हाई लेवल लैंग्वेज क्या है? (High Level Language in Hindi)

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हाई लेवल लैंग्वेज क्या है? दोस्तों software development हो, App development हो या फिर website designing, कोई भी काम करने के लिए प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखने की जरूरत पड़ती है। लेकिन ज्यादातर जो प्रोग्रामिंग लैंग्वेज होते हैं वो काफी कठिन होते हैं, जिसकी वजह से लोग उसे सीख नहीं पाते हैं। पर High level programming language ने लोगों के इस परेशानी को भी हल कर दिया है।

हाई लेवल लैंग्वेज क्या है? (High Level Language in Hindi)


आज के समय में High level programming language सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि इस लैंग्वेज में सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन के डेवलपमेंट को काफी आसान बना दिया है।

इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के द्वारा प्रोग्रामर ऐसे Code लिख सकते हैं जिसे इंसानों के द्वारा read, write और maintain करना आसान हो। हाई लेवल लैंग्वेज क्या है के इस आर्टिकल में मैंने आपको इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के बारे में विस्तार पूर्वक बताया है। अगर आप नई जनरेशन की नई प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को सीख कर अपनी skills को बेहतर बनाना चाहते हैं। तो इस आर्टिकल में बताई गई हर बात को ध्यान से पढ़िएगा। 

हाई लेवल लैंग्वेज क्या है? (What is High Level Language in Hindi)

हाई लेवल लैंग्वेज C, FORTRAN, Pascal की तरह एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज होता है, जिससे प्रोग्रामर कंप्यूटर प्रोग्राम लिखता है। हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज से काफी आसानी से कंप्यूटर प्रोग्राम लिखे जा सकते हैं क्योंकि ये programming language, human language के जैसा ही होता है। ‌


इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में एक निर्धारित syntax होता है। वैसे तो सभी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज दिखने में काफी कॉम्प्लिकेटेड होते हैं और नार्मल लोगों की समझ में भी नहीं आते हैं। लेकिन high level programming language को कोई भी पढ़ कर समझ सकता है। 

कंप्यूटर के codes लिखने के लिए प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल सबसे पहले 1950 में किया गया था। उसके बाद से आज तक पूरी दुनिया में लोग प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल कर रहे हैं। हाई लेवल लैंग्वेज का उपयोग वेब डिजाइनर और सॉफ्टवेयर डेवलपर एप्लीकेशन के प्रोग्राम लिखने के लिए use करते हैं। 

आप अपने मोबाइल में जिस भी तरह के एप्लीकेशन का इस्तेमाल करते हैं। उस एप्लीकेशन को हाई लेवल लैंग्वेज के द्वारा ही programming code लिख कर बनाया जाता है क्योंकि हाई लेवल लैंग्वेज को आसानी से प्रोग्राम और याद भी किया जा सकता हैं। 


क्योंकि हाई लेवल लैंग्वेज में बहुत ज्यादा ह्यूमन लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता है इसी वजह से कंप्यूटर इस भाषा को समझ नहीं पाता है। और जैसा की आपको पता है कंप्यूटर सिर्फ मशीन लैंग्वेज या low level language समझने के ही काबिल है। 

मशीन लैंग्वेज 0 और 1 के फॉर्म में होती है जिसे कंप्यूटर बिना ट्रांसलेट कर समझ जाता है। जबकि हाई लेवल लैंग्वेज में alphabet का अधिक इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए कंप्यूटर इस लैंग्वेज को नहीं समझ पाता है। 

जिस वजह से फिर हाई लेवल लैंग्वेज में कोड लिख कर उसे 0 और 1 के फॉर्म में बदला जाता है। अलग-अलग हाई लेवल लैंग्वेज में अलग-अलग तरह के syntax का इस्तेमाल किया जाता है। हाई लेवल लैंग्वेज में जो प्रोग्राम लिखे जाते हैं उसे चलाने के लिए Compiler का इस्तेमाल किया जाता है।


जो high level language में लिखे हुए प्रोग्राम को low level programming language और machine level language में convert कर देता है। ताकि कंप्यूटर को ये लैंग्वेज समझ आ जाए और CPU प्रोग्राम को execute कर सकें। 

