मॉनिटर क्या है और इसके प्रकार (What is Monitor in Hindi)

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जिस प्रकार से कंप्यूटर के लिए उसके साथ जुड़े हुए कई भाग महत्वपूर्ण होते हैं, उसी प्रकार से मॉनिटर की भी गिनती कंप्यूटर के महत्वपूर्ण भागों में होती है। अगर किसी कंप्यूटर में मौजूद मॉनिटर की स्क्रीन खराब हो जाती है, तो ऐसी अवस्था में आप लगभग कुछ भी काम कंप्यूटर पर नहीं कर सकेंगे। इसलिए मॉनिटर कंप्यूटर का अहम् हिस्सा होता है जिसके बारे में हम इस आर्टिकल में जानेंगे कि “मॉनिटर क्या है” और “मॉनिटर का उपयोग क्या है।”

मॉनिटर क्या है और इसके प्रकार (What is Monitor in Hindi)


क्योंकि आपको कुछ भी कंप्यूटर की स्क्रीन पर दिखाई नहीं देगा। कई प्रकार के महत्वपूर्ण काम मॉनिटर के द्वारा किए जाते हैं। आइए इस पेज पर मॉनिटर क्या है के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करते हैं।

अनुक्रम

मॉनिटर क्या है? (What is Monitor in Hindi)

कंप्यूटर में दो प्रकार के डिवाइस होते हैं इनपुट डिवाइस और आउटपुट डिवाइस। अब इनमें से जो यह मॉनिटर है यह कंप्यूटर के आउटपुट डिवाइस की कैटेगरी में आने वाला डिवाइस है। हम जब किसी भी प्रकार के डाटा को कंप्यूटर में इनपुट करते हैं तो डाटा को स्क्रीन पर दिखाने का काम मॉनिटर के द्वारा ही पूरा किया जाता है।

इसे अन्य नाम के तहत विजुअल डिस्प्ले यूनिट कहा जाता है। यानी कि जानकारियों को स्क्रीन पर दिखाने वाला। मॉनिटर को कंप्यूटर का महत्वपूर्ण भाग इसलिए माना जाता है, क्योंकि आप चाहे कंप्यूटर में कुछ भी इंटर क्यों ना करें, जब तक मॉनिटर सही प्रकार से काम नहीं करेगा, तब तक आप कंप्यूटर में इनपुट किए गए डाटा या फिर किसी भी प्रकार की जानकारी को अपनी आंखों से नहीं देख सकेंगे,


क्योंकि किसी भी प्रकार की जानकारी आपको मॉनिटर पर ही दिखाई देती है। मॉनिटर के द्वारा फोटो, टेक्स्ट और वीडियो के रूप में जानकारियां दिखाई जाती है। सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के साथ मॉनिटर कनेक्ट हुआ रहता है। जब हम कीबोर्ड के द्वारा अथवा माउस का इस्तेमाल करके कोई भी डाटा इनपुट करते हैं तो कंप्यूटर का आउटपुट डिवाइस अर्थात मॉनिटर उसी समय रिजल्ट को तुरंत ही स्क्रीन पर दिखाना चालू कर देता है।

जैसे कि अगर आपने कीबोर्ड में ‌A टाइप किया तो ए लेटर तुरंत ही आपके मॉनिटर की स्क्रीन पर टाइप हो जाता है, वहीं अगर आपने माउस के द्वारा करसर को इधर-उधर किया तो करसर इधर उधर होने की गतिविधि भी आपको मॉनिटर पर दिखाई देती है। 

मॉनिटर का उपयोग (Use of Monitor in Hindi)

कंप्यूटर में किसी भी काम को करने के लिए मॉनिटर की सहायता ली जाती है। अगर कंप्यूटर में मॉनिटर ना हो तो हमें कंप्यूटर पर कुछ भी काम करने में बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। यहां तक कि हम कंप्यूटर में किए जाने वाले सामान्य काम जैसे कि इंटरनेट चलाना या कोई वीडियो देखना या फिर फोटो ओपन करना भी नहीं कर सकेंगे।


