कंप्यूटर क्या है? (What is Computer in Hindi)

7

कंप्यूटर क्या है? (What is Computer in Hindi) आज कंप्यूटर आसानी से हमारे कमरे में स्थापित हो जाता है परंतु क्या आपको पता है कि एक समय ऐसा भी था जब कंप्यूटर को स्थापित करने के लिए एक बड़े कमरे की आवश्यकता पड़ती थी। इसके अलावा कंप्यूटर चलाने के लिए स्पेशल नॉलेज की भी जरूरत होती थी।

कंप्यूटर क्या है? (What is Computer in Hindi)


कंप्यूटर आज हमारे लिए बहुत ही सहायक साबित हो रहे है परंतु इसकी खोज करने से ले करके इस पर रिसर्च करने तक विभिन्न लोगों के द्वारा काफी योगदान दिया गया है, तब जाकर आज हमें टेबल पर कंप्यूटर स्थापित करके उसका इस्तेमाल करने की सुविधा मिल रही है।

आज इस आर्टिकल में हम चर्चा करेंगे कि “कंप्यूटर क्या है” और “कंप्यूटर का इतिहास क्या है” साथ ही हम “कंप्यूटर के प्रकार कितने हैं” और “कंप्यूटर की खोज किसने की” के बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। कुल मिलाकर आप इस आर्टिकल को “कंप्यूटर की पूरी जानकारी हिंदी में” वाला आर्टिकल समझ सकते हैं।

अनुक्रम

कंप्यूटर क्या है? (What is Computer in Hindi)

इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस कंप्यूटर का निर्माण अलग-अलग प्रकार के उपकरणों को असेंबल करके बनाया गया है। कंप्यूटर अकेले ही काम करने की कैपेसिटी नहीं रखता है। इसलिए इसके साथ दूसरे उपकरणों को भी असेंबल किया जाता है। अंग्रेजी भाषा के शब्द Compute से कंप्यूटर शब्द की खोज हुई है जिसे हिंदी भाषा में गणना (Calculation) कहा जाता है।


कंप्यूटर के शुरुआती दशक में जो कंप्यूटर बनाए गए थे उनके द्वारा सिर्फ कैलकुलेशन करना ही पॉसिबल था। इसलिए शुरुआती चरण में कंप्यूटर को गणन यंत्र कहा जाता था परंतु आज के आधुनिक जमाने के कंप्यूटर ना सिर्फ कैलकुलेशन कर पाने में सक्षम है बल्कि इसके अलावा बड़े बड़े कामों को चुटकियों में ही करने की कैपेसिटी भी रख रहे हैं।

आपके द्वारा कंप्यूटर से जुड़े हुए इनपुट डिवाइस का इस्तेमाल करके जो इनपुट दिया जाता है कंप्यूटर उसे स्वीकार करता है और फिर उस पर प्रोसेसिंग करके आउटपुट के तौर पर अपनी स्क्रीन पर रिजल्ट प्रदर्शित करने का काम करता है। कंप्यूटर के कई इनपुट डिवाइस है, जिसमें keyboard और Mouse मुख्य माने जाते हैं, वही कंप्यूटर के द्वारा सूचनाओं को जहां दिखाया जाता है उसे monitor screen कहा जाता है।

डेस्कटॉप कंप्यूटर क्या है? (What is Desktop Computer in Hindi)

सिंगल यूजर के लिए डेस्कटॉप कंप्यूटर का निर्माण किया गया है। इसीलिए इस प्रकार के कंप्यूटर अधिकतर घर या फिर ऑफिस में देखे जाते हैं। डेस्कटॉप कंप्यूटर को पर्सनल कंप्यूटर भी कहा जाता है।


इसका इस्तेमाल कीबोर्ड, सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट, मॉनिटर और माउस के साथ किया जाता है। सामान्य तौर पर डेस्कटॉप कंप्यूटर का इस्तेमाल एक ही जगह पर स्थापित करके किया जाता है। हमारे देश में इंटेल, डेल, सैमसंग जैसी के कंपनियों के द्वारा डेस्कटॉप कंप्यूटर का निर्माण किया जाता है।

लैपटॉप क्या है? (What is Laptop in Hindi)

लैपटॉप एक कंप्लीट इनबिल्ट माइक्रो कंप्यूटर होता है। इसमें कीबोर्ड, माउस, स्क्रीन सब पहले से ही इनबिल्ट होती है। इसका आकार डेस्कटॉप से छोटा और पतला होता है। यह पोर्टेबल होता है। लैपटॉप का वजन मुश्किल से मुश्किल 1 किलो से लेकर के 3 किलो के आसपास में होता है।

कंप्यूटर का फुल फॉर्म

हिंदी भाषा में कंप्यूटर को संगणक अथवा गणक कहा जाता है। कंप्यूटर का फुल फॉर्म निम्नानुसार है


  • C – Commonly
  • O – Operated
  • M – Machine
  • P – Particularly
  • U – Used For
  • T – Technology
  • E – Educational
  • R – Research

कंप्यूटर का फुल फॉर्म हिंदी में

  • सी – आम तौर पर
  • ओ – संचालित
  • एम – मशीन
  • पी – विशेष रूप से
  • यू – प्रयुक्त
  • टी – तकनीकी
  • ई – शैक्षणिक
  • आर – अनुसंधान

कंप्यूटर के आविष्कारक?

कंप्यूटर के जनक अथवा कंप्यूटर के पिता के तौर पर जाने, जाने वाले Charles Babbage के द्वारा साल 1823 में एक मशीन का निर्माण किया गया था, जिसे कैलकुलेशन मशीन कहा जाता था। जिसकी सहायता से आज के जमाने के लेटेस्ट कंप्यूटर का डेवलपमेंट हो सका। इसलिए कंप्यूटर के आविष्कारक के तौर पर या फिर father of computer के तौर पर चार्ल्स बैबेज का ही नाम लिया जाता है।

हालांकि हम आपको यहां पर इस बात से भी अवगत करा देना चाहते हैं कि modern computer के डेवलपमेंट में विभिन्न लोगों के द्वारा अपना योगदान दिया गया था। इसलिए जहां एक तरफ कंप्यूटर के जनक के तौर पर चार्ल्स बैबेज का नाम लिया जाता है वही मॉडर्न कंप्यूटर के जनक के तौर पर alen Turing नाम के वैज्ञानिक का नाम लिया जाता है।

कंप्यूटर क्या है? और इसका आविष्कार किसने किया यह सब जानने के बाद चलिए अब कंप्यूटर से जुड़ी अन्य जानकारिया देखते हैं।


कंप्यूटर का इतिहास (History of Computer in Hindi)

कंप्यूटर का इतिहास जानने से अथवा कंप्यूटर की जनरेशन जानने से यह पता चलता है कि शुरुआत से लेकर के कंप्यूटर का डेवलपमेंट कैसे हुआ? और कब हुआ और कैसे शुरू में बड़े आकार वाला कंप्यूटर आज इतना छोटा हो गया है परंतु पहले के मुकाबले में तेजी के साथ काम कर रहा है और कैसे इसने इंसानों के लिए जरूरी चीजों में अपनी जगह बनाई।

कंप्यूटर के डेवलपमेंट को 5 पीढ़ियों में डिवाइड किया गया जिसे computer fifth generation कहा जाता है। आइए पहली पीढ़ी से लेकर के पांचवी पीढ़ी तक के कंप्यूटर के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।

1: कंप्यूटर की पहली जनरेशन

जिन कंप्यूटर का डेवलपमेंट अर्थात निर्माण साल 1940 से लेकर 1956 तक हुआ उन्हें पहली पीढ़ी अर्थात फर्स्ट जनरेशन के कंप्यूटर की कैटेगरी में रखा जाता है। पहली पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में मेमोरी के लिए magnetic drum का इस्तेमाल होता था, वही सर्किटट्री के लिए vacuum tube का इस्तेमाल किया जाता था।

