लो लेवल लैंग्वेज क्या है? (Low Level Language in Hindi)

0

दोस्तों AI और machine learning की वजह से अब लोगों की रुचि प्रोग्रामिंग और कोडिंग की तरफ बढ़ती जा रही है। अगर आपने अभी नया नया प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के बारे में जानना शुरू किया है, तो आपने हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज और लो लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के बारे में जरूर सुना होगा! वैसे तो हमने अपने पिछले आर्टिकल में आपको high level language क्या है? इस बारे में बताया था पर आज के आर्टिकल में हम आपको लो level language के बारे में बताएंगे। अगर आप जानना चाहते हैं कि लो लेवल लैंग्वेज क्या है? तो इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें। 

लो लेवल लैंग्वेज क्या है? (Low Level Language in Hindi)


लो लेवल लैंग्वेज को समझे बिना आप प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को कभी समझ ही नहीं सकते हैं क्योंकि लो लेवल लैंग्वेज को first generation programming language कहा जाता है। इन प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल कब से किया जा रहा है जब हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज बने भी नहीं थे। 

लो लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कंप्यूटर के इंटरनल सिस्टम को संभालते हैं। इस वजह से इस लैंग्वेज के बारे में जानना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है। इस पोस्ट में आपको लो लेवल लैंग्वेज के बारे में in-depth सब कुछ जानने को मिलेगा, तो इसे पूरा जरूर पढ़ें। 

लो लेवल लैंग्वेज क्या है? 

लो लेवल लैंग्वेज को कंप्यूटर की मूल भाषा कहा जाता है। ये एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज हैं जो कंप्यूटर के हार्डवेयर part के साथ काम करती है। इस लैंग्वेज को इस तरह से डिजाइन किया जाता है जिससे इस भाषा में लिखे गए निर्देश को कंप्यूटर बिना ट्रांसलेट किए आसानी से समझ लेता है।‌ लो लेवल लैंग्वेज में 0 और 1 का इस्तेमाल होता है, जिसे Binary language कहा जाता है जो कि कंप्यूटर की अपनी भाषा होती हैं। 


लो लेवल लैंग्वेज, हाई लेवल लैंग्वेज की बिल्कुल उल्टी होती है क्योंकि इस भाषा में जो कोड लिखे जाते हैं वो इंसानों के पढ़ने लायक नहीं बल्कि मशीनों के पढ़ने लायक होते हैं। कहने का मतलब ये है की इस भाषा में लिखे गए कोड को समझने के लिए कंप्यूटर को इस कोड को पहले ट्रांसलेट करने की जरूरत नहीं पड़ती है क्योंकि कंप्यूटर इस लैंग्वेज को ऐसे ही समझ लेता है। यही कारण भी है लो लेवल लैंग्वेज को मशीन लैंग्वेज कहा जाता हैं। 

इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को कंप्यूटर बहुत ही तेजी से समझ जाता है। इस लैंग्वेज का इस्तेमाल करके code लिखना काफी मुश्किल होता है क्योंकि इस language में कोड लिखने के लिए अल्फाबेट्स नहीं बल्कि सिर्फ 0 और 1 का इस्तेमाल किया जाता है। 

जिस वजह से प्रोग्रामर के लिए कोड याद रखना काफी मुश्किल होता है। डेवलपर Basic text editor या programming IDE की मदद से इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का source code high level language से बना और edit कर सकते हैं। 


लेकिन इस तरह से लिखे गए कोड को CPU directly नहीं समझ सकता हैं। इसीलिए हाई प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में लिखे हुए code को run करने के लिए पहले कोड को लो लेवल लैंग्वेज में ट्रांसलेट करना पड़ता है। 

