कंप्यूटर वायरस क्या है – What Is Virus In Hindi

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कंप्यूटर वायरस क्या है – What Is Virus In Hindi? अगर आप virus के बारे में जानना चाहते हो की वायरस क्या होता है? Computer Virus & Mobile Virus Kya hai? तो आप बिलकुल सही जगा आए हो क्यूँकि आज इस पोस्ट में हम virus के बारे में जानिंगे ओर सिखिंगे what is virus? type of virus? all about virus in hindi?

आज हमारे स्मार्टफोन / कंप्यूटर हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। क्योंकि इनमें हमारी कई गुप्त या निजी जानकारियां मौजूद होती हैं। अतः हमारे लिए इन devices को तथा इनमें स्टोर किये data को सुरक्षित रखना काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।


क्योंकि वायरस किसी भी कंप्यूटर के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकते हैं। आपने अक्सर t.v समाचार पत्रों या किसी व्यक्ति द्वारा वायरस के दुष्प्रभाव के बारे में सुना होगा! अब सवाल आता है कि वायरस क्या है? (What is Virus in Hindi?) तथा यह कैसे कार्य करता है? यदि आप भी वायरस अटैक से संबंधित जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आज का यह लेख आपके लिए ही है।

क्योंकि इस लेख में आप जानेंगे कि कंप्यूटर वायरस क्या है – What Is Virus In Hindi? यह कैसे कार्य करता है तथा आप किस तरह वायरस अटैक से सुरक्षित रह सकते हैं?

दोस्तों इस डिजिटल दुनिया में जहां इंटरनेट ने हमारे समय और ऊर्जा की बचत करते हुए कई कार्य आसान बना दिए हैं वहीं दूसरी तरफ इंटरनेट ने कंप्यूटर वायरस को भी न्योता दिया है। जिस वजह से अक्सर वायरस से होने वाले नुकसान की घटनाएं सामने आती हैं। चलिये सबसे पहले जानते हैं कि

कंप्यूटर वायरस क्या है – What Is Virus In Hindi

वायरस एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक कोड होता है, जिसका इस्तेमाल कंप्यूटर में उपस्थित सूचनाओं को नष्ट करने के लिए किया जाता है. virus का पूरा नाम “vital information resources under siege” है। virus द्वेषपूर्ण प्रोग्राम होते हैं जो किसी कंप्यूटर में बिना यूजर की अनुमति के कार्य करते हैं।

वायरस सूक्ष्म प्रोग्राम होते हैं, अर्थात यह गुप्त रूप से किसी कंप्यूटर में प्रवेश करते हैं जिससे यूज़र को virus इनस्टॉल होने का कोई अंदाजा नही होता।

यह कंप्यूटर में रहकर सिस्टम की कार्य प्रणाली को बाधित करते हैं। यूजर की जानकारी के बिना virus किसी कंप्यूटर में अनेक सालों तक रह कर data को क्षतिग्रस्त को कर सकते हैं। तथा वायरस न सिर्फ किसी एक कंप्यूटर को नुकसान पहुँचाते हैं बल्कि यह पूरे कंप्यूटर नेटवर्क को अपना शिकार बनाते है।

उदाहरण के लिये यदि किसी कंप्यूटर में दुर्भाग्यवश वायरस प्रवेश करता है। तो इस स्तिथि में यदि वह कंप्यूटर नेटवर्क के जरिये दो या दो से अधिक कंप्यूटर से जुड़ा है, तो वह single कंप्यूटर से सभी कंप्यूटर में फैल जाएगा। तथा इस प्रकार सभी कंप्यूटर का data क्षतिग्रस्त हो सकता है। अब सवाल आता है कि वायरस किस तरह कार्य करता है?

सरल शब्दों में समझें तो आमतौर पर हम किसी कंप्यूटर मैं किसी प्रोग्राम को रन करने के लिए कंप्यूटर को कमांड देते हैं परंतु दूसरी ओर वायरस इसके विपरीत कार्य करता है। क्योंकि वायरस को कार्य करने के लिए हमें किसी कमांड देने की आवश्यकता नहीं होती यह स्वतः ही कंप्यूटर में अपने उद्देश्यों की पूर्ति करता है।

दुर्भाग्यवश यदि किसी कंप्यूटर में वायरस आ जाता है तो इस स्थिति में वायरस की प्रोग्रामिंग इस तरह की जाती है जिससे यूज़र द्वारा बिना कमांड दिए वह कंप्यूटर के डाटा को लॉक कर सकता है, कंप्यूटर बंद कर सकता है या कंप्यूटर में यूजर के डाटा को एक जगह से दूसरी जगह ऑटोमेटिक सेंड कर सकता है।


कम्प्यूटर में वायरस कैसे आता है?