यहां पर यह बात गौर करने वाली है कि वर्तमान के समय में आप जो छोटे आकार का कंप्यूटर देख रहे हैं वह हमेशा से ही ऐसा नहीं था, बल्कि जो पहली पीढ़ी के कंप्यूटर थे उनका आकार वर्तमान के कंप्यूटर से काफी अधिक बढा था।

यह तकरीबन 1 कमरे जितनी जगह लेते थे। पहली पीढ़ी के कंप्यूटर में मशीन लैंग्वेज का इस्तेमाल होता था। पहली पीढ़ी कंप्यूटर के एग्जांपल ENAIC, UNIVAC, EDVAC इत्यादि है।

2: कंप्यूटर की दूसरी जनरेशन

1956 से लेकर 1963 तक जिन कंप्यूटर के डेवलपमेंट पर काम चला या फिर जिन कंप्यूटर का निर्माण किया गया, उन्हें कंप्यूटर की दूसरी जेनरेशन अर्थात सेकंड जेनरेशन के कंप्यूटर कहा जाता है।

जहां पहली पीढ़ी के कंप्यूटर में वेक्यूम ट्यूब का इस्तेमाल किया गया था, वही कंप्यूटर की दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में वैक्यूम ट्यूब को हटा दिया गया और उसकी जगह पर transistor का इस्तेमाल किया जाना शुरू किया।

पहली पीढ़ी के मुकाबले में इस कंप्यूटर का आकार भी थोड़ा सा कम कर दिया गया था जो कंप्यूटर डेवलपमेंट टीम के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी।

इन कंप्यूटर की एक खास यह थी की इनके द्वारा बिजली की खपत बहुत ही कम की जाती थी और इस प्रकार के कंप्यूटर में प्रोग्रामिंग कोबोल और FORTRAN जैसी हाई लेवल की प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल किया गया था। सेकंड जनरेशन कंप्यूटर के उदाहरण IBM 7094, CDC 1604, CDC 3600 है।

3: कंप्यूटर की तीसरी जनरेशन

1964 से लेकर के 1971 के बीच कंप्यूटर की तीसरी जनरेशन पर काम चला था। इसे थर्ड जनरेशन कंप्यूटर भी कहा जाता है। पहली पीढ़ी में जहां वेक्यूम ट्यूब का इस्तेमाल किया गया था और दूसरी पीढ़ी में वेक्यूम ट्यूब को हटाकर ट्रांसिस्टर का इस्तेमाल किया गया था।

वहीं तीसरी पीढ़ी में ट्रांजिस्टर को भी हटा दिया गया और उसकी जगह पर तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में Integrated circuit का इस्तेमाल किया गया जिसे संक्षेप में आईसी कहा जाता है।

पहली पीढ़ी के कंप्यूटर और दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर के मुकाबले में इस कंप्यूटर में कुछ विशेष सुविधाएं दी गई थी। इसलिए पहली और दूसरी जनरेशन के कंप्यूटर की तुलना में इसे एडवांस कंप्यूटर कहां गया, साथ ही साथ इसका आकार भी पहले से काफी कम कर दिया गया।

बता दें कि तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में डाटा इनपुट देने के लिए माउस और कीबोर्ड जैसे साधनों का इस्तेमाल करना शुरू हो गया था। तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर के उदाहरण IBM 360, ICL 2900 है।

4: कंप्यूटर की चौथी जेनरेशन

जिन कंप्यूटर का निर्माण 1971 से लेकर 1985 के दरमियान हुआ था, उन्हें चौथी जनरेशन के कंप्यूटर अर्थात चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर कहा जाता है। चौथी पीढ़ी के जो कंप्यूटर बनाए गए थे, उसमें माइक्रोप्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया था और चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर में इंटीग्रेटेड सर्किट के अंदर ही बहुत सारे सिलिकॉन चिप को भी इंस्टॉल किया गया था।

इस प्रकार से पहली, दूसरी, तीसरी पीढ़ी के मुकाबले में चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर का आकार और भी कम कर दिया गया। साइज में छोटे होने के साथ ही साथ इन कंप्यूटर की कीमत भी मार्केट में काफी कम ही रखी गई थी।

हालांकि इसके बावजूद कंप्यूटर की क्वालिटी से कोई भी समझौता नहीं किया गया था। कंप्यूटर का निर्माण मजबूत मटेरियल से किया गया था। चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर का निर्माण करने के दरमियान ही पर्सनल कंप्यूटर पर भी काम करना शुरू कर दिया गया था। चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर के उदाहरण DEC 10, STAR 1000 है।

5: कंप्यूटर की पांचवी जनरेशन

साल 1985 के बाद जितने भी कंप्यूटर का निर्माण हुआ वह सभी कंप्यूटर की पांचवी जनरेशन के अंतर्गत आते हैं, जिनका निर्माण करने के लिए बड़े पैमाने पर Ultra large scale integration Technology का इस्तेमाल किया गया।

बता दें कि यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी होती है जिसमें एक ही microprocessor chip के अंदर लाखों कंपोनेंट को निर्मित किया जाता है। पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर के उदाहरण Desktop, Laptop है।

कंप्यूटर कैसे काम करता है?

कंप्यूटर कुल 3 स्टेप्स में काम करता है, जिसके अंतर्गत यह पहले इनपुट लेता है, उसके बाद उस पर प्रोसेसिंग करता है और फिर आउटपुट प्रदान करता है। इसे अगर उदाहरण सहित समझाएं, तो मान लीजिए कि आपको कंप्यूटर से बागी फिल्म को डाउनलोड करना है।

इसके लिए आप क्या करेंगे, आप सबसे पहले अपने कंप्यूटर को पावर ऑन करेंगे और उसके बाद कंप्यूटर में डाटा कनेक्शन भी ऑन कर देंगे, उसके पश्चात आप कंप्यूटर में मौजूद ब्राउज़र को ओपन कर देंगे। यहां तक सभी सामान्य प्रक्रिया होती है।

अब आपको कंप्यूटर में input देना होगा। इनपुट देने के लिए आप कीबोर्ड अथवा माउस जैसे डिवाइस का इस्तेमाल करेंगे। इसके अंतर्गत आप सर्च बॉक्स पर फिल्म का नाम लिखेंगे और सर्च कर देंगे।

अब आपने जो चीज सर्च की है, कंप्यूटर उसे प्राप्त करेगा और उस पर प्रोसेसिंग करना चालू कर देगा। इस प्रकार से कंप्यूटर को इनपुट मिला और उसने उस पर processing करना चालू किया।

अब कंप्यूटर संबंधित रिजल्ट आपको अपनी स्क्रीन पर दिखाता है। यानी कि output प्रदान करता है। इस प्रकार आप समझ सकते हैं कि आप ने सबसे पहले कंप्यूटर को इनपुट दिया, उसके पश्चात कंप्यूटर ने उस इनपुट पर प्रोसेसिंग करना अर्थात काम करना चालू किया और उसे जो जानकारी मिली उसने आउटपुट के तहत उसे अपनी स्क्रीन पर दिखाया। इस प्रकार से कंप्यूटर काम करता है।

कंप्यूटर के प्रकार? (Types of Computer in Hindi)

कंप्यूटर के कई प्रकार है, जिन्हें उनकी कार्यप्रणाली के आधार पर और साइज के आधार पर डिवाइड किया गया है। नीचे पहले हम कार्यप्रणाली के आधार पर कंप्यूटर के प्रकार जानेंगे और उसके पश्चात साइज के आधार पर कंप्यूटर के प्रकार की जानकारी इकट्ठा करेंगे।

कार्यप्रणाली के आधार पर कंप्यूटर के प्रकार

कार्य प्रणाली के अंतर्गत कंप्यूटर को 3 भाग में डिवाइड किया गया है जिसकी जानकारी निम्नानुसार है।