इसी बात से आप समझ सकते हैं कि मॉनिटर कंप्यूटर के लिए कितना उपयोगी है। इसके द्वारा गेमिंग, ईमेल भेजना और प्राप्त करना, डाटा एंट्री, वेब ब्राउजिंग और बिजनेस से संबंधित कई काम किए जा सकते हैं। यहां तक कि वर्ड प्रोसेसिंग, वेब ब्राउजिंग इत्यादि काम भी मॉनिटर की वजह से ही पॉसिबल हो पाते हैं।

मॉनिटर का इतिहास (History of Monitor in Hindi)

मॉनिटर के इतिहास अर्थात मॉनिटर की हिस्ट्री के बारे में चर्चा की जाए तो पहली बार साल 1922 में पहले कंप्यूटर मॉनिटर का निर्माण किया गया था। इस कंप्यूटर मॉनिटर में कैथोड रे ट्यूब का इस्तेमाल किया गया था। इसलिए संक्षेप में इसे सीआरटी मॉनिटर कहते हैं।

सीआरटी मॉनिटर का आकार काफी ज्यादा था और यह वजन में भी काफी अधिक भारी थे पहले टेलीविजन स्क्रीन का निर्माण करने के लिए भी सीआरटी का इस्तेमाल किया जाता था परंतु वर्तमान के समय में जो टीवी आ रही है।


उनमें सीआरटी के जगह पर एलसीडी अर्थात लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले मॉनिटर का काफी अधिक इस्तेमाल किया जा रहा है जिसका निर्माण साल 2000 के आसपास में किया गया था यह वजन में हल्का होता है साथ ही पतला भी होता है।

मॉनिटर का फुल फॉर्म (Full Form of Monitor in Hindi)

मॉनिटर के फुल फॉर्म से काफी कम ही लोग परिचित हैं परंतु बता दें कि इसका पूरा फुल फॉर्म मांस ऑन न्यूटन इस ट्रेन ऑन रेट होता है। इसे नीचे सामान्य भाषा में समझाया गया है।

  • M – Mass
  • O – On
  • N – Newton
  • I – Is
  • T – Train
  • O – On
  • R – Rat

monitor kya hai


मॉनिटर का परिचय (Introduction of Monitor in Hindi)

मॉनिटर और टीवी का आकार लगभग एक जैसा ही होता है। हालांकि इन दोनों में सिर्फ इतना ही अंतर होता है कि मॉनिटर का डिस्प्ले रेजोल्यूशन टीवी की तुलना में ज्यादा होता है। बता दें कि मॉनिटर की क्वालिटी की पहचान मॉनिटर के सॉल्यूशन, रिफ्रेश रेट और डॉटपिच से की जाती है। मॉनिटर में ग्राफिक और छोटे अक्षर को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

Karl Ferdinand Braun नाम के जर्मन साइंटिस्ट के द्वारा साल 1897 में मॉनिटर का आविष्कार किया गया था।

मॉनिटर के प्रकार (Types of Monitor in Hindi)

शुरुआती दौर में जब मॉनिटर आते थे, तब उनके प्रकार बहुत ही कम थे परंतु वर्तमान के समय में डिजाइन और स्ट्रक्चर के आधार पर अनेक प्रकार के मॉनिटर मार्केट में उपलब्ध है, जिनमें से कुछ प्रमुख मॉनिटर के प्रकार निम्नानुसार है।

  • CRT (Cathode Ray Tube)
  • LCD (Liquid Crystal Display)
  • LED (Light Emitting Diode)
  • SED (Surface Conducted Electron Emitting Display)
  • Plasma Monitor

1: CRT (Cathode Ray Tube)

यह एक अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला आउटपुट डिवाइस है, जिसके द्वारा फोटो को दिखाने के लिए कैथोड रे ट्यूब टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है। आपके घर में जो टेलीविजन की स्क्रीन है, उसमें भी कहीं ना कहीं इसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ होता है। 

इसके एक साइड में इलेक्ट्रॉनिक की गन होती है और दूसरे साइड में फ्लोरोसेंट स्क्रीन उपलब्ध होती है। हालांकि वर्तमान के समय में अधिक वजन और ज्यादा महंगे होने की वजह से इनका इस्तेमाल कम किया जाने लगा है।

2: LCD (Liquid Crystal Display)