वैसे तो ज्यादातर high level scripting language में लिखे हुए प्रोग्राम को रन करने के लिए compiler की जरूरत होती है। लेकिन PHP व Perl जैसे लैंग्वेज में लिखे प्रोग्राम को run करने के लिए interpreter की जरूरत होती है। ये interpreter, high level language में लिखे हुए कोड को low level language में चेंज कर देता हैं। 

ऐसा करने से कंप्यूटर के लिए हाई लेवल लैंग्वेज में समझना आसान हो जाता है। ‌ आज के समय में हाई लेवल लैंग्वेज प्रोग्रामिंग के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले भाषाओं में से एक है। 


क्योंकि इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में गलतियों को ढूंढना और फिर गलती को ठीक करना काफी आसान होता है। यही कारण है की ज्यादातर software developers हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के अंदर बहुत सारी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज आती है जिसके बारे में मैंने आपको नीचे एक-एक करके बताया है।

हाई लेवल लैंग्वेज कितने प्रकार के होते हैं?

पहले के समय में कंप्यूटर में low level programming language का इस्तेमाल किया जाता था। जो की कंप्यूटर की भाषा यानी कि binary language में होते थे। लेकिन इस तरह की प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के साथ programme लिखना बहुत ही ज्यादा मुश्किल होता था। 

इसीलिए जैसे जैसे समय बढ़ता गया, वैसे वैसे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को आसान बनाने के लिए नए रास्ते ढूंढे गए। और तब जाकर High level programming language बना। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में प्रोग्रामर के लिए प्रोग्रामिंग करना आसान बना दिया गया और अब तो सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन devlop करने के लिए इसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल हो रहा है। 

ऐसा नहीं है की हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज एकमात्र एक लैंग्वेज है। बल्कि अब तक कई प्रोग्रामिंग लैंग्वेज बन चुके हैं और हर हाई लेवल लैंग्वेज में अलग तरह के syntax का इस्तेमाल किया जाता है। यही कारण है की हर हाई लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल अलग-अलग कामों में होता है। हाई लेवल लैंग्वेज कई प्रकार के होते हैं, जिसके बारे में मैंने नीचे आपको एक एक करके बताया है – 

  1. Python

पाइथन सारे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाला हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है। ये प्रोग्रामिंग लैंग्वेज object oriented programming language कैटेगरी में आता है। आज कल जितने भी सॉफ्टवेयर या फिर एप्लीकेशन बनाए जा रहे हैं। 

उन्हें बनाने के लिए पाइथन का ही इस्तेमाल किया जाता है। ‌इतना ही नहीं machine learning, artificial intelligence, data science, data analysis, web development जैसे new generation technology में भी इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जा रहा है। 

इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में अलग-अलग तरह की libraries का use किया जाता है। जिस वजह से programmers के लिए इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज पर काम करना आसान हो जाता है।

  1. Java

अगर आप कंप्यूटर साइंस या फिर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में रूचि लेते हैं। तो आप ने JAVA का नाम भी जरूर सुना होगा क्योंकि ये भी एक पॉपुलर high level programming language है। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को 1995 में Sun Micro System ने बनाया था। 

पाइथन की तरह Java भी object oriented programming language की श्रेणी में आता है। प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को आमतौर पर general purpose language भी कहा जाता है क्योंकि इसका इस्तेमाल लगभग सभी सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन बनाने में किया जाता है। 

Java एक platform independent language हैं। जिसका मतलब ये है की इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में जो कोड लिखा जाता है। वो किसी एक machine के ऊपर निर्भर नहीं करता है बल्कि ये code किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम में चल सकता है। 

  1. JavaScript

इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का नाम पढ़कर अगर आप ये सोच रहे हैं की इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के बारे में मैंने आपको अभी बताया है तो ऐसा नहीं है। क्योंकि Java और JavaScript दोनों अलग-अलग लैंग्वेज है। 

javaScript एक तरह की scripting programming language हैं। जिसका इस्तेमाल web browser में HTML और CSS के साथ प्रोग्राम लिखने में किया जाता है। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल वेबसाइट डिजाइनिंग में खास तौर पर किया जाता है। 