एनालॉग कंप्यूटर

एनालॉग कंप्यूटर को हिंदी भाषा में अनुरूप अभिकलित्र कहा जाता है। एनालॉग कंप्यूटर जानकारियों को अपनी स्क्रीन पर दिखाने के लिए एनालॉग सिग्नल का इस्तेमाल करते हैं। एनालॉग कंप्यूटर का इस्तेमाल ना तो घर में किया जाता है ना ही ऑफिस में किया जाता है बल्कि मेडिकल की फील्ड अथवा साइंस की फील्ड में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है।

मेमोरी अथवा स्टोरेज ना उपलब्ध होने की वजह से एनालॉग कंप्यूटर के द्वारा जो पिछले डाटा है उसे स्टोर नहीं किया जाता है अर्थात एनालॉग कंप्यूटर में input signal अगर चेंज होता है तो उसके साथ ही साथ आउटपुट भी समय-समय पर चेंज होता रहता है।

1876 में पहली बार एनालॉग कंप्यूटर का आविष्कार William Thomson के द्वारा किया गया था। इस एनालॉग कंप्यूटर का इस्तेमाल ज्वार की भविष्यवाणी करने के लिए किया जाता था।

एनालॉग कंप्यूटर भी तीन प्रकार में अवेलेबल होते हैं जिनके नाम  इलेक्ट्रॉनिक एनालॉग कंप्यूटर, मैकेनिकल एनालॉग कंप्यूटर, एनालॉग डिजिटल कंप्यूटर है। एनालॉग कंप्यूटर के उदाहरण Thermometer, Speedometer, Seismometer, Analog Clock, Voltmeter इत्यादि है।

डिजिटल कंप्यूटर

डिजिटल कंप्यूटर binary language पर काम करते हैं। बायनरी भाषा अर्थात जीरो से एक। इनपुट डिवाइस का इस्तेमाल करके यूजर के द्वारा कंप्यूटर में इनपुट दिया जाता है और फिर डिजिटल कंप्यूटर प्राप्त हुए इनपुट पर कार्यवाही चालू करता है।

और संबंधित रिजल्ट को आउटपुट डिवाइस के जरिए प्रदर्शित करता है, जिसे यूजर देखता है। बता दें कि डिजिटल कंप्यूटर के द्वारा सिर्फ बायनरी लैंग्वेज को ही समझा जाता है। डिजिटल कंप्यूटर को हिंदी भाषा में संगणक कहा जाता है।

मुख्य तौर पर गणित से संबंधित कैलकुलेशन को चालू करने के लिए डिजिटल कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाता है। स्टोरेज डिवाइस उपलब्ध होने की वजह से डिजिटल कंप्यूटर बड़े पैमाने पर डाटा स्टोर करने की कैपेसिटी रखते हैं। जब कोई काम दिया जाता है तब तेज प्रोसेसिंग स्पीड होने से काफी जल्दी रिजल्ट हासिल होते है।

लैपटॉप, कंप्यूटर और पर्सनल कंप्यूटर इत्यादि डिजिटल कंप्यूटर के ही एग्जांपल है। डिजिटल कंप्यूटर का आविष्कार करने का श्रेय John Vincent Atanasoff को दिया जाता है, क्योंकि इनके द्वारा ही साल 1930 में पहला electronic digital computer बनाया गया था।

हाइब्रिड कंप्यूटर

साल 1961 में Packard Bell के द्वारा पहला हाइब्रिड कंप्यूटर निर्मित किया गया था जिसका नाम हायकॉम 250 था। इसके बाद आगे बढ़ते हुए 1965 में एक अन्य हाइब्रिड कंप्यूटर बनाया गया जिसका नाम HYDAC 2400 था। हाइब्रिड कंप्यूटर के भी तीन प्रकार होते हैं जिनके नाम

Large Electronic Hybrid Computer, General-Purpose Hybrid Computer, Special-Purpose Hybrid Computer है।

डिजिटल कंप्यूटर और एनालॉग कंप्यूटर दोनों का ही मिश्रण हाइब्रिड कंप्यूटर में होता है। इसीलिए इसे hybrid computer कहा जाता है, जिसकी गिनती स्पेशल प्रकार के कंप्यूटर में होती है। हाइब्रिड कंप्यूटर के द्वारा कितनी भी कठिन गणित की कैलकुलेशन में क्यों ना हो, उसे आसानी से सॉल्व किया जा सकता है।

क्योंकि मुख्य तौर पर इसका निर्माण कैलकुलेशन करने के लिए ही किया गया है। इसका इस्तेमाल सामान्य तौर पर व्यक्तिगत कामों को अंजाम देने के लिए नहीं किया गया है। सामान्य कंप्यूटर के मुकाबले में हाइब्रिड कंप्यूटर की कीमत ज्यादा ही होती है।

साइज के आधार पर कंप्यूटर के प्रकार

साइज अर्थात आकार के अंतर्गत कंप्यूटर को चार प्रकार में डिवाइड किया गया है। आइए इनके बारे में भी जान लेते हैं।

माइक्रो कंप्यूटर

पहली बार 1970 में micro computer का नाम सुनाई दिया। दुनिया के पहले माइक्रो कंप्यूटर का नाम Micral था। इसका निर्माण साल 1973 में किया गया था और इसका निर्माण करने वाली कंपनी का नाम Realisation D’Etudes Electroniques (R2E) था।

1995 के आसपास तक माइक्रोकंप्यूटर दुनिया के अधिकतर देशों में पहुंचने में सफल हो गया था। इनपुट डिवाइस, माइक्रोप्रोसेसर, एएलयू, मेमोरी और इनपुट डिवाइस इत्यादि माइक्रो कंप्यूटर के भाग हैं। माइक्रो कंप्यूटर के उदाहरण डेस्कटॉप, लैपटॉप, मोबाइल फ़ोन, एंड्राइड, स्मार्टफोन, नोटबुक, टेबलेट, कैलकुलेटर, सर्वर, गेमिंग कंसोल, वर्क स्टेशन इत्यादि हैं।

माइक्रो कंप्यूटर की साइज छोटी होती है। इसमें सीपीयू की जगह पर माइक्रोप्रोसेसर को लगाया गया होता है। माइक्रो कंप्यूटर को सिर्फ एक समय में एक ही व्यक्ति के द्वारा यूज में लिया जा सकता है।

इस कंप्यूटर में रेंडम एक्सेस मेमोरी, रीड ओनली मेमोरी, इनपुट और आउटपुट पोर्ट तथा माइक्रोप्रोसेसर सभी को एक ही यूनिट में स्थापित किया जाता है। नॉर्मल काम जैसे कि घर से संबंधित काम, स्कूल के काम, कॉलेज के काम या फिर ऑफिस के कामों को अंजाम देने के लिए माइक्रो कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाता है।

मिनी कंप्यूटर

एक बड़े कंप्यूटर की अधिकतर सेवाएं और विशेषताएं mini computer में होती हैं। हालांकि बड़े कंप्यूटर की तुलना में मिनी कंप्यूटर के स्क्रीन का आकार और उसका पूरा आकार छोटा होता है। मिनी कंप्यूटर को मीडियम साइज का कंप्यूटर भी कहा जाता है।

बिजनेस के मैनेजमेंट में, फाइल के मैनेजमेंट में, डाटा के मैनेजमेंट में, इन्वेंटरी के मैनेजमेंट में, एकाउंटिंग और बिलिंग से संबंधित कामों को पूरा करने के लिए मिनी कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाता है।

IBM company के द्वारा पहली बार मिनी कंप्यूटर की खोज और इसका आविष्कार साल 1960 के दशक में किया गया था, जिसका नाम प्रोग्रामेबल डाटा प्रोसेसर 1 रखा गया था। मिनी कंप्यूटर के उदाहरण  IBM’s AS/400e, Honeywell200, TI-990. Control Data’s CDC 160A And CDC 1700, Interdata 7/32 And 8/32, Apple Mac Mini इत्यादि हैं।

