IP Address क्या है और इसके प्रकार (IP Address in Hindi)

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IP Address क्या होता है?

आईपी एड्रेस (IP Address) यानी कि इंटरनेट प्रोटोकोल ऐड्रेस जोकि सरल तौर पर आईपी (IP) के नाम से भी जाना जाता है। इसका उपयोग किसी डिवाइस को इंटरनेट से जोड़ने और पहचानने के लिए किया जाता है, जिससे कि आपका स्मार्टफोन या लैपटॉप किसी भी सर्वर के साथ कम्युनिकेशन स्थापित कर पाए। IP Address इंटरनेट से जुड़े हर डिवाइस का एक यूनिक नंबर होता है, बिना इसके आप इंटरनेट सेवा का उपयोग नहीं कर सकते, इसी आईपी के जरिए कई कंप्यूटर्स दूसरे कंप्यूटर की पहचान करते हैं और फिर अपने बीच वेबसाइट सेवाएं शेयर करते हैं।


सभी डिवाइस का अलग-अलग आईपी एड्रेस होता है, इसलिए इसे आप एक यूनिट एड्रेस मान सकते हैं क्योंकि आईपी किसी भी दो डिवाइस का एक नहीं हो सकता है, जब आप अपने लैपटॉप या मोबाइल को इंटरनेट से जोड़ते हैं तब आपके इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के जरिए आपके डिवाइस को आईपी एड्रेस दिया जाता है और उसी एड्रेस के माध्यम से इंटरनेट की पहचान आपकी डिवाइस से होती है।

एक उदाहरण से समझे जैसे कि आपके पास एक स्मार्टफोन है लेकिन उस स्मार्ट फोन में सिम कार्ड नहीं है तो आप किसी के साथ भी कम्युनिकेशन स्थापित नहीं कर सकते क्योंकि सिम कार्ड के जरिए ही आप दूसरे के सिम कार्ड से कम्युनिकेशन बनाते हैं उसी तरह से आईपी ऐड्रेस संख्याओं का एक सेट होता है, और यह इंटरनेट से जुड़े डिवाइसों की पहचान करता है और फिर उनके बीच डाटा ट्रांसफर करने का कार्य करता है, इसका इस्तेमाल हम लोग डिजिटल एड्रेस के तौर पर करते हैं।

IP Address के प्रकार (Types of IP Address in Hindi)

मुख्य रूप से ip-address के चार प्रकार हैं जो कि नीचे आपको बताए गए हैं।

  1. Private IP address
  2. Public IP address
  3. Static IP address
  4. Dynamic IP address

1. Private IP address

इस आईपी एड्रेस का इस्तेमाल हम कम्युनिकेशन बनाने के लिए करते हैं और यह लोकल एरिया नेटवर्क में ज्यादातर प्रयोग किया जाता है, प्राइवेट आईपी ऐड्रेस को Local Network provider यानी कि राउटर के जरिए असाइन किया जाता है, और इस एड्रेस से जुड़े डिवाइस किसी भी बाहर के नेटवर्क से कम्युनिकेशन नहीं कर सकते हैं, क्योंकि बाहर के नेटवर्क से कम्युनिकेशन स्थापित करने के लिए उसका एक अलग आईपी एड्रेस होता है।


2. Public IP Address

पब्लिक आईपी ऐड्रेस आफ का मुख्य एड्रेस होता है जिसके जरिए आप बाहर के नेटवर्क से कम्युनिकेशन स्थापित कर पाते हैं, यदि आप अपने लैपटॉप स्मार्टफोन को इंटरनेट से जोड़ना चाहते हैं तो आपको पब्लिक आईपी एड्रेस की जरूरत होगी और इसमें इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के द्वारा आपके राउटर को असाइन किया जाता है।

