रोम क्या है? – What Is ROM In Hindi

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ROM Kya Hai? – What Is ROM In Hindi? मोबाइल फ़ोन और कम्प्यूटर तो हम सभी इस्तेमाल करते हैं पर क्या आपको पता है की RAM या ROM क्या होता है? अगर नही! और आप जानना चाहते हो तो यह पोस्ट आपके लिए काफ़ी हेल्पफ़ुल होने वाला है। क्यूँकि आज इस पोस्ट में हम जानिंगे की रोम क्या है? रोम के प्रकार, फ़ायदे, कैसे काम करता है? & All About ROM in Hindi.

यदि आप एक कंप्यूटर यूजर हैं! तो आपने Rom के बारे में शायद सुना जरूर होगा! क्योंकि यह किसी भी कंप्यूटर का महत्वपूर्ण भाग होती है! लेकिन क्या आपको पता है रोम क्या है? Rom का आपके कंप्यूटर में क्या कार्य होता है?


यदि आपको अभी Rom के बारे में जानकारी नहीं है! तो कोई बात नहीं क्योंकि आज के इस लेख को पूरा पढ़ने के बाद आपको आपके कंप्यूटर के motherboard में लगी Rom के बारे में अनेक जानकारी मिल जाएगी!

दोस्तों यहाँ आपका जानना जरूरी है कि Rom का इस्तेमाल न सिर्फ कंप्यूटर बल्कि Mobile, वाशिंग मशीन, TV, तथा AC आदि में भी होता है! अतः आप समझ सकते हैं की वर्तमान समय मे rom का उपयोग अनेक डिवाइस, इंडस्ट्री में किया जा रहा है! इसलिये यदि आप टेक्नोलॉजी ज्ञान के महत्व को जानते हैं तो आपको ROM के बारे में जानकारी अवश्य होनी चाहिए!

दोस्तों यदि आप Rom के बारे में पूरी जानकारी लेना चाहते हैं, तो आज का यह लेख आपके लिए है अतः इस लेख को ध्यानपूर्वक जरूर पढ़ें! इसके हम जानिंगे की रोम क्या है?

दोस्तों पिछले पोस्ट में मैंने आपको बताया था की RAM क्या है? और इसके प्रकार – What Is RAM In Hindi? और आज इस पोस्ट में हम जानिंगे की रोम (ROM) क्या है? – What Is ROM In Hindi?

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रोम (ROM) क्या है? – What Is ROM In Hindi

ROM अर्थात Read Only Memory यह एक प्रकार का storage माध्यम है जिसका कार्य कंप्यूटर तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में स्थायी (परमानेंट) रूप से data को save करना होता है! कंप्यूटर को चालू करने के दौरान Rom का कार्य शुरू होता है क्योंकि pc को start करने के लिए rom में प्रोग्रामिंग होती है, जिससे एक कंप्यूटर boot-up होता है। कंप्यूटर में यूजर द्वारा किसी सॉफ्टवेयर/प्रोग्राम को निर्देश देने पर Rom कार्य करती है तथा प्रमुख input/output कार्यों को पूरा करती है।

दोस्तों यहाँ आपका समझना जरूरी है कि आमतौर पर Rom data को सिर्फ read करने का कार्य करती है, ना कि data को write करने का! कंप्यूटर के पॉवर ऑफ/shut down होने के बावजूद Rom में data save रहता है! जबकी दूसरी तरफ Power off होने के बाद Ram में store किया गया data गायब हो जाता है।

इसके साथ ही आपका यह जानना जरूरी है कि Motherboard में कई सारी chips मौजूद होती हैं, जिनमें से कुछ expansion board में स्तिथ होती हैं! यह chips बुनियादी input/output system (bios), boot up, उपकरणों को read & write करने आदि कार्यों में आवश्यक होती है!

Rom एक non-volatile memory का एक प्रकार होती है! non-volatile memory memory वह memory होती हैं जो power cut होने के बाद भी device में store डेटा को save रखने का कार्य करती है! दूसरी ओर volatile memory में data store करने के लिए लगातार power on रहना चहिये!