मेनफ्रेम कंप्यूटर

मेनफ्रेम कंप्यूटर का आकार काफी बड़ा होता है। इनका अगर इतना बड़ा होता है कि यह स्थापित होने के लिए 1000 स्क्वायर फुट से लेकर 2000 स्क्वायर फुट तक की जगह भी ले सकते हैं।

 इसमें हाई मेमोरी, बहुत ही बड़ा स्टोरेज और अच्छी क्वालिटी के प्रोसेसर उपलब्ध होते हैं। मेनफ्रेम कंप्यूटर के काम करने की कैपेसिटी काफी तेज होती है और यह बहुत ही फास्ट रिजल्ट प्रदर्शित करते हैं।

इसलिए बैंकिंग सेक्टर में, गवर्नमेंट डिपार्टमेंट में, बड़ी-बड़ी कंपनियों में और साइंस रिसर्च के लिए Mainframe computer का इस्तेमाल किया जाता है। मल्टीटास्किंग के मामले में मेनफ्रेम कंप्यूटर काफी कमाल का होता है। मेनफ्रेम कंप्यूटर की खासियत यह है कि इस पर एक ही साथ 80 से भी ज्यादा लोगों के द्वारा काम किया जा सकता है।

इंटरनेट पर मौजूद अलग-अलग वेबसाइट से प्राप्त जानकारियों के अनुसार साल 1930 में Howard Aiken के द्वारा दुनिया का पहला मेनफ्रेम कंप्यूटर बनाया गया था जिसका नाम हार्वर्ड मार्क 1 था। इस कंप्यूटर का वजन तकरीबन 5 टन के आसपास में था और कंप्यूटर की स्थापना करने के लिए तकरीबन 1 बड़े कमरे जितने जगह की आवश्यकता पड़ती थी।

मेनफ्रेम कंप्यूटर के उदाहरण IBM Z Series – IBM Z15, IBM Z14, IBM System Z13, IBM System Z10, IBM System Z9 Etc., Tianhe-1A; NUDT YH Cluster, Jaguar; Cray XT5, Nebulae; Dawning TC3600 Blad, IBM 370, S/390, Fujitsu’s ICL VME, Hitachi’s Z800, I Series System इत्यादि है।

सुपर कंप्यूटर

सुपर कंप्यूटर में एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है और किसी स्पेशल काम को करने के लिए सुपर कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाता है। सुपर कंप्यूटर के नाम से ही प्रतीत होता है कि इनके काम करने की स्पीड दूसरे कंप्यूटर के मुकाबले में काफी अधिक हैं। यह तेजी के साथ कठिन से कठिन चीजों को भी चालू कर देते हैं। दुनिया के सबसे पावरफुल कंप्यूटर में सुपरकंप्यूटर की गिनती होती है।

इनके काम करने की गति को floating point operation per second के पैरामीटर से नापा जाता है। दूसरे कंप्यूटर की तुलना में सुपर कंप्यूटर का आकार भी काफी बड़ा होता है और साथ ही इनकी कीमत भी काफी अधिक होती है।

पहली बार सुपर कंप्यूटर का निर्माण साल 1960 में किया गया था जिसका नाम सीडीसी 1604 था‌। दुनिया के कुछ फेमस सुपर कंप्यूटर के नाम Fugaku, Sunway TaihuLight, Summit, Sierra इत्यादि है और भारत के कुछ प्रसिद्ध सुपर कंप्यूटर के नाम PARAM Siddhi-AI, Pratyush, Mihir इत्यादि है।

कंप्यूटर के भाग

आर्टिकल की शुरुआत में ही हमने आपको इस बात को बताया था कि कंप्यूटर का निर्माण सिर्फ अकेले ही नहीं होता है, बल्कि अलग-अलग भागों को असेंबल करके एक कंपलीट कंप्यूटर का निर्माण किया जाता है। कंप्यूटर के मुख्य तौर पर 2 भाग होते हैं। पहला होता है सॉफ्टवेयर और दूसरा होता है हार्डवेयर। आइए कंप्यूटर के भागों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं।

1: हार्डवेयर

कंप्यूटर हार्डवेयर के अंतर्गत जो भी उपकरण आते हैं उन्हें आप देख भी सकते हैं साथ ही उन्हें आप टच भी कर सकते हैं। एक कंप्यूटर को तभी पूरा आकार मिलता है, जब उसके सभी हार्डवेयर उसके साथ कनेक्ट किए जाते हैं।

कंप्यूटर के प्रमुख हार्डवेयर के तौर पर माउस, कीबोर्ड, मॉनिटर, माइक्रोफोन इत्यादि का नाम लिया जाता है। कंप्यूटर में जो हार्डवेयर कनेक्टेड होते हैं उनसे काम करवाने के लिए कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर होना आवश्यक है। आसान भाषा में कहा जाए तो कंप्यूटर की बॉडी हार्डवेयर होती है और कंप्यूटर की आत्मा सॉफ्टवेयर होती है।

कंप्यूटर हार्डवेयर के मुख्य तौर पर 5 प्रकार होते हैं जिनकी जानकारी निम्नानुसार है।

इनपुट डिवाइस

इनपुट डिवाइस का इस्तेमाल करके यूजर के द्वारा कंप्यूटर को काम करने के लिए किसी भी प्रकार का इंस्ट्रक्शन अर्थात दिशा निर्देश दिया जाता है।

अगर आपके पास इनपुट डिवाइस अवेलेबल नहीं होगा तो आप कंप्यूटर से कोई भी काम करवाने में सक्षम नहीं होंगे। जब आप कंप्यूटर को कोई भी इनपुट प्रदान करते हैं तो कंप्यूटर उसे प्राप्त करता है और प्रोसेसिंग करके संबंधित रिजल्ट दिखाता है। कंप्यूटर के इनपुट डिवाइस के कुछ प्रमुख नाम निम्नानुसार है‌।

  • कीबोर्ड (Keyboard)
  • माउस (Mouse)
  • स्कैनर (Scanner)
  • माइक्रोफोन (Microphone)
  • टच स्क्रीन (Touch Screen)

 सीपीयू

सीपीयू का फुल फॉर्म सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट होता है। कंप्यूटर के जितने भी महत्वपूर्ण भाग हैं, उनमें सीपीयू का नाम अवश्य शामिल होता है। आप जब कंप्यूटर को कोई भी इनपुट देते हैं, तो उसकी प्रोसेसिंग करने का काम सीपीयू के द्वारा ही किया जाता है और जब रिजल्ट आता है उसे आउटपुट के माध्यम से कंप्यूटर की स्क्रीन पर दिखाने का काम भी सीपीयू ही करता है।

अन्य भाषा में इसे या तो प्रोसेसर कहा जाता है अथवा माइक्रोप्रोसेसर कहा जाता है। कंप्यूटर के दिमाग के तौर पर भी सीपीयू का हीं जवाब दिया जाता है, क्योंकि सीपीयू ही वह भाग है जिसके द्वारा कंप्यूटर के इनपुट डिवाइस, आउटपुट डिवाइस, Arithmetic और लॉजिकल तथा डिवाइस मेमोरी को कंट्रोलिंग में लिया जाता है।

हिंदी भाषा में सीपीयू को केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई कहते हैं जोकि सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट का हिंदी में मतलब होता है। सीपीयू के प्रकार Single Core CPU, Dual Core CPU, Quard Core CPU, Hexa Core CPU, Octa Core CPU, Deca Core CPU इत्यादि हैं।

सीपीयू के तीन भाग होते है, जिनके नाम निम्नानुसार है।

  • Memory (मेमोरी)
  • Control Unit (कण्ट्रोल यूनिट)
  • Arithmetic Logic Unit (अरिथमेटिक लॉजिक यूनिट)

