DNS क्या है? इसके प्रकार और यह कैसे काम करता है? (DNS in Hindi)


दोस्तों अगर आप अपने computer या mobile में internet use करते हो तो अपने website, blog और domain के बारे में तो ज़रूर सुना होगा। लेकिन अगर आप domain name system के बारे में डिटेल से जानना चाहते हो तो आज इस पोस्ट में मैं आपको बताऊँगा की DNS क्या है? इसके प्रकार और यह कैसे काम करता है? (DNS in Hindi) Domain Name System क्या है? SubDomain क्या है? इसके प्रकार? कैसे काम करता है? डोमेन कैसे ख़रीदे? & All About Domain Name System In Hindi?

DNS क्या है? इसके प्रकार और यह कैसे काम करता है? (DNS in Hindi)

दोस्तो आज इंटरनेट पर आप किसी भी टॉपिक पर सर्च करते हैं। तो उस टॉपिक से रिलेटेड कहीं सारी वेबसाइट आपके सामने खुल कर आ जाती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि आज इंटरनेट पर रोजाना इंग्लिश, हिंदी या अन्य भाषाओं में लाखों ब्लॉग पब्लिश होते हैं.


एक समय ऐसा भी था जब डोमेन नेम सिस्टम प्रचलन में नहीं था और तब ip-address के द्वारा ही किसी भी वेबसाइट पर पहुंचा जाता था परंतु आखिर क्यों आईपी एड्रेस की जगह पर डोमेन नेम सिस्टम लाया गया।

इसके बारे में अवश्य ही आपको पता होना चाहिए और यह भी जानना चाहिए कि आखिर डोमेन नेम सिस्टम क्या है। इस पेज पर हम चर्चा करेंगे कि DNS क्या है? इसके प्रकार और यह कैसे काम करता है? (DNS in Hindi)

DNS क्या है? (What is Domain Name System in Hindi)

डोमेन नेम को आईपी ऐड्रेस में चेंज करने का काम जिस सिस्टम के द्वारा किया जाता है उसे ही इंटरनेट की भाषा में डोमेन नेम सिस्टम कहा जाता है, जिसे की संक्षेप में DNS कहते हैं।


इसी प्रणाली की वजह से हमारे द्वारा जब किसी भी वेब ब्राउज़र में कुछ भी सर्च किया जाता है तो उसके पश्चात डोमेन नेम सिस्टम संबंधित वेबसाइट से इंफॉर्मेशन प्राप्त करके वेब ब्राउजर की स्क्रीन पर यूजर को दिखाने का काम करता है।

ऐसे डिवाइस जिसमें यूजर किसी ब्राउज़र का इस्तेमाल इंटरनेट चलाने के लिए करते हैं उन सभी डिवाइस में एक आईपी एड्रेस मौजूद होता है जो कि यूनिक अर्थात बिल्कुल अलग ही होता है। यह आईपी ऐड्रेस IPv4 (198.15.48.17) या IPv6 (2100:Cb05:1840:1:D121:F8c2) के फॉर्मेट में होता है।

जितने भी डिवाइस होते हैं उनका ip-address कुछ अजीबोगरीब फॉर्मेट में होता है, जिसे याद रखना इंसानों के बस की बात नहीं होती है, क्योंकि इंसान आसान से शब्दों को तो याद रख सकता है परंतु जिनमें शब्द और अंक दोनों ही होते हैं उन्हें याद रखना मुश्किल होता है। इसीलिए इंटरनेट पर उपलब्ध वेबसाइट को एक्सेस करने के लिए डोमेन नेम का निर्माण किया गया।

डोमेन नेम शब्दों के तौर पर होता है। इसीलिए इसे पढ़ना भी आसान होता है साथ ही इसे याद रखना भी आसान होता है और हम आसानी से डोमेन नेम को टाइप करके संबंधित वेबसाइट पर पहुंच भी सकते हैं। हालांकि सॉफ्टवेयर शब्दों के तौर पर डोमेन को पहचान नहीं पाता है। इसलिए इस जगह पर डोमेन नेम सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है।