Website में functionalities Add करने के लिए इस तरह के लिए JavaScript का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के कुछ frameworks होते हैं, जिसके आधार पर यह काम करता है। जैसे Node Js, Vue Js, React Js, Angular Js इत्यादि।

  1. C#

C# भी पाइथन और जावा की तरह काफी पॉपुलर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज हैं। C# को C sharp के नाम से भी पुकारा जाता है। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को माइक्रोसॉफ्ट के द्वारा साल 2002 में बनाया गया था। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को सर्वप्रथम Microsoft. Net framework के साथ लांच किया गया था। 

ये सबसे अच्छे हाई प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में से एक माना जाता है। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में जिस तरह के syntax का इस्तेमाल किया जाता है वो बहुत हद तक C से मिलते जुलते हैं। बाकी के प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की तरह ये भी object oriented language की श्रेणी में आता है। 

  1. C++

C++, high level programming language की सबसे अच्छे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में से एक है। ये C programming language का updated version हैं। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में आपको C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की सारी खूबी देखने को मिलेगी। लेकिन ये प्रोग्रामिंग लैंग्वेज object oriented programming को सपोर्ट करता है। 

जो इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को और भी खास बनाता है। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की सबसे अच्छी बात ये है की ये हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की तरह तो काम करता ही है। पर साथ ही ये लो लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के तरह भी काम कर सकता है।

इस तरह के प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल software और game devlop करने के लिए किया जाता है। 

  1. Visual Basic

Microsoft corporation के द्वारा बनाया गया ये  एक high level language है। आप नाम से ही समझ गए होंगे की ये BASIC प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का ही updated version हैं। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल मुख्य रूप से GUI Apps और software बनाने के लिए किया जाता है। ये भी object oriented programming language की श्रेणी में आता है। 

  1. PHP

PHP का फुल फॉर्म Hypertext Pre-processor होता है। ये एक scripting programming language होती है जिसका इस्तेमाल वेब डेवलपमेंट के लिए किया जाता है। डेवलपर्स वेबसाइट बनाते समय web server में इसी लैंग्वेज का इस्तेमाल करते हैं। 

इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को सर्वप्रथम 1994 में Rasmus Lerdorf ने बनाया था। अब तक इस लैंग्वेज में बहुत से सुधार किए जा चुके हैं। Web browser में PHP के programme का आउटपुट HTML page के रूप में दिखाई देता हैं। 

  1. Ruby

1990 में जापान में इस object oriented, high level programming language को बनाया गया था। object oriented programming language होने के साथ-साथ ये एक scripting language भी है। 

  1. COBOL

अब तक हमने जितने भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के बारे में बात किया है उनके नाम आपको काफी इंटरेस्टिंग लग रहे होंगे। ‌पर इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का नाम सुनकर आपको थोड़ा अजीब लगा होगा। क्योंकि इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का नाम थोड़ा अजीब हैं। 

COBOL का फुल फॉर्म Common Business Oriented Language होता है। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को साल 1959 में CODASYL के द्वारा लांच किया गया था। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को बिजनेस से संबंधित प्रॉब्लम का समाधान निकालने के लिए बनाया गया था। इस तरह के प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

  1. Perl 

High level programming language में आने वाला ये काफी इंटरेस्टिंग प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल मुख्य रूप से GUI applications और web development में किया जाता है। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को Cross platform programming भी कहा जाता है। 

इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में जो code लिखे होते हैं उसे run करने के लिए interpreter की जरूरत पड़ती है। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में जो प्रोग्राम लिखे जाते हैं उसे Perl script भी कहा जाता है। 

  1. Pascal

High level programming language में आने वाले सभी लैंग्वेज में Pascal काफी ज्यादा पॉपुलर है। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को 1971 में professor Nicklaus Writh के द्वारा स्विजरलैंड में बनाया गया था। 

इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का नाम Pascal, Blaise Pascal के नाम पर रखा गया है। प्रोग्रामिंग के बेसिक कॉन्सेप्ट सिखाने के लिए इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता है। ये भी एक हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के अंदर आता है। 