आउटपुट डिवाइस

कंप्यूटर के साथ कुछ आउटपुट डिवाइस भी कनेक्टेड होते हैं। इनका काम होता है जो इनपुट कंप्यूटर को इनपुट डिवाइस के द्वारा दिया गया है और जिस पर प्रोसेसिंग हुई है उसे रिजल्ट के तौर पर दिखाना।

कुछ महत्वपूर्ण आउटपुट डिवाइस के नाम निम्नानुसार है।

  • Monitor (मॉनिटर)
  • Printer (प्रिंटर)
  • Speaker (स्पीकर)
  • Projector (प्रोजेक्टर)
  • Plotter (प्लॉटर)
  • Headphone (हैडफ़ोन)
  • Speech Synthesizer (स्पीच सिंथेसाइज़र)
  • Ear Phone (एअर फ़ोन)
  • Sound Card (साउंड कार्ड)

मेमोरी

मेमोरी का साफ मतलब होता है चीजों को याद करके रखने वाली चीज। कंप्यूटर मेमोरी में पीसी का सारा डाटा स्टोर होता है, मैमोरी दो प्रकार होते हैं प्राइमरी मेमोरी और सेकेंडरी मेमोरी।

कंप्यूटर की प्राइमरी मेमोरी को प्राथमिक स्मृति कहा जाता है। सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के साथ कंप्यूटर की प्राइमरी मेमोरी डायरेक्ट तौर पर अटैच होती है। इसके भी टोटल दो प्रकार है पहला है रेंडम एक्सेस मेमोरी और दूसरा है रीड ओनली मेमोरी।

RAM

रैम का फुल फॉर्म रेंडम एक्सेस मेमोरी होता है। हमारे द्वारा अपने कंप्यूटर में/मोबाइल में किसी भी प्रकार की एप्लीकेशन को चलाया जाता है या फिर कोई भी वीडियो, ऑडियो, फोटो या फिर गेम इत्यादि को हम ओपन करते हैं।

तब उस दरमियान उसका सभी डाटा रेंडम एक्सेस मेमोरी में ही जाकर सुरक्षित होता हैं और जैसे ही हमारे द्वारा कंप्यूटर या फिर मोबाइल को स्विच ऑफ कर दिया जाता है वैसे ही रेंडम एक्सेस मेमोरी में जो भी डाटा स्टोर होते हैं वह तुरंत ही खत्म हो जाते हैं।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि रेंडम एक्सेस मेमोरी अस्थाई मेमोरी अर्थात वोलेटाइल मेमोरी होती है जिसमें डेटा हमेशा के लिए स्टोर नहीं होते हैं। रेंडम एक्सेस मेमोरी के दो प्रकार होते हैं जिनके नाम SRAM (Static RAM या Static Random Access Memory) और DRAM (Dynamic RAM या Dynamic Random Access Memory) है।

ROM

रोम का फुल फॉर्म रीड ओनली मेमोरी होता है। जिस प्रकार से रेंडम एक्सेस मेमोरी में डाटा मोबाइल या फिर कंप्यूटर को बंद करने के बाद खत्म हो जाता है, उस प्रकार से इस मेमोरी में ऐसा नहीं होता है, क्योंकि यह एक परमानेंट मेमोरी होती है।

इसमें जो भी डाटा अवेलेबल होते हैं, उसमें आप किसी भी प्रकार का कोई भी बदलाव नहीं कर सकते हैं, क्योंकि इसमें मौजूद डाटा कंपनी के द्वारा ही विकसित किया जाता है। कंप्यूटर या फिर मोबाइल को पावर ऑन करने से लेकर के उस पर काम करने तक और कंप्यूटर अथवा मोबाइल को पावर ऑफ करने के पश्चात भी इसमें जो डाटा होते हैं, वह खत्म नहीं होते है।

सेकेंडरी मेमोरी

हिंदी भाषा में इसे द्वितीय मेमोरी कहा जाता है। कंप्यूटर में स्थाई तौर पर डाटा को सुरक्षित करने के लिए इस मेमोरी का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी गिनती नॉन वोलेटाइल मेमोरी में होती है अर्थात इसका मतलब यह है कि जब कंप्यूटर को पावर ऑफ कर दिया जाता है तो उसके पश्चात भी इसमें जो डाटा उपलब्ध होते हैं वह खराब नहीं होते हैं अर्थात नष्ट नहीं होते हैं।

इसका अन्य नाम एक्सटर्नल मेमोरी अथवा ऑग्ज़ीलियरी स्टोरेज है। इसमें जो डाटास्टोर होते हैं वह टेराबाइट और गीगाबाइट में सुरक्षित होते हैं। सेकेंडरी मेमोरी तब काम में आती है, जब कंप्यूटर में डाटा का बैकअप लेने की आवश्यकता होती है।

 मदर बोर्ड

हरे रंग के मदरबोर्ड का अन्य नाम प्रिंटेड सर्किट बोर्ड भी होता है, जो कि कंप्यूटर सिस्टम के महत्वपूर्ण भागों में से एक गिना जाता है। मदर बोर्ड का काम होता है कंप्यूटर के विभिन्न भागों को एक साथ कनेक्ट करना ताकि कंप्यूटर के साथ जो भाग कनेक्ट किए गए हैं वह आपस में एक दूसरे के साथ कम्युनिकेशन स्थापित कर सकें।

कंप्यूटर के जितने भी इंटरनल पार्ट है और जितने भी एक्सटर्नल पार्ट है वह सभी आपस में कम्युनिकेशन करने के लिए मदर बोर्ड के साथ ही अटैच होते हैं। सीपीयू, रैम, हार्ड डिस्क ड्राइव इत्यादि कंप्यूटर के मदरबोर्ड के साथ ही कनेक्टेड होते हैं।

2: सॉफ्टवेयर

क्या आप जानते हैं कि अगर किसी कंप्यूटर का सॉफ्टवेयर खराब हो जाता है या फिर किसी कंप्यूटर में अगर सॉफ्टवेयर दिया ही ना जाए तो वह कंप्यूटर एक प्लास्टिक के डिब्बे के अलावा कुछ भी नहीं होगा।

कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर को कंप्यूटर की आत्मा कहा जाता है। दरअसल सॉफ्टवेयर के अंतर्गत प्रोग्राम का एक ग्रुप बनाया जाता है जिसमें विभिन्न प्रकार के इंस्ट्रक्शन होते हैं और उन्ही इंस्ट्रक्शन को कंप्यूटर तब ग्रहण करता है, जब आप सॉफ्टवेयर को कंप्यूटर में इंस्टॉल करते हैं।

सामान्य भाषा में कहा जाए तो सॉफ्टवेयर में ही यह सब चीजें फिट की गई होती है कि कंप्यूटर को किस प्रकार से काम करना है और कौन से इनपुट पर उसे क्या प्रदर्शित करना है। सॉफ्टवेयर को ना तो किसी भी व्यक्ति के द्वारा देखा जा सकता है ना ही इसे टच किया जा सकता है, इन्हें सिर्फ अनुभव किया जा सकता है क्योंकि इनका कोई भी फिजिकल अस्तित्व नहीं होता है।

कंप्यूटर में मौजूद एमएस वर्ड, एक्सल, पावरप्वाइंट इत्यादि सॉफ्टवेयर ही है। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के भी दो प्रकार होते हैं, जिसमे पहला होता है सिस्टम सॉफ्टवेयर और दूसरा होता है एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर।

सिस्टम सॉफ्टवेयर

कंप्यूटर के जो हार्डवेयर होते हैं, उनका मैनेजमेंट करने का काम जिस प्रोग्राम के द्वारा किया जाता है उसे ही सिस्टम सॉफ्टवेयर कहा जाता है। सिस्टम सॉफ्टवेयर के द्वारा ना सिर्फ कंप्यूटर के हार्डवेयर का मैनेजमेंट देखा जाता है।

