LiFi क्या है? और यह कैसे काम करता है? (Li-Fi IN HINDI)


Li-fi और वाईफाई यह दोनों शब्द आपस में काफी मिलता-जुलता है। इसलिए कई लोग इस बात को समझने का प्रयास कर रहे हैं कि आखिर Li-fi क्या है और क्यों आजकल इसकी चर्चा वाईफाई के साथ की जा रही है।

LiFi क्या है? और यह कैसे काम करता है? (Li-Fi IN HINDI)

बता दें कि लाईफाई भविष्य में आने वाली एक एडवांस टेक्नोलॉजी है। इस टेक्नोलॉजी के अंतर्गत आपके घर में जो एलईडी बल्ब है, उसकी रोशनी जहां तक रहेगी वहां तक आप इंटरनेट को एक्सेस कर सकेंगे। यानी कि इंटरनेट को चला सकेंगे। दुनिया भर की कई कंपनी लाईफाई टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है परंतु इसे खोजने का श्रेय एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले प्रोफेसर हेराल्ड हास को जाता है।


अगर आपको भी“Li-fi टेक्नोलॉजी क्या है” अथवा “Li-fi क्या है” इसके बारे में जानना है, साथ ही “Li-fi के बारे में पूरी जानकारी हिंदी में” प्राप्त करनी है, तो हमारे इस लेख को पूरा अवश्य पढ़ें।

LiFi क्या है? (What is Li-Fi In Hindi)

Li-fi full form “Light Fidelit” है। लाइट एमिटिंग डायोड का इस्तेमाल लाईफाई के द्वारा डाटा ट्रांसमिशन के लिए किया जाता है। लाईफाई तेजी के साथ काम करने वाली ऑप्टिकल वायरलेस टेक्नोलॉजी है, जिसका सीधा सा अर्थ यही होता है कि किसी भी प्रकार के डाटा को भेजने के लिए या फिर डेटा को प्राप्त करने के लिए प्रकाश यानी कि लाइट का यूज किया जाता है।

वास्तव में देखा जाए तो यह एक प्रकार का विजिबल लाइट कम्युनिकेशन सिस्टम भी है जिसे ऑप्टिकल वायरलेस कम्युनिकेशन का सबसेट माना जाता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ऑप्टिकल वायरलेस कम्युनिकेशन, ऑप्टिकल कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी है। इसके अंदर अल्ट्रावायलेट लाइट का इस्तेमाल सिग्नल का आदान प्रदान करने के लिए होता है।

लाईफाई कम्युनिकेशन के लिए एक विजिबल लाइट का इस्तेमाल करती है। हालांकि इसकी रेंज कम ही होती है। इसलिए इसे दूर तक ले करके नहीं जाया जा सकता है। इसलिए वर्तमान के समय में इसका इस्तेमाल छोटी रेंज मे कम्युनिकेशन के लिए किया जा रहा है

Li-fi Technology का मतलब क्या है?

साल 2011 में प्रोफेसर हेराल्ड हास के मन में एक आईडिया आया और उन्ही के आईडिया के पश्चात इस टेक्नोलॉजी पर काम करना चालू किया गया।

प्रोफेसर के द्वारा एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी में साल 2011 में पहली बार इस आइडिया को लोगों को बताया गया, साथ ही उन्होंने लाईफाई की सहायता से किस प्रकार से वायरलेस कम्युनिकेशन किया जा सकता है इसकी टेक्नोलॉजी के बारे में भी लोगों को अवगत कराया। इस प्रकार उन्होंने इस टेक्निक का नाम लाईफाई रखा।

प्रोफेसर ने अपने बयान में कहा कि वाईफाई से अगर इसकी तुलना की जाए तो यह वाईफाई से 100 गुना ज्यादा तेजी के साथ काम करता है। इसलिए इसके जरिए अगर डाटा को ट्रांसफर किया जाता है तो काफी कम टाइम में ही भारी मात्रा में डाटा ट्रांसफर हो सकता है। हालांकि इसके जहां कुछ एडवांटेज है तो वहीं कुछ खामियां भी इसके अंदर हैं।

Li-Fi का इतिहास क्या है?

यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग में प्रोफेसर हेराल्ड हाउस नाम के एक प्रोफेसर थे,और इन्हीं के मन में सबसे पहली बार लाईफाई टेक्नोलॉजी का आईडिया आया था।

इस प्रकार से किताबों में लाईफाई टेक्नोलॉजी के फाउंडर के तौर पर प्रोफेसर हेराल्ड हास का नाम ही पढ़ाया जाता है। इन्होंने अपने इस आइडिया को टेक टॉक नाम के एक कार्यक्रम में लोगों के सामने प्रस्तुत किया था और इन्हीं के प्रयासों के फलस्वरूप आने वाले समय में लाईफाई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अधिकतर लोग कर सकेंगे।

उन्होंने बताया था कि जब किसी डाटा या फिर इंफॉर्मेशन को विजिबल लाइट पोर्सन के द्वारा भेजा जाता है तो उसे विजिबल लाइट कम्युनिकेशन कहा जाता है। प्रोफेसर के द्वारा एक प्रोजेक्ट की भी शुरुआत की गई थी, उस प्रोजेक्ट का नाम प्रोफेसर ने डी लाइट प्रोजेक्ट रखा था।

उनके द्वारा साल 2010 से लेकर के साल 2012 तक अपने प्रोजेक्ट पर काफी समय दिया गया और जब उन्होंने साल 2011 में लाईफाई टेक्नोलॉजी के बारे में लोगों को बताया तब धीरे-धीरे लोगों को इसके बारे में पता चला और प्रोफेसर ने समय की कीमत को समझते हुए Pure Li-FI नाम की एक कंपनी को भी स्टार्ट कर दिया, जो कि वर्तमान के समय में भी काम कर रही है।

प्रोफेसर के द्वारा बनाई गई इस कंपनी ने अपने बिजनेस को तेजी के साथ आगे बढ़ाने के लिए वर्तमान के समय में एलईडी लाइटिंग पर काम करना चालू कर दिया है।

साल 2011 में अक्टूबर के महीने में ही कंपनी ने दूसरी इंडस्ट्री के साथ मिलकर के Li-Fi Consortium को बनाया, जिसका मकसद एक हाई स्पीड वायरलेस सिस्टम को तैयार करना था।

साल 2013 में अगस्त के महीने में इस बात को सर्टिफाइड किया गया कि Li-Fi के द्वारा डाटा का ट्रांसमिशन Single Color LED 1.6 Gbit/sec के साथ हो रहा है।

साल 2013 के सितंबर के महीने में यह बात सामने आई कि लाईफाई में लाइन की साइड की कोई भी जरूरत नहीं है, वहीं साल 2013 में अक्टूबर के महीने में यह रिपोर्ट भी आई कि लाइफ किट के डेवलपमेंट पर चाइनीस मैन्युफैक्चर के द्वारा काम किया जा रहा है।


साल 2014 के अप्रैल के महीने में बीम कास्टर नाम का एक वायरलेस नेटवर्क बनाया गया, इस नेटवर्क को बनाने का काम रसिया की कंपनी Stins Coman के द्वारा किया गया था, जिसमें वर्तमान में डाटा स्पीड 1.25 gigabytes per second है।

Li-Fi का उपयोग क्या है?

एयरलाइंस में Li-Fi Technology का इस्तेमाल करना चालू कर दिया गया है। इसके अलावा लाईफाई का इस्तेमाल समंदर के नीचे रिसर्च करने के लिए भी किया जा रहा है क्योंकि पानी के जरिए लाइट आसानी से समुंदर के नीचे ट्रैवल कर सकती है, साथ ही हॉस्पिटल के अंदर ऑपरेशन करने के लिए ऑपरेशन थिएटर में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

इसके अलावा ऑफिस और घरों में भी डाटा के ट्रांसमिशन के लिए और इंटरनेट को एक्सेस करने के लिए लाईफाई का इस्तेमाल हो रहा है। जैसे-जैसे लाईफाई टेक्नोलॉजी को लोगों के द्वारा अपनाया जाएगा, वैसे वैसे ही इसके उपयोग में भी बढ़ोतरी देखी जाएगी। इस प्रकार से लाई फाई का दायरा बढ़ता जाएगा।

Li-Fi काम कैसे करता है?

वाईफाई में भी डाटा का ट्रांसमिशन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फॉर्मेट में होता है और लाईफाई में भी वाईफाई की तरह ही डाटा ट्रांसमिशन सेम इसी फॉर्मेट में होता है। हालांकि जहां एक तरफ वाईफाई में जो डाटा का ट्रांसमिशन होता है वह रेडियो तरंगों के द्वारा होता है, वहीं दूसरी तरफ लाईफाई में डाटा का ट्रांसमिशन विजिबल प्रकाश किरण की वजह से होता है।

