TPIN क्या होता है? और TPIN कैसे बनाये?


वर्तमान का समय डिजिटल युग कहा जाता है जिसके जहां अनेक फायदे भी है तो इसके कुछ नुकसान भी है। हमारा लगभग सभी महत्त्वपूर्ण डाटा ऑनलाइन रहता है जिसकी वजह से हम कुछ ही मिनटों में अपने डाटा को एक्सेस कर सकते हैं परंतु ऑनलाइन डाटा होने के कारण हमारे डाटा का गलत इस्तेमाल होने का खतरा भी होता है और ऑनलाइन डाटा चोरी होने की संभावना भी काफी ज्यादा होती है। तो दोस्तों आजके इस पोस्ट में हम जानिंगे की आख़िर TPIN क्या होता है? और TPIN कैसे बनाये?

TPIN क्या होता है? और TPIN कैसे बनाये?

इसीलिए ऑनलाइन डाटा चोरी को रोकने के लिए अलग-अलग प्रकार के पिन को बनाया गया है जो सिर्फ यूजर को ही पता होता है जिसके द्वारा वह अपने डाटा को बचा करके रखता है। टी पिन भी एक ऐसा ही पिन है जो अधिकतर शेयर मार्केट में/स्टॉक मार्केट में इस्तेमाल किया जाता है।


इस आर्टिकल में आपको “टी पिन क्या है” इसके बारे में आज हम जानकारी दे रहे हैं। तो चलिए देखते हैं की आख़िर TPIN क्या होता है? और TPIN कैसे बनाये?

TPIN क्या होता है?

टी पिन यानी कि टेलीफोन पर्सनल आईडेंटिफिकेशन नंबर का इस्तेमाल ग्राहक का वेरिफिकेशन करने के लिए किया जाता है, दरअसल एक बार सत्यापन की यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो व्यक्ति ट्रेड में एक्सेस कर सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस पिन को जनरेट करने का जिम्मा सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विस लिमिटेड के पास होता है, जो टेलीफोन पर्सनल आईडेंटिफिकेशन नंबर को जनरेट भी करती है और आवश्यकता पड़ने पर उसमें एडिटिंग भी करती है, साथ ही उसे मैनेज भी करती है।

अगर आप भी ऑनलाइन ट्रेड करते हैं यानी कि शेयर मार्केट में Selling और Buying का काम करते हैं तो सिक्योरिटी के लिहाज से आपके पास भी टी पिन होना जरूरी है।

बता दें कि इसके द्वारा ग्राहक ट्रेड ब्रोकर और डिमैट अकाउंट को एक्सेस कर सकता है और यह पिन टोटल 6 अंकों का होता है। इसी पिन की सहायता से वह जब चाहे तब शे‌यर को ट्रांसफर भी कर सकता है। जब यह नहीं था तो उसके पहले पावर ऑफ अटॉर्नी की आवश्यकता पड़ती थी परंतु इस पिन के आ जाने के कारण पावर ऑफ अटॉर्नी की जगह टी पिन ने ले ली है।

जब हम गूगल पे/फोन पे पर अपना अकाउंट बनाते हैं तब हमें एक एमपिन दिया जाता है जिसकी सहायता से हम ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर सकते हैं।‌ अगर हमारे पास एमपिन नहीं होता है तो हम ऑनलाइन ट्रांजेक्शन नहीं कर सकते हैं।


इसी प्रकार जिस व्यक्ति को ट्रेड में एक्सेस करना है उसके पास टी पिन होना बहुत ही आवश्यक माना जाता है, क्योंकि गवर्नमेंट ने सेबी को यह आदेश दिया था कि वह जल्द से जल्द इसे लागू करें और सेबी संस्था ने साल 2020 में 1 जून के दिन इसे लागू भी कर दिया अर्थात जितने भी ब्रोकर और डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट है, सभी के पास अपना खुद का सीडीएसएल टी पिन होना आवश्यक है जो कि उन्हें उनके द्वारा दिए गए फोन नंबर पर या फिर ईमेल आईडी पर प्राप्त होता है।

TPIN का मतलब क्या होता है?

