पेन ड्राइव क्या है? कैसे काम करता है? प्रकार, उपयोग और फायदे?


पेन ड्राइव क्या है? कैसे काम करता है? प्रकार, उपयोग और फायदे? आज के समय मे यह समझना बहुत जरूरी है, मगर 15 से 17 साल पहले डाटा को स्टोर करने के लिए फ्लॉपी डिस्क जैसे स्टोरेज डिवाइस का इस्तेमाल लोगों के द्वारा किया जाता था। हालांकि इसकी सबसे बड़ी कमी यह थी कि इसमें डाटा काफी कम मात्रा में ही स्टोर हो पाते था साथ ही इसके डाटा को पढ़ने की और उसे लिखने की कैपेसिटी भी कम थी.

पेन ड्राइव क्या है? कैसे काम करता है? प्रकार, उपयोग और फायदे?

इसलिए ऐसे डिवाइस की खोज की गई जिसके डाटा को पढ़ने की और डाटा को लिखने की स्पीड शानदार थी। उसी डिवाइस को पेनड्राइव कहा जाता है, जो आपको मार्केट में अलग-अलग कलर में मिलती है।


हर पेन ड्राइव के डाटा को स्टोर करने की कैपेसिटी अलग-अलग होती है। पेनड्राइव की वजह से ही हम फाइल ट्रांसफर आसानी से कर पाते हैं। आइए इस आर्टिकल में जान लेते हैं कि पेन ड्राइव क्या है? कैसे काम करता है?

पेन ड्राइव क्या है? (What is Pen Drive in Hindi)

Pendrive किसी भी डाटा/सामग्री को स्टोर करने वाला एक एक्सटर्नल डिवाइस होता है। हिंदी भाषा में पेनड्राइव को स्मृति सालिका कहा जाता है।

पेनड्राइव का आकार 1 इंच के आसपास में होता है और यह पोर्टेबल डिवाइस होने की वजह से आसानी से इधर से उधर आ और जा सकता है। हम अपने कंप्यूटर के डाटा को आसानी से पेन ड्राइव में कॉपी पेस्ट कर सकते हैं।

अगर हमें लैपटॉप, डेस्कटॉप अथवा कंप्यूटर के डाटा और फाइल का बैकअप बनाना है तो हमें पेनड्राइव का इस्तेमाल करना पड़ता है। अथवा अगर आपको अपने किसी एक कंप्यूटर के अंदर मौजूद डाटा को दूसरे कंप्यूटर में ट्रांसफर करना है तो इसके लिए भी हमें पेनड्राइव का इस्तेमाल करना पड़ता है।

दुनिया में पेन ड्राइव बनाने वाली बहुत सारी कंपनियां है। हर लैपटॉप, डेस्कटॉप अथवा कंप्यूटर में पेन ड्राइव को इस्तेमाल करने के लिए एक पोर्ट मौजूद होता है। उसी पोर्ट के अंदर पेनड्राइव को डाला जाता है।

इसके बाद आसानी से पेन ड्राइव के डाटा को कंप्यूटर में अथवा कंप्यूटर के डाटा को पेन ड्राइव में स्टोर किया जा सकता है। पेनड्राइव की साइज अलग-अलग होती है। जैसे कि 1GB, 2GB, 3GB, 12gb, 16GB, 128GB। पेनड्राइव की जीबी के हिसाब से उसकी कीमत भी अलग-अलग होती है।


पेन ड्राइव कैसे काम करता है?

आपने ASCII के बारे में सुना होगा जो कि एक कैरक्टर इनकोडिंग होता है। यह दो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के बीच में डाटा को पढ़ने में और समझने में मदद करता है और स्टोर करने में करता है। यही नहीं यह 0 से 1 की भाषा में प्रोग्राम को सूचना को भी स्टोर करता है और जो यूएसबी फ्लैश ड्राइव होता है वह इसी का उपयोग करते हुए डाटा को स्टोर करता है।

हमारे द्वारा जब कंप्यूटर अथवा लैपटॉप में पेन ड्राइव को यूएसबी पोर्ट में लगाया जाता है तो यह स्विच ऑन हो जाता है और उसके बाद इसके सोर्स से करंट का फ्लो स्टार्ट होता है जो ड्रेन तक पहुंच जाता है।