हमारे और आपके घर में जो सामान्य एलइडी लाइट का यूज किया जाता है उसी का यूज़ लाईफाई ट्रांसमिशन के लिए भी होता है अर्थात हमारा कहने का मतलब है कि हमारे घर में मौजूद एलईडी बल्ब राउटर का काम करता है और आपको हम यह भी बता दें कि एलईडी बल्ब, लैंप ड्राइवर और फोटो डिटेक्टर यही वह तीनों मुख्य कंपोनेंट है जिसके द्वारा लाईफाई ट्रांसमिशन का काम पूरा करता है।

क्योंकि लैंप ड्राइवर के साथ ही इंटरनेट का मुख्य जरिया कनेक्टेड होता है और इंटरनेट से जो भी इनफार्मेशन लैंप ड्राइवर को प्राप्त होती है वह उन सभी इंफॉर्मेशन को एलईडी बल्ब के पास भेजता है।

इसके पश्चात एलईडी बल्ब से जो लाइट निकलती है, उसे प्राप्त करने का काम फोटो डिटेक्टर करता है और फोटोडिटेकटर जो लाइट सिगनल होते हैं, उन्हें बाइनरी डाटा में ट्रांसमीट करने के पश्चात लैपटॉप या स्मार्टफोन में प्रोसेस के लिए सेंड कर देता है।

Li-Fi का उपयोग कैसे करें?

इसमें जो एलईडी बल्ब होता है, उसका काम अपने जरिए डाटा को ट्रांसफर करना होता है। इसलिए एलईडी बल्ब की सहायता से आप डाटा को यहां से वहां ट्रांसफर कर सकते हैं परंतु आपको हम यह बात भी बता देना चाहते हैं कि आप लाईफाई का इस्तेमाल तभी कर सकेंगे, जब एलईडी बल्ब जलता होगा। इसके अलावा इसके इस्तेमाल करने की एक लिमिट भी है।

हमारा कहने का मतलब है कि एलईडी बल्ब ऑन होने के पश्चात जहां तक एलईडी बल्ब का प्रकाश जाता होगा, वहां तक आप लाईफाई का इस्तेमाल कर सकेंगे और इसके जरिए आप इंटरनेट एक्सेस करने के लिए कंप्यूटर या फिर मोबाइल अथवा अन्य किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल कर सकेंगे।

Li-Fi के फायदे क्या है?

लाईफाई टेक्नोलॉजी के द्वारा इंसानों को कई बेनिफिट प्राप्त हो रहे हैं। नीचे आपको Li-Fi के फायदों की डिटेल्स दी जा रही है।


1: उपलब्धता

आर्टिकल में आपने जाना कि लाईफाई टेक्नोलॉजी को काम करने के लिए एलईडी बल्ब की आवश्यकता होती है और एलईडी बल्ब एक ऐसी वस्तु है जो हर घर में प्राप्त होता है। घर के अलावा यह ऑफिस, रेस्टोरेंट, हॉस्पिटल, कॉलेज, स्कूल, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और बस अड्डे पर भी प्राप्त होते हैं। इसलिए किसी भी जगह पर लाईफाई का यूज किया जा सकता है।

2: सुरक्षा

जहां वाईफाई में अक्सर सिक्योरिटी से संबंधित मुद्दों का सामना करना पड़ता है, वही Li-Fi सिक्योरिटी के मामले में वाईफाई से काफी बढ़िया मानी जा रही है, क्योंकि इसमें सिग्नल आवन जावन करने के लिए लाइट का इस्तेमाल करते हैं, जिसका सीधा सा मतलब यह है कि इसमें हैकिंग करना काफी आसान नहीं है। इसलिए यूजर चिंता मुक्त होकर के लाईफाई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकता है।

3: गोपनीयता

आज के डिजिटल जमाने में प्राइवेसी को लेकर के हर व्यक्ति सतर्क रहता है परंतु कहीं ना कहीं से उसकी प्राइवेसी को खतरा पैदा ही हो जाता है, क्योंकि अक्सर कई लोग अब ऑनलाइन अपने पर्सनल काम करते हैं। ऐसे में वह अपनी प्राइवेसी को लेकर के भी चिंतित होते हैं परंतु लाईफाई टेक्नोलॉजी के साथ यूजर को प्राइवेसी को लेकर के ज्यादा चिंता करने की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि इसका जो टावर होता है वह उसी जगह तक सीमित होता है जिस जगह पर आप मौजूद होते हैं।

इसलिए कोई दूसरा व्यक्ति या फिर हैकर के द्वारा आपके नेटवर्क में दखलंदाजी नहीं की जा सकती है अर्थात इसका मतलब यह हुआ कि आप प्राइवेसी की चिंता किए बगैर इंटरनेट एक्सेस कर सकते हैं और डाटा को यहां वहां शेयर कर सकते हैं।