एक रिसर्च के अनुसार हमारे भारत देश में शेयर मार्केट में डिमैट अकाउंट रखने वाले लोगों की संख्या सिर्फ 5 ही परसेंट है और उनमें से भी दो या फिर तीन परसेंट लोग ही ऐसे हैं जो डिमैट अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं।

जिसका साफ मतलब यह है कि ऐसे लोगों की संख्या काफी कम है जो यह जानते हो कि टी पिन वास्तव में होता क्या है तो हम बता दें कि टी पिन एक प्रकार का सिक्योरिटी पासवर्ड होता है और इसका इस्तेमाल सिर्फ शेयर मार्केट में/ ट्रेड में किया जाता है। अगर आपके पास टी पिन मौजूद है तो इसके जरिए आपके शेयर और डेटा की सिक्योरिटी बनी रहती है।

TPIN के फायदे क्या है?

जो व्यक्ति अपस्टॉक ट्रेडिंग या फिर दूसरे टॉप शेयर मार्केट एप्लीकेशन का इस्तेमाल करते हैं उन्हें टी पिन अवश्य प्राप्त करना चाहिए। नीचे हम आपको टी पिन के कुछ एडवांटेज अथवा टी पिन के कुछ बेनिफिट के बारे में जानकारी दे रहे हैं ताकि आपको पता चल जाए कि टी पिन होने के क्या फायदे हो सकते हैं।

इस पिन के आ जाने से अब व्यक्ति को पावर ऑफ अटॉर्नी की जरूरत नही पड़ती है क्योंकि जब यह पिन था तब व्यक्ति को शेयर का ट्रांजैक्शन करने के लिए पावर ऑफ अटार्नी की आवश्यकता पड़ती थी परंतु अब व्यक्ति बिना पावर ऑफ अटॉर्नी के टी पिन की सहायता से शेयर का ट्रांजैक्शन ऑनलाइन कर सकता है।

डिमैट अकाउंट पर ट्रांजेक्शन करने के लिए भी टी पिन होना बहुत ही आवश्यक होता है।


डीमैट अकाउंट से आप जितनी बार विथड्रावल ट्रांजेक्शन करेंगे, उतनी बार आपको टी पिन की आवश्यकता पड़ेगी। अगर आपके पास टी पिन नहीं है तो ब्रोकर कस्टमर के अकाउंट को यूज़ में नहीं ले पाएगा।

सीडीएसएल के द्वारा टी पिन को मैनेज किया जाता है। ऐसे में किसी भी कस्टमर के पिन का इस्तेमाल ब्रोकर गलत काम को करने के लिए नहीं कर सकेगा।

TPIN कैसे बनाये?

हमने आपको ऊपर ही इस बात की जानकारी दी कि जो व्यक्ति ट्रेडिंग करता है और शेयर मार्केट में पैसे इन्वेस्ट करता है, उसके पास टी पिन होना बहुत ही आवश्यक होता है और सेबी संस्था के द्वारा साल 2020 में जून के महीने से इसे लागू भी कर दिया गया है।

इसलिए टी पिन के लिए अप्लाई करने के बाद आपको टी पिन अपने फोन नंबर या फिर ईमेल आईडी पर प्राप्त हो जाता है। अगर आपके पास टी पिन नहीं है तो आप इसे घर बैठे ही बना सकते हैं। इसके लिए टी पिन जनरेट करने का तरीका आपके साथ नीचे शेयर किया जा रहा है।

1: नया टेलीफोन पर्सनल आईडेंटिफिकेशन नंबर को बनाने के लिए आपको नीचे एक लिंक दिया गया है, जो सीडीएसएल इंडिया की ऑफिशियल वेबसाइट का लिंक है। नीचे दिए हुए लिंक पर क्लिक करके आपको सीडीएसएलआइंडिया की ऑफिशियल वेबसाइट पर चले जाना है।