बल्कि इसके अलावा उसके द्वारा एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को भी संचालित करने का काम किया जाता है। आपका कंप्यूटर काम करने के लायक तभी बन पाता है जब उसमें सिस्टम सॉफ्टवेयर अवेलेबल होता है।

अगर किसी कंप्यूटर में मौजूद सिस्टम सॉफ्टवेयर में कोई भी खराबी आ जाती है तो उस कंप्यूटर को विभिन्न ऑपरेशन को पूरा करने में काफी समस्याएं आती है। जब आप अपने कंप्यूटर को ऑन करते हैं और उस पर काम करते हैं और उसके पश्चात कंप्यूटर को ऑफ करते हैं।

तो इस दरमियान कंप्यूटर के ऑन होने से लेकर कंप्यूटर के ऑफ होने तक जो भी काम होते हैं वह सिस्टम सॉफ्टवेयर की वजह से ही हो पाते हैं और सिस्टम सॉफ्टवेयर ही उन कामों को कंट्रोल करता है। सिस्टम सॉफ्टवेयर को सिर्फ लो लेवल लैंग्वेज में लिखा जाता है, क्योंकि इसे सिर्फ मशीन ही समझ पाती है।

सिस्टम सॉफ्टवेयर के प्रकार निम्नानुसार है।

  • ऑपरेटिंग सिस्टम
  • डिवाइस ड्राइवर
  • ट्रांसलेटर
  • फर्मवेयर
  • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर

स्पेशल कैटेगरी के सॉफ्टवेयर में आने वाले एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को किसी स्पेशल कामों की पूर्ति के लिए ही डिजाइन करने का काम किया जाता है। एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के द्वारा यूजर अपने आवश्यक कामों को पूरा कर सकता है।

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को जब चाहे तब यूजर के द्वारा इनस्टॉल किया जा सकता है या फिर यूजर चाहे तो डायरेक्ट इन्हें ऑनलाइन भी एक्सेस कर सकता है और जब उसका काम पूरा हो जाए तब वह एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को अनइनस्टॉल भी कर सकता है।

इंटरनेट पर ऐसे कई एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर मौजूद है, जिनका इस्तेमाल निशुल्क किया जा सकता है, वहीं कुछ एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने के लिए पैसे देने की आवश्यकता होती है।

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के उदाहरण निम्नानुसार है।

  • MS Word
  • Excel
  • Power Point
  • Chrome
  • Notepad
  • Media Player,
  • MS Access
  • Oracle

कंप्यूटर की विशेषताएँ?

कंप्यूटर की कुछ शानदार विशेषताओं में से मुख्य विशेषताएं निम्नानुसार है।

  • कंप्यूटर के एक्सटर्नल स्टोरेज में तो अनलिमिटेड डाटा को स्टोर करके रखा जा सकता है। इसके अलावा कंप्यूटर के पास अपना खुद का भी इंटरनल स्टोरेज होता है जिसकी साइज निश्चित होती है, उसमें भी आप अपने तमाम प्रकार के डाटा को स्टोर कर सकते हैं।
  • कंप्यूटर की विभिन्न शानदार विशेषताओं में से सबसे जबरदस्त विशेषता है इसके द्वारा बिना गलती के दिया जाने वाला रिजल्ट। इंसान तो एक बार भले किसी भी काम को करने में गलती कर सकता है परंतु कंप्यूटर के द्वारा गलती करने के चांस ना के बराबर होते हैं। आपको इसके द्वारा बिल्कुल एक्यूरेट अर्थात सटीक जानकारी दी जाती है। कैलकुलेशन करने के मामले में तो इसका कोई भी जवाब नहीं है।
  • चाहे कितनी भी मुश्किल कैलकुलेशन अर्थात गणना क्यों ना हो, कंप्यूटर पर आप मुश्किल से मुश्किल कैलकुलेशन को सेकंड में ही कर सकते हैं। यहां तक की गणित से संबंधित जिन सवालों को सॉल्व करने के लिए इंसानों को घंटे तक उसे सॉल्व करने का प्रयास करना होता है उसे ही कंप्यूटर एक सिंगल क्लिक में सॉल्व करके देता है।
  • आज के आधुनिक समय में जो कंप्यूटर कंपनियों के द्वारा लांच किए जा रहे हैं वह एक ही समय पर अलग-अलग कामों को करने की कैपेसिटी रखते हैं अर्थात मल्टीटास्किंग में निपुण होते हैं।
  • कंप्यूटर ना सिर्फ इंसानों के लिए अलग-अलग कामों को करने के लिए सहायक साबित हो रहा है बल्कि कंप्यूटर के द्वारा ही इंसान घर बैठे आज पैसे कमाने में भी सफल हो रहे है। गृहणियो के लिए भी कंप्यूटर घर बैठे पैसे कमाने का एक बेहतरीन जरिया बनकर सामने आया है।
  • कंप्यूटर का इस्तेमाल करने से इंसानों के समय की भी काफी बचत हो रही है क्योंकि ऐसे कई काम है जिन्हें ऑफलाइन करने में काफी अधिक समय लगता था परंतु वही काम अब ऑनलाइन बहुत ही कम समय में हो जा रहा है।

कंप्यूटर का उपयोग?

आज अधिक से अधिक जगह पर कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इंसानों के काम की सबसे महत्वपूर्ण वस्तुओं में कंप्यूटर की गिनती होती है।

1: मेडिकल की फील्ड में

मेडिकल स्टोर पर दवाइयों का डाटा रखने के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा पेशेंट का बिल बनाने के लिए भी कंप्यूटर को इस्तेमाल में लिया जाता है। इसके अलावा हॉस्पिटल में आने जाने वाले लोगों की एंट्री करने के लिए भी आजकल बड़े पैमाने पर कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

2: साइंस की फील्ड में 

साइंस की फील्ड में कंप्यूटर काफी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। नई-नई रिसर्च करने के लिए और रिसर्च डाटा को सुरक्षित रखने के लिए वैज्ञानिक कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा कठिन कैलकुलेशन को सॉल्व करने के लिए भी साइंटिस्ट के द्वारा कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

3: ऑफिस के लिए

ऑफिस में ऑफिस से संबंधित कामों की डाटा एंट्री करने के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जा रहा है साथ ही ऑफिस में बैठे बैठे बिजनेस संचालित करने के लिए भी कंप्यूटर सहायक साबित हो रहा है।

4: एजुकेशन की फील्ड में

स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और कोचिंग इंस्टीट्यूट में भी कंप्यूटर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है, क्योंकि कंप्यूटर के द्वारा विद्यार्थियों को टीचर के द्वारा विभिन्न चीजें सिखाई जा रही है, साथ ही कंप्यूटर पर उनका प्रैक्टिकल भी करवाया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल ज्ञान भी बड़े पैमाने पर हासिल हो रहा है।

शैक्षणिक संस्थानों में कंप्यूटर पर रिपोर्ट बनाने का काम, ऑनलाइन एग्जाम करवाने का काम किया जाता है, साथ ही विद्यार्थियों की फीस का डाटा भी कंप्यूटर में स्टोर किया जाता है। इसके अलावा विद्यार्थियों का रिजल्ट भी कंप्यूटर के द्वारा स्कूलों में अथवा शैक्षणिक संस्थानों में बनाया जा रहा है।

5: बैंकिंग की फील्ड में

चाहे गवर्नमेंट बैंक हो, चाहे प्राइवेट बैंक हो या फिर कोई भी फाइनेंस इंस्टीट्यूट हो, हर जगह कंप्यूटर अवश्य उपलब्ध होता है, क्योंकि बैंकिंग की फील्ड में कंप्यूटर की आवश्यकता अकाउंट डिटेल चेक करने के लिए, पासबुक की प्रिंटिंग करने के लिए।