C, C++ ऐसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज हैं जिसमें लो लेवल लैंग्वेज और हाई लेवल लैंग्वेज दोनों की ही क्वालिटी देखने को मिलती है। यही कारण है की सॉफ्टवेयर प्रोग्राम बनाने के लिए इस तरह के प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता है। ताकि आसानी से code लिख कर फिर कोड को low level language में बदल दिया जाता है क्योंकि लो लेवल लैंग्वेज कंप्यूटर के हार्डवेयर के साथ सीधा काम करता हैं। 

इतना ही नहीं इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में code बहुत ही तेजी से और कम memory footprint के साथ इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह के प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल करने के लिए डेवलपर को इस लैंग्वेज का एक्सपोर्ट होना जरूरी है। लो लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल operating system और software compilers बनाने के लिए किया जाता है। 


लो लेवल लैंग्वेज कितने प्रकार के होते हैं? 

निम्न स्तरीय भाषा जो कंप्यूटर की अपनी भाषा मानी जाती हैं, प्रोग्रामिंग कोड की संरचना के आधार पर ये दो तरह की होती है – 

  1. Machine Language

मशीन लैंग्वेज निम्न स्तरीय भाषा यानी कि लो लेवल लैंग्वेज का वो प्रकार है! जिसमें प्रोग्रामिंग कोड कंप्यूटर की भाषा Binary language में लिखी जाती है। मतलब की मशीन लैंग्वेज में जो कोड होते हैं वो 0 और 1 के फॉर्म में लिखे जाते हैं। 

मशीन लैंग्वेज में लिखे गए कोड को कंप्यूटर का brain यानी कि CPU आसानी से समझ लेता है और बहुत ही तीव्र गति से code को Run करता है। इस लैंग्वेज में code लिखना काफी मुश्किल होता है। 


क्योंकि इस तरह की लैंग्वेज में programming code लिखने के लिए alphabet का इस्तेमाल नहीं होता है इसमें सिर्फ 0 और 1 को ही मुख्य नंबर के तरह इस्तेमाल किया जाता है। जिस वजह से इन नंबर्स के द्वारा कोड को याद रखना काफी मुश्किल होता है। मशीन लैंग्वेज में प्रोग्रामिंग करने में काफी ज्यादा समय लगता है। 

Machine Language के फायदे

  • मशीन लैंग्वेज काफी फास्ट होती हैं। 
  • मशीन लैंग्वेज काफी आसानी से hardware level instruction पर काम कर सकते हैं। 
  • मशीन लैंग्वेज को conversion की जरूरत नहीं होती है। 
  • कंप्यूटर में सभी लैंग्वेज को run करने के लिए machine language के ऊपर निर्भर होना पड़ता है। 
  • मशीन लैंग्वेज को execute करने के लिए बहुत ही कम memory की जरूरत पड़ती है। 

Machine Language के नुकसान

  • मशीन लैंग्वेज को डिजाइन करना काफी मुश्किल होता है। ‌
  • मशीन लैंग्वेज को लिखने में समय भी ज्यादा लगता है। 
  • मशीन लैंग्वेज में numerical values का इस्तेमाल किया जाता है जिसे पढ़ना काफी ज्यादा मुश्किल होता है। 
  •  मशीन लैंग्वेज को पढ़ने लायक बनाने के लिए उसे दूसरे लैंग्वेज में कन्वर्ट करने की जरूरत पड़ती है। 
  • प्रोग्राम में मौजूद numerical values को debugging करना मुश्किल होता है। 

यह भी पढ़े: Python क्या है और कैसे सीखें? (What is Python in Hindi)

  1. Assembly language

Assembly language भी निम्न स्तरीय भाषा का एक प्रकार है। ये भाषा कंप्यूटर के हार्डवेयर से सीधा कनेक्ट करती है और कंप्यूटर को निर्देश देकर उससे प्रोग्राम रन करवाती है। ये भाषा मशीन लैंग्वेज से काफी अलग होती है, क्योंकि इसमें कोड लिखने के लिए binary code की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि इसमें जो कोड होते हैं वो mnemonics में लिखे जाते हैं। 