क्योंकि इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को पढ़ना, समझना और सीखना आसान होता है। इसीलिए ये लैंग्वेज high level programming language के अंदर आता है। क्योंकि इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के syntax में alphabets का इस्तेमाल किया जाता है। जिसकी वजह से इसे लोगों के लिए पढ़ना आसान होता है। 

क्योंकि इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल मुख्य रूप से दूसरों को प्रोग्राम सिखाने के लिए किया जाता है। इसलिए इस लैंग्वेज को educational language के नाम से भी जाना जाता है। 

जैसा की आपने ऊपर देखा बहुत सारे high level programming language हैं। लेकिन इनमें से python, c, C++, Java सबसे ज्यादा पॉपुलर है। 

हाई लेवल लैंग्वेज की विशेषता क्या है? 

  • लो लेवल लैंग्वेज की तुलना में हाई लेवल लैंग्वेज को लोग आसानी से पढ़ कर interpret कर सकते हैं। 
  • हाई लेवल लैंग्वेज को समझना बहुत ही ज्यादा आसान होता है। 
  • हाई लेवल लैंग्वेज को programmer friendly language कहा जाता है क्योंकि इसे समझना काफी आसान होता है। 
  • हाई लेवल लैंग्वेज में Debugging करना ज़्यादा मुश्किल नहीं होता हैं। 
  • इस तरह की लैंग्वेज में maintenance काफी आराम से किया जा सकता है क्योंकि ये लैंग्वेज बहुत ही simple और manageable होते हैं। 
  • हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को अलग-अलग platforms पर आसानी से Run किया जा सकता है। 
  • हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में compiler या फिर interpreter की जरूरत होती है ताकि high level language के programming codes को machine code में कन्वर्ट किया जा सके। 
  • यूज़र हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को एक जगह से दूसरी जगह पर port कर सकता है। 
  • इस तरह की लैंग्वेज की memory efficiency काफी कम होती है इसी वजह से ये लैंग्वेज low level language से ज्यादा memory consume करती है। 
  • high level language आज के समय में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला लैंग्वेज है।
  • इस लैंग्वेज में Java, c, c++, python जैसे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज आते हैं। 

High level language के बारे में इतना सब कुछ पढ़ने के बाद आपके मन में जरूरी ये सवाल आ रहा होगा कि high level language लोगों के बीच में इतना पॉपुलर क्यों है ‌? या फिर high level language, low level language से इतना अलग कैसे हैं?

इस सवाल का जवाब पता करने के लिए आपको high level language के बारे में जानने के साथ-साथ low level language को भी समझना पड़ेगा। क्योंकि तब आप हाई लेवल लैंग्वेज के पॉपुलर होने का कारण भी जान पाएंगे और high व low level language के अंतर को भी समझ पाएंगे। 

लो लेवल लैंग्वेज क्या है? 

Low level language एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जो कंप्यूटर के hardware components के साथ संबंध बनाता है। लो लेवल लैंग्वेज को कंप्यूटर के पुरे हार्डवेयर को operate और manage करता हैं। लो लेवल लैंग्वेज का मुख्य कार्य कंप्यूटर के हार्डवेयर पार्ट्स को operate, manage और manipulate करना होता है। 

लो लेवल लैंग्वेज में जो प्रोग्राम लिखे जाते हैं वो कंप्यूटर के द्वारा आसानी से execute होते हैं। लो लेवल लैंग्वेज को रन करने के लिए Compiler या फिर interpret की जरूरत नहीं होती है। लो लेवल लैंग्वेज को machine language या फिर Assembly language कहा जाता है। 

लो लेवल लैंग्वेज मशीन के काफी करीब होता है। मतलब इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को कंप्यूटर आसानी से समझ सकता है। यही कारण है की कंप्यूटर के जो system software होते हैं उसे low level language में बनाया जाता है। 

लो लेवल लैंग्वेज की विशेषता क्या होती है? 

