मैलवेयर क्या है? Malware Kya Hai? Malware Meaning in Hindi


आपने इस बात पर गौर किया होगा कि हमारा अच्छा खासा चलता हुआ स्मार्टफोन, कंप्यूटर या फिर लैपटॉप अचानक से ही हैंग होने लगा है और उसमें से जाने अनजाने में हमारी कुछ जरूरी फाइल भी ऑटोमेटिक डिलीट होने लगी है या फिर ऑटोमेटिक ही हमारा स्मार्टफोन या फिर डिवाइस पावर ऑन और ऑफ होना चालू हो गया है। आजके इस पोस्ट में हम जानिंगे की मैलवेयर क्या है? Malware Kya Hai? Malware Meaning in Hindi?

मैलवेयर क्या है? Malware Kya Hai? Malware Meaning in Hindi अगर आपके साथ ऐसा होता है तो आपको तुरंत ही अपने डिवाइस में मैलवेयर वायरस की चेकिंग करनी चाहिए। क्योंकि ऐसा अधिकतर किसी ना किसी वायरस के कारण ही होता है और अधिकतर ऐसे मामले में मैलवेयर वायरस ही जिम्मेदार होता है। इसीलिए ऐसे मामले में मैलवेयर क्या है? Malware Kya Hai? Malware Meaning in Hindi? इसके बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए।  

इसलिए आइए इस आर्टिकल में “मैलवेयर क्या है” (Malware Kya Hai in Hindi?) अथवा “मैलवेयर का मतलब क्या होता है” इसके बारे में पूरी जानकारी हिंदी में प्राप्त करते हैं।


Malware Kya Hai? (Malware Meaning in Hindi)

कंप्यूटर में तरह तरह के वायरस प्रवेश करके कंप्यूटर की परफॉर्मेंस को खराब करने का काम करते हैं। मैलवेयर भी एक ऐसा ही वायरस है जो कंप्यूटर के सिस्टम को हैंग करने के लिए कंप्यूटर में प्रवेश करता है। यह स्पेनिश भाषा का शब्द है। स्पेनिश भाषा में Mal नाम का एक शब्द है जिसका अर्थ होता है बैड। हिंदी में बैड को खराब या फिर बुरा कहा जाता है।

इस प्रकार से मैलवेयर को “बैडवेयर” भी कहा जाता है। इसका पूरा नाम Malicious Software होता है और यह एक छोटी फाइल होती है जो कंप्यूटर में बिना परमिशन के इंटर कर जाती है और इंटर कर जाने के बाद यह कंप्यूटर के सिस्टम की परफॉर्मेंस को खराब करने का काम करता है और इसमें जो भी डाटा होते हैं, उसे या तो नुकसान पहुंचाने का काम करता है या फिर चुराने का काम करता है।

जब व्यक्ति को किसी भी प्रकार की इंफॉर्मेशन नहीं होती है तब वह उसकी इंफॉर्मेशन को प्राप्त करने के लिए इंटरनेट पर उसके बारे में सर्च करता है और कई बार सर्चिंग के दरमियान जाने अनजाने में उससे कुछ ऐसी गलती हो जाती है, जिसकी वजह से वायरस या फिर मैलवेयर वायरस उसके डिवाइस में इंटर कर जाता है और इसके बारे में यूजर को पता भी नहीं चलता है।

उसे इसके बारे में तब पता चलता है जब उसके डिवाइस में अचानक से ही खराबी पैदा होने लगती है या उसका डिवाइस हैंग करने लगता है अथवा उसके डिवाइस में से कोई चीज ऑटोमेटिक ही डिलीट हो चुकी होती है।

डिवाइस में मैलवेयर वायरस अलग-अलग प्रकार से प्रवेश कर जाता है। अगर आप किसी वेबसाइट पर आने वाली एडवर्टाइजमेंट पर क्लिक कर देते हैं तो भी यह वायरस आ सकता है या फिर किसी भी अन्य ट्रस्टेड वेबसाइट से अगर आप कोई गेम, सॉफ्टवेयर, गाना, डाउनलोड करते हैं तो भी यह वायरस आ सकता है। इसके अलावा अगर आप किसी ऐसी ईमेल को खोलते हैं जिसमें कुछ अटैच लिंक है तो भी कंप्यूटर में या फिर डिवाइस में यह वायरस प्रवेश कर सकता है।

कभी कबार ऐसा भी होता है कि हम किसी अन्य व्यक्ति की पेन ड्राइव, सीडी या डीवीडी अथवा हार्ड ड्राइव को ला करके अपने डिवाइस में लगाते हैं तो इसकी वजह से भी वायरस डिवाइस में आ जाता है और डिवाइस की फाइल को खत्म करने लगता है। तो दोस्तों उम्मीद है की अब आप जान गये होगे की आख़िर यह Malware Kya Hai?