इसे आप सीटीआर मॉनिटर का थोड़ा अपडेटेड वर्जन कह सकते हैं, क्योंकि जिस प्रकार से सीटीआर मॉनिटर अधिक वजन और ज्यादा महंगा होता है, उस प्रकार से यह थोड़ा सा कम वजनी होता है। इस मॉनिटर का निर्माण करने के लिए लिक्विड क्रिस्टल का इस्तेमाल किया जाता है, जो साइज में पतले तो होते ही हैं, इसके अलावा उनका वेट भी कम ही होता है। इसलिए इन्हें स्थापित करने के लिए अधिक स्पेस की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

3: LED ( Light Emitting Diode )

एलसीडी मॉनिटर और सीआरटी मॉनिटर की कंपैरिजन में एलईडी मॉनिटर के द्वारा बहुत ही कम इलेक्ट्रिसिटी का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बावजूद यह टिकाऊ माने जाते हैं। इसे एनवायरमेंट फ्रेंडली मॉनिटर भी कहा जाता है। हालांकि दूसरे मॉनिटर की तुलना में इसकी कीमत थोड़ी सी ज्यादा होती है।

4: SSD (Surface Conducted Electron Emitting Display)

इस मॉनिटर में high-resolution वाला डिस्प्ले होता है। इसका निर्माण कैनन और तोशीबा नाम की कंपनी के द्वारा मिलकर के किया गया है। अगर सीटीआर मॉनिटर से इसकी तुलना की जाए तो इस मॉनिटर के द्वारा सीटीआर मॉनिटर की तुलना में तकरीबन 50 पर्सेंट कम इलेक्ट्रिसिटी का इस्तेमाल किया जाता है। इलेक्ट्रॉन एमिटेड अरे और फास्फोरस की परत का इस्तेमाल करके इस मॉनिटर का निर्माण किया जाता है।

5: Plasma Monitor

प्लाज्मा मॉनिटर स्क्रीन की ब्राइटनेस काफी बेहतरीन होती है। इसके द्वारा प्लाज्मा डिस्चार्ज सिद्धांत पर काम किया जाता है। सीटीआर की तुलना में प्लाज्मा मॉनिटर बहुत ही पतला होता है और यह काफी साईनी भी होते हैं।

मॉनिटर का काम (Work of Monitor in Hindi)

कंप्यूटर के साथ जितने भी भाग जुड़े हुए होते हैं, उनका कुछ ना कुछ काम अवश्य होता है। मॉनिटर की गिनती आउटपुट डिवाइस में होती है। यानी कि जो आउटपुट डिवाइस होते हैं, वह वर्क इंफॉर्मेशन देते हैं। इसलिए माना जा सकता है कि मॉनिटर का भी मुख्य काम वर्क की इंफॉर्मेशन देना ही होगा।

हालांकि कुछ अन्य आउटपुट डिवाइस हार्ड कॉपी के तौर पर भी इंफॉर्मेशन देते हैं, जैसे कि प्रिंटर, वहीं कुछ ऐसे आउटपुट डिवाइस भी हैं जिनके द्वारा सॉफ्ट कॉपी के तौर पर इंफॉर्मेशन दी जाती है। जैसे कि मॉनिटर कंप्यूटर पर आप जो भी काम करते हैं वह सभी काम आपको मॉनिटर पर ही दिखाई देता है।

अगर कंप्यूटर का मॉनिटर खराब हो जाता है या फिर कंप्यूटर में मॉनिटर नहीं है तो ऐसी अवस्था में कंप्यूटर में कौन सा काम हो रहा है यह आप नहीं देख सकेंगे जिससे आपको कंप्यूटर पर जरूरी काम को करने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। आपको यह पता ही नहीं चलेगा कि आप कंप्यूटर पर जो काम कर रहे हैं वास्तव में वही काम हो रहा है या फिर कोई अन्य काम हो रहा है।

मॉनिटर के कनेक्टर (Connectors of Monitor in Hindi)

कंप्यूटर को मॉनिटर के साथ जोड़ने के लिए अथवा मॉनिटर को कंप्यूटर के साथ जोड़ने के लिए कनेक्टर की जरूरत होती है। इसलिए नीचे दिए गए कनेक्टर में से कोई भी कनेक्टर आपके पास कंप्यूटर को मॉनिटर से अथवा मॉनिटर को कंप्यूटर से जोड़ने के लिए होना चाहिए।