चूँकि Rom को बदला नहीं जा सकता इसे केवल read किया जा सकता है! यह मुख्यतः firmware के लिए इस्तेमाल की जाती है firmware अर्थात सॉफ्टवेयर तथा निर्देशों का एक सेट जो किसी hardware device से चिपका/जुड़ा होता है।

firmware सभी निर्देशों की पूर्ति करता है की कैसे एक उपकरण विभिन्न हार्डवेयर कॉम्पोनेन्ट के साथ communicate (संचार) करता है! firmware को स्थायी माना जाता है क्योंकि यह तब तक नहीं बदलता जब तक इसे update न किया जाए!

अन्य प्रकार की non-volatile memory निम्नलिखित हैं!

  • Programmable Read-Only Memory (PROM)
  • Electrically Programmable Read-Only Memory (EPROM)
  • Electrically Erasable Programmable Read-Only Memory (EEPROM; also called Flash ROM)
  • Electrically Alterable Read-Only Memory (EAROM)

Rom अक्सर ऑप्टिकल स्टोरेज मीडिया डिवाइस जैसे कि compact डिस्क जिनमें read only memory (Cd-rom), compact disk recordable (CD-R) तथा compact disk rewritable (Cd-Raw) आदि में भी शामिल होती है! उम्मीद है की अब आप जान गये होगे की रोम क्या है?


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रोम (ROM) कैसे काम करती है? – How ROM Works In Hindi

read-only memory एक इंटीग्रेटेड circuit chip होती है जो पहले से ही विभिन्न फंक्शन के साथ प्रोग्राम की जाती है इसे firmware भी कहा जाता है!

rom chip array (श्रंखला समहू) की तरह ऑपरेट होती है, Rom chips में turn on/off करने के लिए पंक्तियों (lines) तथा कॉलम का एक ग्रिड होता है!

दोस्तों जब value एक होती है तो यह lines को जोड़ने के लिए डायोड का उपयोग करता है, परन्तु यदि value 0 होती है तो इसका मतलब यह lines जुड़ी नहीं है! array का प्रत्येक एलिमेंट (तत्व) मेमोरी के storage एलिमेंट से मेल (match) खाता है!

ROM chip पर डाटा लिखने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली विधियां तथा उनके लिखे जाने की संख्या के आधार पर ROM को विभिन्न भागों में बांटा गया है रूम के निम्नलिखित प्रकार हैं!


उम्मीद है की अब आप आज गये होगे की रोम क्या है? और यह कैसे काम करती है? तो चलिए अब देखते है की रोम कितने प्रकार की होती है?

ROM के प्रकार – Types of ROM in Hindi

Rom के मुख्यतः दो मूलभूत घटक होते हैं पहला Decoder तथा OR gates! तथा इन घटकों की कार्यप्रणाली भी भिन्न होती है! Decoder का input बाइनरी फॉर्म में होता है तथा आउटपुट दशमलव (decimal) अनुरूप होता है! तथा Rom में मौजूद सभी OR gates Decoder के output को input के रूप में लेते हैं!

  • Mask Read-Only Memory (MROM)
  • Programmable Read-Only Memory (PROM)
  • Erasable Programmable Read-Only Memory (EPROM)
  • Electrically Erasable Programmable Read-Only Memory (EEPROM)
  • Flash Read-Only Memory (Flash ROM)

1. MROM

MROM अर्थात Mask read only memory यह chip कंटेंट्स के साथ मैन्युफैक्चर (निर्मित) की जाती है। यह ROM सस्ती होती हैं तथा जो हार्ड wired डिवाइस थे जिनमें पहले से ही डाटा तथा इंस्ट्रक्शन का प्रोग्राम सेट होता था उनमें इस्तेमाल होती थी!

इन चिप्स में एक सॉफ्टवेयर मास्को होता है जो सेमीकंडक्टर निर्माण की प्रक्रिया की डिजाइन के चरण के दौरान chip पर जल जाता है

Mask रीड ओनली मेमोरी का मुख्य फायदा यह है कि इसकी प्रोडक्शन कीमत काफी कम होती है, IC की कीमत साइज के आधार पर होती है जैसे per bit अधिक मात्रा में इस मेमोरी का निर्माण होने पर यह अन्य सेकेंडरी मेमोरी से काफी सस्ती ग्राहकों को उपलब्ध होती है!

MROM मेमोरी का इस्तेमाल?