Anti Malware Kya Hai?

एंटी मैलवेयर एक प्रकार का मजबूत सॉफ्टवेयर होता है जो डिवाइस में इंस्टॉल करने पर आपके डिवाइस की रक्षा करता है। मुख्य तौर पर यह वायरस को पहचानता है, उनकी स्कैनिंग करता है और उसे खत्म करता है और इसी उद्देश्य के लिए इन्हें डेवलपमेंट कंपनी के द्वारा डिवेलप किया गया है। एंटीवायरस के भी कई प्रकार के नाम होते हैं। जो कंपनी अपना एंटीवायरस बनाती है वह अपने हिसाब से उस एंटीवायरस को नाम देती है।

एंटीवायरस आपको फ्री भी प्राप्त होते हैं साथ ही चार्जेबल भी प्राप्त होते हैं। हालांकि अधिकतर यह देखा गया है कि जो चार्जेबल एंटीवायरस होते हैं वह काफी शानदार तरीके से अपना काम करते हैं और डिवाइस को किसी भी प्रकार के हानिकारक वायरस की चपेट में आने से बचाते हैं। एंटीवायरस सॉफ्टवेयर कंप्यूटर के लिए भी बनाए जाते हैं साथ ही लैपटॉप, डेस्कटॉप और स्मार्टफोन के लिए भी बनाए जाते हैं।

यह भी पढ़े: वायरस क्या है – What Is Virus In Hindi

मैलवेयर के प्रकार – Types of Malware in Hindi

मैलवेयर वायरस के कई प्रकार होते हैं परंतु इसके मुख्य तौर पर प्रकार है, जिसकी डिटेल्स आपको नीचे बताई जा रही है।

1: Computer Worm

malicious software program होने के नाते यह जिस डिवाइस पर रहते हैं, उसे तो नुकसान पहुंचाते ही हैं साथ ही उस डिवाइस से संबंधित अन्य डिवाइस को भी नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं। यह वायरस नेटवर्क के जरिए एक डिवाइस में से दूसरे डिवाइस में चले जाते हैं। जैसे कि ईमेल, यूएसबी डिवाइस, मीडिया स्टोरेज इत्यादि।

2: Virus

यह बहुत ही पुराना मैलवेयर वायरस होते हैं जो कंप्यूटर प्रोग्राम में घुसकर के कंप्यूटर प्रोग्राम को नुकसान पहुंचाते हैं। यह एक के बाद एक ऑटोमेटिक ही बनते जाते हैं और कंप्यूटर के काम करने की कैपेसिटी को कमजोर करते हैं साथ ही यह कंप्यूटर के हार्डवेयर को भी खराब करते हैं।

3: Trojan Horse

कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम तक जाने के लिए यह स्टार्टिंग में तो एक सुरक्षित एप्लीकेशन होने का नाटक करता है और जब यह ऑपरेटिंग सिस्टम तक पहुंच जाता है तब यह अपना असली रूप दिखाता है। यह फाइल की कॉपी बनाता है और उन्हें दूसरे व्यक्ति को भेजता है साथ ही महत्वपूर्ण जानकारियों को भी लीक करता है।

4: Spyware

यूजर के डाटा को बाहर लाने के लिए इस प्रकार के मैलवेयर का इस्तेमाल किया जाता है और जब यूजर का डाटा प्राप्त हो जाता है तब उसे प्राप्त करने वाला व्यक्ति उसे सौदेबाजी करके दूसरे व्यक्ति को भेज देता है। इस प्रकार के मैलवेयर वायरस का जब अटैक होता है तब यूजर को पता भी नहीं चल पाता है कि उसकी जो भी एक्टिविटी है, उसे रिकॉर्ड की जा रही है। इसका अधिकतर इस्तेमाल बिजनेस की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए होता है।