वेबसाइट लिंक: https://edis.cdslindia.com/home/generatepin

2: लिंक पर क्लिक करके जब आप ब्राउज़र में चले जाएंगे, तब आपकी स्क्रीन पर एक नया पेज ओपन होकर के आएगा। इस पेज में आपको तय जगह BO ID डालनी है और उसके बाद आपको तय जगह में अपने PAN CARD के नंबर को भी डालना है।

3: दोनों जानकारियों को भरने के बाद आपको जो NEXT की बटन दिखाई दे रही है उसके ऊपर क्लिक करना है।

4: नेक्स्ट की बटन दबाने के पश्चात आपका जो फोन नंबर है उस पर एक OTP जाएगा, ओटीपी को आपको तय जगह में डालना है और उसके बाद SUBMIT बटन को दबाना है।

इतनी प्रक्रिया जब आप पूरी कर लेंगे तब आपके फोन नंबर पर एक एसएमएस आएगा जिसमें 6 अंकों का टी पिन होगा। इसे आपको कहीं पर नोट कर के रख लेना है।

TPIN का उपयोग क्या है?

डीमैट अकाउंट को स्टार्ट कर लेने के बाद जब व्यक्ति किसी भी कंपनी के शेयर को खरीदता है तो जब मार्केट क्लोजिंग का समय आता है, तब उस व्यक्ति को अपने होल्डिंग को वेरीफाई करवाने की जरूरत पड़ती है और होल्डिंग को वेरीफाई करवाने के लिए टी पिन की भी आवश्यकता पड़ती है।

अगर व्यक्ति के पास टी पिन नहीं होगा तो वह मार्केट से शे‌यर की खरीददारी या फिर बिक्री नहीं कर सकेगा और अगर उसके पास टी पिन होगा तो वह मार्केट से शेयर की खरीददारी और उसकी बिक्री कर सकेगा, साथ ही आपको बता दे कि अगर कोई व्यक्ति मार्केट के समय अपने होल्डिंग को वेरीफाई करवाता है तो उसका जो टी पिन होता है वह उसी दिन खत्म हो जाता है।

क्योंकि हर दिन दोपहर 3:30 बजे यह अपने आप खत्म हो जाता है और अगर 4:00 बजे व्यक्ति इसे फिर से वेरीफाई करवाता है तो यह अगले दिन 3:30 बजे तक एक्टिव रहता है और उसके बाद एक्सपायर हो जाता है।

बता दे कि डीमैट अकाउंट को क्रिएट करने के लिए यूजर जिस अकाउंट का इस्तेमाल करता है, उसमें जो ईमेल आईडी और फोन नंबर रजिस्टर्ड होती है, उसके साथ यह भी रजिस्टर्ड हो जाता है।

जैसे ही व्यक्ति वेरीफाई होल्डिंग वाली बटन को दबाता है, वैसे ही ऑटोमेटिक पिन अपने आप बन जाता है, जो एसएमएस और ईमेल के माध्यम से यूजर को प्राप्त होता है जो कि टोटल 6 अंकों का होता है।

TPIN Change कैसे करे?

कभी-कभी कुछ सिक्योरिटी प्रॉब्लम के कारण या फिर अन्य वजह के कारण टी पिन को बदलने की आवश्यकता भी पड़ती है। अगर आप भी अपने किसी व्यक्तिगत कारणों की वजह से टी पिन को चेंज करना चाहते हैं, तो आप ऐसा कर सकते हैं और एक नया टी पिन प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आपको नीचे टी पिन चेंज कैसे किया जाता है, इसकी प्रोसेस बताई जा रही है।

1: टेलीफोन पर्सनल आईडेंटिफिकेशन नंबर को चेंज करने के लिए आपको नीचे एक लिंक दिया गया है, जो सीडीएसएल इंडिया की ऑफिशियल वेबसाइट का लिंक है। नीचे दिए हुए लिंक पर क्लिक करके आपको सीडीएसएलआइंडिया की ऑफिशियल वेबसाइट पर चले जाना है।