ये निम्न स्तरीय भाषा मशीन लैंग्वेज की तुलना में ज्यादा flexible होती है। असेंबली लैंग्वेज में अगर कोई प्रोग्राम लिख रहा होता है और उन्हें अलग से प्रोग्राम में number जोड़ने की जरूरत है तो वो ADD लिखकर नंबर को जोड़ सकता है। 

लेकिन कंप्यूटर इस तरह की लैंग्वेज को सीधा नहीं समझता वह सिर्फ मशीन लैंग्वेज को ही समझ सकता है। जिस वजह से इस लैंग्वेज में लिखे गए प्रोग्राम को कंप्यूटर में run करने के लिए इस लैंग्वेज को Assemblers की मदद से machine language में बदला जाता है। ‌

इस लो लेवल लैंग्वेज की मदद से सॉफ्टवेयर बनाना काफी आसान होता है क्योंकि इस लैंग्वेज में लिखे गए कोड को याद रखना प्रोग्रामर के लिए आसान होता है। इस निम्न स्तरीय भाषा का प्रयोग Software development के लिए किया जाता है। इसके अलावा कुछ जरूरी प्रोग्रामिंग कोड लिखने के लिए भी इस तरह के निम्न स्तरीय भाषा का इस्तेमाल किया जाता हैं।  

Assembly language के फायदे 

  • मशीन लैंग्वेज के मुकाबले Assembly language के प्रोग्राम को पढ़ना थोड़ा आसान होता है। 
  • Assembly language का इस्तेमाल अब भी कई जगहों पर किया जाता है। 
  • प्रोग्रामर इस लैंग्वेज का इस्तेमाल program के flow को समझने के लिए करते हैं। 
  •  इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल Microprocessors और Microcontrollers में किया जाता है। 
  • इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के द्वारा भी हार्डवेयर को आसानी से access किया जा सकता है। 

Assembly language के नुकसान 

  •  हाई लेवल लैंग्वेज से तुलना की जाए तो इस लैंग्वेज को पढ़ना काफी मुश्किल है। 
  • इस लैंग्वेज में लिखे गए लंबे प्रोग्राम को याद रखना मुश्किल होता है। 
  • ये प्रोग्रामिंग लैंग्वेज मशीन के ऊपर निर्भर ना करके प्लेटफार्म के ऊपर निर्भर करती है। 

लो लेवल लैंग्वेज की विशेषताएं;

लो लेवल लैंग्वेज की निम्नलिखित विशेषताएं हैं-

  •  लो लेवल लैंग्वेज को सीपीयू काफी जल्दी एक्सेस कर लेता है जिस वजह से इस भाषा में लिखे गए कोड बहुत तेजी से रन करते हैं। 
  •  लो लेवल लैंग्वेज को बायनरी लैंग्वेज में लिखा जाता है जिस वजह इसे ट्रांसलेट करने की जरूरत नहीं पड़ती हैं। क्योंकि कंप्यूटर इस लैंग्वेज को directly read कर लेता है। इसलिए इसे machine language कहा जाता है। 
  • लो लेवल लैंग्वेज में कोड को binary language यानी कि 0 और 1 में लिखा जाता है।
  • लो लेवल लैंग्वेज में कोड लिखना काफी मुश्किल होता है क्योंकि बायनरी लैंग्वेज में होने के कारण इस पर कार्य करना मुश्किल होता है। ‌
  • निम्न स्तरीय भाषा में कोड लिखने में आवश्यकता से अधिक समय लगता है क्योंकि इसके कोड काफी जटिल होते है। 
  • कोई भी व्यक्ति ऐसे ही इस लैंग्वेज से कोड नहीं लिख सकता है, इस लैंग्वेज में कोड लिखने के लिए प्रोग्रामर को इसकी ट्रेनिंग लेना बहुत ज्यादा जरूरी है। आसान शब्दों में कहूं तो लो लेवल लैंग्वेज में सिर्फ एक एक्सपर्ट ही कोड लिख सकता है। क्योंकि इस लैंग्वेज में code लिखने के लिए special knowledge की जरूरत पड़ती है। ‌

लो लेवल लैंग्वेज के लाभ क्या है? 

