कंप्यूटर की पीढियां – Generation Of Computer In Hindi


आज हम सब इस लेख के माध्यम से जानेंगे कि जनरेशन ऑफ कंप्यूटर क्या है? कंप्यूटर की पीढियां – Generation Of Computer In Hindi! कंप्यूटर की किस – किस पीढ़ी में क्या क्या बदलाव आया? और साथ ही साथ उसकी कमियां क्या है? और उसकी विशेषता क्या है? आज इसी विषय पर विस्तृत से चर्चा करेंगे।

कंप्यूटर की पीढियां - Generation Of Computer In Hindi

क्योंकि बदलते समय के साथ आज कंप्यूटर का उपयोग और कंप्यूटर के ढांचे में भी बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। आज कंप्यूटर आकार में पहले से अधिक छोटे और प्रदर्शन के मामले में बेहतर नजर आते हैं यह सब समय के साथ हुआ है तो आइए जानते हैं कंप्यूटर की किस जनरेशन (Generation Of Computer In Hindi) में क्या बदलाव आया?


तो चलिए जानते हैं कंप्यूटर की पीढियां – Generation Of Computer In Hindi! के बारे में।

Contents

कम्प्यूटर क्या है? इसकी फुल फॉर्म क्या है?

कंप्यूटर एक ऐसा एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो यूजर द्वारा दिए गए कमांड को प्रोसेस करके उपयुक्त जानकारी को रिजल्ट के रूप में प्रदान करती है। यदि अन्य शब्दों में कहा जाए तो कंप्यूटर इनपुट को प्रोसेस करके आउटपुट में बदलती है।


  • C- commonly
  • O- operated
  • M- machine
  • P- particular
  • U- used for
  • T- training
  • E- education
  • R- research

तो दोस्तों चलिए अब जानते हैं कंप्यूटर की पीढियां – Generation Of Computer In Hindi! के बारे में।

कंप्यूटर की पीढियां – Generation Of Computer In Hindi

जनरेशन ऑफ कंप्यूटर का अर्थ होता है कंप्यूटर की पीढ़ी अर्थात समय और परिस्थिति के अनुसार सॉफ्टवेयर में अपडेशन और उपयोग के लिए सहज। इसी सब बात को ध्यान में रखते हुए जनरेशन ऑफ कंप्यूटर की अवधारणा विकसित हुई।

पहली पीढ़ी के कम्प्यूटर (1946-1956):

पहली पीढ़ी के कंप्यूटर का समय काल 1946 से लेकर 1956 तक माना जाता है। प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर का अविष्कार जेपी एकर्ट तथा जेडब्ल्यू मोश्ले ने किया था इन्होंने पहली पीढ़ी के कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इंटीग्रेटर कैलकुलेटर को विकसित किया था।

पहली पीढ़ी की कम्प्यूटर की विशेषता क्या है?

  • पहली पीढ़ी का कंप्यूटर वेक्यूम ट्यूब के सिद्धांत पर काम करता था अर्थात इसमें हजारों वेक्यूम ट्यूब का प्रयोग होता था तब जाकर एक कंप्यूटर काम कर पाता था
  • पहली पीढ़ी के कंप्यूटर के डाटा स्टोरेज के लिए मैग्नेटिक ड्रम का यूज़ होता था।
  • पहली पीढ़ी के कंप्यूटर के डाटा को सुरक्षित रखने के लिए पंच कार्ड का यूज़ होता था । जिससे कंप्यूटर का डाटा लीक ना हो।
  • पहली पीढ़ी के इस कंप्यूटर में मशीनी भाषा का यूज़ होता था जिसे असेंबल भाषा कहते थे इसे जीरो तथा एक से कूटबद्ध किया जाता था।

पहली पीढ़ी के कम्प्यूटर की कमियां क्या थी?