पेन ड्राइव के प्रकार? Types of Pen Drive in Hindi

इन्हें इंटरफेस और जनरेशन के आधार पर अलग अलग प्रकारों में विभाजित किया गया है। मार्केट में पेन ड्राइव के विभिन्न प्रकार मौजूद है और हर प्रकार की अपनी खुद की खूबियां है। दुनिया में पेन ड्राइव का निर्माण जो भी कंपनी करती है वह उसमें लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और लेटेस्ट फीचर देने का प्रयास करती है।

जब पेन ड्राइव को मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के द्वारा डिजाइन किया जाता है तब इस बात का ध्यान रखा जाता है कि उसमें सबसे अधिक काम जनरेशन और इंटरफ़ेस पर हो। अगर आप पेनड्राइव के जनरेशन और इंटरफ़ेस को समझ जाते हैं तो आप आसानी से पेनड्राइव के टाइप के बारे में जान सकेंगे।

पेन ड्राइव के जनरेशन

प्राप्त जानकारियों के अनुसार पेन ड्राइव की कुल 5 जनरेशन अभी तक लॉन्च हो चुकी है जिनकी अपनी अपनी काम करने की स्पीड है। जो लेटेस्ट जेनरेशन वाले पेनड्राइव होते हैं वह पुराने जनरेशन की तुलना में बेहतर तरीके से वर्क करते हैं। आइए पेन ड्राइव की जनरेशन की जानकारी हासिल करते हैं।

1: USB 1.0

सबसे पहली बार जब पेनड्राइव लांच की गई थी तो उसका जनरेशन यही था परंतु इसके जो वर्क करने की स्पीड थी वह उम्मीद के मुताबिक नहीं थी। इसलिए आगे चलकर के इसका निर्माण करना बंद कर दिया गया। पेनड्राइव मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के द्वारा इसे साल 1998 में लांच किया गया था और वर्तमान के समय में शायद ही कोई इसका इस्तेमाल करता हो।

2: USB 2.0

साल 2002 में लॉन्च हुई पेनड्राइव के इस जनरेशन की अधिक से अधिक डाटा को पढ़ने की कैपेसिटी 30 एमबी प्रति सेकंड थी और इसके डाटा को लिखने की कैपेसिटी 15mb प्रति सेकंड थी।


3: USB 3.0

यह अधिक से अधिक डाटा को पढ़ने की क्षमता 130mb प्रति सेकंड रखता था और डाटा को लिखने की क्षमता 100MB प्रति सेकेंड रखता था। साल 2010 में यह लांच हुआ था और इसके पहले वाले जनरेशन के पेन ड्राइव की तुलना में इसकी स्पीड 10 गुना अधिक थी।

4: USB 3.1

इसके डाटा को पढ़ने की कैपेसिटी 400mb प्रति सेकंड थी और इसके डाटा को लिखने की कैपेसिटी 240 एमबी प्रति सेकंड थी। इसे सुपरफास्ट पेनड्राइव कहते हैं जो साल 2013 में लांच किया गया था।

5: USB 3.2

यह साल 2013 में लांच हुआ था और इसके डाटा को पढ़ने की कैपेसिटी 1GB प्रति सेकंड थी और डाटा को लिखने की कैपेसिटी 900mb प्रति सेकंड थी। इसके काम करने की स्पीड इसके पहले वाली जनरेशन के पेन ड्राइव की तुलना में बहुत ही बढ़िया थी।

पेन ड्राइव का इतिहास?

आईबीएम कंपनी ने लंबे समय तक पेनड्राइव की मैन्युफैक्चरिंग करने का प्रयास किया और यह अपने प्रयास में साल 1998 में तब सफल हुई जब पहली बार पेनड्राइव का आविष्कार किया गया। आईबीएम कंपनी चाहती थी की पेनड्राइव के द्वारा वह अपने थिंक पैड प्रोडक्ट को फ्लॉपी ड्राइव में कन्वर्ट करें।

इजराइल की एक कंपनी एम सिस्टम के द्वारा पहला फ्लैश ड्राइव क्रिएट किया गया था और इसे बनाने का सारा श्रेय Dov Maron नाम के व्यक्ति को दिया गया था। यह एम सिस्टम कंपनी में ही वर्क करते थे। इनके द्वारा जो पेनड्राइव बनाई गई थी उसे डिस्गो कहा जाता था जो अलग-अलग आकार में आती थी। जैसे कि 8MB, 16mb, 32mb और 64mb।

