या होता है?

Computer के physical part को हार्डवेयर कहा जाता है इसकी मदद से कंप्यूटर में निर्देश डाला जाता है। जबकि सॉफ्टवेयर कंप्यूटर का non physical part होता है, इसके द्वारा यूज़र के निर्देशों का पालन किया जाता है। 

कंप्यूटर के मुख्य भाग कितने होते हैं?

कंप्यूटर के 2 भाग होते हैं – Hardware और software. 

कंप्यूटर सिस्टम के 5 मुख्य घटक क्या है?

कंप्यूटर सिस्टम के पांच मुख्य घटक है – input unit, Processing Unit, Memory unit, output unit, arithmetic and logical unit. 

कंप्यूटर के कंपोनेंट्स क्या है?

कंप्यूटर्स जिन चीजों से मिलकर बना होता है उसे कंप्यूटर के कंपोनेंट्स कहते हैं। एक कंप्यूटर में  monitor, keyboard, mouse, trackball, joystick  scanner, printer जैसी चीजें उसके कंपोनेंट्स  होते हैं। 

कंप्यूटर का फुल फॉर्म क्या है? 

कंप्यूटर का फुल फॉर्म Commonly Operated Machine Particularly Used for Technical and Educational Research हैं। 

कंप्यूटर का जनक कौन है? 

कंप्यूटर का जनक Charles Babbage हैं। 

दोस्तों इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको कंप्यूटर के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो गई होगी। कंप्यूटर के घटक (Components of Computer in Hindi) के इस आर्टिकल में मैंने आपको कंप्यूटर के बारे में लगभग सब कुछ बताने की कोशिश की है।

इस आर्टिकल में बताई गई बातें अगर आपको अच्छी लगी हो तो आप इस अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर कीजिए।  

Previous articleएसएमएस (SMS) क्या होता है? (SMS Meaning in Hindi)
Next articleप्रोग्राम क्या है? (What is Program in Hindi)
Ankur Singh
हेलो दोस्तों, मेरा नाम अंकुर सिंह है और में New Delhi से हूँ। मैंने B.Tech (Computer Science) से ग्रेजुएशन किया है। और में इस ब्लॉग पर टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर, मोबाइल और इंटरनेट से जुड़े लेख लिखता हूँ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here