डेटाबेस क्या है और इसके प्रकार (Database in Hindi)

4

डेटाबेस क्या होता है?

डेटाबेस बहुत सारे डेटा का एक समहू होता है जिसका मुख्य उद्देश्य डाटा को स्टोर करना होता है, डाटा को फिर से हासिल करना होता है और डाटा को प्रबंधित करके बड़ी मात्रा में इंफॉर्मेशन को मैनेज करना होता है।


डेटाबेस में डाटा एक ऑर्गेनाइज कलेक्शन के तौर पर स्टोर होता है ताकि इसे सरलता से एक्सेस कर सके और इसे मैनेज कर सके। आप डाटा को टेबल, सीरीज, कॉलम और इंडेक्स में व्यवस्थित कर सकते हैं ताकि संबंधित इंफॉर्मेशन को खोजा जा सके।

डेटाबेस के द्वारा संचालित होने वाली बहुत सारी डायनेमिक वेबसाइट वर्तमान के समय में वर्ल्ड वाइड वेब पर उपलब्ध है। डेटाबेस के नाम के बारे में जानकारी प्राप्त की जाए तो MySQL, Sybase, Oracle, MongoDB, Informix, PostgreSQL, SQL Server इत्यादि जैसे कई डेटाबेस उपलब्ध हैं।

वर्तमान के समय के जो लेटेस्ट टेक्नोलॉजी वाले डेटाबेस है उनका मैनेजमेंट डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम के द्वारा किया जाता है। डेटाबेस में जो डाटा स्टोर होते हैं उस पर काम करने के लिए स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लैंग्वेज (SQL) का इस्तेमाल किया जाता है।

डेटाबेस में जो इंफॉर्मेशन मौजूद होती है उसे ट्रांसफर किया जा सकता है या फिर उसके स्टोरेज में बदलाव किया जा सकता है। इसके अलावा डेटाबेस में जब चाहे तब नए डाटा को शामिल कर सकते हैं और पुराने डाटा को डिलीट कर सकते हैं अथवा उसमें एडिटिंग कर सकते हैं। इसके अलावा डेटाबेस को एक ही समय में बहुत सारे लोगों के द्वारा एक्सेस किया जा सकता है।


डाटा क्या होता है? उसकी पूरी जानकारी यहाँ है।

डेटाबेस सॉफ्टवेयर क्या होता है?

डाटाबेस सॉफ्टवेयर एक प्रकार का ऐसा सॉफ्टवेयर है जिसके माध्यम से डेटाबेस से संबंधित कामों को किया जाता है। डाटाबेस सॉफ्टवेयर की सहायता से डाटाबेस की फाइल को क्रिएट किया जा सकता है अथवा डेटाबेस की फाइल के रिकॉर्ड को बनाया जा सकता है। इसके अलावा डेटाबेस में जो फाइल मौजूद है उसकी एडिटिंग कर सकते हैं।

बता दे कि डाटाबेस सॉफ्टवेयर डाटा स्टोरेज, बैकअप, रिर्पोटिंग, मल्टी एक्सेस कंट्रोल तथा सिक्योरिटी को भी संभालने का काम करता है। डाटाबेस सॉफ्टवेयर को संक्षेप में डीबीएस (DBMS) कहा जाता है।


DBMS क्या होता है? उसकी पूरी जानकारी यहाँ है।

डेटाबेस कैसे काम करता है?

डेटाबेस के काम करने के तरीके को मुख्य तौर पर चार प्रकारों में बांटा गया है जिसमें सबसे पहले डाटा बनाया जाता है, उसके बाद डाटा को पढ़ा जाता है। इसके पश्चात आवश्यकता पड़ने पर डाटा में अपडेट करते हैं और सबसे आखरी में डाटा को डिलीट कर सकते हैं अथवा कर देते हैं। इस प्रकार से डाटाबेस के जो काम करने का तरीका होता है उसे डेटाबेस ऑपरेशन कहा जाता है।

सरल भाषा में कहा जाए तो सबसे पहले किसी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है और सॉफ्टवेयर की सहायता से डेटाबेस को बना करके तैयार कर लिया जाता है। जैसे कि आपके द्वारा सॉफ्टवेयर के माध्यम से किसी एक्सेल फाइल को बनाया जाता है। एक बार डाटा बना लेने के बाद डाटा को सही प्रकार से पढ़ा जाता है ताकि किसी भी प्रकार की गलती होने पर पता चल सके।।


डाटा को पढ़ने के बाद अगर डाटा में किसी भी प्रकार का बदलाव करने की आवश्यकता होती है तो डेटाबेस में बदलाव किया जा सकता है अर्थात डेटाबेस को अपडेट करने की आवश्यकता होती है। अब आगे की प्रक्रिया में अगर डेटाबेस में से किसी इंफॉर्मेशन को डिलीट करना है तो डिलीट वाले ऑप्शन का इस्तेमाल किया जाता है और डेटाबेस में से उस इंफॉर्मेशन को निकाल दिया जाता है।