5: Adware

आपने इस बात पर गौर किया होगा कि जब हम इंटरनेट चलाते हैं तब हमारी स्क्रीन पर एक पॉपअप एडवरटाइजमेंट आती है, जो हमें यह दर्शाती है कि हमारे डिवाइस में वायरस है परंतु हमारे डिवाइस में वायरस नहीं होता है। यह एडवेयर के कारण ही होता है। यह एक ऐसा मैलवेयर वायरस होता है जिसे फ्री सॉफ्टवेयर में ऐड कर दिया जाता है, ताकि जब यूजर उस एप्लीकेशन को स्टार्ट करें तो वह ब्राउज़र की सेटिंग में चेंज करके अपने हिसाब से एडवर्टाइजमेंट डिवाइस की स्क्रीन पर दिखाएं।

6: Backdoor

इसकी गिनती मोस्ट डेंजरस मैलवेयर वायरस में होती है, जो बाईपास होते हुए डिवाइस के सिस्टम में पहुंच जाता है और जब यह डिवाइस के सिस्टम में पहुंच जाता है तब हैकर रिमोट एक्सेस के जरिए डिवाइस के एक्सेस को प्राप्त कर लेता है और डिवाइस के यूजर को इसकी जानकारी भी नहीं होती है। इसके जरिए हैकर जासूसी करता है, फाइल को डिलीट करता है, खतरनाक सॉफ्टवेयर को डिवाइस में इंस्टॉल करता है और अन्य कई इल्लीगल काम करता है।

7: Ransomware

एडवांस वायरस होने के नाते यह बहुत ही डेंजरस वायरस माना जाता है। यह कंप्यूटर को लॉक कर देता है और उसमें मौजूद जो भी डाटा होते हैं उसे डिलीट करने की कैपेसिटी भी रखता है। अधिकतर हैकर इस प्रकार के वायरस का इस्तेमाल पैसे ऐठने के लिए या फिर धोखाधड़ी करने के लिए अथवा किसी के अकाउंट से इलीगल तरीके से पैसे निकालने के लिए करते हैं।

मैलवेयर कहां से आता है?

डिवाइस में मैलवेयर के पहुंचने के बहुत सारे रास्ते होते हैं और सामान्य तौर पर यह इनफेक्टेड वेबसाइट, ईमेल अटैचमेंट तथा कुछ अन्य जरिए से डिवाइस में आते हैं। नीचे आपको मैलवेयर कहां से डिवाइस में प्रवेश करते हैं, इसकी जानकारी प्रोवाइड की जा रही है।

1: Phishing: इस तरीके में मैलवेयर किसी धोखाधड़ी करने वाली कंपनी की तरफ से आपके कंप्यूटर में ईमेल के जरिए भेजा जाता है और जब आप उस ईमेल को ओपन करके उसमें अपनी डिटेल्स को भर देते हैं तो वायरस आपके डिवाइस में इंटर कर जाता है और आपको पता भी नहीं चलता है।

2: Malicious Website: देखा जाए तो कुछ वेबसाइट या तो पॉपअप के जरिए या फिर हानिकारक लिंक के जरिए आपके डिवाइस में वायरस को डालने की कोशिश करती हैं।

3: Torrents: इसके जरिए जिस फाइल को शेयर किया जाता है वह सुरक्षित नहीं मानी जाती है। इसके जरिए ट्रोजन मैलवेयर काफी तेजी के साथ फैलता है।

4: Shared Networks: अगर किसी डिवाइस में पहले से ही मैलवेयर है और उस डिवाइस के द्वारा शेयर्ड नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है तो मैलवेयर दूसरे डिवाइस में पहुंच जाता है।

5: Pirated Software: इंटरनेट से किसी भी अनट्रस्टेबल वेबसाइट से अगर आप इनफेक्टेड सॉफ्टवेयर या फिर कुछ अन्य चीजें डाउनलोड करते हैं तो उसमें जो मैलवेयर होते हैं, वह डिवाइस में आ जाते हैं।

कंप्यूटर वायरस कैसे फैलता है?

