ईएमआई क्या है? EMI Kya Hai In Hindi


आजकल महंगाई बढ़ जाने के कारण लोगों को अपने आवश्यक काम करने के लिए लोन लेने की आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि लोगों के पास बड़े अमाउंट नहीं होते हैं। इसलिए वह घर बनवाने के लिए, स्मार्टफोन खरीदने के लिए, कार खरीदने के लिए या फिर बाइक खरीदने के लिए तथा अन्य दूसरे कामों के लिए लोन लेते हैं और लिए हुए लोन को वापस लौटाने के लिए वह किस्तों का सहारा लेते हैं। दोस्तों आजके इस पोस्ट में हम EMI के बारे में ही जानिंगे की आख़िर ईएमआई क्या है? EMI Kya Hai In Hindi?

ईएमआई क्या है? EMI Kya Hai In Hindi

इस प्रकार उन्हें एक बार में मोटा पैसा प्राप्त हो जाता है जिसे वह किसी मुख्य काम को निपटाने के लिए इस्तेमाल में लेते हैं और उस मोटे पैसे को वह किस्त के तौर पर वापस लौटाते हैं जिसे अंग्रेजी में ईएमआई कहा जाता है।


आपने भी कई जगह पर देखा होगा कि ईएमआई पर सामान ले लीजिए। आखिर यह ईएमआई है क्या और ईएमआई के फायदे और नुकसान क्या है? इन सभी बातों के बारे में अगर आपको जानना है तो हमारा यह आर्टिकल पूरा अवश्य पढ़ें जिसका टॉपिक है ईएमआई क्या है? EMI Kya Hai In Hindi?

ईएमआई क्या है?

जब आप कोई सामान लेते हैं और आप उस सामान की पूरी पेमेंट ना करके आधी पेमेंट ही करते हैं और बाकी की पेमेंट करने के लिए आप महीने में किस्त भरने का सिस्टम करते हैं, तो उसे ही ईएमआई कहा जाता है।

अगर इसे एक लाइन में समझा जाए तो किसी भी प्रकार के लोन की पेमेंट करने के लिए महीने में जो एक निश्चित रकम भरी जाती है, उसे ही ईएमआई कहा जाता है और सामान्य तौर पर ईएमआई तब किया जाता है जब व्यक्ति के पास किसी सामान को खरीदने के पूरे पैसे नहीं होते हैं अथवा वह उस सामान को खरीदने के लिए पूरे पैसे नहीं देना चाहता है परंतु सामान भी प्राप्त करना चाहता है।

ऐसी सिचुएशन में वह हाफ पेमेंट करके उस सामान को खरीद लेता है और सामान की बाकी पेमेंट को महीने में किस्त के तौर पर भरता है।

अगर इसे और भी सामान्य भाषा में समझाया जाए तो जब किसी बैंक के द्वारा आप लोन लेते हैं तो बैंक आपकी आवश्यकता के अनुसार पूरे पैसे एक साथ ही दे देती है और बदले में बैंक से लिए लोन को आपको ईएमआई के तौर पर भरना होता है। जैसे कि मान लीजिए कि आपने बैंक से 1 साल के लिए ₹1,00000 का लोन लिया है तो आप इस ₹1,00000 को एक साथ ही ना भर के महीने में थोड़ा-थोड़ा करके भरते हैं। इस प्रकार साल भर में बैंक को उसके ₹1,00000 प्राप्त हो जाते हैं।

ईएमआई का फुल फॉर्म क्या है?