अब यहाँ सवाल आता है कि किसी कंप्यूटर में वायरस किस तरह प्रवेश करता है?

वायरस अनेक स्थानों से कंप्यूटर में प्रवेश कर सकता है परंतु अधिकतर मामलों में इंटरनेट से किसी असुरक्षित सामग्री को
डाउनलोड करने से वायरस प्रवेश करता है। इसके साथ ही यदि हम ऑफलाइन तरीके की बात करें तो पेनड्राइव या CD ड्राइव से भी एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में वायरस ट्रांसफर हो सकता है।

कंप्यूटर वायरस के प्रकार – Types of Virus In Hindi

अब हम जानते हैं कि वायरस के कितने प्रकार होते हैं?

Boot Sector Virus

यह वायरस सिस्टम में हार्ड डिस्क के बूट सेक्टर में फैलता है तथा आमतौर पर यह वायरस removable drive से सिस्टम में फैलते हैं। यह हार्ड डिस्क या फ्लॉपी डिस्क में पहुँचकर बूट सेक्टर को संक्रमित करता है तथा इस वायरस को मास्टर बूट रिकॉर्ड वायरस के नाम से भी जाना जाता है।

Macro Virus

मैक्रो वायरस को macro भाषा मे तैयार किया जाता है। अर्थात यह माइक्रोसॉफ्ट वर्ड, एक्सेल आदि .doc.xls आदि फॉरमेट में किसी विशिष्ठ एप्लीकेशन या प्रोग्राम में बनाई जाती है। तथा macro वायरस किसी सिस्टम में ईमेल, usb ड्राइव, फ्लॉपी डिस्क तथा इंटरनेट से डाउनलोड करते समय किसी सिस्टम में प्रवेश कर सकता है।

File System Virus

किसी भी सिस्टम में file महत्वपूर्ण path होता है जिसमें महत्वपूर्ण data स्टोर होता है। अतः फ़ाइल सिस्टम वायरस कुछ फाइल्स malicious code के रूप में किसी सिस्टम में प्रवेश करता है। यह वायरस सीधे files की डायरेक्टरी को निशाना बनाकर file की लोकेशन को बदल देता है।

Web Scripting Virus

यह वायरस इंटरनेट पर मौजूद कुछ आकर्षक वेबसाइट के रूप में पाया जाता है। अर्थात web scripting वायरस वेबसाइट के माध्यम से किसी कंप्यूटर में घुसता है। तथा वेब ब्राउज़र की सिक्योरिटी को तोड़ते हुए आपकी web ब्राउज़िंग हिस्ट्री या अन्य निजी जानकारियों को चुरा सकता है।

वायरस से कैसे बचे?

अब सवाल आता है कि हम virus से अपने कंप्यूटर को किस प्रकार सुरक्षित रख सकते हैं?

अपने सिस्टम पर हमेशा एक अच्छे ब्रांड का antivirus इस्तेमाल करें तथा फ्री antivirus के स्थान पर paid antivirus खरीदने की कोशिश करें। जिससे antivirus इंटरनेट से डाउनलोड की गयी असुरक्षित apps/files को कंप्यूटर में कार्य करने से रोकता है।

तथा समय-समय पर antivirus से सिस्टम को scan जरूर करें विशेष रूप से यदि आप इंटरनेट का रोजाना इस्तेमाल करते हैं तो आप रोजाना antivirus को कंप्यूटर में स्कैन कर सकते हैं।

किसी भी असुरक्षित वेबसाइट से कोई file डाउनलोड न करें! आपको web ब्राउज़र में किसी फ़ाइल को डाउनलोड करते समय वेबसाइट देखनी चाहिए कि https इनेबल है या नहीं। यह (https) एक सूचक होता है जिससे एक वेबसाइट secure मानी जाती है। अतः हमेशा किसी game, music या photoshop, आदि प्रोफेशनल app को ऑफिसियल वेबसाइट से डाउनलोड करना चाहिए।

आज हम सभी को ई-मेल पर रोजाना कई नई mail प्राप्त होते हैं। तथा जिनमें से हमें कुछ आकर्षक email देखने को मिलते हैं तथा इन अनजाने सोर्सेज से आये emails में दिए गए लिंक पर क्लिक करने पर आप किसी virus युक्त वेबसाइट पर पहुँच सकते हैं।