क्योंकि डोमेन नेम सिस्टम के द्वारा ऐसे ip-address को अंकों में कन्वर्ट किया जाता है जो शब्दों में लिखे गए होते हैं और फिर वेब ब्राउजर उस आईपी ऐड्रेस को सही प्रकार से समझता है।

और वेब ब्राउज़र को यह पता चल जाता है कि यूजर कौन सी वेबसाइट पर जाना चाहता है अथवा यूज़र ने जो सर्च किया है वह कौन सी वेबसाइट से संबंधित है।

DNS का फुल फॉर्म

Domain Name System

डीएनएस का फुल फॉर्म अंग्रेजी भाषा में डोमेन नेम सिस्टम होता है और हिंदी भाषा में डोमेन नेम सिस्टम को डोमेन नाम प्रणाली कहा जाता है। आसान भाषा में समझाया जाए तो डोमेन नेम सिस्टम एक ऐसा सिस्टम होता है, जो डोमेन नाम को ऐसे आईपी एड्रेस में चेंज करने का काम करता है जिसे कंप्यूटर आसानी से समझ ले।

DNS Record क्या है?

डोमेन नेम सिस्टम के द्वारा अपने पास सभी वेबसाइट के आईपी ऐड्रेस को और उनके डोमेन नेम को व्यवस्थित ढंग से रखने का काम करता है। इसे ही डोमेन नेम सिस्टम रिकॉर्ड कहा जाता है जिसके अलग-अलग प्रकार होते हैं, जैसे कि A, AAA, CNAME, MX, TXT, इत्यादि।

Domain Name Space क्या है?

डोमेन नेम सिस्टम का जो डेटाबेस होता है उसी डेटाबेस के स्ट्रक्चर को ही डोमेन नेम स्पेस कहते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डोमेन नेम सिस्टम का डेटाबेस का जो स्ट्रक्चर होता है वह इनवर्टेड पेड़ के जैसे ही होते हैं, जिसके जीरो लेवल को रूट कहते हैं।

डोमेन नेम स्पेस के डेटाबेस के स्ट्रक्चर में टोटल 128 लेवल अवेलेबल होते हैं। इसमें लेवल की शुरुआत 0 से लेकर के 128 लेवल तक होती है और इसमें 0 लेवल को रुट कहा जाता है।

DNS का इतिहास (History of DNS in Hindi)

इंटरनेट का जब निर्माण हुआ था तब इतनी ज्यादा वेबसाइट मौजूद नहीं थी, क्योंकि दुनिया भर में टेक्नोलॉजी की काफी कमी थी और अधिकतर देशों में लोगों के पास कंप्यूटर/ स्मार्टफोन जैसे सिस्टम भी कम ही उपलब्ध थे।

इसीलिए इंटरनेट का इस्तेमाल काफी कम ही किया जाता था। इसलिए तब के समय में किसी भी वेबसाइट की पहचान उनके जो आईपी एड्रेस होते थे उन्हीं के द्वारा की जाती थी।

परंतु जैसे-जैसे इंटरनेट का फैलाव दुनिया के अन्य देशों में होता गया और लोगों के पास कंप्यूटर, लैपटॉप और स्मार्टफोन की उपलब्धता होने लगी, वैसे वैसे काफी तेज गति के साथ इंटरनेट पर अलग-अलग वेबसाइट और ब्लॉग का निर्माण होना चालू हो गया।

और जब वेबसाइट की संख्या लगातार बढ़ती जाने लगी तो किसी भी वेबसाइट की आईपी एड्रेस को याद रखना काफी मुश्किल काम होने लगा। इसी समस्या को देखते हुए और इस समस्या से निजात दिलाने के लिए अमेरिका देश में रहने वाले साइंटिस्ट Paul Mockapetris के द्वारा साल 1980 में डोमेन नेम सिस्टम की खोज की गई।

इसकी खोज होने के पश्चात वेबसाइट के एड्रेस को डोमेन नेम का नाम दिया जिसकी वजह से सामान्य इंसान को भी किसी वेबसाइट के ip-address को याद रखने में काफी सरलता होने लगी और इस प्रकार से डोमेन नेम सिस्टम की शुरुआत हुई, जो आज वेबसाइट के लिए और यूजर के लिए काफी सहायक साबित हो रही हैं।

DNS कैसे काम करता है?