  • Low level language को machine level language भी कहा जाता है। 
  • मशीन इस तरह की लैंग्वेज को आसानी से समझ सकता है। 
  • इंसानों के लिए इस लैंग्वेज को पढ़ना और समझना बहुत ही ज्यादा मुश्किल होता है। 
  • low level language पूरी तरह से machine friendly होती है। 
  • इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में Debugging करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल होता है। ‌
  • low level language या फिर यूं कहें की कंप्यूटर की binary language को maintain करना या फिर maintenance देना काफी आसान होता है। 
  • इस तरह के लैंग्वेज portable नहीं होते हैं। ‌
  • इस तरह के लैंग्वेज machine के ऊपर dependent होते हैं। लो लेवल लैंग्वेज को किसी भी प्लेटफार्म run किया जा सकता है। ‌
  • low level language में translating instruction करने के लिए assemblers की जरूरत पड़ती है। 
  • आज के समय में इस तरह की लैंग्वेज का इस्तेमाल ना के बराबर किया जाता है। 
  • मतलब आप ये समझ सकते हैं और high level language low level Language का बिल्कुल उल्टा होता है।

लो लेवल लैंग्वेज क्या है? उसकी पूरी जानकारी यहाँ है। 

हाई लेवल लैंग्वेज और लो लेवल लैंग्वेज में क्या अंतर होता है? 

High level language और low level language के बारे में इतना पढ़ने के बाद आपको बहुत हद तक समझ आ गया होगा कि कैसे हाई लेवल लैंग्वेज लो लेवल लैंग्वेज से अलग है। लेकिन अगर आप इन दोनों लैंग्वेज के बीच के अंतर को बारीकी से समझना चाहते हैं। तो आप को नीचे दिए गए bullet points को ध्यान से पढ़ना होगा – 

  1. Basic

हाई लेवल लैंग्वेज programmer friendly programming language होता है जबकि लो लेवल लैंग्वेज machine friendly programming language होता है। हाई लेवल लैंग्वेज को लोगों के द्वारा आसानी से समझा जा सकता है, लिखा जा सकता है और मैनेज भी किया जा सकता है। लेकिन लो लेवल लैंग्वेज को समझने में इंसानों को काफी दिक्कत होती है पर इस लैंग्वेज को मशीन आसानी से समझ सकते हैं। 

  1. Execution

हाई लेवल लैंग्वेज को execute करना बहुत ही ज्यादा आसान होता है। जबकि वही लो लेवल लैंग्वेज को execute करने में लोगों की हालत खराब हो जाती है। 

  1. Translation

हाई लेवल लैंग्वेज user friendly लैंग्वेज होता है, इसीलिए ये लैंग्वेज मशीन को समझ नहीं आता है। जिस वजह से हाई लेवल लैंग्वेज को मशीन के समझने योग्य बनाने के लिए उसे हाई से लो लेवल या फिर मशीन लैंग्वेज में compiler या फिर interpret की मदद से बदला जाता है। 

जबकि लो लेवल लैंग्वेज में मशीन लैंग्वेज को डायरेक्टली ट्रांसलेट करने के लिए assemblers की जरूरत पड़ती हैं। 

  1. Memory

हाई लेवल लैंग्वेज की मेमोरी कैपेसिटी लो लेवल लैंग्वेज की तुलना में बहुत ही कम होती है। जिस वजह से इस लैंग्वेज को ज्यादा मेमोरी कंसीव करने की जरूरत पड़ती है। ‌

जबकि वहीं लो लेवल लैंग्वेज में memory capacity बहुत ही होती हैं। इसलिए इस लैंग्वेज में हाई लेवल लैंग्वेज की तुलना में कम मेमोरी consume किया जाता है। ‌

  1. Portability

हाई लेवल लैंग्वेज को एक जगह से दूसरी जगह पर आसानी से port या फिर यूं कहें की ट्रांसफर किया जा सकता है। पर लो लेवल लैंग्वेज को एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस में port नहीं किया जा सकता है। 

  1. Understandability

हाई लेवल लैंग्वेज को प्रोग्राम के द्वारा आसानी से सीखा और समझा जा सकता हैं। जबकि वही low level language को developers द्वारा समझना बहुत मुश्किल होता है। 