इस प्रकार से जब डेटाबेस बन करके रेडी हो जाता है तो इसके बाद आसानी से डेटाबेस को एक्सेस कर सकते हैं। हालांकि डेटाबेस बन जाने के बावजूद भी डेटाबेस में जब चाहे तब किसी भी प्रकार का बदलाव कर सकते हैं और किसी भी पुरानी इंफॉर्मेशन को हटा सकते हैं और नई इंफॉर्मेशन को डाल सकते हैं या फिर इंफॉर्मेशन में बदलाव कर सकते हैं।

डेटाबेस के प्रकार (Types of Database in Hindi)

डेटाबेस के बहुत सारे प्रकार हैं। किसी स्पेशल संगठन के लिए सबसे अच्छा डेटाबेस इस बात पर डिपेंड करेगा कि इंस्टीट्यूट अथवा संगठन डेटा का उपयोग किस प्रकार से करना चाहता है। 


नीचे हम आपको डेटाबेस के प्रमुख प्रकारों की जानकारी और उनके नाम बता रहे हैं।

1: रिलेशनल डाटाबेस

साल 1980 के दशक में रिलेशनल डेटाबेस को प्रमुख डेटाबेस के तौर पर गिना जाता था। रिलेशनल डाटाबेस में जो आइटम होते थे वह टेबल के साथ ही साथ कॉलम और रो में ऑर्गेनाइज होते थे। इस प्रकार के डेटाबेस में मौजूद जानकारी तक पहुंचना बहुत ही आसान होता था।

2: ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड डाटाबेस

ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड डाटाबेस में इंफॉर्मेशन को ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग की तरह ऑब्जेक्ट के तौर पर दर्शाया जाता है।

3: डिस्ट्रीब्यूटेड डाटाबेस

डिस्ट्रीब्यूटेड डेटाबेस में अलग अलग साइड में मौजूद दो या दो से अधिक फाइल होती है। डिस्ट्रीब्यूटेड डेटाबेस अलग-अलग कंप्यूटर में भी स्टोर हो सकता है। इसके अलावा यह एक ही फिजिकल लोकेशन में भी लोकेट हो सकता है।

4: डाटा वेयरहाउस

डाटा वेयरहाउस डाटाबेस का एक ऐसा प्रकार है जिसका निर्माण स्पेशल रूप से फास्ट क्वेरी और एनालिसिस के लिए किया गया है। यह डाटा के लिए एक सेंट्रल रिपोजिटरी माना जाता है।

5: नो एसक्यूएल डाटाबेस

नो एसक्यूएल डाटाबेस एै नान रिलेशनल डाटाबेस होता है, जो अनस्ट्रक्चर्ड और सेमी स्ट्रक्चर्ड डाटा को स्टोर करने की और उसमे बदलाव करने की परमिशन प्रदान करता है।

6: ग्राफ डाटाबेस

ग्राफ डाटाबेस इंस्टिट्यूट और इंस्टिट्यूट के बीच रिलेशन के संदर्भ में डाटा को स्टोर करने का काम करता है।

7: ओएलटीपी डाटाबेस

ओएलटीपी डाटाबेस को एक बहुत ही फास्ट और तेज एनालिसिस करने वाला डेटाबेस माना जाता है, जिसकी डिजाइनिंग अलग-अलग यूजर के द्वारा बड़ी संख्या में किए गए ट्रांजैक्शन के लिए की गई है। वर्तमान के समय में जो डाटाबेस इस्तेमाल किए जा रहे हैं उनमें सामान्य तौर पर इस्तेमाल होने वाले डेटाबेस में ओएलटीपी डेटाबेस का भी नाम लिया जाता है।

8: ओपन सोर्स डाटाबेस

जिस डाटाबेस का सोर्स कोड ओपन सोर्स होता है उसे ओपन सोर्स डाटाबेस सिस्टम कहा जाता है। एसक्यूएल अथवा नोएसक्यूएल डाटाबेस इत्यादि ओपन सोर्स डाटाबेस हो सकते हैं।

9: क्लाउड डाटाबेस

क्लाउड डाटाबेस स्ट्रक्चर अथवा अनस्ट्रक्चर्ड डेटा का संग्रह होता है। यह किसी प्राइवेट अथवा गवर्नमेंट या फिर हाइब्रिड क्लाउड कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म पर रहता है। बता देना चाहते हैं कि क्लाउड डाटाबेस मॉडल दो प्रकार के होते हैं। पहला होता है पारंपरिक और दूसरा होता है सर्विस के रूप में डाटाबेस।

10: मल्टीमॉडल डाटाबेस

मल्टीमॉडल डाटाबेस अलग-अलग प्रकार के डाटाबेस मॉडल को एक सिंगल इंटीग्रेटेड बेक एंड में जोड़ने का काम करते हैं। इसका मतलब यह निकल करके आता है कि वह अलग-अलग डाटा के प्रकार को समायोजित कर सकते हैं।

11: डॉक्यूमेंट डाटाबेस

दस्तावेज पर आधारित इंफॉर्मेशन को स्टोर करने के लिए या फिर से प्राप्त करने के लिए या फिर उसका मैनेजमेंट करने के लिए डॉक्यूमेंट डाटाबेस को डिजाइन किया गया है। डॉक्यूमेंट डाटाबेस कॉलम अथवा रो की जगह पर जेएनओएन फॉर्मेट में डाटा संग्रहित करते हैं।

12: सेल्फ ड्राइविंग डाटाबेस

Self-driving डेटाबेस डेटाबेस के प्रकारों में से सबसे नए और महत्वपूर्ण प्रकार का डेटाबेस माना जाता है। इसे ऑटोनॉमस डाटाबेस के तौर पर भी जानते हैं।

डेटाबेस का इस्तेमाल कहां कहां होता है?