Low level language के बारे में इतना जाने के बाद शायद आपको लगे कि इस लैंग्वेज में काम करना समय की बर्बादी है। पर ऐसा नहीं है क्योंकि इस लैंग्वेज के भी अपने फायदे होते हैं – 

  • Low level language के कोड को CPU बहुत ही तेजी से access करता है। 
  • कंप्यूटर में प्रोग्राम लिखने के लिए लो लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है। ताकि सिस्टम की मेमोरी और प्रोसेसर की क्षमता को बढ़ाकर सिस्टम के परफॉर्मेंस को बेहतर किया जा सके। ‌
  • इस लैंग्वेज में प्रोग्राम कोड लिखने का एक फायदा ये होता है की इस लैंग्वेज को compiler या assembler के द्वारा ट्रांसलेट करने की जरूरत नहीं पड़ती है। जिस वजह से code काफी तेजी से run करता है। ‌क्योंकि इस लैंग्वेज को सिस्टम आसानी से एक्सेस कर पाता है। ‌
  • लो लेवल लैंग्वेज को मशीनी कोड में आसानी से कन्वर्ट किया जा सकता है। 
  • निम्न स्तरीय भाषा काफी तेजी से डाटा ट्रांसफर करने में मदद करती हैं। ‌
  • कंप्यूटर का हार्डवेयर क्योंकि इस भाषा को समझता है जिस वजह से प्रोग्रामर के लिए कंप्यूटर क्या हार्डवेयर को निर्देश देकर उनसे काम करवाना आसान होता है।
  • लो लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल ऐसी चीजें बनाने के लिए किया जाता है जो पूरी तरह से कंप्यूटर के हार्डवेयर को कंट्रोल करते हैं। इस लैंग्वेज के द्वारा मुख्य रूप से Drivers, Operating system, Database मनाया जाता है क्योंकि ये यूजर और हार्डवेयर के इंटरेक्शन में मदद करता है। 
  • Low level language कंप्यूटर में memory management करता है क्योंकि इस लैंग्वेज की मदद से प्रोग्रामर कंप्यूटर की मेमोरी को मैनेज कर पाता है जिससे कि कंप्यूटर का execution time काफी तेज हो जाता है। 
  • ऐसेसॉफ्टवेयर जिनमें high efficiency वाले code की जरूरत होती है, उनमें इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता है। 
  • लो लेवल लैंग्वेज को execute करने में ज्यादा दिक्कत नहीं आती है क्योंकि इसमें कम मेमोरी की जरूरत पड़ती है। 
  • लो लेवल लैंग्वेज information को execute करने में काफी तेज और भरोसेमंद होते हैं। 
  • system software बनाने के लिए इस निम्न स्तरीय भाषा का उपयोग किया जाता है। 
  • लो लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का कंप्यूटर के इंटरनल सिस्टम में पूरा कंट्रोल होता है। 