3. Static IP Address

स्टैटिक आईपी एड्रेस नाम से ही पता चल रहा है की ऐसा एड्रेस जिसे आप मैनुअली क्रिएट करते हो और जो कभी बदलता ना हो। जब आप अपने लैपटॉप पर नेटवर्क सेटिंग को अपने से ही कंफीग्योर करते हैं तो यह स्टैटिक आईपी ऐड्रेस के नाम से जाना जाता है, एक परमानेंट एड्रेस के तौर पर काम करता है और किसी भी नेटवर्क से कम्युनिकेशन स्थापित करने के लिए सबसे सरल और विश्वसनीय माध्यम माना जाता है। इसके अलावा आप इस एड्रेस के जरिए किसी भी डिवाइस की वर्तमान लोकेशन भी पता कर सकते हैं।

4. Dynamic IP Address

डायनेमिक आईपी एड्रेस आस्थाई एड्रेस होता है जो कि लगातार अपने से बदलता रहता है, यह Lease System के आधार पर काम करता है यानी कि एक निश्चित समय के लिए ही किसी नेटवर्क को असाइन किया जाता है और जब वह समय पूरा होता है तो आपका डिवाइस नए lease के लिए request करता है। डायनेमिक आईपी ऐड्रेस को Dynamic Host Configuration Protocol (DHCP) नाम की सर्विस आपके नेटवर्क और डिवाइस को असाइन करती है।


IP Address के क्लास

अभी ऊपर हमने समझा कि ip-address के कितने प्रकार हैं यहां पर आईपी एड्रेस को नेटवर्क साइज के आधार पर 5 क्लास में डिवाइड किया गया है, इन सभी क्लासेस का क्या मतलब है इसकी जानकारी आपको नीचे दी गई है।

Class A:- क्लास ए आईपी ऐड्रेस का इस्तेमाल बड़े नेटवर्क के लिए किया जाता है, जहां पर होस्ट की संख्या अधिक होती है। इसके अंतर्गत 8 बिट्स पहले नेटवर्क की पहचान करते हैं और बाकी के 24 बिट्स नेटवर्क के होस्ट के लिए होते हैं। इसके अंतर्गत 127.0.0.0 से 127.255.255.255 तक के आईपी ऐड्रेस लूपबैक के लिए रिजर्व्ड होते हैं, इसकी रेंज 1 से 227 तक होती है।

Class B:- इसका इस्तेमाल मध्यम आकार के नेटवर्क के लिए किया जाता है। इसके अंतर्गत 16 बिट्स पहले नेटवर्क की पहचान करते हैं और बाकी के 16 बिट्स नेटवर्क के होस्ट के लिए होते हैं। इसकी रेंज 128 से 191 के बीच होती है।


Class C:- इसका इस्तेमाल छोटे आकार के नेटवर्क के लिए किया जाता है, इस क्लास के आईपी एड्रेस की रेंज 192 से 223 होती है। इसमें पहले 24 बिट्स का इस्तेमाल network ID के लिए किया जाता हैं और आखरी के 8 बिट्स का इस्तेमाल host के लिए किया जाता है।

Class D:- क्लास डी का इस्तेमाल रेगुलर नेटवर्किंग कार्यों के लिए नहीं किया जाता बल्कि इसका इस्तेमाल multicasting applications (बहु-प्रसारण अनुप्रयोग) के लिए किया जाता है और इसकी रेंज 224 से 239 के बीच होती है।

Class E:- इस क्लास को आने वाले समय के लिए सुरक्षित करके रखा गया है हालांकि इसका इस्तेमाल अभी तक नहीं किया गया है, इसकी रेंज 240 से 245 के बीच है।


आईपी एड्रेस के वर्जन (IP Address Version in Hindi)

आपकी जानकारी के लिए बता दें आईपी एड्रेस के दो वर्जन है जिनके बारे में नीचे आपको विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई है।

  • IP version 4
  • IP version 6

IP version 4:- वर्ष 1981 में आईपी वर्जन 4 की शुरुआत हुई थी और तब से लेकर आज तक इसमें कुछ खास बदलाव नहीं किया गया है, यह एक सामान्य वर्जन है जो इंटरनेट की शुरुआत से लेकर अब तक चला आया है लेकिन अब इसकी समय सीमा पूरी हो चुकी है क्योंकि ये इतने एड्रेस की पूर्ति नहीं कर पाया है जितने आईपी एड्रेस की मांग थी और इसमें असीमित एड्रेस नहीं बन सकते। आईपी वर्जन 4, 32 बिट का होता है और इसे दशमलव के द्वारा चार हिस्सों में बांटा गया है, इसका हर हिस्सा 8 बिट का होता है, इसके अलावा आईपी वर्जन 4 की रेंज 0-225 के बीच होती है।