 DVI

इसका पूरा मतलब डिजिटल विजुअल इंटरफेस होता है, जिसका इस्तेमाल टीवी में किया जाता है। हालांकि अधिकतर इसका इस्तेमाल कंप्यूटर मॉनिटर और प्रोजेक्टर में किया जाता है। इसके टोटल तीन प्रकार उपलब्ध है।

DisplayPort

टीवी अथवा मॉनिटर या फिर प्रोजेक्टर को कनेक्ट करने के लिए डिस्प्ले बोर्ड का इस्तेमाल किया जाता है। यह आपको स्टैंडर्ड और मिनी डिस्पले पोर्ट जैसे प्रकारों में मिलता है।

VGA

इसका पूरा नाम Video Graphics Array होता है। अन्य नाम के तौर पर इसे Video Graphics Adapter भी कह सकते हैं। साल 1987 में आईबीएम के द्वारा इसका डेवलपमेंट किया गया था। सामान्य तौर पर अगर इसके उपयोग के बारे में बात की जाए तो कंप्यूटर को प्रोजेक्टर, टीवी या फिर मॉनिटर के साथ जोड़ने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। आप इसकी खरीदारी ऑनलाइन या फिर ऑफलाइन कर सकते हैं। इसकी कीमत ₹100 के आसपास में हो सकती है।

Thunderbolt Cable

इसका इस्तेमाल कीबोर्ड, प्रिंटर, माउस और स्केनर इत्यादि को कंप्यूटर के साथ जोड़ने के लिए किया जाता है। यह एक हार्डवेयर इंटरफ़ेस होता है।

HDMI Cable

इसका फुल फॉर्म हाई डेफिनेशन मल्टीमीडिया इंटरफेस होता है, क्योंकि यह एक केबल कनेक्शन है। इसका इस्तेमाल ब्लू रे अथवा डीवीडी प्लेयर या फिर टीवी के लिए होता है।

USB Cable

यूएसबी का फुल फॉर्म यूनिवर्सल सीरियल बस होता है। इसका पहला एडिशन साल 1996 में जारी किया गया था। कीबोर्ड, माउस, डिजिटल कैमरा, प्रिंटर, स्कैनर, माइक्रोफोन, पेनड्राइव और मोबाइल चार्जर जैसे कई इलेक्ट्रॉनिक साधनों में इसका इस्तेमाल किया जाता है।

monitor
Source – Wikipedia

रंग के आधार पर मॉनिटर के प्रकार

कलर के आधार पर मुख्य तौर पर मॉनिटर को तीन प्रकार में बांटा गया है।

  • Monochrome (मोनोक्रोम)
  • Gray Scale (ग्रे – स्केल)
  • Color Monitor (रंगीन मॉनिटर)

1: Monochrome (मोनोक्रोम) – मोनोक्रोम मॉनिटर के द्वारा जो आउटपुट होते हैं, उसे ब्लैक एंड वाइट फॉर्मेट में प्रदर्शित किया जाता है।

2: Gray Scale (ग्रे – स्केल) – इस प्रकार के मॉनिटर के द्वारा जो आउटपुट होते हैं उसे ग्रे कलर में प्रदर्शित किया जाता है।

3: Color Monitor (रंगीन मॉनिटर) – कलर मॉनिटर ऐसे मॉनिटर होते हैं जो हाई रेजोल्यूशन में ग्राफिक को डिस्प्ले करने की कैपेसिटी रखते हैं।

मॉनिटर की विशेषताएँ 

आइए जानते हैं कि मॉनिटर की प्रमुख विशेषताएं क्या है।

1: रेजोल्यूशन – काफी लोग नहीं जानते हैं कि रेजोल्यूशन का मतलब क्या होता है, तो बता दे कि इसका अर्थ यह होता है कि जो पिक्सेल होते हैं वह स्क्रीन पर कैसे पैक होते हैं। ग्राफिक फोटो में पिक्सेल एक अकेला बिंदु होता है। मॉनिटर के द्वारा पिक्सल को अलग-अलग पिक्सेल में डिवाइड किया जाता है और फोटो को दिखाया जाता है। यह फोटो कॉलम के तौर पर व्यवस्थित होती हैं।