किसी भी योजना के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरने के लिए, व्यक्ति का पीएफ अकाउंट ओपन करने के लिए, फंड का ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। यहां तक की बैंकिंग की फील्ड में व्यक्ति के पैन कार्ड से संबंधित जानकारियों को पाने के लिए भी कंप्यूटर का इस्तेमाल होता है।

6: घरों में कंप्यूटर

हमारे और आपके घर में भी कंप्यूटर का इस्तेमाल कुछ भी सर्च करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त करने के लिए अथवा किसी छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने हेतु या फिर किसी योजना की जानकारी पाने के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल हो रहा है।

7: सिक्योरिटी की फील्ड में

कंप्यूटर के द्वारा देश की सिक्योरिटी और सैन्य क्षेत्र में भी अपना अहम योगदान दिया जा रहा है। दुश्मन देश के द्वारा किए गए मिसाइल अटैक को खत्म करने के लिए भी कंप्यूटर का इस्तेमाल मिसाइल को ट्रैक करने के लिए किया जाता है।

8: गवर्नमेंट ऑफिस में

गवर्नमेंट ऑफिस में बड़े पैमाने पर कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे जनता को सुविधाएं प्राप्त होती है, साथ ही गवर्नमेंट वर्कर को भी काम करने में आसानी होती है

9: मनोरंजन की फील्ड में

आज हमें चाहे कोई भी गाना सुनना हो, कोई भी वीडियो देखना हो या फिर किसी भी प्रकार की फोटो देखनी हो, यह सभी काम कंप्यूटर के द्वारा किया जा सकता है। इस प्रकार से कंप्यूटर हमारे इंटरटेनमेंट का भी साथी माना जाता है।

10: बिजनेस में

आज हर कोई अपने बिजनेस को ऑनलाइन लेकर जा रहा है क्योंकि ऑनलाइन बिजनेस करने से लाखों की इनकम की जा रही है। लोग घर बैठे ऑनलाइन सेलिंग कर रहे हैं। इसके लिए उनके द्वारा कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जा रहा है क्योंकि इसके द्वारा वह अपने बिजनेस का मैनेजमेंट सही प्रकार से कर पाते हैं।

11: ऑनलाइन पैसे कमाने में

कंप्यूटर की वजह से अब विद्यार्थी और घर पर रहने वाली महिलाएं एक्स्ट्रा इनकम घर बैठे ही कर रही है, क्योंकि ऐसे कई काम अब ऑनलाइन उपलब्ध हो चुके हैं जिन्हें करने पर अच्छे खासे रुपए घर बैठे कमाए जा सकते हैं। पार्ट टाइम कंप्यूटर पर काम करने वाले कई काम अब उपलब्ध हो चुके हैं।

कंप्यूटर के फायदे?

कंप्यूटर के एडवांटेज क्या है अथवा कंप्यूटर के लाभ क्या है, आइए जानते हैं।

  • कंप्यूटर के द्वारा हम गणित से संबंधित कैलकुलेशन को सिर्फ 1 सेकेंड के अंदर ही सॉल्व कर सकते हैं, फिर चाहे कैलकुलेशन कितनी भी कठिन क्यों ना हो।
  • घर बैठे पैसे कमाने के लिए या फिर ऑनलाइन पैसा कमाने के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है। इसलिए आप इस पर कितने भी घंटे काम कर सकते हैं।
  • कंप्यूटर में आप अपने किसी भी प्रकार के डाटा को स्टोर करके रख सकते हैं। जैसे की ऑडियो, वीडियो, दस्तावेज, कांटेक्ट नंबर, फोटो इत्यादि।
  • कंप्यूटर की वजह से ही हमारे कई काम अब आसान बन चुके हैं।
  • अपने आस-पड़ोस की, देश और दुनिया की जानकारी हासिल करने के लिए आप कंप्यूटर का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • कंप्यूटर से आप पसंदीदा गाना सुन सकते हैं, वीडियो देख सकते हैं या फिर अपनी पसंद का न्यूज़ आर्टिकल पढ़ सकते हैं।
  • अपनी बोरियत को दूर करने के लिए कंप्यूटर पर आप गेम खेल सकते हैं।

कंप्यूटर के नुकसान?

कंप्यूटर के डिसएडवांटेज क्या है अथवा कंप्यूटर की हानियां क्या है, आईए इसके बारे में भी जान लेते हैं।

  • अगर आपके द्वारा दैनिक तौर पर और खास तौर पर रात में कंप्यूटर का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है तो इससे आपकी आंखों को नुकसान हो सकता है और आपकी आंखों में से पानी बहने की समस्या हो सकती है।
  • अगर आपको कंप्यूटर का काम है तब तो कंप्यूटर पर काम करना चाहिए परंतु बिना काम के ही अगर आप कंप्यूटर पर समय व्यतीत करते हैं तो यह समय की बर्बादी है।
  • कंप्यूटर की वजह से ही कई लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है, क्योंकि कुछ ऐसे काम है जहां पर अब कंप्यूटर का इस्तेमाल इंसानों की जगह पर किया जा रहा है जिसकी वजह से बेरोजगारी की समस्या भी काफी बढ़ी हुई है।
  • कंप्यूटर का इस्तेमाल करने से आपकी सिक्योरिटी को भी बराबर खतरा बना हुआ रहता है, क्योंकि अधिकतर लोगों के द्वारा कंप्यूटर में अपनी पर्सनल जानकारियों को रखा जाता है।
  • ऐसे में अगर आपके कंप्यूटर को किसी साइबर क्रिमिनल के द्वारा हैक कर लिया जाता है तो उनके द्वारा आपकी पर्सनल जानकारियों का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है अथवा उसके द्वारा आप को ब्लैकमेल भी किया जा सकता है।
  • कंप्यूटर में कोई भी खराबी आने पर उसके पार्ट्स थोड़े से महंगे आते हैं। इसलिए आपके पास कंप्यूटर की मरम्मत करवाने के लिए उचित पैसे होने चाहिए।

भारत में कंप्यूटर का इतिहास?

हमारे देश में पहला कंप्यूटर लाने का श्रेय डॉक्टर Dwijish Dutta को जाता है। यह बात साल 1952 की है। 1952 के साल में हमारे देश में पहला कंप्यूटर Indian science institute के अंदर लाया गया था जो कि भारत देश के पश्चिम बंगाल राज्य के कोलकाता शहर में मौजूद है। इस संस्थान में लाया गया कंप्यूटर analog computer था।

इसके बाद के सालों में बेंगलुरु शहर में मौजूद इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के अंदर भी एक एनालॉग कंप्यूटर का सेटअप किया गया। हालांकि वास्तविक तौर पर देखा जाए तो हमारे भारत देश में कंप्यूटर के युग की शुरुआत साल 1956 में हुई क्योंकि इसी साल में पश्चिम बंगल के कोलकाता शहर में स्थापित साइंस इंस्टिट्यूट में HEC-2M नाम के कंप्यूटर पर स्थापित किया गया।

यह एक डिजिटल कंप्यूटर था। इस प्रकार से इस कंप्यूटर का भारत में आगमन होने से एशिया में मौजूद सभी देशों में से हमारा भारत देश दूसरे नंबर का ऐसा देश बना, जहां पर कंप्यूटर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाना शुरू किया गया। पहले स्थान पर जापान देश विराजमान था।

इसके बाद तो इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कोलकाता और जादवपुर यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट की टीम के द्वारा मिलकर के कंप्यूटर पर काम किया जाना शुरू कर दिया गया।

और इस प्रकार से लंबी खोजबीन और डेवलपमेंट के पश्चात साल 1966 में हमारे देश में ही निर्मित पहला डिजिटल कंप्यूटर बना करके तैयार किया गया जिसे ISIJU का नाम दिया गया। इस कंप्यूटर का निर्माण करने में ट्रांसिस्टर का भी इस्तेमाल किया गया था।

भारत में निर्मित सुपर कंप्यूटर?