लो लेवल लैंग्वेज की हानि

लो लेवल लैंग्वेज के लाभ होने के साथ-साथ इसके अपने कुछ नुकसान भी हैं – 

  • लो लेवल लैंग्वेज पूरी तरह से मशीन के ऊपर निर्भर करता है। जिस वजह से ये लैंग्वेज बिल्कुल भी पोर्टेबल नहीं है। 
  • लो लेवल लैंग्वेज में प्रोग्राम लिखने के लिए ध्यान लगाना बहुत जरूरी होता है। 
  • libraries की कमी होने की वजह से लो लेवल लैंग्वेज में लंबे प्रोग्राम लिखना मुश्किल होता है। ‌
  • लो लेवल लैंग्वेज में प्रोग्राम लिखने में ज्यादा गलतियां होती है जिसे आसानी से ठीक भी नहीं किया जा सकता है। 
  •  लो लेवल लैंग्वेज काफी जटिल होता हैं क्योंकि इसमें जो कोड लिखे हुए होते हैं। वो इंसानों के नहीं बल्कि मशीनों के समझने योग्य होते हैं। 
  • लो लेवल लैंग्वेज में कोड लिखना काफी मुश्किल होता है और इसमें कोड लिखने में काफी ज्यादा समय लग जाता है। इतना ही नहीं इस लैंग्वेज में कोड लिखते समय अगर कोई गलती हो जाती है। तो उस गलती को ठीक करने में भी काफी दिक्कत होती है और कई बार तो प्रोग्राम को शुरू से लिखना पड़ता है। ‌ जिस वजह से इस लैंग्वेज में प्रोग्राम देखते समय गलती की कोई गुंजाइश नहीं रहती है। 
  • लो लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के अपनी limitations होती हैं। क्योंकि इसकी संरचना मुश्किल होने की वजह से इसका उपयोग अलग-अलग चीजों के लिए नहीं किया जाता है। 
  • लो लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के प्रोग्राम को सिर्फ specialised knowledge रखने वाले expert programmers के द्वारा ही लिखा जा सकता है। कोई साधारण व्यक्ति इस लैंग्वेज में कोड नहीं लिख सकता है। 
  • लो लेवल लैंग्वेज में debugging करना और कोड लिखने के बाद उसमें गलतियां ढूंढना काफी मुश्किल होता है। 
  •  इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को सीखना काफी मुश्किल होता है। 
  • लो लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में लिखे हुए code को execute करने में भी दिक्कत होती है। ‌
  • लो लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को इंसानों के द्वारा पढ़ा और समझा नहीं जा सकता है।
  • लो लेवल लैंग्वेज के प्रोग्राम के द्वारा डेक्सटॉप के सॉफ्टवेयर और ऑनलाइन मोबाइल एप्लीकेशन नहीं बनाए जा सकते हैं क्योंकि ये लैंग्वेज उन्हें सपोर्ट नहीं करता है। 
  • लो लेवल लैंग्वेज को एक से ज्यादा बार लिखने की जरूरत पड़ती है। 
  • निम्न स्तरीय भाषा के अंदर बड़े प्रोग्राम को लिखना काफी मुश्किल होता है। 

यह भी पढ़े:  Artificial Intelligence (AI) क्या है? और कैसे काम करता है? (AI IN HINDI)

लो लेवल लैंग्वेज और हाई लेवल लैंग्वेज में क्या अंतर है? 

जैसे की मैंने आपको पहले बताया कि लो लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सबसे पहली प्रोग्रामिंग लैंग्वेज मानी जाती है। पहले के समय में लो लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता था। हाई लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल करके सॉफ्टवेयर डेवलप करना काफी देर से शुरू हुआ। 

लेकिन आज के समय की अगर मैं बात करूं तो अब हाई लेवल लैंग्वेज लो लेवल लैंग्वेज से भी ज्यादा पॉपुलर है क्योंकि इस लैंग्वेज का इस्तेमाल अब सबसे ज्यादा किया जाता है। लो लेवल लैंग्वेज और हाई लेवल लैंग्वेज में क्या अंतर है? ये मैंने आपको नीचे दिए गए bullet points के माध्यम से समझाने की कोशिश की है – 