3: गति

अगर हमें इंटरनेट की स्पीड बहुत ही बढ़िया मिलती है, तो हमारे डिवाइस पर वेब पेज आसानी के साथ और तेजी के साथ लॉन्च हो जाते हैं अथवा लोड हो जाते हैं जिसकी वजह से हमारे जो भी आवश्यक काम होते हैं, उन्हें हम जल्दी निपटा लेते हैं।

हालांकि 5जी टेक्नोलॉजी भी मार्केट में आ गई है परंतु कई इलाके ऐसे हैं, जहां पर अभी 5G टेक्नोलॉजी नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में लाईफाई टेक्नोलॉजी के द्वारा हमें इंटरनेट की तेज स्पीड प्राप्त होती है, जिसकी वजह से हमारे डिवाइस पर तेजी के साथ वेब पेज लोड हो जाते हैं।

लाईफाई की स्पीड 224 GB/s के आसपास में होती है, जो कि 5G टेक्नोलॉजी के इंटरनेट स्पीड से भी ज्यादा होती है और इसकी स्पीड वाईफाई से तकरीबन 100 गुना अधिक है। इसलिए मार्केट एक्सपर्ट ने भी यह कहा है कि फ्यूचर में वाईफाई की जगह Li-Fi का इस्तेमाल अधिकतर लोग करने लगेंगे।

5: प्रभावशीलता

एलईडी बल्ब हर घर में इस्तेमाल होता है और लाईफाई टेक्नोलॉजी भी एलईडी बल्ब की सहायता से ही अपना काम करती है। इसलिए लाईफाई टेक्नोलॉजी अधिकतर घरों में अपनी पहुंच बनाने में कामयाब हो सकती है। इस प्रकार से लाईफाई टेक्नोलॉजी का डबल फायदा यह है कि इसके जरिए घरों में रोशनी भी रहेगी, साथ ही लोगों को बढ़िया इंटरनेट कनेक्टिविटी प्राप्त होगी।

6: नुकसान रहित

वायरलेस कम्युनिकेशन की जो टेक्नोलॉजी होती है, वह रेडियो सिग्नल पर डिपेंड होती है अर्थात सिग्नल के आवन जावन के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का इस्तेमाल होता है। इसलिए उनमें से इंसानों के लिए और पशु पक्षियों के लिए घातक माने जाने वाले खतरनाक रेडिएशन बाहर निकलते हैं जो कि स्वास्थ्य के लिए बहुत ही खतरनाक माने जाते हैं।

इसलिए कोई व्यक्ति अगर लंबे समय तक रेडिएशन के प्रभाव में रहता है तो उसे विभिन्न प्रकार की बीमारियां होती है परंतु Li-Fi को नुकसान रहित टेक्नोलॉजी बताया जा रहा है, क्योंकि इसमें सिग्नल के आवन जावन के लिए विजिबल लाइट वेब्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इसमें ना के बराबर रेडिएशन निकलता है। इस प्रकार ना तो यह इंसानों के लिए खतरनाक माना जाता है ना ही यह जानवरों के लिए खतरनाक माना जाता है।

Li-Fi के नुकसान क्या है?

आपने ऊपर Li-Fi Technology के एडवांटेज के बारे में डिटेल प्राप्त की। आइए अब आपको

Li-Fi Technology के डिसएडवांटेज के बारे में भी इंफॉर्मेशन देते हैं।

1: बल्ब ऑन रखना

लाईफाई इस्तेमाल तभी किया जा सकता है, जब एलईडी बल्ब ऑन हो। इस प्रकार लगातार एलईडी बल्ब ऑन रखने की वजह से अधिक पावर का खर्च होता है जिससे बिजली का बिल भी अधिक आता है। अगर एलईडी बल्ब ऑफ होगा तो लाईफाई के जरिए आप इंटरनेट एक्सेस नहीं कर सकेंगे।

2: महंगी

लाई फाई के सिग्नल को अगर एक रूम से दूसरे रूम में लेकर के जाना है, तो इसके लिए अलग-अलग लाइट का यूज करना पड़ता है। ऐसी अवस्था में यह तकनीक थोड़ी सी कॉस्टली साबित होती है। इसके अलावा सूरज की रोशनी भी इसके सिग्नल के संचार में रुकावटें पैदा करती है।

3: कम रेंज

लाईफाई टेक्नोलॉजी का सिग्नल अधिक दूर तक नहीं जा सकता है क्योंकि इसकी रेंज काफी कम ही होती है। इसलिए अधिक दूर तक इसका सिग्नल काम नहीं कर पाता है।

4: दीवारों के आर पार ना होना

लाईफाई टेक्नोलॉजी का जो सिग्नल होता है उसकी मुख्य बात यह है कि वह दीवारों के आर पार भी नहीं जा सकता है। इसलिए जिस जगह पर इसे इस्तेमाल किया जाता है यह उसी जगह तक सीमित रह जाता है।

Li-Fi और वाईफाई में क्या अंतर है?