कंप्यूटर की उपयोगिता को समझते हुए भारतीय वैज्ञानिकों ने भी इस पर काम करना चालू किया और धीरे-धीरे एक से बढ़कर एक सुपर कंप्यूटर का निर्माण हमारे देश में होने लगा, जिनमें से कुछ प्रमुख सुपर कंप्यूटर की लिस्ट निम्नानुसार है, जिनका निर्माण भारत देश में किया गया है, जो हर भारतवासी के लिए गर्व की बात है।

  • एका
  • अनुपम अध्या
  • सागा 220
  • परम युवा II
  • आदित्य
  • परम इशान
  • प्रत्युष
  • परम – सिद्धि

कंप्यूटर का भविष्य (Future of Computer in Hindi)

जिस प्रकार से समय व्यतीत होते जा रहा है, उसी प्रकार से अधिक से अधिक जगह पर कंप्यूटर का इस्तेमाल लोगों के द्वारा अथवा कंपनियों के द्वारा किया जा रहा है, साथ ही साथ लगातार कंप्यूटर पर रिसर्च भी की जा रही है।

यह कंप्यूटर पर रिसर्च का ही परिणाम है कि जहां शुरुआत में कंप्यूटर को एक बड़े कमरे में स्थापित किया जाता था, वहीं अब यह एक छोटे से टेबल पर भी स्थापित हो जाता है।

वर्तमान के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भी काफी बड़े पैमाने पर काम किया जा रहा है। इसलिए इस बात की प्रबल संभावना जताई जा रही है कि भविष्य में ऐसे कंप्यूटर भी विभिन्न कंपनियों के द्वारा लांच किए जा सकते हैं, जो ऑटोमेटिक ही अपने सभी कामों को अंजाम देंगे।

हालांकि इसका सबसे बड़ा नुकसान इंसानों को ही भुगतना पड़ेगा, क्योंकि कंप्यूटर की वजह से कई इंसानों को भविष्य में अपनी नौकरी गंवानी पड़ सकती है। हालांकि दूसरी तरफ इंसानों की कई समस्या को सॉल्व करने में भी कंप्यूटर महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे। हालांकि भविष्य किसी ने भी नहीं देखा, इसलिए कंप्यूटर का भविष्य कैसा रहेगा, इसके बारे में पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता है।

कंप्यूटर सीखना क्यों जरूरी है?

दुनिया भर में लगभग हर फील्ड में कंप्यूटर का इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह आवश्यक है कि वह कंप्यूटर सीखना चालू कर दें और अपने कंप्यूटर की साक्षरता को बढ़ाएं। वर्तमान के समय में किसी भी फील्ड में नौकरी पाने के लिए आपके पास कम से कम सामान्य कंप्यूटर की जानकारी तो अवश्य ही होनी चाहिए।

गवर्नमेंट से लेकर के प्राइवेट सेक्टर की ऐसी कई नौकरी है, जिनमें मुख्य तौर पर कंप्यूटर सीखें हुए लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसलिए कंप्यूटर सीखना आज के समय में आवश्यक हो गया है। आज के समय में अधिकतर बिजनेस टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इसलिए उन बिजनेस को ऑपरेट करने वाले लोगों के द्वारा अथवा कंपनी के द्वारा अपने वर्कर से यह अपेक्षा की जाती है कि उन्हें कंप्यूटर चलाना आता ही हो।

अगर आपको कुछ सीखना है या फिर आपको किसी चीज के बारे में भी चर्चा करनी है, तो आपको कंप्यूटर चलाना आना चाहिए। कंप्यूटर चलाना सीख कर आप प्राइवेट और गवर्नमेंट नौकरी पाने का प्रयास कर सकते हैं। इसके अलावा आप कंप्यूटर के द्वारा ही ऑनलाइन तरीके से पैसे कमाने का भी प्रयास कर सकते हैं। तो दोस्तों आशा करते हैं की अब आपको कंप्यूटर और उससे जुड़ी सभी प्रकार की जानकारी मिल चुकी होगी, और आप जान गए होगे की कंप्यूटर क्या है? (What is Computer in Hindi)

FAQ:

कंप्यूटर के भाग कितने होते हैं?

कंप्यूटर के मुख्य तौर पर दो भाग हैं सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर।

कंप्यूटर का पूरा नाम क्या है?

Commonly Operated Machine Particularly Used for Technology Education and Research

कंप्यूटर का जनक कौन है?

चार्ल्स बैबेज

कंप्यूटर कैसे चलाते हैं?

कंप्यूटर चलाने के लिए सबसे पहले आपको कंप्यूटर पावर ऑन करना पड़ता है। कंप्यूटर पावर ऑन करने के बाद आपको कंप्यूटर में डाटा कनेक्शन भी ऑन कर देना होता है। इसके पश्चात आपको कंप्यूटर से कनेक्टेड माउस प्वाइंटर को उस आईकन या फिर शब्द पर लेकर जाना होता है जिस पर आप क्लिक करना चाहते हैं।

कंप्यूटर कैसे काम करता है?

कंप्यूटर कुल 3 स्टेप्स में काम करता है, जिसके अंतर्गत यह पहले इनपुट लेता है, उसके बाद उस पर प्रोसेसिंग करता है और फिर आउटपुट प्रदान करता है। इसे अगर उदाहरण सहित समझाएं, तो मान लीजिए कि आपको कंप्यूटर से बागी फिल्म को डाउनलोड करना है।

आज के हमारे इस आर्टिकल में हमने आपको computer के बारे में संपूर्ण जानकारी प्रदान की है, हमने आपको कंप्यूटर क्या है? डेस्कटॉप कंप्यूटर क्या है? लैपटॉप क्या है? कंप्यूटर का फुल फॉर्म क्या है? कंप्यूटर के आविष्कारक, कंप्यूटर का इतिहास, कंप्यूटर कैसे काम करता है? कंप्यूटर के प्रकार, कंप्यूटर के भाग, सिस्टम सॉफ्टवेयर के प्रकार, कंप्यूटर की विशेषताएँ, कंप्यूटर का उपयोग, इन सब के बारे में संपूर्ण जानकारी प्रदान की है, हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारी यह जानकारी पसंद आई होगी।

यह भी पढ़े:

यदि आपने हमारा यह आर्टिकल अच्छी तरह से पूरा पढ़ लिया है, तो अब आपको computer के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो चुकी है, और आप जान चुके हैं की आख़िर Computer Kya Hai (कंप्यूटर क्या है?) अगर आपने इस आर्टिकल से कुछ अच्छी जानकारी हासिल की है और आपको हमारा यह आर्टिकल अच्छा लगा है तो इसे अपने दोस्तों को सोशल मीडिया में शेयर करना ना भूले, ताकि वह भी जानकारी का फायदा उठा सकें।

यदि आपके मन में कोई सवाल क्या सुझाव है हमारे आज के इस आर्टिकल को लेकर तो आप उसे नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमें बता सकते हैं, हम आपके सवाल का अवश्य जवाब देंगे, तथा आपके सुझाव को अगले आर्टिकल्स में अवश्य हमारे लेख में प्रस्तुत करेंगे।

Previous articleमोबाइल से बीपी (BP) कैसे चेक करे? (आसान तरीक़ा)
Next articleOne Time Password क्या है? (What is OTP in Hindi)
Ankur Singh
हेलो दोस्तों, मेरा नाम अंकुर सिंह है और में New Delhi से हूँ। मैंने B.Tech (Computer Science) से ग्रेजुएशन किया है। और में इस ब्लॉग पर टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर, मोबाइल और इंटरनेट से जुड़े लेख लिखता हूँ।

7 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here