EMI: EQUATED MONTHLY INSTALLMENT

ईएमआई: (समान मासिक किस्त)

इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट को हिंदी में मासिक किस्त कहा जाता है। ईएमआई का ऑप्शन आपको बैंक से लिए हुए लोन को भरने के लिए भी प्राप्त होता है, साथ ही किसी सामान को अगर आपने डाउन पेमेंट करके फाइनेंस पर लिया है, तो उसमें भी आपको ईएमआई के जरिए उस प्रोडक्ट की पेमेंट करने का ऑप्शन मिलता है।

सामान्य तौर पर आपको किस्त भरने का ऑप्शन 3 महीने से लेकर के 1 साल के लिए मिलता है। हालांकि लोन की रकम अगर अधिक होती है तो उसे भरने के लिए 5 साल से भी अधिक का समय दिया जाता है।

ईएमआई पर सामान लेने का फायदा यह है कि आपको सामान की पूरी कीमत को एक साथ नही देना पड़ता है बल्कि आपको उसकी डाउन पेमेंट भरनी पड़ती है और बाकी के पैसे को आपको किस्त के तौर पर जमा करते रहना पड़ता है। इससे आपके ऊपर ज्यादा लोड भी नहीं आता है और आपके पास सामान भी उपलब्ध हो जाता है।

ईएमआई का अन्य फुल फॉर्म क्या है?

जैसा कि आप जानते हैं कि एक ही शब्द के कई फुल फॉर्म होते हैं। इसलिए नीचे हमने आपके समक्ष ईएमआई के कुछ अन्य फुल फॉर्म की लिस्ट भी पेश की है। नीचे बताए गए ईएमआई के फुल फॉर्म है जिनका इस्तेमाल अलग-अलग जगह पर होता है।

EMI – Electromagnetic Interference.
EMI – Equated Monthly Installment.
EMI – Electric and Musical Instrument.
EMI – Electromagnetic Interference.
EMI – Equal Monthly Installment.
EMI – Equated Monthly Instalment.
EMI – Electronic Money Institution.

ईएमआई कैसे काम करती है?

ईएमआई कैसे काम करती है, अगर इसके बारे में बात की जाए तो इसे हम आपको एक उदाहरण देकर के समझाएंगे। उदाहरण के तौर पर आपने बैंक से 12 महीनों के लिए तकरीबन ₹1,00000 का लोन लिया और यह लोन बैंक ने आपको 10 परसेंट ब्याज पर दिया हुआ है।


इस प्रकार 12 महीने के लिए ₹1,00000 की मासिक किस्त ₹8792 होगी। इसमें से ₹8333 मूल रकम होगी और ₹458 ब्याज के पैसे होंगे। तो इस प्रकार व्यक्ति को ₹1,00000 को 12 महीने में चुकाना है और इसके लिए उसे हर महीने ₹8792 भरने पड़ेंगे, तब जाकर 12 महीने में बैंक को उसके ₹100000 भी प्राप्त हो जाएंगे साथ ही उस पर जो ब्याज होता है वह भी प्राप्त हो जाएगा। 

हालांकि हम आपको यहां पर यह भी बता दें कि हर बैंक में ब्याज की दर अलग होती है और गवर्नमेंट बैंक की तुलना में प्राइवेट बैंक में ब्याज की दर ज्यादा होती है। इसलिए अधिकतर लोग गवर्नमेंट बैंक से ही लोन लेने का प्रयास करते हैं।

ईएमआई कैसे तय होती है?

आप जितना बड़ा लोन लेंगे, आपकी ईएमआई उतनी ही ज्यादा होगी और बता दें कि इसका निर्धारण लोन की अमाउंट के ऊपर किया जाता है, साथ ही ईएमआई बनाते समय इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि लोन कितना बड़ा है और लोन को चुकाने के लिए कितना समय दिया जा रहा है।

अगर किसी व्यक्ति ने लोन लिया है और उसे चुकाने की अवधि कम है तो उसे कम ईएमआई भरनी पड़ेगी, साथ ही उस पर ब्याज भी कम भरना पड़ेगा और अगर किसी व्यक्ति ने अधिक पैसे का लोन लिया है तो उसे महीने में अधिक ईएमआई भरनी पड़ेगी।

साथ ही अधिक ब्याज भी भरना पड़ेगा क्योंकि कम अवधि के लोन में ईएमआई कम होती है क्योंकि लोन के पैसे कम होते हैं और अधिक अवधि के लोन में ज्यादा होती है क्योंकि लोन के पैसे भी ज्यादा होते हैं। कुछ लोन पर आपको सिर्फ ईएमआई ही भरनी होती है, ब्याज नहीं भरना पड़ता और कुछ लोन पर आपको ईएमआई के साथ-साथ ब्याज भी भरना पड़ता है।


EMI के फायदे क्या है?