वाईफाई और Li-Fi दोनों में ही कुछ बातें कॉमन है। हालांकि इनकी जो टेक्नोलॉजी है, वह अलग अलग है। इसीलिए इन की स्पीड, ट्रांसमिशन मीडियम, रेंज, सिक्योरिटी में भी काफी डिफरेंस देखे जाते हैं। आइए Li-Fi और वाईफाई के बीच डिफरेंस की जानकारी हासिल करते हैं।

1: गति

लाईफाई की स्पीड वाईफाई से अधिक होती है। जहां वाईफाई की स्पीड 5 GBps होती है, वही

LiFi की स्पीड 224 GBps होती है। इस प्रकार से स्पीड के मामले में LiFi, वाई फाई से बाजी मार जाता है।

2: दायरा

एलईडी बल्ब की रोशनी जहां तक जाती है, वहां तक Li-Fi की रेंज होती है और वाई फाई की रेंज तकरीबन 30 मीटर के आसपास में होती है। इस प्रकार से यहां वाईफाई, Li-Fi पर रेंज के मामले में भारी पड़ता है।

3: गोपनीयता और सुरक्षा

सिक्योरिटी और प्राइवेसी के मामले में लाईफाई टेक्नोलॉजी को काफी स्ट्रांग माना जाता है क्योंकि इसमें यूज़र के डाटा को हैक करना या फिर उसके सिक्योरिटी को तोड़ना आसान नहीं होता है, जबकि वाईफाई में अक्सर डाटा चोरी से संबंधित शिकायतें आती रहती है।

4: माध्यम

वाईफाई सिग्नल को ले जाने के लिए अलग मीडियम का इस्तेमाल करता है और Li-Fi सिग्नल को लाने और ले जाने के लिए अलग मीडियम का इस्तेमाल करता है। बात करें अगर

Li-Fi की तो यह विजिबल Light Waves का इस्तेमाल सिग्नल को लाने और ले जाने के लिए करता है, वही वाईफाई रेडियो वेव्स का इस्तेमाल सिग्नल को लाने और ले जाने के लिए करता है।

5: स्पेक्ट्रम

इन दोनों में स्पेक्ट्रम का भी काफी अंतर है। वाईफाई का जो रेडियो वेब स्पेक्ट्रम होता है, उससे 1000 गुना ज्यादा बडा Li-Fi का विजिबल स्पेक्ट्रम होता है।

6: रेडिएशन

लाईफाई टेक्नोलॉजी की सबसे मुख्य खासियत यह है कि इसके द्वारा बिल्कुल भी रेडिएशन नहीं निकलता है। इस प्रकार से यह इंसानों के लिए साथ ही पशु पक्षियों के लिए खतरनाक नहीं माना जाता है, जबकि वाईफाई में सिग्नल का आदान-प्रदान होने के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का यूज़ होता है और इस प्रकार से उसके जरिए स्वास्थ्य के लिए खतरनाक रेडिएशन भी बाहर निकलता है।

FAQ:

Li- Fi का फुल फॉर्म क्या है?

Light Fidelity

लाईफाई का जिक्र पहली बार कब आया?

11 साल पहले (मार्च, 2011)

लाईफाई टेक्नोलॉजी किस इंडस्ट्री से संबंधित है?

डिजिटल कम्युनिकेशन

लाईफाई के फाउंडर कौन है?

प्रोफेसर हेराल्ड हास

लाईफाई किसके जरिए नेटवर्क डिलीवर करती है?

एलइडी बल्ब

लाईफाई और वाईफाई में से बेहतर क्या है?

लाईफाई

हमने इस आर्टिकल के द्वारा आपको “Li-fi क्या है?” के बारे में जानकारी दी है

Hope आपको LiFi क्या है? और यह कैसे काम करता है? (Li-Fi IN HINDI) का यह पोस्ट पसंद आया होगा, ओर हेल्पफ़ुल लगा होगा।


दोस्तो! हमें उम्मीद है आज का यह लेख आपके लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ होगा। आप इस लेख से जुड़े अपने विचारों को कमेंट की मदद से हमें बता सकते हैं।

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