लेज़र प्रिंटर्स के लिए फ़ॉन्ट store करने के लिए data sound को इलेक्ट्रॉनिक म्यूजिकल instruments (उपकरण) में स्टोर करने के लिए नेटवर्क ओपरेटिंग सिस्टम में

अगर हम इसके नुकसान की बात करें तो इनका समयकाल काफी कम होता है क्योंकि इसमें यदि code में कोई error आता है तो MROM मेमोरी useless हो जाती है अर्थात code में बदलाव के लिए इसे replace करने की आवश्यकता पड़ती है अतः डिजाइन error इसमें महंगे होते हैं!

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2. PROM

इस मेमोरी को blank अर्थात खाली मनुफैकचर किया जाता है जैसे कि नाम से ही पता चलता है इसे मैन्युफैक्चरिंग के बाद प्रोग्राम किया जाता है अर्थात एक यूजर ब्लैंक मेमोरी खरीदता है, तथा PROM प्रोग्राम्स के जरिए मन मुताबिक कंटेंट्स में डालता है

इस मेमोरी में डाटा को केवल एक बार प्रोग्राम किया जा सकता है तथा जिसे बाद में तब्दील नहीं किया जा सकता! PROM मेमोरी का इस्तेमाल निम्नलिखित कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है!

video gaming console, high defination multimedia interfaces(HDMI), Radio-Frequency Identification (RFID) tags, मोबाइल फोन में users को विशेष विकल्पों को उपलब्ध करने के लिए!

इस मेमोरी में विभिन्न्न सॉफ्टवेयर के जरिए प्रोग्रामिंग की जा सकती है! तथा मेमोरी को programms की हार्ड वायरिंग पर भरोसा करने के आवश्यकता नहीं पड़ती!

इसमें डाटा में बदलाव नहीं किए जा सकते! जिससे data की authority बरकरार रहती है तथा इसमें बदलाव करने की गुंजाइश नहीं होती अतः इसे विश्वसनीय भी कहा जा सकता है!

PROM मेमोरी में डाटा को जलाए जाने पर ना इसे मिटाया जा सकता है तथा error का पता चलने पर न ही इसे बदला जा सकता है.

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3. EPROM

अर्थात Erasable Programmable Read-Only Memory यह non-volatile मेमोरी का एक प्रकार है अर्थात पावर ऑफ होने के बावजूद इसमें डाटा सेव रहता है

PROM मेमोरी का एक नुकसान यह था कि एक बार मेमोरी को प्रोग्राम किए जाने के बाद डाटा को बदला नहीं जा सकता परंतु EPROM मेमोरी ने इस समस्या को हल कर दिया है

EPROM मेमरी का निम्नलिखित एप्लीकेशन में इस्तेमाल होता है!.

मॉडेम, वीडियो कार्ड और कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स में प्रोग्राम स्टोरेज chip के रूप में कंप्यूटर में bios chip के लिए प्रोग्राम डेवलपमेंट के लिए.

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4. EEPROM

अर्थात Electrically Erasable Programmable Read Only Memory. यह EPROM की तरह ही कार्य करती है! तथा इसे EPROM की कमियों को दूर करने के लिए विकसित किया गया है। EEPROM को इलेक्ट्रॉनिक रूप से मिटाया या प्रोग्राम किया जाता है!

क्योंकि यह अल्ट्रा वॉइस किरणों के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक संकेतों का उपयोग करती है

इसमें डाटा को मिटाने तथा प्रोग्रामिंग करने में 4 से 10 मिली सेकंड का समय लेता है! पूरी chip के स्थान पर सिर्फ बाइट को एक बार मे मिटाना भी संभव है। chip को लगभग 10000 बार मिटाया या दोबारा प्रोग्राम किया जा सकता है। हालांकि यह प्रक्रिया धीमी होती है!

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5. FROM

यह एक यूनिवर्सल फ्लैश प्रोग्रामिंग non-volatile मेमोरी है, जिसका उपयोग कंप्यूटर में stoarge के रूप में किया जाता है इसे विद्युत (electricity) की मदद से डिलीट तथा Re-प्रोग्राम किया जा सकता है!

इस chip में डाटा के memory ब्लॉक को विशेष समय में डिलीट या store किया जा सकता है!

दोस्तों ROM क्या है, ROM के प्रकार जानने के बाद अब हम जानेंगे ROM की विशेषताओं को यहां ROM की कुछ मुख्य विशेषताएं दी गई हैं!

ROM में जानकारी/ सूचनाएं आसानी से अपडेट की जा सकती हैं!