  • Low level language, machine friendly language होती है मतलब की हमारा कंप्यूटर इस लैंग्वेज को आसानी से समझ सकता है। जबकि high level language, programmer friendly language होती है। हाई लेवल लैंग्वेज प्रोग्रामर की अपनी भाषा यानी कि alphabets और numbers में use किए जाते हैं। 
  • लो लेवल लैंग्वेज को मैनेज करना काफी ज्यादा मुश्किल होता है क्योंकि ये लैंग्वेज इंसानों के समझ में नहीं आती है। जबकि हाई लेवल लैंग्वेज को मैनेज करना और उसमें त्रुटियां ढूंढना आसान होता है क्योंकि ये लैंग्वेज आसानी से इंसानों को समझ आ जाती है। 
  • लो लेवल लैंग्वेज को execute करना मुश्किल होता है लेकिन हाई लेवल लैंग्वेज को आसानी से execute किया जा सकता है। 
  •  लो लेवल लैंग्वेज को Assembler की जरूरत मशीन लैंग्वेज कंस्ट्रक्शन को डायरेक्टली ट्रांसलेट करने के लिए होती है। जबकि हाई लेवल लैंग्वेज में interpreter या compiler हाई लेवल लैंग्वेज को machine code में कन्वर्ट कर देता है। 
  • लो लेवल लैंग्वेज की memory efficiency काफी high होती है जबकि हाई लेवल लैंग्वेज की memory efficiency काफी low होती है। ‌
  • लो लेवल लैंग्वेज, हाई लेवल लैंग्वेज की तुलना में कम energy consume करती है। जबकि हाई लेवल लैंग्वेज में energy consumption काफी ज्यादा होता है। 
  • लो लेवल लैंग्वेज में लिखे हुए कोड को किसी दूसरे डिवाइस में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है। पर हाई लेवल लैंग्वेज में लिखे हुए कोड को किसी भी डिवाइस में run किया जा सकता है। 
  • लो लेवल लैंग्वेज में debugging करना काफी मुश्किल होता है जबकि वही हाई लेवल लैंग्वेज में debugging करना काफी आसान होता हैं। 
  • लो लेवल लैंग्वेज को मेंटेन करना काफी मुश्किल होता है क्योंकि ये लैंग्वेज काफी जटिल होते हैं। जबकि हाई लेवल लैंग्वेज simple और easy होने के वजह से आसानी से समझ आते हैं। 
  • लो लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल आजकल ज्यादा नहीं किया जाता है पर हाई लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल आपको हर जगह देखने को मिलेगा। चाहे सॉफ्टवेयर डेवलपर करना हो, आप डेवलप करना हो या फिर वेबसाइट डिजाइन करना। 
  • लो लेवल लैंग्वेज में ट्रांसलेशन जैसा ज्यादा कुछ होता नहीं है, जिस वजह से इस लैंग्वेज को machine code को बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता है। और यही वजह है की ये लैंग्वेज कंप्यूटर में बहुत ही तेजी से execute होता है। लेकिन हाई लेवल लैंग्वेज को कंप्यूटर में run करने के लिए उसे machine language में कन्वर्ट करना पड़ता है जिस वजह से इसके execution में काफी समय लगता है। 
  • लो लेवल लैंग्वेज में प्रोग्राम लिखने के लिए व्यक्ति के पास हार्डवेयर की नॉलेज होना भी जरूरी है लेकिन हाई लेवल लैंग्वेज में प्रोग्राम लिखने के लिए हार्डवेयर की नॉलेज की जरूरत नहीं होती है। 
  • क्योंकि लो लेवल लैंग्वेज मशीन द्वारा आसानी से समझा जाता है जिस वजह से hardware level पर इस भाषा में प्रोग्राम लिखना आसान हो जाता है। लेकिन वही हाई लेवल लैंग्वेज hardware level पर प्रोग्रामर को कोई फायदा नहीं देता है‌। 
  • लो लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में लिखे हुए प्रोग्राम को मॉडिफाई करने का प्रोसेस आसान होता है। क्योंकि ये processor द्वारा आसानी से समझे जा सकते हैं। 
  • • लो लेवल लैंग्वेज को use करना काफी मुश्किल होता है जबकि हाई लेवल लैंग्वेज को use करना आसान होता है। 
  • लो लेवल लैंग्वेज में कोई सॉफ्टवेयर डेवलप करने में ज्यादा प्रोग्रामिंग करनी पड़ती है और इसमें debugging करना मुश्किल होता है जिस वजह से इसमें development time ज्यादा लगता है। पर वही हाई लेवल लैंग्वेज में programming और coding करने की जरूरत नहीं पड़ती हैं। 
  • लो लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को system programming, device driver development, और embedded systems में use किया जाता है जबकि हाई लेवल लैंग्वेज को software development, web development और database management में use किया जाता है। 
  • लो लेवल लैंग्वेज में machine language और assembly language आते हैं पर वही high level language में Python, C++, C, C#, Visual Basic और JavaScript आते हैं। 