इस बात से तो आप परिचित ही होंगे कि किसी भी चीज के दो पक्ष होते हैं, उसी प्रकार EMI के भी दो पक्ष है। इसके कुछ ना कुछ एडवांटेज भी हैं तो कुछ ना कुछ इस साइड इफेक्ट भी है। पहले आइए जानते हैं कि EMI के एडवांटेज क्या है अथवा EMI के बेनिफिट क्या है।

अगर आपको किसी सामान को खरीदना आवश्यक हो गया है तो आप उसे EMI के जरिए बड़ी ही आसानी से ऑफलाइन या फिर ऑनलाइन खरीद सकते हैं।

अगर आपके पास किसी सामान को खरीदने के लिए पूरे पैसे नहीं है तो आप थोड़ी सी डाउन पेमेंट भरकर उस सामान को किस्त के तौर पर खरीद सकते हैं और मासिक किस्तों में उसकी पेमेंट को कर सकते हैं। कुछ सामान पर आपको बिना ब्याज के भी ईएमआई का ऑफर प्राप्त होता है। इस प्रकार अगर आप उस सामान को लेते हैं तो आपको सिर्फ उसकी किस्त हीं भरनी पड़ती है ना कि उस सामान की कीमत पर ब्याज भरना पड़ता है।

किस्त पर लिए गए सामान की पेमेंट जब आप समय-समय पर करते हैं, तो इससे आपका क्रेडिट स्कोर भी सही होता है। इस प्रकार जिन लोगों का क्रेडिट स्कोर खराब है वह अपने क्रेडिट स्कोर को सुधारने के लिए किस्तों पर समान ले करके उसकी टाइम पर पेमेंट करें। ऐसा करने से उनका क्रेडिट स्कोर सही हो जाएगा।

अगर आप किसी ट्रस्टेबल कंपनी से किस्त पर प्रोडक्ट लेते हैं तो आपके साथ धोखाधड़ी होने की संभावना बहुत ही कम होती है।

किस्त पर सामान लेने की वजह से आपके ऊपर ज्यादा प्रेशर नहीं आता है ना ही आपको एक साथ कहीं पर भारी पैसे लगाने पड़ते हैं। आप डाउन पेमेंट भर के सामान को ले सकते हैं।

EMI के नुकसान क्या है?

आपने ऊपर ईएमआई के बेनिफिट के बारे में जानकारी हासिल कर ली है और अच्छे से यह जान लिया है कि EMI के फायदे क्या हैं। आइए अब आगे जानते हैं कि ईएमआई के साइड इफेक्ट क्या है अथवा ईएमआई के डिसएडवांटेज क्या है।

इसकी वजह से कभी-कभी कुछ लोग आवश्यकता से अधिक महंगी प्रोडक्ट को खरीद लेते हैं और इसके कारण उस प्रोडक्ट की किस्त को भरने में काफी समस्या होती है।

अगर लिए गए प्रोडक्ट की किस्त को समय पर नहीं भरा जाता है तो इसकी वजह से ओवरड्यू चार्ज अथवा लेट फीस लगने लगती है, जिसकी वजह से प्रोडक्ट की कीमत से हमें थोड़े अधिक पैसे भरने पड़ते हैं। अगर व्यक्ति ने किसी भरोसेमंद कंपनी से किस्त पर सामान नहीं लिया है तो उसे धोखाधड़ी का सामना भी करना पड़ सकता है।