  1. Debugging

हाई लेवल वाले प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को बहुत ही आराम से debug किया जा सकता है। पर लो लेवल लैंग्वेज को debug करना प्रोग्राम के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं होता है। 

  1. Maintenance 

हाई लेवल लैंग्वेज बहुत ही सिंपल होने के कारण इसे आसानी से मेंटेन या जा सकता है। पर वही लो लेवल लैंग्वेज काफी कॉन्प्लेक्स होता है, जिस वजह से इस लैंग्वेज को मेंटेन करने में भी काफी दिक्कत होती है। 

  1. Usage 

हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल आजकल ज्यादातर प्रोग्रामर के द्वारा किया जाता है क्योंकि इससे प्रोग्रामिंग करना काफी ज्यादा आसान होता है। पर वहीं लो लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल अब काफी कम हो गया है। 

  1. Speed of execution

हाई लेवल लैंग्वेज को execute करने में low level language के मुकाबले काफी ज्यादा समय लगता है। क्योंकि इस लैंग्वेज में प्रोग्राम को रन करने के लिए अलग से translation program की जरूरत पड़ती है। जबकि वहीं लो लेवल लैंग्वेज बहुत ही तेजी से प्रोग्राम को execute करता है। 

  1. Abstraction

High level language में abstraction काफी ज्यादा होता है। वही low level language में बिल्कुल भी abstraction नहीं होता है। 

  1. Hardware की जरूरत

हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को programmes लिखने के लिए हार्डवेयर की कोई जरूरत नहीं पड़ती है। जबकि लो लेवल लैंग्वेज में प्रोग्राम लिखने के लिए हार्डवेयर की जरूरत पड़ती है। 

  1. Facility

हाई लेवल लैंग्वेज से कंप्यूटर को कुछ खास फायदा नहीं होता है, जबकि लो लेवल लैंग्वेज कंप्यूटर के हार्डवेयर कंप्यूटर के close रखता है। 

  1. Modification

हाई लेवल लैंग्वेज को मॉडिफाई करने में बहुत ज्यादा दिक्कत होती है क्योंकि इस लेवल के लैंग्वेज में लिखे गए एक स्टेटमेंट में बहुत सारे instructions होता है जिसे execute करना पड़ता है। 

जबकि low level language में ऐसा नहीं होता है। लो लेवल लैंग्वेज में प्रोग्राम को मॉडिफाई करना आसान होता है क्योंकि ये उस भाषा में लिखे होते हैं जो समझना कंप्यूटर के लिए भी आसान होता है।

  1. Example 

हाई लेवल लैंग्वेज में Perl, COBOL, Pascal, Ruby जैसे लैंग्वेज आते हैं जबकि जो low level language के अंदर machine language और assembly language आता है। 

हाई लेवल लैंग्वेज के लाभ क्या है? 

High level language के लाभ निम्नलिखित हैं – 

  • हाई लेवल लैंग्वेज में English के alphabets, number, symbols, characters का इस्तेमाल किया जाता है। जिस वजह से इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को पढ़ना और समझना बहुत ही आसान होता हैं।
  • ये प्रोग्रामिंग लैंग्वेज ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड नहीं होती है जिसकी वजह से इसे आसानी से सीखा  और इसके कोड को लिखा जा सकता है।
  • हाई लेवल लैंग्वेज की खास बात ये है कि ये प्रोग्रामिंग लैंग्वेज किसी एक particular मशीन के ऊपर निर्भर नहीं होती है। जिस वजह से इस भाषा में जो कोड लिखा जाता है उसे किसी भी मशीन में आसानी से execute किया जा सकता हैं। 
  • इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के द्वारा लो लेवल लैंग्वेज की तुलना में ज्यादा अच्छे GUI संबंधित एप्लीकेशन बनाए जा सकते हैं।
  • हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल करके कम समय में सॉफ्टवेयर बनाया जा सकता है। 
  • ये प्रोग्रामिंग लैंग्वेज platform independent होते हैं। इस वजह से इस लैंग्वेज को किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम में modification के बिना run किया जा सकता है। 
  • हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के code को maintain करना काफी आसान होता है क्योंकि इसमें कॉन्प्लेक्स कोड का इस्तेमाल नहीं होता है। ‌
  •  हाई लेवल लैंग्वेज में अगर कोडिंग करते हुए कोई गलती हो जाती है! तो भी उस गलती को आसानी से सुधारा जा सकता है। 
  • इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में वो सारी चीजें हैं जो आज के आधुनिक तकनीक की जरूरतों को पूरा करती है। 
  • हाई लेवल लैंग्वेज को इस तरह से डिजाइन किया गया है की वह लो लेवल लैंग्वेज की तुलना में ज्यादा efficient रहे।