जैसे कभी व्यक्ति के घर का एड्रेस अलग अलग होता है उसी प्रकार से इंटरनेट पर जितनी भी वेबसाइट मौजूद है उन सभी वेबसाइट का अपना अलग-अलग ip-address होता है। आईपी एड्रेस के द्वारा ही वेबसाइट को आसानी से सर्च किया जा सकता है।

हमारे द्वारा जब किसी भी वेब ब्राउज़र में किसी भी डोमेन नेम को या फिर वेब एड्रेस को सर्च किया जाता है तो उसके पश्चात हमें रिजल्ट तो तुरंत ही अपनी स्क्रीन पर दिखाई देते हैं।

परंतु कंप्यूटर इसके पहले काफी प्रक्रियाओं से होकर के गुजरता है और उसके बाद हमें रिजल्ट ला कर देता है। हालांकि कंप्यूटर की स्पीड काफी तेज होती है। इसलिए हमें यह पता ही नहीं चल पाता है कि कब कंप्यूटर में कौन सी प्रक्रिया की।

दरअसल जब हम किसी भी डोमेन नेम या फिर ip-address को इंटरनेट पर सर्च करते हैं तो उसके पश्चात डोमेन नेम सिस्टम के द्वारा ip-address में डोमेन नेम को कन्वर्ट करने का काम किया जाता है। यह प्रक्रिया होने पर कंप्यूटर को इस बात की जानकारी प्राप्त होती है कि आखिर यूजर किस वेबसाइट पर जाना चाहता है अथवा यूज़र ने किस वेबसाइट को सर्च किया हुआ है।


कंप्यूटर के द्वारा जब ip-address को आईडेंटिफाई कर लिया जाता है, तब कंप्यूटर लोकल कैची में आपने जो भी वेबसाइट सर्च की हुई है उसे खोजने का काम करता है, क्योंकि यहां पर आपके द्वारा हाल ही में जो भी चीजें सर्च की गई होती है वह सभी चीजें सुरक्षित होती हैं।

अगर कंप्यूटर को लोकल कैची में जानकारी मिल जाती है तो वह आपको आपके ब्राउज़र पर संबंधित रिजल्ट दिखाना चालू करता है। अगर नहीं प्राप्त हो पाती है तो कंप्यूटर रिक्वेस्ट को इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के पास सेंड कर देता है, क्योंकि इस जगह पर सभी लोकप्रिय वेबसाइट की इनफार्मेशन उपलब्ध होती है।

यहां पर अगर कंप्यूटर को जानकारी मिलती है तो उसे कंप्यूटर के द्वारा वेबपेज की स्क्रीन पर दिखाया जाता है परंतु अगर यहां भी जानकारी उपलब्ध नहीं होती है तो आपका सवाल उसके पश्चात डोमेन नेम सिस्टम रूट नेमसर्वर के पास चला जाता है, क्योंकि इस जगह पर डोमेन नेम की सभी इंफॉर्मेशन अवेलेबल रहती है।

डोमेन नेम सर्वर यूजर के द्वारा जो रिक्वेस्ट की गई है उसका रिव्यू करता है और फिर उसे Authoritative Name Server के पास सेंड कर देता है। इसके बाद डोमेन से रिलेटेड आईपी ऐड्रेस से इंफॉर्मेशन प्राप्त करने के बाद वापस जानकारी आपके वेब ब्राउज़र के स्क्रीन पर आती है, जिसकी वजह से आप संबंधित वेबसाइट को एक्सेस कर सकते हैं।

DNS के प्रकार (Type of DNS in Hindi)

डोमेन नेम सिस्टम के मुख्य तौर पर दो प्रकार हैं, जो कि निम्नानुसार हैं।

  • Public Domain Name System
  • Private Domain Name System

1: सार्वजनिक डोमेन नाम प्रणाली

इसे पब्लिक डोमेन नेम सिस्टम कहा जाता है। इंटरनेट देने वाली कंपनी के द्वारा वेबसाइट के मालिकों के लिए साथ ही सामान्य जनता के लिए पब्लिक डोमेन नेम सिस्टम को उपलब्ध करवाया जाता है।