अधिकतर जो डिस्प्ले डिवाइस होते हैं, वह पिक्सेल पर ही काम करते हैं। अगर किसी डिस्प्ले में पिक्सेल की मात्रा ज्यादा होगी, तो उस डिस्प्ले का रेजोल्यूशन भी उतना ही ज्यादा होगा। कहने का मतलब है कि जिस फोटो का रेजोल्यूशन ज्यादा होता है, वह बिल्कुल साफ और स्पष्ट दिखाई देती है‌।

2: डॉट-पिच – यह माप करने की एक तकनीकी है। इसके द्वारा यह पता चलता है कि दो पिक्सेल के बीच होरिजेंटल की दूरी कितनी है। यही नहीं इसके द्वारा मॉनिटर की क्वालिटी को भी डिस्प्ले किया जाता है।

3: साइज़ – मॉनिटर का जो आकार होता है उसे लंबाई और चौड़ाई में मापा जाता है। Dianalog Inch के  Terms में मॉनिटर का नाप किया जाता है।

4: रिफ्रेश रेट – इसके द्वारा यह पता चलता है कि आखिर हर सेकंड में कितनी बार मॉनिटर को रिफ्रेश करना है। मॉनिटर के द्वारा लगातार वर्क किया जाता है और एक के बाद एक फोटो दिखाई जाती है। इस प्रकार से एक के बाद दूसरी फोटो की दिखाने की जो स्पीड होती है उसे रिफ्रेश रेट कहते हैं।

टीवी और मॉनिटर में अंतर

अगर आप ध्यान से मॉनिटर और टीवी की स्क्रीन को देखेंगे तो दोनों एक जैसी ही दिखाई देती है, परंतु इसके बावजूद इनमें काफी अंतर होता है। आइए जानते हैं कि आखिर टीवी और मॉनिटर में क्या डिफरेंस है।

  • टीवी का साइज अलग-अलग होता है परंतु मॉनिटर का साइज छोटा होता है।
  • टीवी से बेहतरीन पिक्चर क्वालिटी मॉनिटर की होती है।
  • टीवी की तुलना में ज्यादा इनपुट कनेक्टर मॉनिटर में होते हैं।
  • टीवी और मॉनिटर के रेजोल्यूशन की तुलना की जाए तो मॉनिटर का रेजोल्यूशन ज्यादा होता है।
  • मॉनिटर का Viewing Angle 110 वही टीवी का Viewing Angle 160 होता है।
  • टीवी की कंपैरिजन में मॉनिटर का रिफ्रेश रेट बेहतरीन होता है।

मॉनिटर के भाग (Parts of Monitor in Hindi)

मॉनिटर का निर्माण अलग-अलग प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक भाग को मिला करके किया जाता है। इसमें जो भी भाग होते हैं उन सभी का अपना अलग-अलग काम होता है। नीचे कुछ प्रमुख मॉनिटर के भाग की जानकारी दी जा रही है।

LCD Screen

एलसीडी स्क्रीन वाले मॉनिटर का इस्तेमाल आज सबसे ज्यादा किया जा रहा है। इसकी प्रमुख वजह है कि यह काफी पतले भी होते हैं और हल्के भी होते हैं। इसलिए इन्हें किसी भी स्थान से उठा कर के किसी भी दूसरे स्थान पर ले जाकर के आसानी से स्थापित किया जा सकता है। इन्हें यहां वहां ले जाने के लिए ज्यादा कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता है।

Interface Board

इंटरफ़ेस बोर्ड नाम की एक चीज भी मॉनिटर में होती है। इसके द्वारा जितने भी काम हो रहे हैं उन पर कंट्रोल कर के रखा जाता है।

Amplifier Circuit

वीडियो सिग्नल को और भी ज्यादा बढ़ाने के लिए एंपलीफायर सर्किट वर्क करता है।

Layered Glass

एलसीडी मॉनिटर की स्क्रीन का निर्माण करने के लिए गिलास के विभिन्न परतो का इस्तेमाल किया जाता है। इन्हीं ग्लास की परत के द्वारा स्क्रीन पर लाइट को इधर से उधर किया जाता है।

Laptop Stand

अगर आपको मॉनिटर को किसी डेस्क पर खड़ा करना है तो इसके लिए लैपटॉप स्टैंड बनाया गया है।

Power Connector

मॉनिटर में जो पावर कनेक्टर होते हैं, उनके द्वारा अलग-अलग कंपोनेंट में पावर भेजी जाती है और इनके द्वारा ही सभी को आपस में जोड़ करके रखा जाता है।

मॉनिटर कैसे काम करता है?

