सैटेलाइट क्या है? – What Satellite In Hindi

2

हम अक्सर सेटेलाइट के बारे में tv, समाचारों में सुनते रहते हैं, और हाल ही में Isro ने सैटेलाइट को भी लॉन्च किया है। परंतु ऐसे अनेक शब्द होते हैं जो हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में सुनते तो है, परंतु हमें इनके बारे में विशेष जानकारी नहीं होती। ठीक उसी तरह यह सैटेलाइट शब्द है, जिसका हिंदी अर्थ उपग्रह है, हम यह तो जानते सेटेलाइट बेहद उपयोगी होता है लेकिन वास्तव में सैटेलाइट क्या है? (What Satellite In Hindi) इसका क्या काम होता है? कैसे काम करता है? इसके प्रकार? पहेला सैटेलाइट कब और किसने बनाया? इस विषय पर काफी कम लोगों को ज्ञान होता है।

इसलिए यदि आप भी सेटेलाइट के बारे में पूरी जानकारी सरल शब्दों में पाना चाहते हैं। तो आज का हमारा यह आर्टिकल उन पाठकों के लिए है, जो सेटेलाइट क्या है? इसका क्या काम होता है? यह क्यों जरूरी है! सैटेलाइट को किसने और कब बनाया? इसके क्या क्या उपयोग एवं फायदे हैं! सेटेलाइट कितने प्रकार के होते हैं। इसकी जानकारी पाना चाहते हैं। तो इस विषय पर पूरी जानकारी पाने के लिए आज के इस लेख को अंत तक पढ़ना ना भूलें! तो यदि आप तैयार हैं तो आज के इस लेख को शुरू करते हैं, और जानते हैं यह सेटेलाइट क्या होता है? (What Satellite In Hindi)


सैटेलाइट क्या है? – What Satellite In Hindi

यदि हम सैटेलाइट की परिभाषा को जानें तो “यह एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है, जो विशेष उद्देश्य के लिए अंतरिक्ष
में पृथ्वी या अन्य ग्रह (Planet) की परिक्रमा करता है.” दोस्तों यदि हम इसे Nasa के शब्दों में समझें तो सेटेलाइट एक ऑब्जेक्ट है, जो किसी विशाल जॉब्जेक्ट के चारों ओर घूमता है। यदि आप पृथ्वी को देखें तो यह भी एक सेटेलाइट है, जो सूर्य के चारों ओर घूमती है (परिक्रमा करती है) इसी प्रकार चांद जो earth के चारों ओर घूमता है, उसे भी सेटेलाइट की श्रेणी में गिना जाता है! परंतु दोस्तों Earth एवं Moon यह दोनों सेटेलाइट्स क्योंकि प्राकृतिक हैं, अतः इन्हें “नेचुरल सैटेलाइट” के नाम से जाना जाता है।

लेकिन आमतौर पर जब हमें सेटेलाइट शब्द सुनाई देता है, या सेटेलाइट की बात होती है तो हमारा अभिप्राय Man Made सैटेलाइट से होता है, दोस्तों यह मैन-मेड सैटेलाइट वह मशीन होती हैं जो मनुष्य द्वारा निर्मित की जाती हैं! मनुष्य द्वारा ही इन्हें space (अंतरिक्ष) में लांच किया जाती हैं

और यदि आप सेटेलाइट्स को देखें तो अब तक हजारों सेटेलाइट विभिन्न देशों द्वारा अंतरिक्ष में लॉन्च जा चुकी हैं। और विभिन्न समय अनुसार इन सेटेलाइट्स को जब लॉन्च किया जाता है तो इन इन्हें लांच करने का उद्देश्य (Purpose) भी अलग-अलग होता है।

कुछ सेटेलाइट्स को हमारे Planet के बारे में अधिक जानकारी पाने के लिए लांच किया जाता है, जबकि कुछ अन्य प्लैनेट्स के बारे में सूर्य तथा अन्य Objects के विषय पर जानकारी के लिए लांच किए जाते हैं।


दोस्तों यह सेटेलाइट वैज्ञानिकों (साइंटिस्ट) को पृथ्वी सोलर सिस्टम तथा इस यूनिवर्स को समझने में मदद करती हैं! इसके अलावा भी कुछ सेटेलाइट लांच की जाती हैं, जो टीवी सिग्नल, मोबाइल सिग्नल इत्यादि के उद्देश्य से लांच की जाती हैं।

तो दोस्तों उम्मीद है इस प्रकार आप समझ चुके होंगे कि वास्तव में सैटेलाइट क्या है? (What Satellite In Hindi) आइए अब हम जानते की सेटेलाइट क्यों जरूरी होती है?

सेटेलाइट क्यों जरूरी है?