इसका साफ तौर पर यह अर्थ होता है कि अगर आपके पास अपनी खुद की कोई वेबसाइट है तो दूसरे लोग भी उसके डोमेन नेम सिस्टम के बारे में जान सकते हैं और आपकी वेबसाइट तक विजिट कर सकते हैं।

2: निजी डोमेन नाम प्रणाली

निजी डोमेन नाम प्रणाली को प्राइवेट डोमेन नेम सिस्टम कहा जाता है। प्राइवेट डोमेन नेम सिस्टम सभी लोगों के लिए मौजूद नहीं होता है। जिन लोगों के पास अपनी खुद की वेबसाइट है सिर्फ उनके लिए ही यह अवेलेबल होता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्राइवेट डोमेन नेम सिस्टम फायरवॉल के द्वारा सुरक्षित होते हैं। ऐसे लोगों के लिए यह काफी काम का होता है जिनके पास अपनी खुद की वेबसाइट है और वह यह चाहते हैं कि उनकी वेबसाइट सामान्य लोगों के लिए उपलब्ध ना हो।

आईपी एड्रेस और डोमेन नेम में अंतर

आर्टिकल में आपने डोमेन नेम सिस्टम क्या है, के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त की, साथ ही आपने यह भी जाना कि डोमेन नेम सिस्टम काम कैसे करता है।

अब हम आपको यह बताने वाले हैं कि आखिर आईपी एड्रेस और डोमेन नेम में अंतर क्या होता है। जो आईपी एड्रेस होते हैं यह नंबर पर होते हैं अर्थात इनका प्रारूप नंबर की तरह होता है।

इसलिए इन्हें सामान्य इंसानों के लिए याद रखना थोड़ा सा मुश्किल हो जाता है परंतु दूसरी तरफ जो डोमेन नेम होते हैं, यह शब्दों पर आधारित होते हैं। इसलिए इन्हें याद रखना सामान्य इंसानों के लिए बहुत ही सरल होता है। हालांकि कंप्यूटर आईपी एड्रेस और डोमेन नेम दोनों को ही आसानी से याद करके रख सकता है।

DNS Server Not Responding से क्या मतलब है?

आपके द्वारा अथवा हमारे द्वारा जब किसी भी वेब ब्राउज़र में किसी भी डोमेन नेम के यूआरएल को इंटर किया जाता है और उसके बाद सर्च वाली बटन पर क्लिक किया जाता है।

 तो कई बार हमें हमारे वेब ब्राउज़र की स्क्रीन पर “DNS server isn’t responding” वाला मैसेज दिखाई देता है जिसका अर्थ कई लोगों को पता नहीं होता है।

बता दे कि इसका मतलब होता है कि डोमेन नेम सिस्टम के साथ कम्युनिकेट करने का प्रयास तो किया गया परंतु सरवर रिजल्ट नहीं दे पाया अर्थात सर्वर रिजल्ट देने में फेल हो गया।

इसके पीछे कुछ ना कुछ कारण अवश्य होता है, जिसमें मुख्य कारण यह होता है कि आप जिस डिवाइस में वेब ब्राउज़र का इस्तेमाल कर रहे हैं उस डिवाइस में जो इंटरनेट कनेक्शन है उसकी स्पीड काफी धीमी है या फिर परमानेंट नहीं है, जिसकी वजह से आपको उपरोक्त समस्या का सामना करना पड़ता है।

इसके अलावा हो सकता है कि आप जो वेब ब्राउज़र का इस्तेमाल कर रहे हैं वह पुराना हो चुका हो और आपको उसे अपडेट करने की आवश्यकता हो।

DNS के फायदे?