क्योंकि ROM non-volatile मेमोरी है जिसका मतलब है कि device शटडाउन या पावर कट होने के बाद भी उस डिवाइस में ROM डाटा को स्टोर रखने का काम करती है! ROM चिप्स का इस्तेमाल विभिन्न कंप्यूटर ब्रांड के कंप्यूटर के साथ किया जा सकता है.

MROM के फायदे?

  • किसी भी कंप्यूटर में MROM का इस्तेमाल करने का एक फायदा यह है कि इसकी प्रोडक्शन cost low होती है
  • Mask ROM  अन्य rom की तुलना में अधिक compact होती है।
  • किसी भी अन्य सेकेंडरी मेमोरी की तुलना में MROM का price कम होता है! क्योंकि इसकी लागत भी कम होती है जिस वजह से सस्ते दाम में मार्केट में यह मिल जाती है!

MRom के नुकसान?

  • MRom का इस्तेमाल करते हुए यदि इसमें कोई Eror Code आ जाता है तो ऐसे में यह Rom useless साबित होती है! क्योंकि इसे रिपेयर करना मुश्किल होता है और Mask Rom (MRom) को फिर replace करना होता.
  • इसके अलावा दोस्तों किसी भी अन्य रैम की तुलना में हम M Rom अधिक समय तक नहीं चलती और इसकी लाइफ Expectancy कम होती है इसलिए इन्हें समय-समय पर बदलना पड़ता है।

PRom के फायदे?

  • इस ROM की प्रोग्रामिंग  कई प्रकार के सॉफ्टवेयर के जरिए की जा सकती है।
  • PROM का एक और मुख्य फायदा यह है एक बार इसे प्रोग्राम कर दिया जाए तो इसके बाद इसमें मौजूद इंफॉर्मेशन या डाटा को कभी भी मिटाया या डिलीट नहीं किया जा सकता है!
  • क्योंकि इसमें इंफॉर्मेशन Permant होती है।
  • इसका इस्तेमाल कंप्यूटर जैसे अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के  साथ ही मेडिकल Devices में भी किया जाता है।

EPROM के फायदे?

  • यह एक नॉन वोलेटाइल मेमोरी होती है।
  • इसकी दूसरी बड़ी खासियत यह है कि इसे प्रोग्राम करने के बाद भी erase किया जा सकता है तथा re प्रोग्राम किया जा सकता है।
  • PROM की तुलना में इसमें लागत कम (Cost effective) होती है।
  • पावर ऑन ना होने के बावजूद भी EPROM मेमोरी को यह रिटर्न करती है! तथा इसमें कोई एक्सटर्नल मेमोरी की आवश्यकता नहीं होती।
  • कंप्यूटर जो Bios के तौर पर लगी रहती है!

EPROM के नुकसान?

  • हालांकि इसे दोबारा प्रोग्राम किया जा सकता है परंतु जब इसको री प्रोग्राम किया जाता है तो इसे इसके बोर्ड से हटाया जाता है तभी इसकी रिप्रोग्रामिंग की जाती है।
  • जैसा कि हमने जाना है इस ROM को Erase किया जा सकता है! लेकिन दोस्तों इसमें किसी किसी विशेष BYte को erase नहीं किया जा सकता अर्थात एक बारी में इंफॉर्मेशन नस्ट हो जाती है। अतः आपका सारा कॉन्टेंट यहां से डिलीट होता है।
  • इसके अलावा मार्केट में ही UV पर आधारित EROM अवेलेबल होती हैं जिनमें कॉन्टेंट को रिमूव करने में अधिक समय लगता है
  • स्टैटिक पावर कंजप्शन ई प्रो में अधिक होता है क्योंकि इसमें ट्रांजिस्टर भी हाई रेजिस्टेंस का इस्तेमाल किया जाता है।

EEPROM के फायदे?

  • EEPROM को किसी कंप्यूटर में एक से ज्यादा बार प्रोग्राम किया जा सकता है।
  • जैसा कि हमने जाना था EEPROM में byte के आधार पर डाटा डिलीट नहीं हो सकता था! परंतु EEPROM इसके विपरीत है यहां पर आप बाइट के आधार पर बोर्ड के कॉन्टेंट को डिलीट किया जा सकता है।
  • इसमें डाटा चेंज करने के लिए किसी एडिशनल डिवाइस की आवश्यकता नहीं होती।
  • EEPROM भी कंप्यूटर में Bios चिप के तौर पर मौजूद होती है! तथा इसमें डाटा को इरेज करने का मेथड इलेक्ट्रिकल एवं instant होता है जिससे info तेजी से डिलीट हो जाता है।

EEPROM के नुकसान?