कंप्यूटर में वायरस आने के एक ही नहीं बल्कि कई रास्ते होते हैं। इसलिए कंप्यूटर में वायरस आने के पीछे भी बहुत सारे कारण होते हैं। जब किसी डिवाइस को वायरस अपनी चपेट में ले लेता है तो उस डिवाइस में गड़बड़ी होना स्टार्ट हो जाती है। जैसे कि उस डिवाइस में कोई भी सॉफ्टवेयर ऑटोमेटिक इंस्टॉल होने लगता है, डाटा डिलीट होने लगते हैं इत्यादि।

इसके अलावा वायरस डिवाइस के अंदर मौजूद गेम्स, फाइल, म्यूजिक, एंड्राइड एप्लीकेशन तथा अन्य सभी चीजों को प्रभावित करने का काम करता है। आप अगर जाने अनजाने में किसी इलीगल फाइल, गेम, म्यूजिक, android app या फिर मूवी को डाउनलोड करते हैं।

तो इसकी वजह से कंप्यूटर वायरस आपके कंप्यूटर में आता है और वह फैलने भी लगता है, साथ ही अगर आप वायरस इनफेक्टेड किसी पेनड्राइव, सीडी या फिर डीवीडी का इस्तेमाल अपने डिवाइस में करते हैं या फिर किसी अन्य व्यक्ति के डिवाइस में करते हैं तो ऐसा होने से भी वायरस फैलता है।

कंप्यूटर वायरस का इतिहास क्या है?

1970 में पहली बार अरपानेट के द्वारा वायरस खोजा गया था। उस वायरस का नाम क्रीपर था, जिसे निर्माण करने का काम बोब थॉमस के द्वारा किया गया था और यह वायरस TENEX ऑपरेटिंग सिस्टम के जरिए फैला था।

इस वायरस की खासियत यह थी कि यह कंप्यूटर को कंट्रोल करने के लिए किसी भी टाइप के मॉडम का यूज कर सकता था। इस वायरस का अटैक जिस किसी भी कंप्यूटर पर होता था उस कंप्यूटर की स्क्रीन पर “I am the creeper Catch Me If You Can“ का मैसेज आता था।

साल 1982 में पब्लिक तौर पर एक वायरस रिलीज हुआ था जिसका नाम एल्क क्लोनर था जिसे रिच स्कैंटा नाम के व्यक्ति ने बनाया था। इसे फ्लॉपी डिस्क के जरिए फैलाया गया था जो कंप्यूटर प्रोग्राम को टारगेट करता था।

इसके बाद पब्लिक तौर पर कंप्यूटर वायरस शब्द का इस्तेमाल साल 1984 में करना चालू किया गया। वायरस का नाम साउथ कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले विद्यार्थी फ्रेड कोहेन ने दिया। साल 1986 में ब्रेन बूट सेक्टर नाम का एक वायरस भी चर्चा में आया। इसके बाद कई वायरस अस्तित्व में आते गए

Malwarebyte क्या है?

यह एक बहुत ही स्ट्रांग एंटी वायरस सॉफ्टवेयर है। अगर आप इस एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं, तो यह सॉफ्टवेयर आपके डिवाइस में से मैलवेयर वायरस को हटाने का काम करता है।

इसलिए अगर किसी व्यक्ति का डिवाइस पूरी तरह से मैलवेयर वायरस की चपेट में आ गया है और वह मैलवेयर वायरस को अपने डिवाइस में से रिमूव करना चाहता है, तो वह इस एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर सकता है और इसके जरिए मैलवेयर वायरस को बाहर निकाल सकता है और अपने सिस्टम को प्रोटेक्ट कर सकता है।

यह एंटीवायरस सॉफ्टवेयर दोबारा से डिवाइस में किसी भी प्रकार के वायरस को आने से रोकता है और अगर वायरस आ भी जाता है, तो उसकी सूचना तुरंत ही यूजर को देता है।


कंप्यूटर वायरस के नाम क्या है?

कंप्यूटर वायरस जितने भी प्रकार के होते हैं, उन सभी का अलग-अलग काम होता है और काम के हिसाब से ही उनका नाम भी अलग अलग होता है। नीचे कुछ प्रसिद्ध कंप्यूटर वायरस के नाम आपको दिए जा रहे हैं।

1: Boot Sector Virus
2: Direct action virus
3: Resident virus
4: Web scripting virus
5: Polymorphic Virus
6: File infector virus
7: Multipartite virus
8: Macro virus
9: Overwrite Virus
10: Browser hijacker

डिवाइस को मैलवेयर अटैक से कैसे बचाएं?