K.S Pua Khein Seng नाम के व्यक्ति जो कि मलेशिया के थे, उनके द्वारा डिस्गो पेन ड्राइव का लेटेस्ट वर्जन क्रिएट किया गया था और इनके द्वारा क्रिएट की गई पेनड्राइव जब मार्केट में आई तो धीरे-धीरे यह दुनिया भर में फैलती गई।

और आईटी फील्ड की जो अन्य कंपनियां थी उनके द्वारा भी पेनड्राइव का मैन्युफैक्चरिंग किया जाना प्रारंभ कर दिया गया और इस प्रकार से आज दुनिया भर की अलग-अलग कंपनियों के द्वारा पेनड्राइव को तैयार किया जा रहा है, जिनका साइज़ अलग होता है, टाइप अलग होता है और उनका रंग भी अलग होता है।

पेन ड्राइव के भाग?

टोटल 8 भाग पेन ड्राइव के होते हैं। आइए इन सभी के ऊपर चर्चा कर लेते हैं।

1: यूएसबी कनेक्टर: अगर हमें कंप्यूटर को पेनड्राइव के साथ Plug करना है तो हमें यूएसबी कनेक्टर की आवश्यकता पड़ती है।
2: राइट प्रोटेक्ट चीप: पेन ड्राइव में जो डाटा होता है उसे इसके द्वारा ही सिक्योरिटी प्रदान की जाती है।
3: सेकंड फ्लैश मेमोरी चिप: पेन ड्राइव की स्टोरेज कैपेसिटी को बढ़ाने हेतु यह एक्स्ट्रा मेमोरी चिप डालने वाला एक स्लॉट होता है।
4: कंट्रोलरशिप: इसका काम पेनड्राइव से जानकारियों को Retrieve करना होता है।
5: फ्लैश मेमोरी चिप: हम इसके जरिए पेनड्राइव से जानकारियों को मिटा सकते हैं क्योंकि यह डाटा को स्टोर करती है।
6: क्रिस्टल ऑस्किलेटर: यह सिर्फ स्पेशल फ्रिकवेंसी पर ही वाइब्रेट होता है क्योंकि यह क्वार्टज क्रिस्टल का एक टुकड़ा होता है।
7: एलईडी: हमारा पेनड्राइव सही प्रकार से वर्क कर रहा है अथवा नहीं, इसके द्वारा ही हमें पता चलता है।
8: टेस्ट प्वाइंट: पेनड्राइव को असेंबल करने के दरमियान टेस्ट प्वाइंट के जरिए पेनड्राइव को Stimulate करते हैं।

पेन ड्राइव के प्रकार?

टोटल 3 टाइप पेन ड्राइव के अवेलेबल है। इसकी जानकारी नीचे प्रस्तुत की गई है।

1: सिक्योरिटी फ्लैश ड्राइव

यह एक नॉर्मल यूएसबी स्टोरेज डिवाइस होता है, जो डाटा को सिक्योर रखने का काम करता है।

2: म्यूजिक फ्लैश ड्राइव

इसे हिंदी में संगीत फ्लैश ड्राइव कहा जाता है। अगर हमें म्यूजिक को किसी एक डिवाइस से किसी दूसरे डिवाइस में ट्रांसफर करना है या फिर स्टोर करना है तो इसका इस्तेमाल करना पड़ता है।

3: बूट फ्लैश ड्राइव

ऑपरेटिंग सिस्टम को इंस्टॉल करने में कारगर यह बहुत ही नॉर्मल यूएसबी मेमोरी स्टिक होती है।