समय पर अगर व्यक्ति किस्त नहीं भरता है तो इसकी वजह से व्यक्ति का क्रेडिट स्कोर भी खराब होने लगता है। अगर व्यक्ति ने किसी लोकल दुकान से सामान लिया है और वह समय पर किस्त नहीं भर पा रहा है तो उसे दुकानदार के अभद्र व्यवहार का सामना भी करना पड़ता है।

जब कभी भी आप किस्त पर सामान ले तो ईएमआई की पॉलिसी को पूरा अवश्य पढ़ें, वरना आपको नुकसान हो सकता है।

EMI कैसे करते है?

अगर आपको सामान लेना है वह भी किस्त पर तो इसके लिए आपको सबसे पहले अपने घर के आस-पास में स्थित ऐसी दुकान का एड्रेस पता करना है, जो दुकान वाला किस्तों पर सामान देता हो।

पता चल जाने के पश्चात आपको अपने बैंक की पासबुक, चेक बुक, आधार कार्ड और आवश्यक डॉक्यूमेंट को लेकर के उस दुकान में जाना है और दुकानदार के साथ आपको किस्त पर सामान लेने की बातचीत करनी है। अगर दुकानदार किस्त पर सामान देने के लिए मान जाता है तो उसके बाद वह आपको एक फॉर्म देता है जिसके अंदर आपको सिग्नेचर करनी पड़ती है और कुछ आवश्यक प्रक्रिया आपको करनी पड़ती है।

इस प्रकार आपको किस्तों पर सामान मिल जाता है, जिसकी पेमेंट आपको महीने में करनी होती है। अक्सर दुकान में दुकानदार आपको यह भी ऑप्शन देता है कि आप महीने में कितने रुपए की किस्त भरने के इच्छुक है।

EMI कैसे भरे?

अक्सर काफी लोग इंटरनेट पर यह सर्च करते हैं कि EMI कहां भरी जाती है और कैसे भरी जाती है, तो हम आपको बता दें कि अगर आपने ऑफलाइन दुकान से किस्त पर सामान लिया है तो सामान लेने के दरमियान वह आपसे बैंक की जो चेक बुक मांगते हैं उसी के आधार पर वह ऑटोमेटिक उस चेक को बैंक में लगाते हैं।

इस प्रकार आपके बैंक अकाउंट से किस्त कट जाती है और अगर आपके बैंक अकाउंट में पर्याप्त पैसे नहीं होते हैं तो आप को पेनल्टी भी देनी पड़ती है और अगर आप लगातार अपना चेक बाउंस करवाते हैं तो दुकानदार आपको दिया हुआ प्रोडक्ट वापस भी ले सकता है।

इसीलिए यह आवश्यक होता है कि आपने जिस तारीख का चेक दिया है उस तारीख को अपने बैंक अकाउंट में पैसे अवश्य रखें। इसके अलावा अगर आपने ऑनलाइन किसी स्टोर से किस्तों पर सामान खरीदा है तो उसकी पूरी पेमेंट आपके कार्ड से कट जाती है और फिर आपको अपने कार्ड में किस्त के तौर पर पेमेंट भरनी होती है।

इस आर्टिकल में हमने आपको “EMI क्या है” इसके बारे में जानकारी दी, साथ ही हमने आपको “EMI का फुल फॉर्म क्या है” और “EMI के साइड इफेक्ट क्या है” अथवा “ईएमआई के एडवांटेज क्या है” इसके बारे में भी बताया और आपने आर्टिकल में यह भी जाना कि “EMI कैसे करते हैं” अथवा “ईएमआई कैसे भरी जाती है” ईएमआई क्या है? EMI Kya Hai In Hindi?

उम्मीद है की ईएमआई क्या है? EMI Kya Hai In Hindi! इस बारे में आपको पूरी जानकारी मिल गयी होगी।


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