वेबसाइट लिंक: https://edis.cdslindia.com

2: लिंक पर क्लिक करके जब आप वेबसाइट पर पहुंचेंगे, तो आपको Change – eDIS TPIN का एक ऑप्शन दिखाई देगा। आपको इसी ऑप्शन के ऊपर क्लिक कर देना है।

3: अब आपको अगले पेज में जहां पर BO ID लिखी हुई है, वहां पर अपने डिमैट अकाउंट के नंबर को डालना है और फिर जहां पर पैन कार्ड के नंबर को डालने के लिए कहा जा रहा है, वहां पर पैन कार्ड के नंबर को डालना है और फिर नीचे जो NEXT की बटन दिखाई दे रही है, उसके ऊपर क्लिक कर देना है।

4: अब आपको अपने फोन नंबर पर एक ओटीपी प्राप्त होगा, उस OTP को आपको इंटर ओटीपी जहां पर लिखा हुआ है, उसके सामने बने हुए बॉक्स में डालना है और SUBMIT की बटन को क्लिक करना है।

ऐसा करने पर आपको NEW TPIN प्राप्त हो जाएगा, जो कि एसएमएस पर या फिर ईमेल आईडी पर आएगा।

TPIN का उपयोग कहा किया जाता है?

जिस प्रकार ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने के लिए हम यूपीआई आईडी का इस्तेमाल करते हैं और डाटा वेरीफिकेशन या फिर अकाउंट वेरिफिकेशन करवाने के लिए ओटीपी का इस्तेमाल करते हैं, उसी प्रकार टी पिन का इस्तेमाल शेयर मार्केट में शेयर की खरीददारी और उसकी बिक्री करने के लिए किया जाता है, साथ ही इसका इस्तेमाल हम डिमैट अकाउंट में हमारे एसेट की सिक्योरिटी के लिए भी करते हैं।

TPIN कौन जनरेट करता है?

सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विस लिमिटेड के द्वारा टी पिन कोड को बनाया जाता है यानी कि जनरेट किया जाता है और इसका इस्तेमाल व्यक्ति स्टॉक को खरीदने के लिए या फिर स्टॉक की बिक्री करने के लिए करता है। टी पिन को भूल जाने की अवस्था में कस्टमर टी पिन को घर बैठे ही जनरेट कर सकता है। नया टी पिन उसे उसके फोन नंबर या फिर ईमेल आईडी पर मिलता है।

CDSL TPIN से संबंधित बातें

सीडीएसएल के द्वारा ही टी पिन का निर्माण किया गया है और टी पिन को मैनेज करने की जिम्मेदारी साथ ही उसे एडिट करने की जिम्मेदारी भी सीडीएसएल के पास ही होती है। ब्रोकर का इसमें कोई भी किरदार नहीं होता है।

सीडीएसएल के द्वारा टिफिन को 6 अंकों का बनाया जाता है और इसे जब चाहे तब रिसेट भी कर सकते हैं। एक बार जब टी पिन को ऑथराइज कर लिया जाता है तो उसके बाद यह 90 दिनों तक वैलिड और एक्टिव रहता है। हालांकि जब चाहे तब इसके ऑथराइजेशन को कैंसिल भी कर सकते हैं।

जो ट्रेड एप्लीकेशन का यूज करते हैं वह टी पिन ऑथराइजेशन को जब चाहे तब चेक कर सकते हैं।

इस आर्टिकल के जरिए हमने आपको टी पिन क्या है इसके बारे में जानकारी दी, साथ ही हमने आपको यह भी बताया कि TPIN क्या होता है? और TPIN कैसे बनाये? और टी पिन जनरेट करने की प्रक्रिया क्या है। इसके अलावा आर्टिकल में हमने आपको टी पिन से संबंधित अन्य जानकारियां भी दी।

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Hope की आपको TPIN क्या होता है? और TPIN कैसे बनाये? का यह पोस्ट पसंद आया होगा, और हेल्पफ़ुल लगा होगा।


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