पेन ड्राइव की विशेषताएं? Features of Pendrive in Hindi

नीचे आपके सामने हमने पेनड्राइव की विशेषताएं प्रस्तुत की हुई है।

  • पेनड्राइव की जितनी स्टोरेज क्षमता होती है हम उतना उसमें डाटा को शामिल कर सकते हैं। सामान्य तौर पर पेन ड्राइव में स्टोरेज की कैपेसिटी 512mb से लेकर के 128GB तक होती है।
  • आकार में छोटा और पोर्टेबल होने की वजह से हम इसे अपनी जेब में लेकर के भी कहीं पर भी आ और जा सकते हैं।
  • हम पेन ड्राइव के अंदर अपनी गुप्त फाइल को स्टोर कर सकते हैं साथ ही पेनड्राइव पर हम पासवर्ड का सिस्टम भी कर सकते हैं। अर्थात जब आप पेनड्राइव कंप्यूटर में लगाएंगे तो पासवर्ड इंटर करने के बाद ही पेनड्राइव के डाटा को आप देख सकेंगे।
  • जिस प्रकार प्राइमरी मेमोरी डाटा को स्टोर करता है उसी प्रकार पेनड्राइव भी डाटा को स्टोर करता है।
  • इसे चलाने के लिए एक्सटर्नल पावर की आवश्यकता नहीं होती है। कंप्यूटर में कनेक्ट करते ही यह अपने आप पावर ऑन हो जाता है क्योंकि यह कंप्यूटर, डेस्कटॉप अथवा लैपटॉप के पावर से ही पावर लेता है।
  • पेनड्राइव ज्यादा महंगे नहीं होते हैं और यह कंप्यूटर के कंपोनेंट की कंपैरिजन में तेज गति के साथ डाटा को ट्रांसफर करने का काम करता है।

पेन ड्राइव का उपयोग? Uses of Pendrive in Hindi

आइए अब हम यह भी जान लेते हैं की पेनड्राइव का इस्तेमाल आखिर किस लिए किया जाता है अथवा पेन ड्राइव का यूज़ क्या है।

अगर आपको अपनी फोटो, अपने दस्तावेज या फिर वीडियो अथवा अन्य किसी दूसरी पर्सनल फाइल को स्टोर करने की आवश्यकता है तो आप पेनड्राइव का इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि इसे मुख्य तौर पर इसी के लिए बनाया ही गया है।

पेनड्राइव का इस्तेमाल आप तब बैकअप लेने के लिए कर सकते हैं जब आपके कंप्यूटर अथवा लैपटॉप या फिर डेस्कटॉप में कोई खराबी आ गई है।

आपने अपने पेनड्राइव में जो फाइल स्टोर करके रखी हुई है उसे आप आसानी से दूसरे कंप्यूटर में ट्रांसफर कर सकते हैं अथवा दूसरे कंप्यूटर की फाइल को आप आसानी से अपने पेनड्राइव में ट्रांसफर कर सकते हैं।

पेनड्राइव का इस्तेमाल ऑपरेटिंग सिस्टम को इंस्टॉल करने के लिए भी किया जाता है।

पेन ड्राइव के फायदे?

पेनड्राइव के एडवांटेज अथवा पेनड्राइव के लाभ निम्नानुसार हैं।

  • अगर हमें अपने कंप्यूटर की फाइल का बैकअप बनाना है तो हम पेनड्राइव का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह इसका सबसे बड़ा एडवांटेज है।
  • पेनड्राइव वजन में हल्का भी होता है और इसकी साइज भी छोटी होती है। इसलिए आपको इसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता है। आप इसे अपनी जेब में भी ले कर के जा सकते हैं।
  • आपके पास कुछ ऐसे दस्तावेज मौजूद हैं जिसे आप डिजिटल फॉर्मेट में सुरक्षित रखना चाहते हैं तो आप उन दस्तावेज को पेन ड्राइव में स्टोर कर सकते हैं और जब चाहे जहां चाहे कंप्यूटर में पेनड्राइव को अटैच करके उन दस्तावेज को प्राप्त कर सकते हैं।
  • पेनड्राइव की कीमत काफी कम होती है। इनकी कीमत इनके साइज के हिसाब से अलग-अलग होती है। इसीलिए आपको जितने साइज की फाइल को इंस्टॉल करना है उतने साइज के पेनड्राइव को लेना चाहिए।

पेन ड्राइव के नुकसान?

आइए अब जान लेते हैं कि पेनड्राइव के डिसएडवांटेज क्या है अथवा पेनड्राइव की हानि क्या है।

  • पेनड्राइव की साइज छोटी होती है। इसलिए अक्सर पेनड्राइव लोगों से गुम हो जाती है अथवा कहीं गिर जाती है। इसलिए जब आप इसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर लेकर के जाए तब सावधानी अवश्य बरते।
  • कंप्यूटर के अंदर जो वायरस होते हैं वह आसानी से पेन ड्राइव में आ जाते हैं। इसलिए आपको टाइम टू टाइम पेन ड्राइव के वायरस की स्कैनिंग करना जरूरी है।
  • हार्ड डिस्क की तुलना में पेनड्राइव के डाटा को स्टोर करने की कैपेसिटी कम होती है।

पेन ड्राइव का उपयोग कैसे करें?