क्योंकि कुछ समय पूर्व एक malware हमले के लिए ई-मेल का इस्तेमाल किया गया था। अतः किसी विश्वसनीय email को ध्यानपूर्वक पढ़ने के बाद ही उस email पर दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

इसके साथ ही इंटरनेट पर कार्य करते सावधानीपूर्वक web browsing करें। जिससे आप वायरस से स्वयं के सिस्टम को सुरक्षित रख सके।

Malware क्या है? –  What Is Malware In Hindi

आसान शब्दों में Malware को समझें तो यह एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जिसे बनाने का उद्देश्य किसी Device के Data को डैमेज करने, डाटा चुराने इत्यादि के लिए किया जाता है। अर्थात दूसरे user को तथा उसके Device को नुकसान पहुंचाना इसका मुख्य मकसद होता है।

Malware के कई रूप हो सकते हैं जिनमें से Virus, Trojan, Spyware इत्यादि प्रमुख हैं! आमतौर पर Malware को hackers की टीम द्वारा तैयार किया जाता है! क्योंकि सामान्यतः हैकर्स ही साइबर क्राइम जैसी गतिविधि को अंजाम देते है।

अपने निजी फायदे के लिए अन्य उपयोगकर्ताओं के डाटा को चुराने, डाटा लीक करने या फिर डिवाइस को नुकसान पहुंचाने में वे कोई कसर नहीं छोड़ते हैं! इसलिए हैकर्स Malware का इस्तेमाल सबसे अधिक करते हैं।

परंतु यह जरूरी नहीं कि हर बार Malware को बनाने का उद्देश्य गलत हो क्योंकि Malware का इस्तेमाल किसी Protest में Tool के तौर पर क्या सिक्योरिटी टेस्टिंग के तौर पर किया जा सकता है।

परंतु अंत में यही निष्कर्ष निकलता है Malware किसी भी डिवाइस के लिए सुरक्षित नहीं होते! और इनका आना किसी भी कंप्यूटर सिस्टम में एक बड़ा खतरा है।

दोस्तों वायरस एवं मैलवेयर को तो हम सुनते ही हैं साथ ही कभी-कभी ट्रोजन शब्द भी हमें वायरस के साथ सुनने को मिलता है। परंतु असल में Trojan क्या है? हममें से कई लोग नहीं जानते इसलिए आइए हम जान लेते हैं.

Trojan Horse क्या है?

इसे सामान्यतः ट्रोजन या फिर Trojan हॉर्स के नाम से हम सभी लोग जानते हैं! यह एक टाइप का Malicious Code या फिर सॉफ्टवेयर होता है जो सामान्यतः हमें दिखने में तो Safe लगता है परंतु इस सॉफ्टवेयर को गलती से भी यदि हम अपने कंप्यूटर में इंस्टॉल कर लेते हैं तो यह पूरे कंप्यूटर को कंट्रोल कर सकता है

और चूंकि ट्रोजन को कंप्यूटर को control करने उसके डाटा को Steal करने, डाटा या नेटवर्क में छेड़छाड़ करने तथा यूजर को नुकसान पहुंचाने के लिए ही बनाया गया है। तो आप समझ सकते हैं कि यह भी वायरस के समान ही एक खतरनाक तत्व है।

यहां पर अब सवाल आता है कि क्या ट्रोजन और वायरस एक ही होते हैं या फिर यह दोनों चीज एक ही हैं आमतौर पर ट्रोजन वायरस को ट्रोजन Horse वायरस भी हम कहते हैं लेकिन चूंकि यहां पर आप को समझना होगा वायरस ऑटोमेटिक Execute या Replicate कर सकते हैं.

परंतु दूसरी तरफ एक Trojan ऐसा नहीं कर सकते। ट्रोजन को हम अपने कंप्यूटर पर स्वयं इनस्टॉल करते हैं क्योंकि Trojan फाइल के रूप में सामने आता है परंतु जब उसे हम अपने कंप्यूटर में इंस्टॉल कर ले तो उसके हानिकारक परिणाम सामने आते हैं। तो हम यह सकते हैं धोखे से हम जिस Trojan को इंस्टॉल कर लेते हैं वह हमारे लिए खतरनाक साबित होता है।

कंप्यूटर में वायरस कैसे पहचाने?