दोस्तों जिस प्रकार Drone कैमरा काफी उँची हाइट से पृथ्वी के बड़े भू-भाग को एक फोटो/video में कैप्चर कर पाता है! इसी तरह सैटेलाइट भी आसमान में काफी ऊपर स्तिथ होते हैं, जिस वजह से वह पृथ्वी का बड़े भाग को देख पाते हैं।

इसके अलावा सैटेलाइट अंतरिक्ष नजारे को clearly देख पाते हैं ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वह बादलों तथा हवा के ऊपर दूरी तय कर पाते हैं।

दोस्तों जब सैटेलाइट का अविष्कार नहीं हुआ था तो इनके इस्तेमाल से पूर्व टीवी सिग्नल अधिक दूरी तय नहीं कर पाते थे! तथा tv सिग्नल सिर्फ स्ट्रैट lines तक ही ट्रेवल कर पाते थे।

लेकिन सेटेलाइट के आविष्कार के साथ ही टीवी सिग्नल को अंतरिक्ष में स्थापित किया जा सका। जिससे आज हम मैदानी इलाके, पहाड़ी इलाके कहीं पर भी सेटेलाइट के माध्यम से अच्छे सिंगल्स में टीवी देख पाते हैं।

इसके अलावा phone कॉल्स की बात करें! तो सैटेलाइट से पूर्व मोबाइल सिग्नल को स्थापित करने में अधिक खर्चा आने के साथ-साथ अधिक दूरी पर telephones Wires को सेट-अप करने के लिये काफी लागत आने के साथ ही कठिन भी होता था।

परंतु सेटेलाइट्स की मदद से टीवी सिग्नल तथा mobile सिग्नल्स को सेटेलाइट्स पर भेजा गया। सैटेलाइट की मदद से आज पृथ्वी पर सिग्नल्स आसानी से विभिन्न स्थानों पर प्राप्त होते हैं।

दोस्तों आइए हम जान लेते हैं कि सेटेलाइट का इस्तेमाल किन किन स्थानों पर कहां-कहां किया जाता है?

सैटेलाइट का इस्तेमाल – Use of Satellite in Hindi 

Communication

सैटेलाइट का इस्तेमाल कम्युनिकेशन संचार के उद्देश्य से किया जाता है। न सिर्फ आज Signals को ही अंतरिक्ष पर भेजा जा सकता है, बल्कि वर्तमान समय में सेटेलाइट विभिन्न Instruments, यहां तक कि पैसेंजर (यात्रियों) को भी ले जाने योग्य होता है।

ताकि वहां पर विभिन्न एक्सपेरिमेंट्स किए जा सके।

यहां आपको बता दें कि राकेश शर्मा पहले भारतीय थे जो अप्रैल वर्ष 1984 में अंतरिक्ष में गए थे! और जब उनसे पूछा गया कि अंतरिक्ष से हमारा भारत कैसा दिखाई देता है? तो उनका जवाब था “सारे जहां से अच्छा हिंदुस्ता हमारा।”

Weather Info

इसके अलावा सेटेलाइट्स का उपयोग मौसम की जानकारी हेतु किया जाता है, और यही वजह है कि आज हम अपने मोबाइल, स्मार्टफोन के माध्यम से वर्तमान मौसम तथा भविष्य के मौसम की सूचना प्राप्त कर सकते हैं।

GPS

gps अर्थात ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम दोस्तों जीपीएस का इस आधुनिक दुनिया में यातायात के क्षेत्र में विशेष महत्व है, आज हम gps के जरिए बिना किसी से रास्ता पूछे Exact लोकेशन पर पहुंच पाते हैं, तो यह भी सैटेलाइट की देन है।

तो दोस्तों यह थे कुछ सेटेलाइट के मुख्य उपयोग। आइए अब हम जानते हैं की सेटेलाइट्स के कौन-कौन से भाग (Parts) होते हैं?

दोस्तों यहां आपको बता दें कि सेटेलाइट को आवश्यकतानुसार विभिन्न साइज में निर्मित किया जाता है। लेकिन इनमें से अधिकतर सेटेलाइट में दो Parts मुख्यतः Common होते हैं, जिसमें पहले एंटीना तथा दूसरा पावर सोर्स है। आप अधिकतर सेटेलाइट्स में एंटीना का उपयोग देख सकते हैं, जिसका इस्तेमाल जानकारियों को Send एवं Receive करने के उद्देश्य से किया जाता है।

दूसरी तरफ Power Source की बात करें तो यह पावर सोर्स Solar पैनल या फिर बैटरी हो सकती है! यह सोलर पैनल हेल्प करता है, सूर्य ऊर्जा को इलेक्ट्रिसिटी बनाने में!