आप नीचे दी गई प्रक्रिया को फॉलो करके पेनड्राइव का इस्तेमाल कर सकते हैं।

1: आपको सबसे पहले पेनड्राइव अपने हाथों में लेना है और उसे आपको अपने लैपटॉप के यूएसबी पोर्ट में इंटर करना है। आप अपने पेन ड्राइव को सीपीयू के यूएसबी पोर्ट में भी इंटर कर सकते हैं। ऐसा करने पर पेनड्राइव आपके कंप्यूटर के साथ अटैच हो जाएगा।
2: अब पेनड्राइव कनेक्ट होने का मैसेज आपको अपने डिवाइस की स्क्रीन पर दिखाई देगा।
3: अब आपको कंप्यूटर में उस फाइल को सर्च करना है और कॉपी कर लेना है जिसे आप पेनड्राइव में कॉपी करना चाहते हैं अथवा ट्रांसफर करना चाहते हैं।
4: अब आपको फाइल मैनेजर में जाना है और पेनड्राइव को ओपन करने के बाद जो फाइल आपने कॉपी की है उसे पेस्ट कर देना है।

इतनी प्रक्रिया जब आप कर लेंगे तो कंप्यूटर का डाटा आसानी से पेन ड्राइव में ट्रांसफर हो जाएगा अथवा कॉपी हो जाएगा।

पेन ड्राइव के अन्य नाम?

पेनड्राइव के दूसरे भी कई नाम है, जिनकी लिस्ट नीचे दी गई है।

  • USB Drive
  • Jump Drive
  • Flash Drive
  • Thump Drive
  • USB Memory

पेन ड्राइव मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के नाम?

पेनड्राइव का निर्माण करने वाली कई कंपनी मौजूद है परंतु जिन कंपनियों के द्वारा अच्छी क्वालिटी के पेनड्राइव को बनाया जाता है, उनकी सूची निम्नानुसार है।

  • SanDisk
  • Sony
  • Toshiba
  • HP
  • IBall
  • Kingston Technology

पेन ड्राइव कहां से खरीदें?

पेनड्राइव हर जगह उपलब्ध है अर्थात यह मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान पर भी आपको मिल जाएगा, साथ ही कंप्यूटर अथवा लैपटॉप रिपेयरिंग या फिर कंप्यूटर अथवा लैपटॉप के शोरूम में भी आपको मिल जाएगा।

अगर आप पेनड्राइव लेने के लिए घर से बाहर नहीं जाना चाहते हैं तो आप ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट पर अच्छी क्वालिटी के और अच्छी कैपेसिटी के पेनड्राइव को सर्च कर सकते हैं और उनकी बुकिंग कर सकते हैं तथा घर बैठे ही पेनड्राइव प्राप्त कर सकते हैं।

याद रखें कि आपको हमेशा अच्छी ब्रांड के पेन ड्राइव को ही लेना चाहिए ताकि बार-बार आपको पेनड्राइव लेने की आवश्यकता ना पड़े क्योंकि घटिया ब्रांड खराब हो जाते हैं, उसमें जल्दी वायरस आ जाता है। उम्मीद है की अब आपको पेन ड्राइव क्या है? कैसे काम करता है? प्रकार, उपयोग और फायदे? से जुड़ी पूरी जानकारी मिल चुकी होगी।

FAQ:

हिंदी में पेनड्राइव को क्या कहा जाता है?

स्मृतीशलाक़ा

पेनड्राइव की गिनती किस प्रकार के डिवाइस में होती है?

एक्सटर्नल डिवाइस

पेन ड्राइव कौन सी मेमोरी है?

एक्सटर्नल डिवाइस

पेन ड्राइव किसका उदाहरण है?

E MEMORY का

इस लेख मे हमने आपको Pen Drive Kya Hai के बारे मे बताया है। इस लेख मे आप समझ गए होंगे की पेन ड्राइव क्या है? कैसे काम करता है? pendrive का खोज किसने किया और इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है।

Hope अब आपको पेन ड्राइव क्या है? कैसे काम करता है? प्रकार, उपयोग और फायदे? समझ आ गया होगा, और आप जान गये होगे की यह यंत्र कैसे काम करता है और इसके क्या लाभ है। 


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