  • डाटा को erase करने रीड करने या राइट करने के लिए विभिन्न प्रकार के voltage की आवश्यकता होती है ।
  • EEPRPOM का डाटा रिटेंशन  टाइम लिमिटेड होता है उदाहरण के लिए यह 10 साल तक का हो सकता है।
  • अन्य डिवाइस की तुलना में EEPROM डिवाइस महंगे होते हैं।

FROM के फायदे?

  • आज के कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जैसे पेनड्राइव FROM का सपोर्ट होता है।
  • इसकी ट्रांसफर स्पीड काफी अधिक होती है
  • कंप्यूटर टर्न off, शटडाउन  होने की स्थिति में फ्लैश रीड ओनली मेमोरी में डाटा सेव रहता है! अर्थात पावर न होने की स्थिति में भी यह अपना काम करते रहती है।
  • यह काफी स्ट्रॉन्ग मेमोरी है! 

FROM के नुकसान?

  • लेटेस्ट टेक्नोलॉजी एवं बेहतर फंक्शनैलिटी ही वजह से FROM की कीमत ज्यादा है।
  • इसके अलावा दूसरा नुकसान है कि इसमें Read/ राइट करने की संख्या लिमिटेड होता है।

ROM की विशेषताएं – Features of ROM in Hindi

  • ROM में स्टोर डाटा को न तो परिवर्तित नहीं किया जा सकता अगर परिवर्तन संभव भी हो तो इसमें बहुत कठिनाई होती है।
  • ROM में जो डाटा या प्रोग्राम  होते हैं उन्हें एक यूजर द्वारा कोड नहीं किया जा सकता! वह पहले से ही मैन्युफैक्चरिंगके समय ही ROM में इंस्टॉल कर दिया जाता है जैसे कि फर्मवेयर|
  • अचानक पावर ऑफ होने के बावजूद भी ROM में जो डाटा है काफी दिनों तक कंप्यूटर बंद होने के बावजूद भी हम स्टोर किए गए डाटा को एक्सेस कर पाते हैं! इसलिए इसे नॉन वोलेटाइल मेमोरी माना जाता है वहीं दूसरी तरफ FROM में डाटा पावर ऑफ होने के बाद सेव नहीं होता।
  • rom कंप्यूटर में bios के तौर पर लगी होती है
  • Rom का एक मुख्य गुण यह भी है कि यह Rom की तुलना में कंप्यूटर यूजर को बड़ी मात्रा में एक्सपेंसिव डाटा स्टोरेज की सुविधा प्रदान करती है ।
  • साथ ही Rom रैम की तुलना में सस्ती होती है।
  • सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट सीपीयू का एक भाग होता है। यह मदर बोर्ड में एक चिप के रूप में लगी होती है.
  • यह परमानेंट मेमोरी होती है इसमें स्टोर डाटा को बार-बार रिफ्रेश करने की आवश्यकता नहीं पड़ती.
  • तो दोस्तों अब तक आपे Rom की सबही विशेषताओं के बारे में जाना अब हम इसके फायदे नुकसान दोनों के बारे में जान चुके हैं एक बात और आपका यह भी जानना जरूरी है कि Rom का इस्तेमाल न सिर्फ हम अपने कंप्यूटर डिवाइस में करते हैं! बल्कि Rom का अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे कि रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन टीवी इत्यादि में भी होता है! 
  • और प्रत्येक डिवाइस के हिसाब से उसमें Rom लगी होती है उसमें प्रोग्रामेबल फंक्शन से होते हैं! जिन्हें मैन्युफैक्चरिंग के समय ही डाला जाता है।

दोस्तों उम्मीद है इस लेख को अंत तक पढ़ने के बाद आप समझ गए होंगे कि रोम क्या है? ROM के कितने प्रकार होते हैं? तथा ROM की क्या विशेषताएं हैं! मुझे उम्मीद है यह जानकारी आपको पसंद आयी होगी।

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Hope की आपको रोम (ROM) क्या है? – What Is ROM In Hindi? का यह पोस्ट पसंद आया होगा, और अब आप जान गये होगे की रोम क्या है? रोम के प्रकार, फ़ायदे, कैसे काम करता है? & All About ROM in Hindi.


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