आपको पता होगा जब भी बात आती है सेटेलाइट्स की तो Nasa की विश्व में एक प्रमुख पहचान है! नासा में अधिकतर सेटेलाइट्स कैमरा एवं सेंसर्स को Carry करते हैं, जिससे वह पृथ्वी वायु, पानी इत्यादि के बारे में जानकारी प्राप्त करने में मदद करते हैं।

दोस्तों इसके अलावा वह सोलर सिस्टम या यूनिवर्स से डाटा कलेक्ट कर पाते हैं।

अंतरिक्ष में पहला सेटेलाइट किसने और कब लॉन्च किया था?

सोवियत यूनियन (सोवियत संघ) ने दुनिया मे पहली बार सैटेलाइट को अंतरिक्ष में लांच किया था! दोस्तों इस सेटेलाइट को वर्ष 1957 में पहली बार लांच किया गया जिसका नाम Sputnik 1 रखा गया।

दोस्तों यदि हम Nasa की बात करें! तो Nasa अब तक अंतरिक्ष में कई सैटेलाइट लॉन्च कर चुका है, और आज भी कर रहा है।

Nasa (The National Aeronautics and Space Administration) की बात करें तो उन्होंने पहला सेटेलाइट वर्ष 1958 में Explorer 1 नाम से लांच किया था।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक्सप्लोरर 1 नामक यह सेटेलाइट अमेरिका का पहला Man made सैटेलाइट था।

दोस्तों अब हम जान लेते हैं कि भारत की पहली सेटेलाइट कब लांच की गई थी।

Isro द्वारा भारत में बनाई गई पहली सैटेलाइट का नाम आर्यभट्ट था! इस सैटेलाइट को महान गणितज्ञ आर्यभट्ट का नाम दिया गया। इस सेटेलाइट को सोवियत संघ द्वारा वर्ष 1975 के अप्रैल माह में लांच किया गया। उसके बाद Rohini नामक सैटेलाइट को वर्ष 1980 में लॉन्च किया गया।

दोस्तों इस प्रकार हमने सेटेलाइट के इतिहास के बारे में जानकारी ली अब जान लेते हैं कि सेटेलाइट के कितने प्रकार होते हैं?

सैटेलाइट के प्रकार – Types Of Satellite In Hindi 

दोस्तों क्योंकि सैटेलाइट को विभिन्न प्रकार के उद्देश्यों के लिए अंतरिक्ष में लांच किया जाता है! अतः यहां हमारे लिए यह जानना जरूरी हो जाता है कि यह सेटेलाइट्स कितने प्रकार की होती हैं?

सेटेलाइट के निम्न प्रकार हैं।

  • Communications Satellite
  • Remote Sensing Satellite
  • Navigation Satellite
  • Geocentric Orbit type satellite – LEO, MEO, HEO
  • Global Positioning System (GPS)
  • Geostationary Satellites (GEOs)
  • Drone Satellite
  • Ground Satellite
  • Polar Satellite
  • Nano Satellites, CubeSats and SmallSats

दोस्तों पृथ्वी की सतह से ऊपर सेटेलाइट्स की ऊंचाई के आधार पर इन्हें अलग-अलग वर्गों में विभाजित किया जा सकता है, इस प्रकार सैटेलाइट्स को मुख्यतः तीन कैटेगरी में बांटा गया है।

Low – Earth orbits (LEO)

LEO  यह उपग्रह पृथ्वी से 180 किलोमीटर से 2000 km तक ऊपर अंतरिक्ष के स्थान को घेरते हैं। यह सेटेलाइट पृथ्वी की सतह के निकट चक्कर लगाते हैं, अतः इनका उपयोग सैन्य उद्देश्यों तथा मौसम की जानकारी के डाटा का अवलोकन (observation) करने हेतु किया जाता है।

Geosynchronous Orbits (GEO)

यह भू-उपग्रह 36000 किलोमीटर से अधिक ऊंचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं,इनकी कक्षीय अवधि पृथ्वी के
घूर्णन अवधि (24 घंटे) के बराबर होती है।

तथा इस कैटेगरी में भू-स्थैतिक geostationary (GSO) उपग्रह भी शामिल है! आपको बता दें सभी geosynchronous भू-स्थैतिक उपग्रह नहीं होते।

किसी किसी में elliptical orbits (अण्डाकार कक्षाएँ) होती है, जिसका मतलब है कि वह एक निश्चित बिंदु में रहकर पूर्व एवं पश्चिम की ओर बहती हैं।

Medium-Earth orbits (MEO)

यह सेटेलाइट्स उच्च एवं निम्न उड़ान भरने वाले सेटेलाइट होते हैं,जिनकी ऊंचाई 2000 किलोमीटर से लेकर 36000 किलोमीटर तक होती है। इनके अंतर्गत नेविगेशन सैटेलाइट जैसे कि Cars में Gps का उपयोग होता है, अतः gps सैटेलाइट भी इस ऊंचाई पर अच्छे-से कार्य करती हैं।

इस प्रकार के उपग्रह की ऊंचाई लगभग 20,200 किलोमीटर तथा इसमें 13,900 किलोमीटर प्रति घंटे कि orbital speed ( कक्षीय गति)हो सकती हैं।

तो दोस्तों अब यहां पर किसी यूज़र के मन में सवाल आ सकता है? कि आखिर उपग्रह अंतरिक्ष में कैसे टिके रहते हैं?