लो लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल कहा किया जाता है? 

लो लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल प्रत्यक्ष नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष तरीके से किया जाता है। लेकिन इस लैंग्वेज का इस्तेमाल हर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में होता हैं। इसके अलावा assembly language का इस्तेमाल सॉफ्टवेयर बनाने के लिए भी किया जाता है। 

Performance critical devices बनाने में ! 

लो लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल ऐसे डिवाइस बनाने में किया जाता है जिसमें Performance काफी critical होते हैं। 

Less storage efficient devices बनाने में !  

इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल उस डिवाइस को बनाने में किया जाता है। जिसमें स्टोरेज कम होता है क्योंकि हाई लेवल लैंग्वेज में programming libraries और translator store करने के लिए स्टोरेज की जरूरत पड़ती है।‌

Integrated circuits और Microcontrollers बनाने में !  

Integrated circuits और Microcontrollers क्योंकि कंप्यूटर के इंटरनल सिस्टम का भाग होते हैं इसीलिए इन्हें बनाने में भी लो लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता है। 

Designing applications बनाने में ! 

ऐसे एप्लीकेशन जिन्हें बनाने के लिए hardware-level के interface की जरूरत होती है। उन्हें डिजाइन करने के लिए लो लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता है जैसे compilers, drivers.

FAQs

लो लेवल लैंग्वेज को हिंदी में क्या कहते हैं? 

लो लेवल लैंग्वेज को निम्न स्तरीय भाषा कहा जाता है ये computer की अपनी भाषा होती हैं। 

लो लेवल प्रोग्रामिंग क्यों सीखते हैं?

कंप्यूटर के हार्डवेयर के साथ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल करने के लिए लो लेवल प्रोग्रामिंग सीखा जाता हैं। 

लो लेवल लैंग्वेज कितने प्रकार की होती है?

लो लेवल लैंग्वेज दो प्रकार की होती है –  machine language और assembly language. 

लो लेवल लैंग्वेज कैसे लिखी जाती है?

लो लेवल लैंग्वेज Binary codes में लिखी जाती है। 

दोस्तों इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद अब आपको समझ आ गया होगा कि लो लेवल लैंग्वेज क्या है? इस आर्टिकल में मैंने आपको लो लेवल लैंग्वेज के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी देने की कोशिश की है। ताकि आपके मन में लो लेवल लैंग्वेज को लेकर किसी भी तरह का कोई doubt न रहे। 

इस पोस्ट को पढ़ने के बाद भी अगर आपके मन में कोई सवाल रह जाता है तो आप अपने सवाल कमेंट करके हमसे पूछ सकते हैं! हम आपके सवालों का जवाब देंगे बाकी अगर आपको आर्टिकल पसंद आया हो, तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिए।‌

Previous articleडॉट मैट्रिक्स प्रिंटर क्या है? प्रकार एवं फ़ायदे (Dot Matrix Printer in Hindi)
Next articleमशीन लैंग्वेज क्या है? (Machine Language in Hindi)
Ankur Singh
हेलो दोस्तों, मेरा नाम अंकुर सिंह है और में New Delhi से हूँ। मैंने B.Tech (Computer Science) से ग्रेजुएशन किया है। और में इस ब्लॉग पर टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर, मोबाइल और इंटरनेट से जुड़े लेख लिखता हूँ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here