दुनिया के सात अजूबे के नाम और फोटो | Seven Wonders of World in Hindi


दुनिया में ऐसे कई अजूबे होते हैं जो हमें आश्चर्यचकित कर देते हैं और सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि ऐसे भी अजूबे हो सकते हैं! अचंभित करने वाले अजूबे दुनिया में अपनी खूबियों के कारण जग प्रसिद्ध हो जाते हैं। आजके इस पोस्ट में हम देखिंगे दुनिया के सात अजूबे के नाम और फोटो | Seven Wonders of World in Hindi!

दुनिया के सात अजूबे के नाम और फोटो | Seven Wonders of World in Hindi

सभी इन अजूबों के बारे में जानना चाहेंगे की आखिर क्या खूबी है ऐसे अजूबों में जिन्हें देखकर आँखें बस देखती रह जाती हैं और बिना तारीफ किए शब्द रुक नहीं पाते।


यह अजूबे जनरल नॉलेज का विषय बन जाते हैं और परीक्षा हो या अपने ज्ञान की बढ़ोतरी इनके बारे में जानकारी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी संदर्भ को आगे बढ़ाते हुए जानते हैं दुनिया के ऐसे सात अजूबे जो अपनी छवि और गुणों के कारण ख्याति प्राप्त एवम् विश्व प्रसिद्ध हैं।

सर्वप्रथम 2200 वर्ष पहले अजूबों की सूची बनाने व विश्व प्रसिद्ध 7 अजूबों के बारे में सोचा गया था, जिसका श्रेय हेरोडोटस और कल्लिमचुरू को जाता है। इनके द्वारा सूची में अंकित सात प्राचीन अजूबे अब नष्ट हो चुके हैं। सिर्फ मिस्र का पिरामिड है जो अब अजूबे की सूची में नहीं है बल्कि अपनी विशिष्ट अलग धरोहर के रूप में जाना जाता है।

इन सात प्राचीन अजूबों के स्थान पर नए अजूबों की सूची बनाने के लिए स्विजरलैंड ज्यूरिख के सात न्यू वंडर्स फाउंडेशन साइट के द्वारा 200 मुख्य धरोहरों की सूची तैयार की गई और पोल के माध्यम से इंटरनेट और मोबाइल के जरिए वोटिंग की गई और परिणाम स्वरूप दुनिया के नए सात अजूबों को सूचीबद्ध किया गया।

इसके सर्वे का कार्यभार कनाडाई स्विस और बर्नार्ड वेबर के द्वारा सम्पन्न हुआ और 7 जुलाई वर्ष 2007 में पूर्ण रूप से सात अजूबे घोषित किए गए। इन सात अजूबों के बारे में विस्तृत से जानते हैं कि आखिर क्या है इनमें अनोखी ऐसी बात जो दुनिया के सात अजूबों के रूप में जाने जाते हैं। दुनिया के सात अजूबे के नाम और फोटो | Seven Wonders of World in Hindi!

ये अजूबे हैं : ताजमहल, द ग्रेट चाइना वॉल , पेट्रा , क्राइस्ट द रिडीमर स्टैचू , माचू पिच्चू , रोमन कोलॉसियम, चिचेन इट्ज़ा ।

दुनिया के सात अजूबे के नाम और फोटो

1) ताजमहल (Tajmahal)

 

ताजमहल भारत देश के उत्तर प्रदेश राज्य के आगरा शहर में स्थित एक ऐतिहासिक स्मारक है। जो अपनी सुंदरता, अनोखेपन के कारण दुनिया के सात अजूबों में गिना जाता है। ताजमहल का निर्माण सन 1632 में मुगल बादशाह शाहजहांँ ने करवाया था जिसको बनाने में लगभग 15 वर्ष लग गए थे।

ताजमहल को प्यार की निशानी माना जाता है क्योंकि इस स्मारक को शाहजहांँ ने अपनी पत्नी मुमताज की मृत्यु के पश्चात उसकी याद में बनवाया था। ताजमहल में मुगल शिल्पकारी की सुंदरता देखने को मिलती है।

ताजमहल पूरी तरह सफेद संगमरमर से बना है जो चारों ओर खूबसूरत बगीचों से घिरा हुआ है। ताजमहल अपनी शिल्पकारी, सुंदर कलाकृति के कारण विश्वविख्यात है। ऐसा कहा जाता है कि शाहजहांँ न इस मकबरे को बनाने वालों के हाथ कटवा दिए थे ताकि कोई ऐसा मकबरा ना बनवा सके।