मॉनिटर में एक स्क्रीन उपलब्ध होती है जिसे मॉनिटर का डिस्प्ले एरिया कहा जाता है। एग्जांपल के तौर पर आप जब माउस का इस्तेमाल करके करसर को इधर-उधर करते हैं, तो कंप्यूटर में लगे हुए मॉनिटर की स्क्रीन पर माउस प्वाइंटर भी एक जगह से दूसरी जगह जाता हुआ दिखाई देता है।

इसके अलावा एचडीएमआई केबल अथवा वीजीए केबल के द्वारा सिस्टम यूनिट से जोड़ करके सिस्टम यूनिट में मौजूद वीडियो कार्ड की सहायता से जब जानकारी मॉनिटर तक पहुंचाई जाती है तो वह मॉनिटर अपने स्क्रीन पर दिखाने का काम करता है। आप जो भी एक्टिविटी अपने कंप्यूटर में करते हैं उसे तुरंत ही स्क्रीन पर मॉनिटर ही दिखाता है।

गेमिंग मॉनिटर क्या है?

इस प्रकार के मॉनिटर का निर्माण प्रोफेशनल गेम खेलने वाले लोगों के लिए किया गया है। गेमिंग मॉनिटर में आपको बेहतरीन रिफ्रेश रेट, अच्छा रिस्पांस टाइम मिल जाता है। 

इस मॉनिटर का इस्तेमाल ना सिर्फ गेम खेलने के लिए ही किया जाता है बल्कि वीडियो एडिटिंग करने के लिए, फोटो की एडिटिंग करने के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है। इस प्रकार के मॉनिटर में हाई रिफ्रेश रेट, हाई रेजोल्यूशन और गुड रिस्पांस टाइम होता है।

सर्वश्रेष्ठ मॉनिटर ब्रांड लिस्ट

वैसे तो हमारे देश में कई देशी और विदेशी कंपनियां हैं, जिनके द्वारा मॉनिटर का निर्माण किया जाता है, परंतु सभी ब्रांड के द्वारा निर्मित मॉनिटर बेहतरीन क्वालिटी के हो, इसकी कोई भी गारंटी नहीं होती। इसलिए आपको फेमस ब्रांड के मॉनिटर की ही खरीदारी करनी चाहिए। नीचे कुछ प्रमुख और भरोसेमंद मॉनिटर निर्मित करने वाले ब्रांड के नाम आपको बताए जा रहे हैं जिनके द्वारा निर्मित मॉनिटर की खरीदारी आप कर सकते हैं।

  • Acer.
  • ASUS.
  • Dell.
  • Gigabyte.
  • HP.
  • LG.
  • MSI.
  • Samsung

मॉनिटर की कीमत

मॉनिटर की कीमत इस बात पर डिपेंड करती है कि आखिर मॉनिटर का निर्माण कौन से ब्रांड के द्वारा किया गया है और उसकी बिल्ड क्वालिटी कैसी है, साथ ही उसमें कौन-कौन सी विशेषताएं मौजूद है। हमने जब ऑनलाइन मॉनिटर के दाम की चेकिंग की तब हमें अलग अलग ब्रांड के मॉनिटर की कीमत अलग अलग दिखाई दी। नीचे कुछ प्रमुख ब्रांड के द्वारा निर्मित मॉनिटर के दाम आपको बताए जा रहे हैं।

  • Acer HA220Q 54.61 cm (21.5 inch: ₹8,299.00
  • ZEBRONICS MT52-ZEB A19HD 46.9 cm (18.5 inch): ₹4,999.00
  • ENTER A06 39.1 cm (15.4 inch): ₹2,899.00