नीचे आपको कुछ ऐसे तरीके और उपाय बताए जा रहे हैं जिसे अगर आप करते हैं तो आप अपने डिवाइस को मैलवेयर वायरस के अटैक से बचा सकते हैं और अपने आवश्यक डाटा को चोरी होने से भी बचा सकते हैं।

1: वायरस से बचने के लिए हमेशा आपको अपने डिवाइस में एक स्ट्रांग एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करना चाहिए, जो फ्री भी हो सकता है या फिर पेड भी हो सकता है।

2: आपने अपने डिवाइस में जो भी एंटीवायरस सॉफ्टवेयर लगा कर के रखा है, आपको टाइम टू टाइम उसे अपडेट भी करते रहना चाहिए ताकि आपको एडवांस सिक्योरिटी प्राप्त होती रहे।

3: किसी भी दूसरे व्यक्ति के पेनड्राइव, सीडी, डीवीडी या फिर किसी भी दूसरे व्यक्ति के एक्सटर्नल डिवाइस को आपको अपने डिवाइस में बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं करना है।

4: अगर आप इंटरनेट से कोई गाना, वीडियो, फोटो, मूवी, सॉफ्टवेयर या फिर गेम डाउनलोड कर रहे हैं तो आपको यह ख्याल रखना है कि जिस वेबसाइट से आप यह चीजें कर रहे हैं वह वेबसाइट ट्रस्टेबल है अथवा नहीं। आपको हमेशा लीगल वेबसाइट से ही इन सभी कामों को करना चाहिए।

5: आपको अपने डिवाइस में फायर बॉल का यूज करना चाहिए। यह इंटरनेट और आपके डिवाइस के बीच में सिक्योरिटी के तहत काम करता है। इससे होता यह है कि अगर कोई हैकर आपके डिवाइस पर वायरस का अटैक करता है तो उसका अटैक अनसक्सेसफुल हो जाता है क्योंकि फायर बॉल तुरंत ही इलीगल एक्टिविटी को खत्म कर देता है।

6: आपको हमेशा अपने डिवाइस में सिक्योरिटी पासवर्ड लगा कर के रखना है और पासवर्ड भी आप को स्ट्रांग बना करके ही रखना है ताकि आसानी से कोई आपके पासवर्ड के बारे में ना जान सके।

7: अगर आपको अपनी ईमेल या फिर जीमेल आईडी पर ऐसा कोई ईमेल प्राप्त होता है जो स्पैम फोल्डर में चला गया है या फिर आपको लगता है कि वह इमेल फर्जी है तो आपको उसे भूल कर के भी ओपन नहीं करना चाहिए।

8: अपने डिवाइस पर आए हुए किसी भी ऐसे लिंक पर आप को क्लिक नहीं करना चाहिए जिसके बारे में आप नहीं जानते हैं, साथ ही अगर किसी वेबसाइट का यूआरएल थोड़ा अजीब सा है तो भी आप को उसके ऊपर क्लिक नहीं करना चाहिए।

9: कभी-कभी आपको किसी ऐसी वेबसाइट पर लॉगइन करने की आवश्यकता होती है जो आपसे gmail-login मांगती है। ऐसे में आपको वहां पर अपनी ओरिजिनल जीमेल आईडी की जगह पर डुप्लीकेट या फिर टेंपरेरी जीमेल आईडी का इस्तेमाल करना चाहिए।


10: आपकी स्क्रीन पर जब कभी भी कोई पॉप अप मैसेज आए तब आपको उसके उपर भूल कर के भी नहीं क्लिक करना चाहिए।

दोस्तों उम्मीद है मैलवेयर से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां आपको आज के इस लेख में मिल चुकी होंगी। और आप जान गये होगे की मैलवेयर क्या है? Malware Kya Hai? Malware Meaning in Hindi इसके प्रकार? कैसे काम करता है? all about antivirus in hindi?

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Hope की आपको मैलवेयर क्या है? Malware Kya Hai? Malware Meaning in Hindi का यह पोस्ट पसंद आया होगा, और हेल्पफ़ुल लगा होगा।


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