इसकी ऊँचाई लगभग 171 मीटर (561 फीट) मानी जाती है। ताजमहल के वास्तुशास्त्र उस्ताद अहमद लाहौरी थे। मुगल वास्तु शैली से निर्मित ताजमहल में फारसी, भारतीय, तुर्की और इस्लामी वास्तुकला का मिलाजुला अद्भुत रूप देखने को मिलता है।

ताजमहल सबसे अधिक ख्याति प्राप्त धरोहर के रूप जाना जाता है जो मनुष्य द्वारा बनाया गए सफेद गुंबद और संगमरमर जो टाइल के आकार के है इनसे ढका हुआ है। ताजमहल अपनी भव्य कलाकृति के कारण जग प्रसिद्ध है जिसे देखने लोग दूर-दूर से आते हैं।

2) चीन की दीवार (Great wall of china)

चीन में स्थित चीन की विशाल दीवार ईंट, पत्थर, मिट्टी से बनी एक अनोखी धरोहर है जिसका निर्माण 7वीं शताब्दी से 16वीं शताब्दी के करीब माना जाता है। इसकी विशाल,ठोस,अद्भुत कलाकृति के कारण इसे ‘द ग्रेट वॉल ऑफ चाइना’ के नाम से जाना गया जो विश्व प्रसिद्ध है। इसकी सबसे अनोखी बात यह है कि इसे अंतरिक्ष से भी साफ देखा जा सकता है।

इसकी लंबाई लगभग 6400 किलोमीटर, ऊँचाई 35 फीट है। किले के आकार की यह दीवार पूर्व में शानहागुआन से पश्चिम के लोपनुर तक फैली हुई है। विभिन्न शाखाओं के अनुसार इसके विस्तार का क्षेत्र 8,851.8 किलोमीटर (5,500.3मील) तक माना जाता है।

इसके निर्माण में लगभग 20 से 30 लाख व्यक्तियों ने सहयोग दिया था। इस दीवार का निर्माण मुख्यत: देश की रक्षा के लिए, आक्रमण से बचने के लिए किया गया था। इसे कंकड़, मिट्टी, ईंटों का इस्तेमाल करके बनाया गया था।

इसका निर्माण अलग-अलग शासकों ने करवाया था। यूनेस्को द्वारा सन् 1949 से इसे विश्व प्रसिद्ध धरोहर के रूप में सात अजूबे की प्रसिद्ध स्मृति सूची में स्थान दिया गया। दूर-दूर से पर्यटक इस अद्भुत स्मारक को देखने आते हैं।

3) पेट्रा (Petra)

जॉर्डन के मुख्य आकर्षण में अपनी विशेष छवि बनाने वाले पेट्रा शहर को सात अजूबों में से एक माना जाता है जो एक ऐतिहासिक शहर है। पेट्रा का निर्माण लगभग 312BC के आस पास माना जाता है।

इस शहर के निर्माण में वास्तुकला का सुंदर स्वरूप दिखाई देता है जो चट्टानों को काटकर बनाया गया है, इसे रोज़ सिटी भी कहा जाता है। इसके निर्माण में मुख्यतः लाल पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है।

इस शहर में बड़े बड़े मंदिर देखने को मिलते हैं जो सुन्दर लगते हैं। इस शहर में पानी के लिए बड़े नियोजित तरीके से नालीनुमा प्रणाली का प्रयोग पानी के रिसाव के लिए किया गया है साथ ही यहाँ पर नहरें, तालाब सुंदर होने के साथ-साथ अच्छे ढ़ग से बनाई गई हैं।

इस शहर को नबातियों ने 6वीं शताब्दी में स्थापित किया था। इसके निर्माण का कार्य 1200 ईसा पूर्व के लगभग शुरू हुआ था। पेट्रा ‘ होर ‘ नाम की पहाड़ी के ढलान में बनी पहाड़ों से घिरी एक द्रोणी में है जो वादी अरबा नाम की घाटी की पूर्वी सीमा है। इसकी ऊँचाई 810 मीटर (2,657 फीट) के लगभग मानी जाती है। इसके सुव्यवस्थित निर्माण और सुंदर कलाकृति के कारण यह एक पुरातात्विक स्थल के रूप में सात अजूबों में से एक माना जाता है तथा पर्यटन स्थल के रूप में विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

पेट्रा को अपने समय में वाणिज्य केंद्र के रूप में फेमस माना जाता था क्योंकि पेट्रा दमिश्क, सीरिया, लाल सागर के मध्य स्थित था और जॉर्डन की राजधानी अम्मान और यरूशलम साथ ही दक्षिण क्षेत्र से 150 मील की निकटवर्ती दूरी के करीब माना जाता था जो व्यापारिक उद्देश्य के स्वरूप लाभदायक थे।