अभी तक हम जान चुके हैं कि सेटेलाइट होता क्या है? (What Satellite In Hindi) लेकिन दोस्तों कहीं ना कहीं हमारे लिए यह जानना भी जरूरी हो जाता है कि अंतरिक्ष में सैटेलाइट इतनी ऊंचाई पर किसके सहारे टिके रहते हैं!

तो इसका जवाब यह है कि अंतरिक्ष में किसी ऑब्जेक्ट के टिके रहने के लिए किसी Larger ऑब्जेक्ट की चक्कर (परिक्रमा) लगाने पड़ते है। और इस वजह से इनकी चक्कर लगाने की यह गति पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल को अपनी और आकर्षित नहीं कर पाती है।

जिस वजह से कई सालों तक सैटेलाइट अंतरिक्ष में रहकर अपना कार्य करते हैं। तो दोस्तों आइए अब हम इस लेख के अंत में भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी Isro के बारे में जानकारी लेते हैं!

ISRO क्या है?

Isro अर्थात Indian Space Research Organization जिसे हिंदी में “भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन” कहा गया है।

आपने इसरो की क्षमताओं के विषय में अक्सर टीवी समाचारों में सुना होगा! isro अब तक 370 से अधिक सेटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़ चुका है। जिसमें से 269 विदेश सेटेलाइट हैं, जबकि 101 सेटेलाइट्स भारतीय हैं।

इसरो द्वारा जिन 101 सेटेलाइट्स को हमारे देश के लिए लांच किया है, वह विभिन्न उद्देश्यों के साथ अंतरिक्ष में मौजूद हैं। जिनका कार्य इंटरनेट आपदा, मौसम,शिक्षा, संचार इत्यादि सेवाएं देना है।

UNOOSA (United Nations For Outer Space Affaires) के अनुसार वर्ष 2018 तक पृथ्वी के चारों ओर 8,378 सैटेलाइट्स भेजे जा चुके हैं। जिसमें से ISRO द्वारा कुल 371 सैटेलाइट्स छोड़े गए हैं।


दोस्तों आज हम जिस संचार व्यवस्था में रह रहे हैं, उसके पीछे Isro का विशेष योगदान है, क्योंकि इसरो अब तक अंतरिक्ष में 41 संचार उपग्रह छोड़ चुका है।

जिनमें से वर्तमान समय में 15 सेटेलाइट कार्य कर रही है! और यह सेटेलाइट हमें समाचार, टेलीफोन, आपदा प्रबंधन मौसम की जानकारी पहुंचाने का कार्य करते हैं।

तो दोस्तों इस तरह न सिर्फ संचार व्यवस्था बल्कि नेविगेशन उपग्रह, प्रयोगिक उपग्रह, इत्यादि अन्य क्षेत्रों में भी इसरो ने अपने सफल परीक्षणों के जरिए उच्च प्रतिष्ठा पाई है।

दोस्तों यहां पर आपका जानना मजेदार एवं प्रेरणादाई होगा कि Isro में कुछ ऐसे सेटेलाइट्स भी हैं, जिन्हें छात्रों द्वारा निर्मित किया गया है Sathyabama Sat, जुगनू StudSat, इत्यादि कुछ ऐसे सेटेलाइट हैं! जिनको बनाने में स्टूडेंट्स का सर्वोत्तम योगदान रहा हालांकि इन सेटेलाइट को isro द्वारा अंतरिक्ष मे छोड़ा जाता है।

तो दोस्तों इस प्रकार आपने आज के इस लेख में सेटेलाइट के बारे में जानकारी ली! उम्मीद है सेटेलाइट से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां आपको आज के इस लेख में मिल चुकी होंगी। और आप जान गये होगे की सैटेलाइट क्या है? (What Satellite In Hindi) इसका क्या काम होता है? कैसे काम करता है? इसके प्रकार? पहेला सैटेलाइट कब और किसने बनाया?

यह भी पढ़े:

Hope की आपको सैटेलाइट क्या है? – What Satellite In Hindi? का यह पोस्ट पसंद आया होगा, और हेल्पफ़ुल लगा होगा।

अगर आपके पास इस पोस्ट से रिलेटेड कोई सवाल है तो नीचे कमेंट करे. और अगर पोस्ट पसंद आया हो तो सोशल मीडिया पर शेयर भी कर दे.


2 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here