हाई लेवल लैंग्वेज के नुकसान क्या है? 

High level language के भी अपने नुकसान है जैसे – 

  • High level language में जो code लिखा जाता है उसे Compiler या फिर interpreter के द्वारा पहले low level language में बदला जाता है क्योंकि कंप्यूटर इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के कोड को डायरेक्ट नहीं समझता है। जिस वजह से प्रोग्राम को execute करने में काफी समय लगता है, जिससे समय की काफी बर्बादी होती हैं। 
  • इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की मेमोरी क्षमता कम होने की वजह से इस के प्रोग्राम को execute करने में काफी ज्यादा memory space की जरूरत पड़ती है। 
  •  हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कंप्यूटर के हार्डवेयर के साथ interact नहीं कर पाने की वजह से इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल करके operating system, device driver जैसे सॉफ्टवेयर नहीं बनाए जा सकते हैं। 
  • हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल कोई भी व्यक्ति ऐसे ही नहीं कर सकता है। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षण की जरूरत पड़ती है। ‌सिर्फ एक trained व्यक्ति इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल कर सकता हैं।
  • इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के पास कंप्यूटर के हार्डवेयर का बहुत ही कम control होता है। 

हाई लेवल लैंग्वेज से जुड़ी अन्य जानकारियों के लिए आप यह वीडियो भी देख सकते हो।

FAQs

सी को उच्च स्तरीय भाषा क्यों कहा जाता है?

C को उच्च स्तरीय भाषा यानी कि हाई लेवल लैंग्वेज इसलिए कहा जाता है क्योंकि C में code लिखने के लिए जिस तरह के syntax का इस्तेमाल होता है। वो इंसानों को आसानी से समझ आ जाता है, पर कंप्यूटर को नहीं। 

उच्च स्तरीय भाषा क्यों महत्वपूर्ण है?

उच्च स्तरीय भाषा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस भाषा को पढ़ना और समझना बहुत ही आसान होता है। 

उच्च स्तरीय भाषा उदाहरण क्या है?

हाई लेवल लैंग्वेज यानी कि उच्च स्तरीय भाषा का उदाहरण Java, C, C++, Python इत्यादि हैं। 

हाई लेवल लैंग्वेज में कौन कौन से गुण होते हैं?

हाई लेवल लैंग्वेज में लिखे हुए programme को पढ़ना और समझना आसान होता है। ‌

हाई लेवल लैंग्वेज से आप क्या समझते हैं?

हाई लेवल लैंग्वेज, वहप्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जिसे आजकल सभी programmers और devlopers के द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है। 

दोस्तों हाई लेवल लैंग्वेज क्या है, इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद अब आप को हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के बारे में सब कुछ पता चल गया होगा। इस आर्टिकल में मैंने आप को इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के बारे में हर एक जानकारी देने की कोशिश की है।

आर्टिकल पढ़ने के बाद भी अगर आपके मन में कोई सवाल है जो आप हम से पूछना चाहते हैं! तो आप अपना सवाल कमेंट करके हमसे पूछ सकते है। बाकी अगर आपको आर्टिकल अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें। 

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Ankur Singh
हेलो दोस्तों, मेरा नाम अंकुर सिंह है और में New Delhi से हूँ। मैंने B.Tech (Computer Science) से ग्रेजुएशन किया है। और में इस ब्लॉग पर टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर, मोबाइल और इंटरनेट से जुड़े लेख लिखता हूँ।

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