IP version 6:- इंटरनेट के तेजी से विकसित होने पर, दुनिया भर में आईपी वर्जन 4 में कमी आ गई जिसकी वजह से एक नए वर्जन की जरूरत महसूस हुई और तब आईपी वर्जन 6 को IETF के द्वारा डेवलप किया गया, जिसके अंतर्गत असीमत ip-address बनाए जा सकते हैं, इसे डिवेलप करने का उद्देश्य आईपी वर्जन 4 को रिप्लेस करना है। ये एक एडवांस आईपी वर्जन है जो कि 128-bit का है, इसे कोलन के जरिए 8 भागों में बांटा गया है।

IP Address कब और किसने बनाया?

आईपी एड्रेस को बनाने में कई लोगों ने अपना सहयोग दिया है, vintcerf को इंटरनेट का फादर माना जाता है और इन्होंने आईपी का निर्माण करने में अहम किरदार निभाया है, जिस दौरान ip-address का निर्माण किया गया उस समय वह यूएस में DARPA (Development of defence advance research project agency) के लिए कार्य कर रहे थे।

IP Address कैसे काम करता है?

जब कभी भी हम ऑनलाइन किसी वेबसाइट से कोई फाइल डाउनलोड करते हैं या कोई मेल भेजते हैं, उस दौरान हम किसी नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे होते हैं जो कि अपने आप को इंटरनेट से जुड़े हुआ होता है। इस वक्त आपका डिवाइस इंटरनेट सेवा प्रदाता से कनेक्ट करता है और यदि आप कंपनी से जुड़े हैं तो कंपनी के नेटवर्क का इस्तेमाल करता है और इन सभी को करने के लिए आपके कंप्यूटर या लैपटॉप को इंटरनेट प्रोटोकोल ऐड्रेस का इस्तेमाल करना होता हैं, इस तरह से ip-address काम करता है।

IP Address कौन प्रदान करता है?

वैश्विक स्तर पर इंटरनेट प्रोटोकोल ऐड्रेस Internet Assigned Number Authority (IANA) के द्वारा प्रदान किया जाता है, जो कि अमेरिका की एक non-profit कॉरपोरेशन है। IANA आईपी एड्रेस के ब्लॉक्स को Regional Internet Registries को देता है जिसके बाद Regional Internet Registries अपने एरिया के internet provider service को आई पी आवंटित करता है। इसके बाद ही इंटरनेट सेवा प्रदाता आपको आईपी एड्रेस देता है। 

आपकी जानकारी के लिए बता दें पूरी दुनिया में 5 रीजनल इंटरनेट रजिस्ट्रीज है जिन्हें इंटरनेट असाइन नंबर अथॉरिटी के द्वारा आईपी आवंटित किया जाता है। इसके साथ ही इन्ही Regional Internet Registries के द्वारा आईपी को मैनेज भी किया जाता है, और यह सभी अपने-अपने क्षेत्रों में local registries और specific users को उनके आवश्यकता के अनुसार आईपी एड्रेस असाइन करती है। इसके अलावा इसके कुछ T&C भी है जिसे मानना अनिवार्य है।

IP Address के फायदे?