जॉर्डन का महत्वपूर्ण शहर पेट्रा है जो व्यापारिक रूप से आमदनी का ज़रिया भी है। अपनी सुंदर नक्काशी और सुनियोजित निर्मित कलाकृति के कारण लोगों में आकर्षण का केंद्र है साथ ही फेमस भी है।

4) क्राइस्ट रिडीमर (Christ The Redeemer Statue)

क्राइस्ट रिडीमर ब्राज़ील के रियो डी जेनेरो में स्थित अद्भुत ईसा मसीह की सबसे लंबी प्रतिमा है, जो विश्व भर में ईसा मसीह की सबसे ऊँची मूर्ति के रूप में प्रसिद्ध है। यह प्रतिमा तिजुका फॉरेस्ट नेशनल पार्क में 700 मीटर की ऊँचाई पर कोर्केवाडो पर्वत की चोटी पर बनी हुई है, जिसे विश्व का दूसरा सबसे बड़ा आर्ट डेको स्टेचू भी कहा जाता है।

इस प्रतिमा का निर्माण लगभग सन 1922 में शुरू किया गया था जो 12 अक्टूबर सन 1931 को ब्राजील में सम्पन्न हुआ और ये प्रतिमा स्थापित की गई। इस प्रतिमा को बनाने का श्रेय महान मूर्तिकार फ्रेंच के पॉल लौंडोवस्की को दिया जाता है और इसका डिजाइन कार्य कार्लोस ओसवाल और सिल्वा कोस्टा ने किया था।

यह अनोखी यीशु मसीह की मूर्ति लगभग 635 टन वजन की है। इसकी लंबाई 130 फीट और चौड़ाई 98 फीट है। ईसाई धर्म के मुख्य प्रतीक के रूप में मानी जाने वाली प्रतिमा विशेष कंक्रीट और सोप स्टोन से बनी है जो अपनी विशिष्ट पहचान लिए हुए है।

इस मूर्ति की सबसे अनोखी बात यह है कि इस मूर्ति से पूरा शहर दिखाई देता है। इस प्रतिमा को पक्षी गंदा ना करें उसके लिए उचित व्यवस्था की गई है जिसके तहत छोटी-छोटी कील लगाई गई हैं।

यह प्रतिमा शांति का प्रतीक मानी जाती है और ईसाई धर्म में इसकी विशेष महत्ता है। इसको बनाने में लगभग 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत मानी जाती है। यह प्रतिमा विश्व भर में ईसाई धर्म के विशेष प्रतीक के रूप में जानी जाती है और पर्यटकों में फेमस है।

5) माचू पिच्चू (Machu Picchu)

माचू पिच्चू दक्षिण अमेरिका के पेरू की ऊँची चोटी पर स्थापित शहर है जो एक ऐतिहासिक स्थल है, जिसका संबंध कोलंबस पूर्व इंका सभ्यता से माना जाता है।

यह शहर समुद्र तल से लगभग 2,430 मीटर की ऊँचाई पर उरुबांबा की घाटी के ऊपर स्थित पहाड़ पर है जहाँ से उरूबांबा नदी भी बहती है। माचू पिच्चू कुज्को़ से 50 मील उत्तर-पश्चिम में स्थित है। इंकाओं की पुरातन शैली में बनाया गया माचू पिच्चू में पॉलिश किए पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था।

सूर्य मंदिर, तीन खिड़कियों वाला कक्ष मुख्य आकर्षण माने जाते हैं। इसे पवित्र स्थल भी माना जाता है। विश्व के समक्ष इस स्मारक के परिचय का श्रेय अमेरिकन इतिहासकार हीरम बिंघम को जाता है।

इसकी खोज हीरम बिंघम ने सन 1911 में की थी उसके पश्चात यह स्थल मुख्य पर्यटक के रूप में आकर्षण का केंद्र बन गया। सन 1981 में माचू पिच्चू को ऐतिहासिक देवालय के रूप में भी माना गया और सन 1983 में यूनेस्को ने विश्व प्रसिद्ध धरोहर की सूची में इसे अंकित किया था।

यह प्राचीन सभ्यता की देन है जो अनोखा अजूबा माना जाता है। एक समय में यह काफी समृद्ध हुआ करता था लेकिन स्पेन के आक्रमण के पश्चात स्थिति बदल गई है। ऐसा माना जाता है कि 1400 ई. पूर्व इसका निर्माण राजा पचाकुती ने करवाया था। इस शहर की विशेष कलाकृति लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। इस शहर के अनोखे रूप को देखने कई लोग जाते हैं।


6) रोम का कोलोसियम (Roman Colosseum)

रोम में स्थित कोलोसियम एक विशालकाय स्टेडियम है जो इटली देश के रोमन साम्राज्य का भव्य सबसे बड़ा स्टेडियम है, जो अपनी भव्यता के कारण विश्व प्रसिद्ध है। इसके निर्माण का समय काल लगभग 72 AD से 80 AD का माना जाता है।