डोमेन नेम सिस्टम के फायदे निम्नानुसार है।

  • अगर दुनिया भर में किसी ऐसी एकमात्र प्रणाली के बारे में बात की जाए, जिसके द्वारा हम सरलता से इंटरनेट पर किसी भी चीज को सर्च कर सकते हैं तो वह प्रणाली डोमेन नेम सिस्टम ही होगा।
  • वेब ब्राउज़र में किसी वेबसाइट को सर्च करने के दरमियान टाइपिंग करने में जो गलती होती है उसे डोमेन नेम सिस्टम के द्वारा ऑटोमेटिक ही सही कर दिया जाता है जिसकी वजह से आप सही रिजल्ट तक पहुंच पाते हैं।
  • डोमेन नेम सिस्टम में जो भी समस्याएं आती हैं उसे सॉल्व करने के लिए रूट नेमसर्वर हमारे लिए सहायक साबित होता है, क्योंकि रूट सर्वर के द्वारा top-level डोमेन पर काम किया जाता है और इसीलिए इसके पास सभी टॉप लेवल डोमेन की जानकारी उपलब्ध होती है।
  • जहां पहले किसी भी वेबसाइट के ip-address को याद रखना हमारे लिए कठिन होता था, वही डोमेन नेम सिस्टम की वजह से ही हम किसी भी वेबसाइट के ip-address को आसानी से याद रख सकते हैं, क्योंकि यह शब्दों में होते हैं। पहले ip-address अंकों में होते थे।
  • अगर हमें किसी वेबसाइट का डोमेन नेम पता है तो हम सरलता से उसे सर्च कर सकते हैं और उस वेबसाइट तक पहुंच सकते हैं। यह सुविधा भी डोमेन नेम सिस्टम की वजह से मिल पाती है।
  • डोमेन नेम सिस्टम के द्वारा वेबसाइट को हाई लेवल की सिक्योरिटी उपलब्ध करवाई जाती है।

डोमेन नेम सिस्टम को उदाहरण सहित समझाइए?

डोमेन नेम सिस्टम के अंतर्गत पहले ip-address का चलन था। हालांकि आईपी एड्रेस में अजीबोगरीब शब्द होते थे और उसका स्ट्रक्चर आम लोगों के याद करने लायक नहीं था।

इसलिए वेबसाइट की संख्या बढ़ने के पश्चात इस समस्या से निजात पाने के लिए डोमेन नेम सिस्टम को लाया गया जिसके तहत किसी भी वेबसाइट के डोमेन नाम को टाइप करके उस तक आसानी से पहुंचा जाने लगा।

इस प्रकार आईपी एड्रेस अभी भी मौजूद है परंतु अब लोगों को ip-address याद रखने की आवश्यकता नहीं है। लोग बस डोमेन नाम को इंटर करके भी वेबसाइट तक पहुंच सकते हैं। नीचे देखिए कि डोमेन नेम सिस्टम और आईपी ऐड्रेस के एग्जांपल क्या है।

  • Domain name:- www.xyx.com
  • Ipaddress:-www.xyz.com/74.125.200.103

डोमेन नेम कहां से खरीदें?

इंटरनेट पर डोमेन बेचने वाली हजारो डोमेन रजिस्ट्रार वेबसाइट उपलब्ध है। आप उनमें से किसी भी वेबसाइट पर अपने ब्लॉग के लिए या फिर अपनी वेबसाइट के लिए डोमेन नेम की खरीदारी कर सकते हैं।

हालांकि हम आपको यहां पर नीचे टॉप 5 डोमेन रजिस्ट्रार वेबसाइट की लिस्ट दे रहे हैं जिनसे डोमन लेने पर आपको कोई भी हानि नहीं होती है और आपको यहां पर बेहतरीन कस्टमर सपोर्ट भी प्राप्त होता है।

  • com
  • in
  • org
  • com
  • google

ऊपर जिन वेबसाइट के नाम आपको बताए गए हैं अधिकतर ब्लॉगर और वेब डिजाइनर के द्वारा उन्हीं वेबसाइट से डोमेन नेम की खरीदारी की जाती है। उपरोक्त वेबसाइट डोमेन का दाम अलग-अलग होता है, साथ ही ऊपर जिस वेबसाइट के नाम आपको बताएं गए हैं उनकी सर्विस भी अच्छी होती है और इनकी मार्केट में एक रेपुटेशन भी है। आपको यहां पर अलग-अलग एक्सटेंशन वाले डोमेन प्राप्त हो जाएंगे।