  • पहली पीढ़ी के कंप्यूटर का आकार एक कमरे के बराबर होता था क्योंकि इसमें हजारों वेक्यूम ट्यूब का प्रयोग होने के कारण यह स्थान बहुत घेरता था।
  • पहली पीढ़ी के कंप्यूटर में कंप्यूटर उर्जा की खपत ज्यादा होती थी जिसके फलस्वरूप इसमें लागत ज्यादा आती थी और रिजल्ट अनुपात में कम था।
  • पहली पीढ़ी के कंप्यूटर में एक कमी यह थी इसकी स्पीड बहुत स्लो थी जिस के नाते यह परिणाम देर से देता था।
  • पहली जेनरेशन के कंप्यूटर के यूज़ के लिए कई ऑपरेटर की जरूरत होती है थी क्योंकि इसमें हजारों वैक्यूम ट्यूब थे इन सब की देखरेख के लिए कई ऑपरेटर की आवश्यकता पड़ती थी।
  • पहली पीढ़ी के कंप्यूटर बहुत सेंसिटिव और कम विश्वसनीय होते थे।
  • पहली पीढ़ी के कंप्यूटर को ठंडा रखने के लिए एसी का यूज करना अति आवश्यक था अन्यथा इसके खराब होने के चांस बढ़ जाते थे।

पहली पीढ़ी के कौन – कौन से कम्प्यूटर है?

(a) universal automatic computer 

(b) Univac -1


(c) ibm-701

(d) ibm-650

दूसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर (1956-1964)

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में अपना अहम योगदान विलियम शोकले  ने दिया था। और साथ ही इस कंप्यूटर के विकास में उनकी टीम का भी अमूल्य योगदान था। द्वितीय पीढ़ी में जो परिवर्तन हुआ वह परिवर्तन काबिले तारीफ था, क्योंकि अब वेक्यूम ट्यूब की जगह ट्रांजिस्टर का यूज होने लगा जिसके परिणाम स्वरूप कंप्यूटर का आकार कम हो गया साथ ही ऊर्जा की खपत भी कम हो गई और साथ ही साथ इसका रिजल्ट में भी सुधार हुआ।

दूसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर की विशेषता क्या है?

  • दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में अब वेक्यूम ट्यूब की जगह ट्रांजिस्टर का यूज होने लगा जिसके परिणाम स्वरूप इसकी लागत में कमी आई।
  • दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में ट्रांजिस्टर के यूज़ से इसका आकार भी कम हो गया जिसके नाते एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया सकता था।
  • दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में प्रोसेसिंग में वृद्धि हो गई जिससे कंप्यूटर की स्पीड बढ़ गई।
  • दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में काम करने के लिए  एक से दो व्यक्ति पर्याप्त थे।
  • दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में जो रिजल्ट आता था वह पहले कंप्यूटर की अपेक्षा रिजल्ट सही था।
  • दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में फोर्ट्रन ,कोबोल, स्नोबॉल ,ऐल्गॉल इत्यादि भाषा का उपयोग होने लगा जब की प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर में असेंबली भाषा का यूज़ होता था।
  • दूसरी पीढ़ी कंप्यूटर में डाटा स्टोरेज के लिए पंच कार्ड के साथ-साथ मैग्नेटिक टैप  डिस्क का भी यूज होने लगा।
  • दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर के डाटा को संग्रहित रखने के लिए मैग्नेटिक कोर मेमोरी का यूज होने लगा।

दूसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर की कमियां क्या है?

  • दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने में परेशानी होती थी जो सबसे बड़ी समस्या थी।
  • दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर का रखरखाव भी कठिन था।
  • इस पीढ़ी के कंप्यूटर की सबसे बड़ी कमी थी  इसकी लैंग्वेज थी, जो उच्च स्तर की  थी। अतः इसको आसानी से कोई नहीं समझ पाता था इसके लिए कोई विशेष व्यक्ति ही इसकी प्रोग्रामिंग कर सकता था जो इसकी लैंग्वेज को समझ सकता था।
  • दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर को ठंडा रखने के लिए एसी का यूज़ होता था जिससे कंप्यूटर सही ढंग से और सही तरीके से काम कर सके और काम में कोई रुकावट ना आ सके।

दूसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर कौन – कौन से है?

  • Ibm-7094
  • Univac1108
  • Honey well 400
  • Cdc 1604
  • Cdc 3600

तीसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर (1964-1971)

तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर को लाने का श्रेय जैक किर्बी को जाता है क्योंकि जय किर्बी ने ही 1958 में इंटीग्रेटेड सर्किट का अविष्कार किया था। इंटीग्रेटेड सर्किट के आने से कंप्यूटर की दुनिया में हाहाकार मच गया। दूसरे शब्दों में समझो तो चमत्कार हो गया क्योंकि इसके आने से कंप्यूटर को एक नई दिशा मिल सकी।

तीसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर की विशेषता क्या है?

  • तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में अब ट्रांजिस्टर के स्थान पर इंटीग्रेटेड सर्किट चिपका यूज होने लगा जिससे अब परिणाम अनुकूल होता था।
  • तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में पहली और दूसरी पीढ़ी के अपेक्षा प्रोसेसर फास्ट हो गया जिससे रिजल्ट कुछ ही सेकंड में आ जाता था।।
  • तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में लैंग्वेज fortron यूज होता था अब यह लैंग्वेज कंप्यूटर के लिए सबसे हाई लैंग्वेज बन गई।
  • तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में रखरखाव बहुत आसान हो गया क्योंकि अब इसको एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता था ।अब आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता था।
  • तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग करते थे जो इसके आंतरिक कार्यों को ऑटोमेटिक ही ठीक कर देते थे।
  • तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसका आकार काफी छोटा हो गया जब आकार छोटा हो गया तब यह देखने में सुंदर भी लगता था।
  • इस पीढ़ी के कंप्यूटर की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इस का जो रिजल्ट आता था वह बेहद भरोसेमंद था।

तीसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर की कमियां क्या थी?

  • तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर की सबसे बड़ी कमी यह थी कि इस को ठंडा रखने के लिए एसी की आवश्यकता होती थी।
  • तीसरी पीढ़ी का कंप्यूटर सिर्फ विशेष उद्देश्य को ही पूरा करता था जैसे कि किसी खगोलीय पिंड से किसी ग्रह की दूरी को मापना और साथ ही साथ किसी जटिल मैथ के सवाल को सॉल्व करना, चूंकि जनसाधारण के लिए अभी उपलब्ध नहीं था।
  • तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर की सबसे बड़ी कमी यह थी कि जो इसमें इंटीग्रेटेड सर्किट चिप लगता था इसका निर्माण  तकनीक बहुत जटिल था।
  • तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर की कमी एक यह थी  की इसमें जो भाषा का यूज़ होता था वह भाषा काफी जटिल थी। सामान्य व्यक्ति नहीं प्रोसेस कर सकता था और ना ही प्रोग्रामिंग कर सकता था इसके लिए कोई विशेष व्यक्ति ही प्रोग्रामिंग कर सकता था।

तीसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर कौन – कौन से है?

  • Pdp1
  • Pdp 5
  • Pdp8
  • ilc2903
  • ilc1900
  • Univac1108

चौथी पीढ़ी के कम्प्यूटर (1971-85):

चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर के आगमन से दुनिया में समझो क्रांति सी आ गई है। क्योंकि इसके आगमन से कंप्यूटर को एक नया आयाम मिला। क्योंकि यहीं से एक कंप्यूटर अब पर्सनल कंप्यूटर बन गया, इसको आसानी से अपने हाथ में पकड़कर कहीं भी ले जाया जा सकता था। अब इसमें कोई समस्या नहीं थी।

चौथी पीढ़ी के कम्प्यूटर की विशेषता क्या है?

  • चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि अब इंटीग्रेटेड सर्किट चिप के स्थान पर वेरी लार्ज स्केल इंटीग्रेटेड चिप का यूज होने लगा जिसे माइक्रोप्रोसेसर कहा जाता है माइक्रोप्रोसेसर 30,000 इंटीग्रेटेड सर्किट चिपका कंपोनेंट्स था।
  • चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर में ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए अब ग्राफिकल यूजर इंटरफेस का यूज होने लगा। जो अंकगणितीय और लाजिकल कार्य करने के लिए बहुत ही आसान था।
  • माइक्रोप्रोसेसर के आने से कंप्यूटर को माइक्रो कंप्यूटर का रूप मिला।
  • वेरी लार्ज स्केल इंटीग्रेटेड चिप का यूज़ होने के नाते चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर का आकार बहुत छोटा हो गया।
  • अब मैग्नेटिक कोर के स्थान पर सेमीकंडक्टर मेमोरी का यूज होने लगा।
  • ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ-साथ एप्लीकेशन ,प्रोग्राम, सॉफ्टवेयर का यूज़ वर्ड प्रोसेसिंग ,स्प्रेडशीट, डाटाबेस आदि का यूज होने लगा।
  • चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसकी कीमत कम थी, कीमत कम होने के नाते अब यह घर घर में उपयोग होने लगा।
  • चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि यह एक पर्सनल कंप्यूटर बन गया था। पर्सनल कंप्यूटर के यूज़ के लिए माउस का यूज होने लगा पहला माउसआईबीएम कंपनी ने विकसित किया था।
  • चौथी पीढ़ी कंप्यूटर की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसकी लैंग्वेज में अब परिवर्तन हो गया, जो तीसरी पीढ़ी में फोर्ट्रन लैंग्वेज पर काम करता था लेकिन अब चौथी पीढ़ी में कि c,c++, जावा, विजुअल बेसिक लैंग्वेज पर काम करने लगा।

चौथी पीढ़ी के कम्प्यूटर की कमियां क्या है?

  • चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर की सबसे बड़ी कमी यह थी कि इसमें माइक्रोप्रोसेसर चिप खराब होने की अधिक संभावना होती थी।
  • नेटवर्क का विकास होने से संक्रमण होने लगा।
  • अब इसको चलाने के लिए इंटरनेट की आवश्यकता होती थी।
  • मल्टीमीडिया जैसे काम होने से अधिक मेमोरी की आवश्यकता होती थी।

चौथी पीढ़ी के कौन – कौन से कम्प्यूटर है?

  • Ibm4341
  • Dec10
  • Stack 1000
  • Zx spectrum
  • Pdp11
  • Cray-1(super computer)
  • Cray-x-mp(super computer)

पांचवी पीढ़ी के कम्प्यूटर (1988 से वर्तमान तक)

पांचवी पीढ़ी का कंप्यूटर चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर की ही ट्रांसफॉरमेशन रूप है, क्योंकि पहले वेरी लार्ज स्केल इंटीग्रेटेड सर्किट का यूज़ होता था । लेकिन अब इसके स्थान पर अल्ट्रा लार्ज स्केल इंटीग्रेटेड सर्किट का यूज होने लगा। इसी के  नाते पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर में अनवरत नवाचार हुआ।

पांचवी पीढ़ी के कम्प्यूटर की विशेषता क्या है?

  • पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर के सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि अब इसमें अल्ट्रा लार्ज स्केल इंटीग्रेटेड सर्किट चिप का यूज होने लगा।
  • अल्ट्रा लार्ज स्केल इंटीग्रेटेड सर्किट चिपकी उपयोग होने के नाते इसके माइक्रोप्रोसेसर में वृद्धि हो गई जिसके परिणाम स्वरुप या कंप्यूटर सहज ढंग से काम करने लगा।
  • पांचवी पीढ़ी का कंप्यूटर तीसरी पीढ़ी की तरह विशेष कामों के लिए नहीं बना था बल्कि अब यह एकाउंटिंग, इंजीनियरिंग ,रिसर्च, इडिफेंस आदि में भी सहायक है।
  • पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर c, c++, python और विजुअल बेसिक लैंग्वेज पर काम करने लगा।
  • अब पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर को आप कहीं भी अपने हाथ में उठाकर आसानी से ले जा सकते हैं।
  • पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर में एनर्जी कम कंज्यूम होती है और यह heat भी कम होता है आप इस आप कई घंटे काम कर सकते हैं।
  • पांचवी पीढ़ी का कंप्यूटर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम करने लगा।
  • पांचवी पीढ़ी से कंप्यूटर की स्टोरेज क्षमता बहुत ज्यादा हो गई।
  • पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर ने मल्टीमीडिया के क्षेत्र में साउंड, इमेज ,ग्राफ में अहम योगदान दिया।

पांचवी पीढ़ी के कम्प्यूटर की कमियां क्या है?

  • पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर के युग से मानव का ब्रेन बहुत ही सुस्त और कमजोर हो गया है।
  • मानव पूरी तरह कंप्यूटर के ऊपर निर्भर हो गया है। अब इस समय वहां अपने स्व – विवेक का प्रयोग नहीं करता है कोई भी निर्णय लेने के लिए।
  • पांचवी पीढ़ी कंप्यूटर के आगमन से रिश्तो में दूरियां बढ़ी है जिसके परिणाम स्वरूप संयुक्त परिवार का विभाजन हुआ है।

पांचवी पीढ़ी के कम्प्यूटर कौन – कौन है?

  • Desktop
  • Laptop
  • Notebook
  • Chromebook
  • Param (super computer)

तो साथियों हमें उम्मीद है जनरेशन ऑफ कंप्यूटर (कंप्यूटर की पीढियां – Generation Of Computer In Hindi) से संबंधित यह आर्टिकल आपको अच्छा लगा होगा। यदि आपको यह आर्टिकल अच्छा लगता है तो कृपया इस आर्टिकल को अपने दोस्तों या अपने रिश्तेदारों को जरुर शेयर करिए।

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