स्टेडियम के निर्माण में रेत एवं कांक्रीट का मुख्य रूप से प्रयोग किया गया था। इसकी आकृति अंडे के आकार के रूप में मानी जाती है जो प्राचीन वास्तुकला की विशेषता लिए हुए है। स्टेडियम में इतनी जगह है कि लगभग 50 से 80 हजार तक लोग बैठ सकते हैं। स्टेडियम का क्षेत्रफल लगभग 24000 वर्ग किलोमीटर फैला हुआ है।

इस स्टेडियम में पुराने समय में खेल कूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पशुओं की लड़ाई आदि कार्यक्रम करवाए जाते थे। इस स्मारक के निर्माण में शासक वेस्पियान ने शुरुआत की और सम्राट टाइटस ने संपूर्ण किया।

यह स्मारक प्राचीन वास्तु कला के रूप में प्रसिद्ध अपने भव्य विशाल आकृति के कारण सात अजूबों में से एक माना जाता है। इसका नाम एंफीथियेटरम फ्लेवियम, वेस्पियन और टाइटस से संबंधित पारिवारिक संदर्भ के कारण कोलोसियम पड़ा। इस स्टेडियम में प्राचीन काल में मनोरंजन के रूप में जानवर और मनुष्य में लड़ाई करवाई जाती थी जिसके तहत कई पशु और मनुष्य मारे जाते थे साथ ही नाटक खेले जाते थे जो पौराणिक कथाओं पर आधारित होते थे, भव्य कार्यक्रम किए जाते थे।

यह स्मारक रोमन साम्राज्य की वैभवता का प्रतीक माना जाता है। विश्व विरासत के रूप में यूनेस्को ने कोलोसियम का चयन किया था जो पर्यटकों में भी प्रसिद्ध है। यह स्टेडियम रोमन चर्च के समीप होने की वजह से यहाँ पोप द्वारा विशाल जुलूस भी निकाले जाते हैं। यह स्मारक अपने विशाल भव्य स्वरूप के कारण अजूबा माना जाता है।

7) चिचेन इट्ज़ा (Chichen Itza)

चिचेन इट्ज़ा प्राचीन बयान मंदिर है जो मैक्सिको में स्थित है। यह एक स्पेनी शब्द है ‘Chichen Itza’ अर्थात ‘ इट्ज़ा के कुए के मुहाने पर ‘। प्राचीन स्थलों में से एक माने जाने वाला चिचेन इट्ज़ा का निर्माण लगभग 600 ईसा.पूर्व माना जाता है जो माया सभ्यता से जुड़ा है।

यह मंदिर 5 किलोमीटर के क्षेत्रफल में विस्तृत रूप से स्थापित है। इस मंदिर की ऊँचाई लगभग 79 फीट है जिसकी आकृति पिरामिड के समान लगती है। इस मंदिर में लगभग 365 सीढ़ियाँ हैं, इसके चारों ओर से सीढ़ियांँ बनी हुई हैं जिसके द्वारा मंदिर के ऊपर चढ़ा जा सकता है।

लोगों में मान्यता है कि 1 सीढ़ी 1 दिन का प्रतीक है। चिचेन इट्ज़ा अधिक क्षेत्रफल वाला शहर एवम् जनसंख्या की दृष्टि से भी अधिक माना जाता है। उत्कृष्ट कारीगरों की कला का बेहतर नमूना है चिचेन इट्ज़ा।

इस मंदिर के ऊपरी भाग में एक चबूतरा बनाया गया है साथ ही अन्य मंदिर, पिरामिड, खेलकूद के मैदान भी आसपास बनाए गए हैं। हर साल इसकी भव्यता को देखने लगभग 2 मिलियन के करीब पर्यटक आते हैं। चिचेन इट्ज़ा अपनी विशिष्ट कलाकृति के कारण सात अजूबों में से एक माना जाता है।

दुनिया में ऐसे कितने अजूबे होते हैं जो आकर्षण का केंद्र बनते हैं। लेकिन दुनिया के सात अजूबों की बात ही निराली है जिसकी विस्तृत जानकारी लिखी गई है जो अपनी विशेषता के कारण विश्व प्रसिद्ध हैं। उम्मीद है की अब आपको दुनिया के सात अजूबे के नाम और फोटो | Seven Wonders of World in Hindi! से जुड़ी पूरी जानकारी मिल चुकी होगी।

उम्मीद है अब आपको पता चल गया होगा दुनिया के सात अजूबे के नाम और फोटो | Seven Wonders of World in Hindi!



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