Top Domain Name Provider List

अगर आप अपने किसी बिजनेस के लिए या फिर अपने व्यक्तिगत काम के लिए अपनी खुद की वेबसाइट क्रिएट करना चाहते हैं तो आपको भी अपनी वेबसाइट के लिए एक बेहतरीन डोमेन नेम की खरीदारी अवश्य करनी चाहिए।

हालांकि इसके लिए आपको यह पता होना चाहिए कि बेस्ट डोमेन नेम सर्विस प्रोवाइडर कौन है। नीचे हमारे द्वारा आपको टॉप डोमन प्रोवाइडर की लिस्ट दी गई है। आप अपनी सहूलियत के हिसाब से किसी का भी सिलेक्शन कर सकते हैं और डोमेन की खरीदारी कर सकते हैं।

  • Bigrock          
  • GoDaddy
  • Namecheap   
  • Dream Host
  • Google Domains
  • com  
  • ZNetLive
  • IPage 
  • Hostinger
  • com

डोमेन नेम का सिलेक्शन कैसे करें?

डोमेन नेम का सिलेक्शन करने के दरमियान निम्न बातों पर अवश्य ध्यान रखें।

  • आपको हमेशा ऐसे ही डोमेन नेम का सिलेक्शन करना चाहिए जो छोटा हो। छोटा डोमेन नेम का सिलेक्शन करने से आपको उसे याद रखने में काफी आसानी होती है।
  • आपका डोमेन नेम ऐसा होना चाहिए जो याद रखने में भी आसान हो, टाइप करने में या फिर बोलने में भी सरल हो।
  • आपको ऐसा डोमेन नेम लेना चाहिए जो डोमेन नेम किसी दूसरे व्यक्ति के डोमेन नेम से मिलता-जुलता ना हो। आपको हमेशा यूनिक डोमेन नेम लेना चाहिए ताकि आप आगे चल कर के अपने डोमेन नेम को अलग ब्रांड के तौर पर स्थापित कर सकें।
  • डोमेन नेम मे आपको स्पेशल करैक्टर या फिर नंबर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। आपको सरल शब्दों में उपलब्ध डोमेन नेम की खरीदारी करनी चाहिए।
  • आपको हमेशा टॉप लेवल डोमेन की ही खरीदारी करनी चाहिए ताकि पूरी दुनिया के लोग उसे पहचान सके।
  • ऐसा ही डोमेन नेम आपको लेना चाहिए जो आपके बिजनेस या फिर आपकी बिजनेस प्रोफाइल से मैच करता हो। ऐसा करने से आपको अलग ब्रांड बनाने में आसानी होगी।

आज के इस आर्टिकल में हमने आपको बताया है कि DNS क्या है? DNS काम कैसे करता है और DNS कितने प्रकार का होता है इस लेख के जरिए हमने आपको संपूर्ण जानकारी प्रदान करने की कोशिश की है अगर आपको कोई सवाल है तो आप कमेंट करके पूछ सकते हैं.

FAQ;

डोमेन नेम सिस्टम को हिंदी में क्या कहते हैं?

डोमेन नाम प्रणाली

डीएनएस का फुल फॉर्म क्या है?

Domain name system

डोमेन नाम की आवश्यकता क्यों होती है?

वेबसाइट को एक अलग पहचान देने के लिए साथ ही आसानी से वेबसाइट पर पहुंचने के लिए।

DNS Full Form in medical in Hindi?

Deviated Nasal Septum

उम्मीद है की अब आपको domain name से जुड़ी पूरी जानकारी मिल चुकी होगी, और आप जान गये होगे की DNS क्या है? इसके प्रकार और यह कैसे काम करता है? (DNS in Hindi)

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Hope की आपको DNS क्या है? इसके प्रकार और यह कैसे काम करता है? (DNS in Hindi) का यह पोस्ट पसंद आया होगा, और हेल्पफ़ुल लगा होगा।


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