डेटाबेस का इस्तेमाल बहुत सारी जगह पर किया जाता है। सभी जगह के बारे में बता पाना मुश्किल है इसलिए नीचे आपको कुछ ऐसी जगहों के नाम बताए जा रहे हैं जहां पर डाटाबेस का यूज़ होता है।

  •  लाइब्रेरी मैनेजमेंट सिस्टम
  •  हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम
  •  टेलीकम्यूनिकेशन
  • आधार कार्ड
  • रेलवे रिजर्वेशन सिस्टम
  • ऑनलाइन विडियो स्ट्रीमिंग
  • ऑनलाइन गेमिंग
  • शेयर मार्केट
  • बैंकिंग
  • ईमेल
  • कॉलेज/ यूनिवर्सिटीज
  • सोशल मीडिया

डेटाबेस के फायदे?

डेटाबेस के कुछ प्रमुख फायदे नीचे आपको बताए गए हैं।

  • डेटाबेस में संबंधित डाटा तक जल्दी पहुंचने के लिए फिल्टर की सुविधा भी आपको प्राप्त होती है, जिसकी वजह से आप के समय की काफी बचत होती है।
  • डेटाबेस में जब चाहे तब आप किसी भी नई जानकारी को शामिल कर सकते हैं और पुरानी जानकारी में बदलाव कर सकते हैं या फिर किसी भी जानकारी को डिलीट कर सकते हैं।
  • अगर डेटाबेस मौजूद है तो आप किसी भी जगह पर रहते हुए आसानी से इंटरनेट के माध्यम से और डिवाइस के माध्यम से डेटाबेस को एक्सेस कर सकते हैं और डेटाबेस में मौजूद जानकारियों को देख सकते हैं।
  • डेटाबेस में अगर कम जगह उपलब्ध है तो ऐसी अवस्था में भी ज्यादा डाटा को संग्रहित कर के रखा जा सकता है।
  • कागज की तुलना में डेटाबेस में फाइल को अथवा इंफॉर्मेशन को सुरक्षित रखना आसान है।
  • डेटाबेस में आपको रिकवरी और बैकअप जैसे ऑप्शन की सुविधा भी हासिल होती है।
  • डेटाबेस को बहुत ही सुरक्षित माना जाता है क्योंकि कोई भी यूजर बिना परमिशन के डेटाबेस तक नहीं पहुंच पाता है।
  • डेटाबेस में जो डेटा संग्रह किए जाते हैं वह लंबे समय तक वहां पर मौजूद होते हैं जिसे आप जब चाहे तब देख सकते हैं।

डेटाबेस के नुकसान?

डेटाबेस के कुछ प्रमुख डिसएडवांटेज की जानकारी निम्नानुसार है।

  • डेटाबेस का निर्माण करना थोड़ा सा महंगा होता है क्योंकि डेटाबेस का निर्माण करने के लिए सॉफ्टवेयर के साथ ही साथ हार्डवेयर की भी आवश्यकता है होती है, जिनकी कीमत मार्केट में ज्यादा होती है।
  • डेटाबेस का निर्माण कोई भी एरा गैरा व्यक्ति नहीं कर सकता है बल्कि जिसे डेटाबेस बनाने आता है वही व्यक्ति डेटाबेस का निर्माण कर सकता है।
  • अगर किसी डेटाबेस की सिक्योरिटी कमजोर है, तो ऐसी अवस्था में उस डाटा बेस पर अगर किसी cyber-attack के द्वारा अटैक किया जाता है तो वह डाटाबेस हैक हो सकता है जिससे काफी तगड़ा नुकसान किसी कंपनी को या फिर किसी व्यक्ति को हो सकता है।

यह भी पढ़े:

यदि आपके पास इस पोस्ट से सम्बंधित कोई सवाल हो तो निचे कमेन्ट करे और पोस्ट पसंद आने पर इसे सोशल मीडिया में शेयर भी कर दे।

Previous articleCPU क्या है? इसके भाग एवं प्रकार (CPU in Hindi)
Next articleCall Recording कैसे करें? (किसी भी फ़ोन में)
Ankur Singh
हेलो दोस्तों, मेरा नाम अंकुर सिंह है और में New Delhi से हूँ। मैंने B.Tech (Computer Science) से ग्रेजुएशन किया है। और में इस ब्लॉग पर टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर, मोबाइल और इंटरनेट से जुड़े लेख लिखता हूँ।

4 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here