आईपी ऐड्रेस इस्तेमाल करने के कई मुख्य फायदे हैं जो कि आपको नीचे बताए गए हैं।

इंटरनेट प्रोटोकोल हमारी डिवाइस की पहचान करता है, ऐसे में अगर कोई व्यक्ति डिजिटल डिवाइस के माध्यम से किसी तरह का क्राइम कर रहा है तो पुलिस इंटरनेट प्रोटोकॉल के जरिए उस तक पहुंच सकती है और इंटरनेट प्रोटोकॉल के माध्यम से कई क्राइम का हल भी किया गया है।

आईपी के माध्यम से किसी नेटवर्क के बीच कम्युनिकेशन स्थापित करना आसान हो गया है। इंटरनेट प्रोटोकॉल की मदद से किसी एक सरवर से दूसरे सरवर तक तेजी से डाटा ट्रांसफर कर सकते हैं।

IP Address और MAC Address में अंतर

मैक और आईपी ऐड्रेस के बीच कई अंतर है क्योंकि नीचे आपको बताए गए हैं।

  • मैक ऐड्रेस देखता है कि कंप्यूटर का फिजिकल ऐड्रेस यूनिक हो, जबकि आईपी ऐड्रेस डिवाइस का लॉजिकल ऐड्रेस होता है जो कि नेटवर्क से जुड़े किसी डिवाइस की पहचान के लिए जाना जाता है।
  • आईपी ऐड्रेस हमेशा नेटवर्क लेयर पर कार्य करता है वही मैक एड्रेस लिंक लेयर पर कार्य करता है।
  • इंटरनेट प्रोटोकोल ऐड्रेस किसी नेटवर्क पर डिवाइस के कनेक्शन की पहचान करता है, जबकि मैक सिर्फ किसी डिवाइस की पहचान करने का ही काम करता है।
  • आईपी हमारा सॉफ्टवेयर ओरिएंटेड होता है वही मैक हार्डवेयर ओरिएंटेड होता है।

मैक एड्रेस क्या है? उसकी पूरी जानकारी यहाँ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न;

मेरा आईपी एड्रेस क्या है?

अपना सार्वजनिक आईपी एड्रेस पता करने के लिए आपको सिंपली गूगल पर लिखना है What’s my up रिजल्ट में आपको अपना आईपी ऐड्रेस दिखाई देगा। इस IP address में आपको नंबर और Text का मिश्रण दिखाई देता है। इस प्रक्रिया को आप अपने मोबाइल या पीसी दोनों में दोहरा सकते हैं। और सेकंड्स में अपना IP address जान सकते है।

क्या आईपी एड्रेस छुपाना जरूरी है?

इस सवाल का जवाब है कि हां आपको अपना आईपी एड्रेस छुपाना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से आपको प्राइवेसी मिलेगी और आपका पर्सनल जानकारी कोई चुरा नहीं सकेगा और ना ही उसका दुरूपयोग कर पाएगा।

IP में अंको की संख्या कितनी होती है?

एक आईपी एड्रेस 32 बिट का नंबर होता है जो किसी मशीन में नेटवर्क इंटरफेस के बारे में जानकारी देता है। आमतौर पर एक IP address को डेसिमल डिजिट्स में लिखा जाता है जो आमतौर पर hexadecimal or decimal number के combination में लिखा होता है।

IP address के कितने भाग हैं?

इंटरनेट प्रोटोकोल ऐड्रेस के ivp4 में 4 भाग होते हैं वही ivp6 में 8 भाग होते हैं।

क्या सिम कार्ड बदलने से आईपी ऐड्रेस बदल जाता है?

जब भी आप अपना सिम कार्ड बदलते हैं या फिर उसे दोबारा से re-insert करते हैं तो आपका आईपी एड्रेस हर बार चेंज हो जाता है। यही नहीं जब आप एयरप्लेन मोड को ऑन करके टर्न ऑफ करते हैं तब भी IP address में बदलाव आता है।

IP address कौन मैनेज करता है।

इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस को Internet Assigned Number Authority (IANA) के द्वारा मैनेज किया जाता है।

IP address के कितने वर्जन है?

इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस के दो वर्जन है पहला ivp4 और दूसरा ivp6। 

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Ankur Singh
हेलो दोस्तों, मेरा नाम अंकुर सिंह है और में New Delhi से हूँ। मैंने B.Tech (Computer Science) से ग्रेजुएशन किया है। और में इस ब्लॉग पर टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर, मोबाइल और इंटरनेट से जुड़े लेख लिखता हूँ।

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