मॉनिटर के फायदे 

मॉनिटर के एडवांटेज क्या है अथवा मॉनिटर के लाभ क्या है आइए जानते हैं।

  • वर्तमान के समय में जो मॉनिटर आ रहे हैं, वह मॉनिटर सीटीआर मॉनिटर की तुलना में बहुत ही कम इलेक्ट्रिसिटी का इस्तेमाल करते हैं।
  • आज के समय में जो मॉनिटर आ रहे हैं उनमें लिक्विड क्रिस्टल डिस्पले और एलईडी बैकलाइटिंग का इस्तेमाल किया जाता है।
  • मॉनिटर के द्वारा इंफॉर्मेशन को ग्राफिक फॉर्मेट में प्रदर्शित किया जाता है, जिसकी वजह से यूजर को समझने में बहुत ही आसानी होती है।
  • एलसीडी मॉनिटर की जो फोटो होती है उसकी 
  • Sharpness ज्यादा होती है।
  • ट्रैकबॉल और टच स्क्रीन माउस की तुलना में मॉनिटर ज्यादा तेज होते हैं।

मॉनिटर के नुकसान 

जिस प्रकार से मॉनिटर के फायदे के बारे में जानना आवश्यक है, उसी प्रकार से मॉनिटर के नुकसान या फिर मॉनिटर के डिसएडवांटेज के बारे में जानना आवश्यक है।

  • कुछ मॉनिटर सस्ते हो सकते हैं तो कुछ मॉनिटर महंगे भी हो सकते हैं।
  • जो सीटीआर मॉनिटर होते हैं वह ज्यादा जगह लेते हैं और उनका वजन काफी अधिक होता है। इसीलिए उनका स्थानांतरण करना थोड़ा सा चुनौती भरा होता है।

FAQ

मॉनिटर क्या है?

कंप्यूटर का महत्वपूर्ण कंपोनेंट और आउटपुट डिवाइस मॉनिटर है।

मॉनिटर क्या है कितने प्रकार के होते हैं?

मॉनिटर का मतलब क्या होता है और आखिर मॉनिटर कितने प्रकार के होते हैं या फिर कलर के आधार पर मॉनिटर के प्रकार कितने हैं, इन सभी की जानकारी आर्टिकल में दी गई है।

मॉनीटर क्या कार्य करता है?

आप अपने कंप्यूटर में जो भी एक्टिविटी करते हैं उसे स्क्रीन पर दिखाने का काम मॉनिटर करता है। जैसे कि आप कोई वीडियो चालू कर रहे हैं या फिर कोई फोटो ओपन कर रहे हैं तो वह आपकी स्क्रीन पर ही दिखाई देती है।

मॉनिटर कितने प्रकार के होते हैं?

मॉनिटर मुख्य तौर पर पांच प्रकार के होते हैं जिनके नाम Cathode Ray Tube, Liquid Crystal Display, Light Emitting Diode, Surface Conducted Electron Emitting Display, Plasma Monitor है।

मॉनिटर क्या कार्य करता है?

मॉनिटर के द्वारा आउटपुट दिखाने का काम किया जाता है।

मॉनिटर का फुल फ्रॉम क्या होता है?

मांस ऑन न्यूटन इस ट्रेन ऑन रेट

यह भी पढ़े:

Hope आप समझ पाए होंगे की मॉनिटर क्या है? इसका इस्तेमाल कैसे करते है? एक कंप्यूटर के लिए उपयोगी क्यों है? तथा यह आर्टिकल आपके लिए हेल्पफुल भी रहा होगा।

इस आर्टिकल में जो बातें मैंने आपको बताई हैं, अगर वो आपको अच्छी लगे तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर कीजिए।

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हेलो दोस्तों, मेरा नाम अंकुर सिंह है और में New Delhi से हूँ। मैंने B.Tech (Computer Science) से ग्रेजुएशन किया है। और में इस ब्लॉग पर टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर, मोबाइल और इंटरनेट से जुड़े लेख लिखता हूँ।

5 COMMENTS

  1. Sir, your artical it’s very helpful I like your tutorials sir i want a queery sir asa koi tarika h jisse mobile me apn koi app use karte h but ram clean karne par ya deep clean karne pr vo app bhi remove ho jata h to kya us ap ko always pin karke ya lock kar sakte h jisse ke vo clean karne pr remove n ho. Sir please reply

  2. अपने बहुत ही अच्छी जानकारी साँझा की है आपके इस पोस्ट को पढ़कर बहुत अच्छा लगा और इस ब्लॉग की यह खास बात है कि जो भी लिखा जाता है वो बहुत ही understandable होता है.

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