कंप्यूटर में वायरस आना वाकई कष्टकारी है! अब ऐसे में वायरस का पता लगाना सही टाइम पर बेहद जरूरी है। ताकि इससे होने वाले नुकसान से बचा जा सके! नीचे कुछ मुख्य लक्षण है जिनसे आप पता कर सकते हैं।

  1. • कंप्यूटर Slow होने लगता है,यह पहला लक्षण है यदि अचानक से आपका कंप्यूटर धीमा लगा है ।
  2. • इंटरनेट ऑन करते ही बेवजह के Ads यदि Screen पर Show हो रहे हैं तो भी यह वायरस का एक लक्षण है।
  3. • आपका सिस्टम यदि ऑटोमेटिक क्रैश होने लगा है।
  4. • स्क्रीन पर यदि बार-बार popup मैसेज show हो रहे हैं।
  5. • बिना आपकी मर्जी  के यदि आपके default वेब ब्राउज़र का होमपेज Change हो गया है
  6. • अचानक से ब्राउज़िंग के दौरान या फिर किसी दूसरे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हुए अनावश्यक मैसेज आ रहे हैं!
  7. • आपके कंप्यूटर की सिक्योरिटी सेटिंग्स में ऑटोमेटिक बदलाव आ गए हैं, अर्थात Security Solution Disable हो चुका है।
  8. • बार-बार Error Show हो रहे हैं.
  9. • यदि आप अपने सिस्टम के कंट्रोल पैनल को एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं।

दोस्तों यह कुछ लक्षण है जिनसे आप वायरस का पूरी तरह तो नहीं परंतु अंदाजा जरूर लगा सकते हैं। दोस्तों अब हम जानते हैं.


कंप्यूटर हैक है कैसे पता करे – हैक हो जाये तो क्या करे? उसकी डिटेल गाइड यहाँ है।

आज हम अक्सर कंप्यूटर में वायरस आने के मामले सुनते रहते हैं! और मार्केट में कई सारे एंटीवायरस इस समय मौजूद हैं जो वायरस को जड़ से खत्म करने का दावा करते हैं! लेकिन दोस्तों वायरस कैसे रिमूव करें? यह तो हम पहले ही जान चुके हैं लेकिन अब हम जानेंगे वायरस को पहली बार कब बनाया था तो यह जानने के लिए हमें जाना होगा वायरस के इतिहास की ओर तो चलिए जानते हैं.

कंप्यूटर वायरस का इतिहास क्या है? – History Of Virus In Hindi

दुनिया का पहला कंप्यूटर वायरस वर्ष 1971 में रिलीज किया गया था। इस वायरस को US में BBM टेक्नोलॉजी द्वारा कंप्यूटर को infect करने के लिए इस virus को बनाया गया था।

जब यह वायरस रिलीज किया गया तो इसका नाम creeper system रखा गया था। जैसे ही यह वायरस कंप्यूटर में प्रवेश करता था तो सिस्टम के हार्ड ड्राइव में यह वायरस स्टोर हो जाता था। और इस वायरस का दुष्प्रभाव कंप्यूटर में इतना अधिक होता था जिससे infected सिस्टम को कोई भी ऑपरेट न कर सके।

अर्थात आप समझ सकते हैं कि कंप्यूटर के शुरुआती दौर से वायरस को बनाने का भी कार्य शुरू हो गया था। Ms dos जिसके बारे में आज हम सभी कंप्यूटर यूजर्स से जानते हैं!

Ms Dos के लिए सर्वप्रथम 1986 में वायरस बनाया गया जिसे Brain नाम दिया गया। इस वायरस के सिस्टम पर आने से यह फ्लॉपी डिस्क में Boot Sector को overwrite कर कंप्यूटर को Boot होने से रोक देता था।

इस भयानक वायरस को दो पाकिस्तानी भाइयों द्वारा copy protection के तहत डिज़ाइन किया गया था।

Top 10 Viruses in Hindi

  • ILoveYou
  • CodeRed
  • Melissa
  • Sasser
  • Zeus
  • conficker
  • Stuxnet
  • Mydoom
  • CryptoLocker
  • Flashback

दोस्तों यह थे Top 10 वायरस जो पूरे विश्व में किसी भी कंप्यूटर के लिए सबसे हानिकारक वायरस के रूप में जाने जाते हैं! परंतु आप हमेशा इन वायरस से secure रखकर अपने डाटा तथा डिवाइस को भी सिक्योर रख सकते हैं.

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उम्मीद है अब आपको virus से related पूरी जानकारी मिल चुकी होगी, ओर अब आप जान गये होगे की वायरस क्या है – What Is Virus In Hindi? Computer Virus & Mobile Virus Kya hai? what is virus? type of virus? all about virus in hindi?


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